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शासकीय छात्रावास में प्रवेश का मौका, 20 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन

शासकीय छात्रावासों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन 20 जुलाई तक स्‍थान रिक्‍त होने पर अंतिम चरण में 20 जुलाई तक कर सकेंगे आवेदन भोपाल राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र, स्‍कूल शिक्षा विभाग ने संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालक/बालिका शासकीय छात्रावासों में रिक्‍त स्‍थानों पर प्रवेश के लिए अंतिम चरण में 20 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। इस वर्ष से प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन की गई है। इसके लिए विभाग ने एजुकेशन पोर्टल 3.0 के माध्‍यम से विशेष होस्‍टल प्रबंधन प्रणाली विकसित की है। संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र हरजिंदर सिंह ने बताया कि, प्रदेश में संचालित छात्रावासों में विशेष रूप से वंचित वर्गों की बालिका/बालक को उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए पारदर्शी ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली प्रारंभ की गई है। यह ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली एक समेकित (Integrated) डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में प्रवेश प्रक्रिया, सीट आवंटन, अभिलेख संधारण तथा प्रशासनिक कार्यों को ऑनलाइन एवं पारदर्शिता के साथ संचालित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह प्रणाली विशेष रूप से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) टाइप-I एवं III एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास (एनएससीबी) बालक/बालिका छात्रावासों के पारदर्शी प्रबंधन एवं उनमें प्रवेश की सुविधा के लिए विकसित की गई है। आवेदन की अंतिम तिथि एवं प्रक्रिया राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार छात्रावासों में कक्षा 6वीं एवं अन्‍य कक्षाओं की रिक्‍त सीटों पर प्रवेश के लिए विद्यार्थी अंतिम चरण में 20 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। हॉस्टल में भर्ती के लिए अभिभावक/पालक/विद्यार्थी द्वारा ऑनलाइन आवेदन नजदीकी एमपी ऑनलाइन कियोस्क केंद्र से स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट https://educationportal3.in के माध्यम से भरा जा सकता है। यदि अभिभावक/पालक/विद्यार्थी को फॉर्म भरने में कोई समस्या आती है तो आवेदन वार्डन के सहयोग से भी भरा जा सकेगा। छात्रावासों में प्रवेश प्रात्रता छात्रावासों में लक्ष्‍य अनुसार 50/100/150/ 175/200/220/275 स्‍थान उपलब्‍ध हैं। कक्षा 6 से 8 की बालिका को (कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाईप-I) में तथा नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस बालिका छात्रावास प्रवेश दिया जाता है। वहीं कक्षा 6 से 12 की बालिका को (कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाईप- III) में प्रवेश की पात्रता है। कस्‍तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास की मार्गदर्शिका के अनुसार 75 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं के लिए एवं 25 प्रतिशत स्‍थान गरीबी रेखा के नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों की बालिकाओं के लिए नियत हैं। इनमें अस्थि बाधित, अनाथ व बेसहारा किसी भी वर्ग की बालिकाओं को चयन में प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्‍त प्रदेश में संचालित 66 नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस बालक छात्रावासों में कक्षा 3 से कक्षा 8 तक में पात्र बालकों को प्रवेश दिया जाता है। ये बालक छात्रावास, शाला अप्रवेशी एवं शाला त्‍यागी बालकों के लिए उनकी आयु के अनुरूप कक्षा में दर्ज करवाकर विशेष प्रशिक्षण के माध्‍यम से कक्षा अनुसार दक्षताएं विकसित कर शिक्षा की मुख्‍य धारा से जोड़े जाने के लिए संचालित हैं। इनमें विशेष रूप से ऐसे बच्‍चे जो रेल्‍वे स्‍टेशन एवं बस स्‍टैण्‍ड के प्‍लेट फार्म पर रहने वाले, पन्‍नी बीनने वाले, पलायन करने वाले परिवारों के बच्‍चे अथवा घर से भटके हुए विमुक्‍त (Denotified Tribal) एवं प्रिमिटिव ट्राइबल परिवार के बच्‍चे, वन ग्राम पटटा धारी परिवारों के बच्‍चों को आवासीय सुविधाएं प्रदान कर शिक्षा की मुख्‍य धारा से जोडकर प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण कराई जाती है। प्रदेश में संचालित छात्रावासों की संख्‍या प्रदेश में राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र अंतर्गत 207 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 324 नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस बालिका एवं 66 नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस बालक छात्रावास संचालित है। सभी छात्रावासों में ऐसे बालिका/बालक जो शाला से बाहर हैं अथवा जो प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हैं एवं पारिवारिक कारणों से परिवार में रहते हुए प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते हैं उन्हें छात्रावास में रखकर प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जाती हैं।  

