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शहर में बनेंगे 10 हजार नए फ्लैट, आवास परियोजना को हरी झंडी

इंदौर प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत नगर निगम ने विभिन्न स्थलों पर आवास निर्माण करने के लिए कुल 5 डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी थी। सरकार के 5 में से 2 डीपीआर मंजूर करते ही निगम फ्लैट निर्माण के काम पर लग गया है, जो कि ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा) और बढिय़ा कीमा में बनेंगे। सबके पास खुद का आवास हो और मकान की कीमत भी कम हो इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई है। योजना के पहले चरण में इंदौर शहर और आसपास 13 जगहों पर मिली सरकारी जमीन पर 18606 फ्लैट बनने के साथ लोगों को आबंटित होना शुरू हो गए हैं। अब प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 पर काम शुरू किया गया है। भेजी गई डीपीआर मंजूरी इसके चलते ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा), सनावदिया, बढिय़ा कीमा और उमरीखेड़ा में 10 हजार फ्लैट बनाने की डीपीआर मंजूरी के लिए राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी गई। निगम अफसरों के अनुसार ताप्ती परिसर और बढिया कीमा की डीपीआर मंजूर हो गई है। अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। रायपुर में भाजपा की बड़ी बैठक इसके लिए पिछले दिनों निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और प्रधानमंत्री आवास योजना के अपर आयुक्त अर्थ जैन ने स्थल निरीक्षण किया था। साथ ही अफसरों को निर्देशित किया गया कि योजना के अंतर्गत प्रस्तावित सभी आवासीय परियोजनाओं से पात्र हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके, इसके लिए फ्लैट का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 पर एक नजर     6048 वन बीएचके के फ्लैट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए बनेंगे।     1368 टू बीएचके के फ्लैट बनेंगे। 720 थ्री बीएचके के फ्लैट बनेंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है… प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों, निम्न आय वर्ग (LIG), और मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों को 2022 (और अब 2.0 के तहत आगे) तक पक्का घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सरकार घर बनाने या खरीदने के लिए सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना के तहत, पात्र लाभार्थियों को नया घर बनाने या कच्चे घर को पक्का करने के लिए लगभग 1.20 लाख से 2.50 लाख तक की वित्तीय सहायता/सब्सिडी मिलती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास पहले से कोई पक्का घर नहीं होना चाहिए। यह योजना मुख्य रूप से EWS (आर्थिक रूप से कमजोर), LIG (निम्न आय वर्ग) और MIG (मध्यम आय वर्ग) के लिए है।

PM आवास योजना लाभुकों को मिली राहत की उम्मीद, विधायक ने दिया पूरा साथ

जमशेदपुर  जमशेदपुर के बिरसानगर में प्रधानमंत्री आवास योजना (PRAW) के सैकड़ों लाभुक रविवार सुबह जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय के बिष्टुपुर स्थित आवास पर जमा हुए. लाभुकों ने व्यथा सुनाते हुए कहा कि पूरा पैसा जमा करने के बावजूद उन्हें पिछले 6 साल से चाबी नहीं मिल रही है. थक-हारकर लाभुकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वे आगामी 6 मई को शुभ मुहूर्त में अपने-अपने घरों में सामूहिक गृह प्रवेश पूजा करेंगे. विधायक सरयू राय ने इस फैसले का न केवल समर्थन किया, बल्कि पूजा सामग्री और पंडाल की व्यवस्था स्वयं करने का एलान किया. दोहरी आर्थिक मार और बदतर हालात लाभुकों ने बताया कि वे वर्तमान में ‘दोहरी मार’ झेल रहे हैं. एक तरफ बैंकों से लिए गए लोन की EMI कट रही है, तो दूसरी तरफ घर न मिलने के कारण वे 4,000 से 6,000 रुपये तक प्रति माह किराया देने को मजबूर हैं. कई परिवारों की माली हालत इतनी खराब हो गई है कि उनके पास खाने तक के लाले पड़ रहे हैं. योजना के तहत ब्लॉक नंबर 8 और 23 में 95% काम पूरा होने के बावजूद बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का काम अब भी अधूरा है. भ्रष्टाचार और निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल विधायक सरयू राय ने निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि 21 ब्लॉक में से मात्र 2 ब्लॉक ही तैयार हो सके हैं. लाभुकों ने विधायक को ऐसी तस्वीरें और वीडियो दिखाए, जिनमें नवनिर्मित मकानों की दीवारों में दरारें और प्लास्टर गिरते हुए स्पष्ट दिख रहे हैं. राय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि घर मिलने से पहले ही आशियाने टूटने लगे हैं. सरकार और जुडको के बीच पिस रही जनता परियोजना का जिम्मा जुडको (JUIDCO) को दिया गया था, जिसने छह अलग-अलग कंपनियों को काम सौंपा है. जिस योजना को मार्च 2021 तक पूरा होना था, वह मई 2026 तक भी फिनिशिंग स्टेज में ही अटकी हुई है. सरयू राय ने कहा कि वे सोमवार को मुख्यमंत्री और विभागीय सचिव से मिलकर इस समस्या के समाधान का अंतिम प्रयास करेंगे ताकि लाभुकों को आधिकारिक रूप से चाबी मिल सके. परियोजना एक नजर में     कुल फ्लैट्स (संशोधित): 7372 (24 ब्लॉक में)     कुल लागत: 653 करोड़ रुपये     प्रति फ्लैट लागत: 6.81 लाख रुपये     लाभुकों का अंशदान: 4.31 लाख रुपये     कारपेट एरिया: 313 वर्ग फीट     संरचना: G+8 (ग्रुप हाउसिंग)     सुविधाएं: जलापूर्ति, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज, पार्क और पार्किंग  

