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साइबर गुलामी मामले में खुलासा, भारतीय युवाओं को विदेश में फंसाकर कराई जा रही थी ठगी

 पटना राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। फरार मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। यह आरोप पत्र पटना स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दाखिल की गई है। एनआईए ने आनंद कुमार सिंह और उसकेचार सहयोगियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए हैं। यूपी के हैं दो आरोपित आरोप पत्र में शामिल तीन सह-आरोपी उत्तर प्रदेश के अभय नाथ दुबे, बिहार के अभिरंजन कुमार और उत्तर प्रदेश के रोहित यादव को इस वर्ष फरवरी में कंबोडिया से दिल्ली पहुंचने पर गिरफ्तार किया गया था। वहीं पांचवां आरोपी प्रहलाद कुमार सिंह फिलहाल जमानत पर बाहर है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने एक संगठित मानव तस्करी गिरोह के तहत भारतीय युवाओं को विदेश में वैध नौकरी और आकर्षक वेतन का झांसा देकर कंबोडिया भेजा। वहां पहुंचने के बाद पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें फर्जी कंपनियों में साइबर ठगी से जुड़े काम करने के लिए मजबूर किया गया। युवाओं को दिए जाते थे ब‍िजली के झटके विरोध करने वाले युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। जांच में सामने आया है कि पीड़ितों को बिजली के झटके दिए गए, जबरन कैद में रखा गया और भोजन-पानी तक से वंचित किया गया। एनआईए की जांच में आनंद कुमार सिंह को इस पूरे गिरोह का सरगना पाया गया है। एजेंसी के मुताबिक, वह भारत में एजेंटों और ट्रैवल एजेंटों के जरिए युवाओं की भर्ती करता था। इसके बाद कंबोडिया में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उनकी अवैध तस्करी कराता था। जांच में यह भी सामने आया है कि प्रत्येक युवक को फर्जी कंपनियों को बेचने के बदले 2,000 से 3,000 अमेरिकी डॉलर तक वसूले जाते थे। एनआईए ने कहा है कि मामले आरसी-10/2024/एनआइए/डीएलाई में गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए जांच अभी जारी है।

गोपालगंज रेस्क्यू ऑपरेशन: ट्रैफिकिंग गिरोह से 44 लड़कियां छुड़ाईं, कई राज्यों से जुड़ा नेटवर्क उजागर

गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र में मंगलवार को आर्केस्ट्रा समूहों के खिलाफ अभियान चलाकर 44 से अधिक नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया है। 15 से अधिक आर्केस्ट्रा समूहों पर छापेमारी में पांच महिला सहित 21 संदिग्धों को ट्रैफिकिंग और बच्चियों के शोषण के आरोप में गिरफ्तार कर पुलिस पूछताछ कर रही है। अपर पुलिस महानिदेशक ,कमजोर वर्ग अमित जैन और एसपी विनय तिवारी की देखरेख चलाए गए इस अभियान में कुचायकोट पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन, नारायणी सेवा संस्थान और बिहार पुलिस मुख्यालय की संयुक्त टीम शामिल थी। पुलिस के अनुसार मुक्त कराई गई लड़कियों की उम्र 10 से 17 वर्ष के बीच है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बच्चियों को पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से झांसा देकर लाया गया था। काउंसलिंग के बाद सभी बच्चियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। उनकी मेडिकल जांच,उम्र सत्यापन और अन्य कानूनी प्रक्रिया जारी है। ये हुए गिरफ्तार पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के गुरुसदे रजना, उत्तर प्रदेश के बनारस जिले के मनोज सोनार, पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले के सुमित गोरे, गोपालगंज जिले के कुशौंधी बाजार निवासी विकास कुमार सिंह, पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के ओमिर बाग सोम, गोपालगंज जिले के विशम्भरपुर निवासी पिंटू साह, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के राहुल मंडल, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सेफुल्लाह रसखोर को पकड़ा गया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के सुब्रतो साधक, पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के राजू पासवान, गोपालगंज जिले के कुचायकोट निवासी जीत कुमार सिंह, गोपालगंज जिले के मठवा परसुराम निवासी अनुप कुमार कुशवाहा, झारखंड के गिरिडीह जिले के शंकर कुमार, उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर निवासी आलोक श्रीवास्तव, पश्चिम बंगाल के नोदिया जिले के रजक मंडल तथा गोपालगंज जिले के कुचायकोट निवासी नीरज कुमार को गिरफ्तार किया गया है। कराया जा रहा था अश्लील नृत्य जांच में सामने आया कि शादी-विवाह के मौसम में आर्केस्ट्रा समूहों द्वारा ट्रैफिकिंग के जरिए नाबालिग लड़कियों को बुलाया जाता था। उनसे भोजपुरी गीतों पर अश्लील नृत्य कराया जाता था। कई लड़कियों ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि उन्हें बेहतर जिंदगी, फिल्मों में काम और रुपये का लालच देकर इस धंधे में धकेला गया। कुछ ने यह भी बताया कि कथित प्रेमियों ने उन्हें बेच दिया। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि कार्रवाई से ट्रैफिकिंग गिरोहों और आर्केस्ट्रा समूहों की मिलीभगत उजागर हुई है। राजस्थान से लापता किशोरी भी मिली पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद किशोरियों में एक किशोरी राजस्थान की रहने वाली है। वह पिछले पांच वर्षों से लापता थी और उसके गायब होने की रिपोर्ट वहां के स्थानीय थाने में दर्ज कराई गई थी। पूछताछ के बाद गोपालगंज पुलिस ने उसके परिजनों को सूचना दे दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद की गई लड़कियों में सबसे अधिक संख्या पश्चिम बंगाल की किशोरियों की है। दलालों द्वारा पैसा की लालच देकर डांस कराया जाता है। पहले भी दस किशोरियों को कराया गया था मुक्त बता दें कि इससे पहले 18 मार्च 2026 को गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र में गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी। सूचना मिली थी कि ऑर्केस्ट्रा एवं डांस ग्रुप के नाम पर बाहर से लाई गई किशोरियों से जबरन डांस कराया जा रहा है तथा उनका शोषण किया जा रहा है।सूचना के बाद पुलिस ने एसोसिएशन फॉर वोलंटरी एक्शन, पटना, नारायणी सेवा संस्थान, गोपालगंज तथा बैकुंठपुर थाना की महिला पुलिस पदाधिकारियों और पुलिसकर्मियों के साथ संयुक्त विशेष टीम बनाकर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान कुल 10 किशोरियों को बरामद कर मुक्त कराया गया था। एक ऑर्केस्ट्रा संचालक और दो संचालिकाओं को गिरफ्तार किया गया था।

