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काटजू अस्पताल में मेनोपॉज से इन्फर्टिलिटी तक का इलाज, में तैयार हुआ हाईटेक गायनेकोलॉजी सेंटर

भोपाल भोपाल के शासकीय कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में महिलाओं के लिए एक बड़ी और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। यहां “स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनेकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी” स्थापित किया जा रहा है।  करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक और हाईटेक मशीनें अस्पताल में पहुंच चुकी हैं और उनके इंस्टालेशन का काम लगभग पूरा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सेंटर को नवरात्र के दौरान शुरू किए जाने की तैयारी है। इस सेंटर के शुरू होने से मेनोपॉज, निसंतानता, पीसीओएस, मोटापा, अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी महिलाओं से जुड़ी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। अभी तक इन बीमारियों के इलाज के लिए महिलाओं को अलग-अलग अस्पतालों और विशेषज्ञों के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब जांच से लेकर उपचार तक की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। किशोरियों से महिलाओं तक 100 से अधिक रोगों का इलाज इस नए सेंटर में किशोरियों से लेकर वयस्क महिलाओं तक की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। यहां महिलाओं से जुड़े 100 से अधिक रोगों की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, सेंटर के लिए ग्राउंड फ्लोर और ऊपरी मंजिलों में स्थान तय कर दिया गया है। यहां प्रजनन स्वास्थ्य से लेकर गर्भाशय कैंसर तक की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था होगी। मेनोपॉज और हार्मोनल समस्याओं के लिए विशेष सुविधा काटजू अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. रचना दुबे के अनुसार महिलाओं में आमतौर पर 45 से 50 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज की स्थिति शुरू होती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजेन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे हड्डियों से जुड़ी समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। नए सेंटर में इन सभी समस्याओं के लिए विशेष परामर्श, जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इन्फर्टिलिटी और गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं का इलाज इस सेंटर में बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं के इलाज पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां पीसीओएस, फाइब्रॉइड, हार्मोनल असंतुलन और अन्य स्त्री रोगों की जांच आधुनिक तकनीकों के माध्यम से की जाएगी। गर्भधारण में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस सेंटर में वीआईए तकनीक के माध्यम से कैंसर की शुरुआती जांच की जाएगी। इस तकनीक की मदद से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सकेगा, जिससे समय रहते इलाज संभव हो सकेगा और महिलाओं की जान बचाई जा सकेगी। आधुनिक मशीनों से होगा इलाज केगेल चेयर- पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने वाली मशीन है। जिन महिलाओं को बच्चेदानी या पेल्विक मांसपेशियों के ढीले होने की समस्या होती है, उनमें बिना सर्जरी के उपचार संभव हो सकेगा। कोलपोस्कोप- मशीन के जरिए गर्भाशय ग्रीवा, योनि और संबंधित अंगों की गहन जांच की जाएगी। लेजर मशीन- इसके माध्यम से सिस्ट, मेनोपॉज से जुड़ी समस्याएं और यूरीन लीक जैसी बीमारियों का इलाज आसान हो जाएगा। रोगों की रोकथाम पर रहेगा विशेष फोकस विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेंटर केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं में रोगों की रोकथाम और शुरुआती पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खराब जीवनशैली और बदलती जीवनशैली के कारण महिलाओं में कई स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी शुरुआत अक्सर पीसीओएस जैसी बीमारी से होती है। किशोरियों में बढ़ रही पीसीओएस की समस्या विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में हर चार में से एक किशोरी में पीसीओएस के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। वहीं अस्पतालों में आने वाली महिलाओं में भी लगभग आधी महिलाएं इसी समस्या से प्रभावित होती हैं। ऐसे में इस सेंटर के माध्यम से समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिलने से महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा कार्यक्रम भी चलेंगे सेंटर की इंचार्ज डॉ. रचना दुबे के अनुसार इस सेंटर की तैयारी पिछले कई महीनों से की जा रही है और उम्मीद है कि यह क्लीनिक जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां केवल जांच और इलाज ही नहीं होगा, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।  

