भारत में इंसानों की लंबाई क्यों घट रही है? डॉक्टर्स ने खुलासा किया, छोटे होते भारतीय बच्चे
नई दिल्ली दुनिया जहां लंबी और बेहतर कद-काठी की ओर बढ़ रही है, वहीं भारत अपने 'रिवर्स गियर' में नजर आ रहा है. आमतौर पर जैसे-जैसे किसी देश की अर्थव्यवस्था बढ़ती है और हेल्थ सुविधाएं बेहतर होती हैं, वहां के लोगों की औसत लंबाई बढ़नी चाहिए जैसा कि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में हुआ है. लैंसेट और NCD रिस्क फैक्टर कोलैबोरेशन के डेटा के मुताबिक, पिछले 100 सालों में दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारतीयों की हाइट में वो उछाल नहीं दिखा जो चीन या जापान में दिखा है. भारत के मामले में उल्टा हो रहा है और उनकी औसत हाइट में गिरावट देखी गई है. विश्लेषण से संकेत मिलता है कि भारत में औसत हाइट में अपेक्षित बढ़त नहीं हो पाई है और कुछ उम्र व सामाजिक समूहों में लंबाई में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई है, जिसका सबसे बड़ा कारण बचपन का कुपोषण है. 20–30 साल पहले (2005–2006) भारतीय पुरुष आज की तुलना में औसतन 1 से 1.1 सेमी लंबे थे यानी पिछले कुछ दशकों में उनकी हाइट में गिरावट आई है. अब भारतीयों की लंबाई कम होने के क्या कारण हैं, कौन-कौन से फैक्टर्स इसके लिए जिम्मेदार हैं. घटती लंबाई पर क्या कहती हैं रिसर्च? ग्लोबल हाइट स्टडी (1985-2019) के अनुसार भारतीयों की लंबाई में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई जिसकी उम्मीद थी. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-3 से NFHS-4, 2005-16) डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि 15-25 साल के पुरुषों की औसत लंबाई 1.10 सेमी और 26-50 साल उम्र वालों की लंबाई 0.86 सेमी कम हो गई है. वहीं यदि 15-25 साल की महिलाओं की बात करें तो उनकी लंबाई में 0.12 सेमी की गिरावट आई है. ट्राइबल महिलाओं में यह आंकड़ा 0.42 सेमी और गरीब तबके वाली महिलाओं की लंबाई 0.57 सेमी तक गिर गई है. PLoS One में पब्लिश भारतीयों की लंबाई घटने पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) द्वारा की गई रिसर्च (2021) से पता चलता है कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-3 (2005-06) से नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) के बीच पुरुषों की लंबाई 1 से 1.1 सेमी और चुनिंदा महिला ग्रुप्स (एसटी, गरीब) में 0.4 से 0.6 सेमी तक घट गई है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5, 2019-21) के मुताबिक, बचपन और किशोरावस्था में कुपोषण ही लंबाई घटने की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है. 5 साल से कम उम्र के 35 प्रतिशत बच्चे नाटे (स्टंटिंग) हैं. दरअसल, हर बच्चे के जेनेटिक्स में एक निश्चित लंबाई तक पहुंचने की अधिकतम संभावना होती है लेकिन स्टंटिंग इस क्षमता को सीमित कर देता है और उनकी लंबाई पूरी नहीं बढ़ पाती. रिपोर्ट के मुताबिक, टीम ने 1985 और 2019 के बीच की गई 2000 से अधिक स्टडीज में 5 से 19 वर्ष की उम्र के 6.5 करोड़ से अधिक बच्चों और वयस्कों के डेटा का एनालेसिस किया. सामने आया कि पिछले 35 सालों में बच्चों की औसत ऊंचाई में सबसे अधिक सुधार चीन और दक्षिण कोरिया में देखा गया है. चीन में 19 साल के लड़कों की औसत लंबाई 1985 से 2019 के बीच 8 सेमी बढ़ी पाई गई थी. 