छत्तीसगढ़ में पहुंची झारखंड आवास बोर्ड की टीम, आवासीय योजनाओं और प्रक्रियाओं का करेगी अवलोकन

रायपुर झारखंड राज्य आवास बोर्ड की 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम अध्ययन प्रवास पर छत्तीसगढ़ पहुंची है। यह दल 15 से 18 अप्रैल 2026 तक राज्य में प्रवास कर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की आवासीय योजनाओं, नियमों, प्रक्रियाओं और नवाचारों का विस्तृत अध्ययन करेगा। आज छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा अध्ययन दल को योजनाओं, नीतियों और कार्यप्रणाली से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान अपर आयुक्त श्री हर्ष कुमार जोशी ने तकनीकी विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्य संपदा अधिकारी श्री सुनील कुमार सिंह ने संपत्ति प्रबंधन, मार्केटिंग, विक्रय प्रणाली एवं आईटी आधारित प्रक्रियाओं की जानकारी साझा की। वहीं मुख्य लेखा अधिकारी श्रीमती पूजा मिश्रा शुक्ला ने वित्तीय प्रबंधन पर प्रकाश डाला। उपायुक्त श्री बी.बी. सिंह एवं कार्यपालन अभियंता श्री संदीप साहू ने भी तकनीकी पहलुओं और कार्यप्रणाली से दल को अवगत कराया। अध्ययन दल को यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी और मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव के मार्गदर्शन में आम नागरिकों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। प्रमुख उपलब्धियों में पिछले एक वर्ष में 1100 करोड़ रुपए की 5145 संपत्तियों का विक्रय, ओटीएस-2 के तहत 174 करोड़ रुपए की 1105 पुरानी संपत्तियों का निस्तारण, आबंटी पोर्टल एवं एआई चैटबोट की सुविधा शामिल है। साथ ही पिछले दो वर्षों में 3050 करोड़ रुपए की लागत से 78 आवासीय परियोजनाओं की शुरुआत तथा 7 रि-डेवलपमेंट परियोजनाओं के प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए गए। उल्लेखनीय है कि झारखंड राज्य आवास बोर्ड द्वारा वर्ष 2000 के अधिनियम में संशोधन या नए कानून के निर्माण के उद्देश्य से इस अध्ययन दल का गठन किया गया है। दल आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक उपयोग को “मिश्रित उपयोग” में परिवर्तित करने की प्रक्रियाओं का भी अध्ययन कर रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ और झारखंड दोनों राज्यों का गठन वर्ष 2000 में हुआ था, लेकिन छत्तीसगढ़ में गृह निर्माण मंडल द्वारा आवासीय योजनाओं का विस्तार तेजी से किया गया, जिससे आम नागरिकों को किफायती दरों पर पक्के मकान उपलब्ध हो सके हैं।