भोपाल के 6 प्राइवेट हॉस्पिटल 1 अप्रैल से हो सकते हैं बंद, सीएमएचओ ने रिन्यू न करने पर भेजा नोटिस

भोपाल   राजधानी में लाइसेंस और पंजीयन का नवीनीकरण नहीं कराने वाले आधा दर्जन निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय ने ऐसे 6 अस्पतालों को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2026 के बाद बिना नवीनीकरण के उनका संचालन नहीं किया जा सकेगा. वहीं तय समय में आवेदन नहीं करने पर अब इन अस्पतालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. अस्पतालों के संचालन के लिए यह नियम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय भोपाल द्वारा शहर के 6 निजी अस्पतालों को लाइसेंस नवीनीकरण का आवेदन नहीं करने पर नोटिस जारी किया गया है. इन अस्पतालों ने निर्धारित समय सीमा के अंदर अपने अस्पताल के लाइसेंस और पंजीयन के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था. मध्यप्रदेश उपचारगृह व रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (पंजीयन व अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 व नियम 1997 (संशोधित 2021) के तहत निजी स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीयन अनिवार्य है. इस अधिनियम की धारा 3 के अनुसार बिना पंजीयन के किसी भी निजी स्वास्थ्य संस्था का संचालन नहीं किया जा सकता. इन अस्पतालों को जारी किया गया नोटिस सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार लालघाटी चौराहा स्थित जहरा अस्पताल, मोतिया तालाब रोड स्थित सरदार पटेल अस्पताल, कैपिटल पेट्रोल पंप के पास राय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, बीडीए कॉलोनी गोदरमऊ गांधीनगर स्थित हेल्थ केयर हॉस्पिटल, दानिश कुंज कोलार रोड स्थित भगवती गौतम अस्पताल व सोनागिरी पिपलानी पेट्रोल पंप के पास स्थित सचिन ममता अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है. ढाई महीने का समय देने के बाद भी नहीं कराया रिन्यू सीएमएचओ कार्यालय से अस्पताल संचालन के लिए पंजीयन और लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है, जो हर तीन वर्ष के लिए जारी किया जाता है. इस वर्ष निजी अस्पतालों और क्लिनिकों को एनएचएस पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने के लिए करीब ढाई महीने का समय दिया गया था, लेकिन इन छह अस्पतालों ने निर्धारित अवधि में नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया. 31 मार्च के बाद होगी कार्रवाई मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने बताया, '' नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के तहत रिन्यूअल आवेदन जमा नहीं करने पर इन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है. यदि 31 मार्च के बाद भी ये अस्पताल संचालित पाए गए तो उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.'' डॉ. शर्मा ने बताया कि इसके साथ अन्या अस्पतालों का अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है. यदि कोई कमी सामने आती है, तो ऐसे अस्पतालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

मध्य प्रदेश: सरकारी अस्पताल में पहली बार मोटापा क्लिनिक, मरीजों को मिलेगा फ्री इलाज

इंदौर   मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर के शासकीय एमवाय अस्पताल में सोमवार से बेरियेट्रिक (मोटापा) और मेटाबोलिक क्लिनिक की शुरुआत की गई। ये प्रदेश के सरकारी क्षेत्र में अपनी तरह की पहली सुविधा है, जिससे अब मोटापे के मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने क्लिनिक का शुभारंभ करते हुए कहा कि, मोटापा तेजी से गंभीर सामाजिक समस्या बनता जा रहा है। इसके कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान इसकी बड़ी वजह हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों का इलाज निशुल्क किया जाएगा। जहां निजी अस्पतालों में इस सर्जरी का खर्च 4 से 5 लाख रुपए तक आता है। वहीं, अब ये सुविधा एमवाय में मुफ्त उपलब्ध होगी। क्लिनिक में मरीजों की जांच, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की सुविधा एक ही स्थान पर मिलेगी। लोगों को बड़ी राहत शहर के खजराना में रहने 30 वर्षीय गुल अफशां के अनुसार, सर्जरी के बाद उनका वजन 120 किलोग्राम से घटकर डेढ़ महीने में 97 किलोग्राम हो गया है। इससे डायबिटीज में राहत मिली और अब वो पहले से अधिक स्वस्थ महसूस कर रही हैं। इसी तरह सुषमा भिलवारे का कहना है कि, उनका वजन 103 किलोग्राम से घटकर 70 किलोग्राम हो गया है, जिससे बीपी और अन्य समस्याओं में सुधार हुआ है।