Working Women Hostel Project: मोहाली में 350 महिलाओं के रहने की सुविधा, आज होगा परियोजना का शुभारंभ

मोहाली  पंजाब सरकार की ओर से अब चंडीगढ़ की तर्ज पर मोहाली में भी वर्किंग वुमेन हॉस्टल बनाया जाएगा। यह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। करीब 15 साल से इसकी मांग की जा रही थी। इसका नींव पत्थर सेक्टर-66 में आज कैबिनेट मंत्री बलजीत कौर रखेंगी।  अब तीन प्वाइंटों में जानिए हॉस्टल कितना जरूरी     मोहाली में कई कंपनियां व यूनिवर्सिटी: मोहाली में विकास काफी तेज गति से हुआ है। पढ़ाई और रोजगार के लिए पंजाब समेत अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में महिलाएं मोहाली आती हैं। इलाके में कई नामी कंपनियां चल रही है, जहां पर महिलाएं काम करती है। ऐसे में काफी समय से यह मांग चल रही थी कि यहां पर वर्किंग वुमन हास्टल बनाया जाए।     सुरक्षा को लेकर चिंता: शहर में नए एरिया भी बसे हैं। प्राइवेट पीजी और हॉस्टलों में रहने वाली महिलाओं के साथ लूटपाट, धोखाधड़ी और सुरक्षा संबंधी घटनाओं के मामले सामने आते रहे हैं। इतना ही नहीं पीजीआई में हत्या तक हुई। ऐसे में लोगों को सुरक्षा का हर समय डर रहता है।     महंगे किराए से राहत: प्राइवेट पीजी और कमरों का किराया अधिक होने के कारण कई कामकाजी और छात्राएं परेशानी झेलती हैं। सरकारी हॉस्टल उन्हें सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराएगा। प्राइवेट पीजी में किराया बहुत है। महिलाओं को उचित सुविधाएं भी नहीं मिल पाती है। इस प्रोजेक्ट को पहले मिली मंजूरी मोहाली के सबसे बड़े महिला हॉस्टल प्रोजेक्ट पर ₹73.85 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसमें 350 महिलाओं के रहने की व्यवस्था होगी। सेक्टर-79 हॉस्टल के प्रोजेक्ट पर ₹12.57 करोड़ खर्च होंगे। फंडिंग में 60% राशि केंद्र सरकार के निर्भया फंड से और 40% (करीब ₹5.03 करोड़) पंजाब सरकार देगी।

हॉस्टल विवाद: लड़कियों से बाइबिल पढ़वाने और धार्मिक अभ्यास रोकने का आरोप वार्डन पर

झाबुआ: मध्य प्रदेश के झाबुआ स्थित एक शासकीय हॉस्टल में वार्डन पर छात्रों से बाइबिल पढ़वाने का आरोप लगा है। बाइबिल पढ़वाने का वीडियो भी वायरल हुआ था। हॉस्टल के अंदर प्रार्थना सभाएं हो रही थीं। मंगलवार को कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की छात्राएं कलेक्टर ऑफिस पहुंची और अपनी शिकायत दी है। ये हॉस्टल की वार्डन बबीता डाबी पर है। बाइबिल पढ़ने का बनाया जा रहा दबाव हॉस्टल से आईं छात्राओं ने आरोप लगाया है कि उनकी मर्जी के खिलाफ वार्डन वहां पर बाइबिल पढ़ने का दबाव बनाती हैं। वहीं, जब लड़कियां मना करती हैं तो उन्हें हॉस्टल से निकालने की धमकी देती हैं। साथ ही कहती हैं कि करियर बर्बाद कर दूंगा। लड़कियों ने हॉस्टल में चल रही गतिविधियों के बारे में अपने परिजनों को जानकारी दी थीं। सहमी हैं लड़कियां बताया जा रहा है कि हॉस्टल में रह रहीं लड़कियां डर के मारे पढ़ाई छोड़ रहे हैं। अभी तक 10-12 लड़कियों के छोड़ने के आरोप हैं। लड़कियों के पालकों के साथ आए हिंदू संगठन के लोगों ने कहा कि वहां धर्मांतरण चल रहा है। उनसे बाइबिल पढ़वाई जाती है। हॉस्टल में 150-200 लड़कियां यहां रहती हैं। हमलोग झाबुआ कलेक्टर से मिलने आए हैं। उनसे शिकायत की है। साथ ही कार्रवाई की मांग की है। वार्डन को तुरंत सस्पेंड किया जाए। कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि हम जांच के लिए टीम गठित कर रहे हैं। एक पालक ने कहा कि हम बच्ची से मिलने गए तो उसने रो दिया। वह घर चलने की जिद करने लगी। फिर बताया कि मैडम कहती हैं कि तुम्हें राम-राम नहीं बोलना है। वह लड़कियों को बाइबिल पढ़ाती हैं। एक अन्य बच्ची के पालक ने कहा कि हमारी बच्ची को ईसाई के बारे में पढ़ाती हैं। साथ ही उसे सूर्य नमस्कार नहीं करवाती है। वह लड़कियों को कहती हैं कि सूर्य नमस्कार करोगी तो यहां नहीं रहने दूंगा। अधिकारियों ने जांच की बात कही वहीं, अभिभावकों की शिकायत पर अधिकारियों ने कहा कि हम इसकी जांच जरूर कराएंगे। वीडियो के बारे में कहा जा रहा है कि वह पुराना है। गौरतलब है कि सरकारी नियम के अनुसार किसी भी शिक्षण संस्थान में धार्मिक प्रचार पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