2019 में पब्लिश हुई द लैंसेट स्टडी में बताया गया है कि 19 साल की उम्र में सबसे लंबे लड़के नीदरलैंड के थे जिनकी औसत हाइट 183.8 सेमी या 6 फीट थी और वहीं 19 साल की उम्र में सबसे कम लंबाई वाले लड़के तिमोर लेस्ते (दक्षिण पूर्व एशिया का देश) में रहते थे जिनकी औसत हाइट 160.1 सेमी या 5 फीट 3 इंच थी. पेट की बीमारी, मॉडर्न लाइफस्टाइल बच्चे की हाइट के दुश्मन बेंगलुरु के स्पर्श हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. विक्रम बेल्लिअप्पा (MBBS, MS, DNB) ने Aajtak/.in को बताया, 'बार-बार होने वाले संक्रमण और पेट से जुड़ी बीमारियां बच्चों की ग्रोथ को प्रभावित कर सकती हैं. पेट के इंफेक्शन, दस्त या उल्टी की वजह से बॉडी जरूरी न्यूट्रिएंट्स को एब्जॉर्ब नहीं कर पाती. इसका सीधा असर बच्चे के वजन और लंबाई पर पड़ता है. लगातार पेट की खराबी न सिर्फ इम्यूनिटी कमजोर करती है, बल्कि ग्रोथ की रफ्तार को भी सुस्त कर देती है.' मॉडर्न लाइफस्टाइल के कारण बच्चों में अर्ली प्यूबर्टी (Early Puberty) देखने मिल रही है जिसका संबंध हाइट कम रह जाने से हो सकता है. दरअसल, आजकल के बच्चे जंक फूड का सेवन अधिक कर रहे हैं जिसके कारण उनमें मोटापा बढ़ रहा है जिस कारण उनमें समय से पहले हार्मोनल बदलाव (प्यूबर्टी) शुरू हो रहे हैं. डॉ. विक्रम बताते हैं, 'शुरू में तो बच्चा तेजी से लंबा होता दिखता है लेकिन हकीकत में उसकी 'ग्रोथ प्लेट्स' समय से पहले बंद हो जाती हैं. नतीजा यह कि उम्र बढ़ने पर उसकी फाइनल हाइट उम्मीद से काफी कम रह जाती है.' क्या हमारी खराब जीवनशैली और प्रदूषित वातावरण हमारे DNA में ऐसे बदलाव कर रहे हैं जो आने वाली पीढ़ियों की हाइट को परमानेंट तौर पर छोटा कर रहे हैं? बैलेंस डाइट की कमी जयपुर के कोकून हॉस्पिटल के पीडियाट्रिशियन डॉ. जितेन्द्र जैन (MBBS, DCH, DNB) से Aajtak.in ने पूछा, क्या कारण है कि भारतीयों की नई पीढ़ी की औसत ऊंचाई पिछली पीढ़ी से कम हो रही है? उन्होंने बताया, 'लंबाई में जेनेटिक्स का अहम रोल है लेकिन केवल जेनेटिक्स ही पूरी कहानी नहीं बताते. भारतीयों की नई पीढ़ी की औसत ऊंचाई पिछली पीढ़ी से कम होने के पीछे लाइफस्टाइल, पोषण और पर्यावरण भी जिम्मेदार हैं. 'जंक फूड, कम प्रोटीन और विटामिन्स, बढ़ता मोटापा, अधिक स्क्रीन टाइम और फिजिकल एक्टिविटी में कमी बच्चों की ग्रोथ को धीमा कर रही है. 'गर्भावस्था में माताओं का खराब पोषण, बचपन में बार-बार होने वाले इंफेक्शन, पेट और आंत की बीमारियां और प्रदूषण भी हार्मोनल संतुलन और हड्डियों की ग्रोथ को प्रभावित कर रहे हैं. इसलिए केवल जेनेटिक्स पर निर्भर रहने की बजाय बैलेंस डाइट, साफ पानी, पर्याप्त नींद और एक्टिव लाइफस्टाइल बेहद जरूरी है ताकि बच्चों की लंबाई सही रहे और ओवरऑल ग्रोथ सही तरह से हो.' खराब लाइफस्टाइल और पॉल्यूशन डॉ. विक्रम ने कहा, 'खराब लाइफस्टाइल और प्रदूषण सीधे तौर पर DNA को बदलकर हाइट को स्थायी रूप से प्रभावित नहीं करते लेकिन ये एपिजेनेटिक बदलाव जरूर पैदा कर सकते हैं. लगातार जंक फूड, न्यूट्रिशन की कमी, स्ट्रेस, प्रदूषण और हार्मोन-डिसरप्टिंग केमिकल्स का असर … Read more