छतरपुर का हाईटेक अस्पताल, 32.50 करोड़ में बनेगा, केंद्रीय AC के साथ मिलेगा बेहतर इलाज

छतरपुर  जिला अस्पताल के इतिहास में एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है। अब मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ग्वालियर, भोपाल या दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। केंद्र सरकार की योजना के तहत करीब 32.50 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार 200 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है। यह पांच मंजिला भवन न केवल छतरपुर बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी जीवनदायिनी साबित होगा। 18 हजार वर्ग फीट में फैला आधुनिक चिकित्सा का केंद्र यह भव्य पांच मंजिला अस्पताल करीब 18 हजार वर्ग फीट के विशाल क्षेत्र में निर्मित किया गया है। पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड एसी युक्त इस भवन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां आने वाले मरीजों को किसी निजी कॉर्पोरेट अस्पताल जैसी सुविधाएं मिल सकें। जिला प्रशासन ने आगामी 30 सितंबर को मुख्यमंत्री द्वारा इस ब्लॉक के संभावित उद्घाटन की तैयारियां युद्ध स्तर पर तेज कर दी हैं। इस ब्लॉक के शुरू होते ही जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। सेंट्रल ऑक्सीजन और मॉड्यूलर ओटी इस नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक की सबसे बड़ी ताकत यहां की अत्याधुनिक तकनीक है। भवन में कुल 200 बेड स्थापित किए गए हैं और प्रत्येक पलंग तक सेंट्रल ऑक्सीजन गैस पाइपलाइन पहुंचाई गई है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आपातकालीन स्थिति में ऑक्सीजन सिलेंडरों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। भवन में कुल 5 अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और 2 माइनर ओटी बनाए गए हैं। खास रणनीतिक डिजाइन के तहत ग्राउंड फ्लोर पर ही एक माइनर और एक मॉड्यूलर ओटी रखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि कोई मरीज सडक़ दुर्घटना, हार्ट अटैक या अन्य गंभीर स्थिति में आता है, तो उसे ऊपरी मंजिल पर ले जाने में वक्त गंवाए बिना तत्काल सर्जरी की सुविधा मिल सके। आईसीयू, कार्डियो और डायलिसिस की एकीकृत सुविधाएं भवन के भीतर सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। इसमें महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू)- गंभीर मरीजों के लिए उन्नत लाइफ सपोर्ट सिस्टम। कार्डियो यूनिट- हृदय रोगियों के लिए त्वरित उपचार और मॉनिटरिंग। डायलिसिस केंद्र- गुर्दा रोगियों के लिए आधुनिक मशीनों के साथ डायलिसिस की सुविधा। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य- बच्चों के लिए विशेष एसएनसीयू और पीएनसी वार्ड के साथ उच्च स्तरीय लेबर रूम। मरीजों की सुविधा के लिए 5 लिफ्ट और विशाल रैंप अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। भवन में कुल 5 लिफ्ट लगाई गई हैं, ताकि आवाजाही में भीड़ न हो। साथ ही, एक विशाल स्ट्रेचर रैंप भी बनाया गया है ताकि बिजली गुल होने या तकनीकी खराबी की स्थिति में मरीजों को स्ट्रेचर के माध्यम से सुरक्षित ऊपर-नीचे ले जाया जा सके। रेफर केस घटेंगे सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि प्रारंभ में भवन की अनुमानित लागत 29.81 करोड़ रुपए थी, लेकिन मरीजों के हित में जोड़ी गई अतिरिक्त आधुनिक सुविधाओं और उपकरणों के कारण यह लागत बढकऱ 32.50 करोड़ रुपए तक पहुंची है। इस ब्लॉक के संचालन से जिला अस्पताल के पास पहले से उपलब्ध करोड़ों रुपए की हाईटेक मशीनों का पूर्ण सदुपयोग हो सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिले से होने वाले रेफर केसों में भारी कमी आएगी, जिससे गरीब परिवारों का आर्थिक बोझ भी कम होगा।