बालाघाट हॉस्टल मामला: नाबालिग छात्रा ने जन्म दिया, लापरवाही बरतने वाली अधीक्षिका सस्पेंड, आरोपी पकड़ा गया

बालाघाट  जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही आठवीं कक्षा की साढ़े 13 वर्षीय नाबालिग के मां बनने की खबर ने छात्रावास में बच्चियों के स्वास्थ्य परीक्षण की पोल खोलकर रख दी है। अस्पताल चौकी से जानकारी मिलने के बाद महिला थाना ने मामले में कार्यवाही करते हुए अग्रिम कार्यवाही के लिए गढ़ी थाना को जानकारी भिजवा दी है। नाबालिग आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया जानकारी के अनुसार, नाबालिग को मां बनाने वाले नाबालिग आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जिसे शनिवार को किशोर न्यायालय में पेश किया जाएगा। वहीं इस मामले में सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग शकुंतला डामोर ने बैहर विकासखंड अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास परसामऊ की छात्रावास अधीक्षिका प्राथमिक शिक्षक चैनबती सैयाम को अपने कार्यों में लापरवाही बरतने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दरअसल, गढ़ी थाना क्षेत्र के परसामऊ आवासीय छात्रावास में रहकर नाबालिग पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान उसके गर्भवती होने और एक बच्ची को जन्म देने का मामला सामने आया है। जिला शिक्षा केंद्र के अधीन संचालित यह आवासीय छात्रावास जिला शिक्षा केंद्र के अधीन संचालित होता है। जिला शिक्षा केंद्र के डीपीसी जीपी बर्मन ने इस मामले में हॉस्टल वार्डन और एएनएम की लापरवाही स्वीकार करते हुए बताया कि आठवीं कक्षा में पढ़ रही पीड़ित छात्रा की तबीयत ठीक नहीं रहती थी तथा वह ज्यादातर समय अपने घर पर ही रहती थी। पुलिस में दिए बयान के अनुसार पीड़ित छात्रा के उसी गांव के किसी व्यक्ति से शारीरिक संबंध थे। महिला थाना प्रभारी किरण वरकड़े ने बताया कि अस्पताल चौकी से जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर प्रारंभिक कार्यवाही की गई और आगे की कार्यवाही गढ़ी थाना पुलिस द्वारा की जाएगी। उन्होंने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और शनिवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। अधिकारियों का क्या कहना है इधर मामले के सामने आने के बाद सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग शकुंतला डामोर ने बताया कि कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास परसामऊ की कक्षा आठवीं की बच्ची के गर्भवती होने और बच्ची को जन्म देने के मामले में प्रथम दृष्टया पाया गया कि छात्रावास अधीक्षिका द्वारा पीड़ित छात्रा के स्वास्थ्य में परिवर्तन होने पर कोई संवेदना नहीं दिखाई गई और न ही छात्रा का पृथक से स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। अधीक्षिका द्वारा छात्रा के बार-बार छात्रावास से अनुपस्थित रहने तथा उसके स्वास्थ्य को लेकर पालकों से संपर्क भी नहीं किया गया। अपने पदीय कर्तव्यों के प्रति बरती गई इस लापरवाही के चलते अधीक्षिका चैनबती सैयाम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।