मौसम की मार से बिगड़ रही सेहत, इंदौर के अस्पतालों में रोज पहुंच रहे सैकड़ों मरीज

इंदौर मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। दिन में तेज धूप और गर्मी बढ़ी जबकि रात में ठंडक के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका सीधा असर वायरल फीवर के रूप में सामने आ रहा है। एमवाय अस्पताल में ही एक दिन में करीब एक हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के शासकीय और निजी अस्पतालों में बुखार, सर्दी-खांसी, गले में खराश और बदन दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय मौसम का उतार-चढ़ाव संक्रमण के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। दिन में पसीना और रात में ठंडी हवा चलने से लोग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। खासतौर पर वे लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो देर रात तक बाहर रहते हैं या ठंड-गर्मी के बीच लापरवाही बरतते हैं।   शादियों का सीजन भी बढ़ा रहा खतरा इन दिनों शादी समारोह का सीजन चल रहा है। देर रात तक कार्यक्रमों में शामिल होना, ठंडी चीजें खाना, नींद पूरी न होना और भीड़भाड़ में समय बिताने से भी वायरल संक्रमण फैलने की बड़ी वजह सामने आई है। डाक्टरों के अनुसार कई लोग हल्का बुखार या सर्दी होने के बाद भी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो रही है। संक्रमण परिवार के अन्य लोगों तक भी फैल रहा है। गंभीर बीमारियों वाले मरीजों के लिए ज्यादा जोखिम शुगर, बीपी, कैंसर, ह्दय रोग, लिवर, अस्थमा, गर्भवती महिलाओं और किडनी से संबंधित बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। वायरल फीवर होने पर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों की रिकवरी धीमी हो जाती है। कई बार उनकी स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ रहा है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण संक्रमण का असर ज्यादा समय तक बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर डॉक्टरों के अनुसार छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी वायरल फीवर के मामले बढ़ रहे हैं। तापमान में अचानक बदलाव से उनकी इम्युनिटी जल्दी प्रभावित होती है, जिससे बुखार और खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बचाव ही सबसे बड़ा इलाज इस मौसम में हल्के गर्म कपड़े साथ रखना, ठंडी चीजों से परहेज करना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतना जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, फल-सब्जियां और भरपूर नींद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति: 184 करोड़ से अस्पतालों का अपग्रेड, सुविधा अब पास-पड़ोस में

ग्वालियर स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक, सुदृढ़ और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 184 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भोपाल भेज दिया है। यह प्रस्ताव वर्ष 2026-27 के एन्युअल प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है, जिसके लागू होने से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बाहर के शहरों दिल्ली-मुबंई की यात्रा काफी हद तक कम हो जाएगी। डिजिटल क्रांति से बढ़ेगी पारदर्शिता और दक्षता प्रस्ताव में डिजिटल गवर्नेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जिला अस्पताल सहित प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक कंम्प्यूटर लैब स्थापित की जाएंगी। मरीजों का पंजीकरण, इलाज का रिकॉर्ड, रिपोर्टिंग और रेफरल सिस्टम पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा। इससे समय की बचत के साथ पारदर्शिता बढ़ेगी।   डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को तकनीक- आधारित प्रशिक्षण भी मिलेगा। सीएमएचओ कार्यालय में 20 कंम्प्यूटरों वाली विशेष कंम्प्यूटर लैब बनाई जाएगी, जहां स्वास्थ्य कार्यक्रमों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा एंट्री होगी। जननी सुरक्षा योजना और प्रसूता सहायता जैसी योजनाओं के भुगतान में गति और पारदर्शिता आएगी। बुनियादी ढांचे का मजबूत उन्नयन प्रस्ताव में अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, वार्डों का विस्तार, साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार और मरीजों की अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। डॉ. सचिन श्रीवास्तव, सीएमएचओ, ग्वालियर ने बताया कि यह प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुधार के लिए तैयार किया गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू हो जाएगा, जिससे जिले की स्वास्थ्य तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।   नए एनआरसी केंद्र स्थापित होंगे जिले में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए विशेष फोकस किया गया है। भितरवार और बरई में दो नए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है। इन केंद्रों में कुपोषित बच्चों को विशेषज्ञ देखरेख, पोषण आहार और उचित इलाज मिलेगा। यह पहल ग्रामीण एवं पिछड़े इलाकों के लिए विशेष रूप से लाभदायक साबित होगी।

राजसमंद में 29 करोड़ से बनेगा 100 बेड का उप जिला अस्पताल

राजसमंद. जिले के भीम उपखंड मुख्यालय में चिकित्सा सुविधाओं को नई ऊंचाई देने वाला उप जिला चिकित्सालय एवं मातृ-शिशु चिकित्सा इकाई भवन 29 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। दोनों परियोजनाओं के इस वर्ष जून तक पूर्ण होने की उम्मीद है। राज्य सरकार की ओर से नये वर्ष की शुरुआत में ही यह खबर भीम सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। भीम से लगभग 100 किलोमीटर की परिधि में स्थित भीलवाड़ा और ब्यावर जिले के टॉडगढ़, रायपुर, बदनोर, करेड़ा और आसींद क्षेत्रों की लाखों की आबादी को इन दोनों अत्याधुनिक चिकित्सा भवनों से बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। NHM और डीएमएफ फंड से मिली 2 बड़ी स्वास्थ्य परियोजनाएं भारत सरकार के नेशनल हेल्थ मिशन एवं डिस्ट्रिक मिनरल फंड ट्रस्ट के बजट से भीम को कुल दो अत्याधुनिक चिकित्सा भवन मिलने जा रहे हैं। इससे क्षेत्रीय स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत आधार मिलेगा और गंभीर रोगियों को बड़े शहरों की ओर रेफर करने की मजबूरी कम होगी। एनएचएम के ठेकेदार कंपनी के प्रोजेक्ट इंचार्ज सागर पंवार ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 29 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन 100 बेड का उप जिला चिकित्सालय भवन लगभग अंतिम दौर में है। आगामी वर्ष में यह भवन आमजन के लिए पूरी तरह उपलब्ध हो जाएगा। यह पूरा भवन चिकित्सा विभाग द्वारा एनएचएम प्रोजेक्ट के अंतर्गत निर्मित किया जा रहा है। मरीजों को ये मिलेंगी सुविधाएं 10 आधुनिक इनडोर वार्ड सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्स-रे एवं सोनोग्राफी लाल, पीला और हरा जोन आधारित आपातकालीन व्यवस्था एचडीयू कम आईसीयू एवं आइसोलेशन यूनिट इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर बहिरंग रोगी विभाग (ओपीडी) 50 बेड की मातृ-शिशु गहन चिकित्सा इकाई भी तैयार डिस्ट्रिक मिनरल फंड ट्रस्ट के माध्यम से पूर्ववर्ती गहलोत सरकार द्वारा स्वीकृत 50 बेड की मातृ एवं शिशु गहन चिकित्सा इकाई का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। यह भवन भी आगामी वर्ष में आमजन को समर्पित होने की उम्मीद है। इससे 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित तीन जिलों की प्रसूता एवं धात्री महिलाओं के साथ-साथ नवजात शिशुओं को उन्नत चिकित्सा सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकेंगी। एमसीएच विंग में मिलेंगी ये सुविधाएं 5 अत्याधुनिक वार्ड शिशु रोग एवं स्त्री रोग के अलग-अलग ओपीडीअल्ट्रासाउंड सुविधा एचडीयू एवं प्रयोगशाला8 लेबर रूम ऑपरेशन थियेटरएसएनसीयू काउंसलिंग सेंटर एवं पोस्ट ऑपरेशन थियेटर

कलेक्टर की पहल और किसान की दानशीलता, दतिया में जल्द शुरू होगा बड़ा अस्पताल

दतिया    दतिया जिले में एक किसान ने उदारता दिखाई है। गांव में 30 साल पहले बना अस्पताल में अब लोगों के लिए छोटा पड़ रहा था। मरीजों की संख्या के हिसाब से अब अस्पताल में जगह नहीं थी। दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े वहां पहुंचे और अस्पताल का निरीक्षण किया। गांव के लोगों ने विस्तार की बात कही तो कलेक्टर ने कहा कि यहां जमीन ही नहीं है। कलेक्टर ने जमीन देने की अपील की अस्पताल के पास ही खड़े होकर कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े वहां लोगों से बात करने लगे। बातचीत के दौरान उन्होंने किसानों से कहा कि यहां निर्माण के लिए जमीन ही नहीं है। अगर जमीन नहीं है तो विस्तार कैसे होगा। ग्रामीणों ने कलेक्टर की अपील को सुना। इस बीच उन्हीं में से एक किसान ने उदारता दिखाई। किसान ने जमीन दान कर दी कलेक्टर स्वपनिल वानखेड़े की बातों को सुनकर मौके पर मौजूद एक किसान ने उदारता दिखाई। किसान ने तुरंत कलेक्टर से कहा कि अस्पताल निर्माण के लिए मैं दो-तीन बीघा जमीन दान दूंगा। इससे ज्यादा भी जरूरत पड़ी तो मैं देने के लिए तैयार हैं। किसान ने कहा कि सड़क किनारे भी हमारी जमीन है, वहां भी दे दूंगा। इसके साथ किसान ने कलेक्टर से कहा कि हमारे परिवार ने पहले भी जमीन दान में दी है। अस्पताल और स्कूल गांव में उसी जमीन पर बने हुए हैं। कलेक्टर ने कहा कि सम्मानित करूंगा वहीं, मौके पर मौजूद दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने अधिकारी से कहा कि दान पत्र बन जाए तो स्थानीय स्तर पर एक कार्यक्रम आयोजित कर इन्हें सम्मानित करें। कलेक्टर ने यह भी कहा कि मैं भी इस कार्यक्रम में आऊंगा। गौरतलब है कि जमीन दान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गांव में अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया शुरु होगी। इससे गांव और आसपास की महिलाओं को डिलीवरी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। कलेक्टर ने किसान से बात करते हुए वीडियो शेयर किया है।

MP में स्वास्थ्य लापरवाही का मामला, NHRC ने नवजात मौत पर भेजा नोटिस

भोपाल  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के एक अस्पताल के अंदर ‘चूहों के हमले’ के कारण एक नवजात शिशु की मौत के मामले को गंभीरता से लिया है। एनएचआरसी ने इस बारे में मिली शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव और इंदौर के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने बताया कि शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश के एक अस्पताल के अंदर ‘चूहों के हमले’ के कारण एक नवजात शिशु की मौत हो गई और अन्य घायल हो गए। एनएचआरसी के अनुसार, कथित घटना से संबंधित शिकायत के बाद आयोग ने 4 सितंबर को मामला दर्ज किया था। एनएचआरसी ने अपने नोटिस में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर 10 दिनों के भीतर ऐक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की कार्यवाही के अनुसार शिकायत का शीर्षक ‘न्याय तक पहुंच के लिए नेटवर्क’ है। कार्यवाही में कहा गया है, ‘‘आयोग को प्राप्त शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता ने इंदौर के एमवाय अस्पताल में हुई एक बेहद हैरान और परेशान करने वाली घटना की सूचना दी है, जहां अस्पताल परिसर के अंदर चूहों के हमले के कारण एक नवजात शिशु की मृत्यु हो गई और अन्य घायल हो गए।’’ इसके अलावा, हाल में सरकारी महाराजा यशवंतराव अस्पताल के आईसीयू में चूहों के काटने से दो नवजात बच्चियों की मौत की खबर भी मिली है। अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह भयावह घटना घोर चिकित्सा लापरवाही और बुनियादी स्वच्छता एवं रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूर्ण विफलता को उजागर करती है। कार्यवाही में कहा गया है कि इस तरह की ‘चूक’ न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में नागरिकों के विश्वास का उल्लंघन करती है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का भी गंभीर उल्लंघन है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता, कीट नियंत्रण और समग्र सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए तत्काल उपाय किए जाने चाहिए। एनएचआरसी ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथमदृष्टया पीड़ितों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन प्रतीत होते हैं। कार्यवाही में कहा गया है, ‘‘रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश सरकार, भोपाल और इंदौर के डीएम को नोटिस जारी करके शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करवाएं और आयोग के अवलोकन के लिए 10 दिनों के भीतर एक ऐक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करें।’’

CMHO की सख्ती: हथाईखेड़ा अस्पताल के 25 स्वास्थ्यकर्मियों पर गिरी गाज, कारण बताओ नोटिस भेजा

भोपाल  राजधानी के सिविल अस्पताल हथाईखेड़ा में लापरवाही और अनुशासनहीनता का गंभीर मामला सामने आया है। जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा 1 अगस्त 2025 को कराए गए आकस्मिक निरीक्षण में अस्पताल के 25 स्वास्थ्यकर्मी अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल मनीष शर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 3 कार्यदिवस के भीतर स्पष्टिकरण मांगा है। जवाब नहीं मिलने की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। डॉक्टर्स से लेकर टेक्नीशियन तक शामिल प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुबह 9:45 बजे तक अस्पताल में कोई नर्सिंग स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं था, जिससे मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना पड़ा। अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों से लेकर तकनीकी स्टाफ तक शामिल हैं। अनुपस्थित पाए गए प्रमुख स्वास्थ्यकर्मी: चिकित्सा अधिकारी 1. डॉ. योगेश सिंह कुरव 2. डॉ. सुनन्दा जैन 3. डॉ. अब्दुल हाफीज 4. डॉ. मनीष मुकाती 5. डॉ. दानिष पटेल 6. डॉ. दयाशंकर त्रिमूर्ति 7. डॉ. भावना मालवीया 8. डॉ. हर्षिता शर्मा 9. डॉ. सुरती शर्मा नर्सिंग ऑफिसर  10. संध्या नारीया 11.  रजनी मोवाडे 12. भाग्यश्री फाटेगाओंकर 13. मोनीका बोबड़े 14.  मेघा सोनी 15.  लीना जाटव 16.  रेखा गुप्ता 17. श्रष्टि खसदेव (प्रशिक्षक) 18.मीना वाडकेले 19. पायल भास्कर और ये भी पढ़े     फार्मासिस्ट और तकनीकी स्टाफ 20.ममता माजोका 21. ललीता साह 22. एन.एन. वर्मा 23. ज्ञान सिंह बोरेला (लैब टेक्नीशियन) 24. लोकेश जैन (लैब टेक्नीशियन) 25. जयदीप माजोका (एक्स-रे टेक्नीशियन) नोटिस में कहा गया है कि इन कर्मचारियों की समय पर गैर-मौजूदगी से मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल सका, जो कि सेवा अनुशासन और नैतिक जिम्मेदारी का उल्लंघन है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आपकी अनुपस्थिति से हितग्राहियों को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित होना पड़ा है। यह घोर लापरवाही है। 3 दिन के भीतर जवाब दें, अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार, यह निरीक्षण भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि समयपालन, जिम्मेदारी और मरीजों को गुणवत्ता वाली सेवा सुनिश्चित की जा सके।