कुचायकोट में छापेमारी के दौरान 16 संचालक गिरफ्तार, कई सबूत बरामद

गोपालगंज गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र में पुलिस ने ऑर्केस्ट्रा नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई अड्डों पर छापेमारी की. इस दौरान 45 नाबालिग लड़कियों को छुड़ाया गया है. वहीं पांच युवतियों और 16 ऑर्केस्ट्रा संचालकों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस को मौके से किशोरियों के उत्पीड़न से जुड़े कई अहम सबूत भी मिले हैं. यह कार्रवाई एसपी विनय तिवारी के निर्देश पर की गई. कुचायकोट थानाध्यक्ष दर्पण सुमन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कुचायकोट, बलिवन सागर और विंदवलिया भठवां इलाके में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया. राजस्थान से लापता किशोरी भी मिली पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. बरामद किशोरियों में एक लड़की ऐसी भी मिली, जो पिछले पांच वर्षों से राजस्थान से लापता थी. वहां के थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज है. पुलिस ने पूछताछ के बाद उसके परिजनों को सूचना दे दी है ताकि वे आकर अपनी बेटी को घर ले जा सकें. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद लड़कियों में सबसे अधिक संख्या पश्चिम बंगाल की है. जबरन ऑर्केस्ट्रा में काम कराने का आरोप किशोरियों ने पूछताछ में आरोप लगाया कि उन्हें जबरन ऑर्केस्ट्रा में काम कराया जाता था. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है. गिरफ्तार युवतियों और संचालकों से लगातार पूछताछ की जा रही है. पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही है. NGO ने भी किया सहयोग इस अभियान में पटना पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के साथ ‘एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन’ और ‘नारायणी सेवा संस्थान’ की टीम ने भी सहयोग किया. दोनों संस्थाएं ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ नेटवर्क से जुड़ी हैं, जो देशभर में बाल संरक्षण पर काम करता है. यौन शोषण की आशंका एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि इस कार्रवाई ने नाबालिग लड़कियों की तस्करी और शोषण के बड़े नेटवर्क को उजागर किया है. उन्होंने कहा कि कई बच्चियों को झांसा देकर इस धंधे में धकेला जाता है और उनके यौन शोषण तक की आशंका सामने आई है.

विदिशा में GRP की बड़ी कार्रवाई, रेलवे स्टेशन से किया 20 बच्चों का रेस्क्यू , 6 तस्कर गिरफ्तार

विदिशा   मध्य प्रदेश के विदिशा रेलवे स्टेशन पर मानव तस्करी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरपीएफ और सोशल वेलफेयर सोसाइटी की संयुक्त कार्रवाई में 20 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। यह बच्चे बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं, और इन्हें मुंबई होते हुए सूरत ले जाया जा रहा था, जहां इनसे साड़ी फैक्ट्रियों में काम करवाया जाना था। ऐसे हुआ बच्चों का रेस्क्यू  विदिशा सोशल वेलफेयर सोसाइटी की दीपा शर्मा ने बताया कि जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में बच्चों को ले जाया जा रहा है । जानकारी के आधार पर ये कार्रवाई की गई। हमारी टीम ने आरपीएफ के साथ मिलकर रात भर स्टेशन पर निगरानी की, और सुबह करीब 5 बजे ट्रेन के पहुंचते ही कार्रवाई को अंजाम दिया गया। रेस्क्यू के दौरान कुछ तस्कर मौके से फरार हो गए, जबकि 6 आरोपी को पकड़ लिया गया है। ट्रेन का स्टॉपेज दो मिनिट का था , चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोका गया और 34 लोगों को उतारा गया, जिनमें से 20 बच्चे नाबालिक निकले । जानकारी ये भी है कि कुछ बच्चे ट्रेन से आगे निकल चुके हैं, जिन्‍हें उज्जैन स्टेशन पर रेस्क्यू किया जाएगा। पकड़े गए लोगों से हो रही पूछताछ  रेस्क्यू किए गए बच्चों को अब बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाएगा और फिर बाल संप्रेषण गृह में अस्थाई रूप से रखा जाएगा। फिलहाल जीआरपी थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह और उनकी टीम, बच्चों को ले जाने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।  जानकारी के अनुसार ये सभी बच्चे बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं और इन्हें ट्रेन के ज़रिए मुंबई होते हुए गुजरात के सूरत शहर ले जाया जा रहा था। वहां इनसे साड़ी फैक्ट्रियों में जबरन मजदूरी करवाई जानी थी। विदिशा सोशल वेलफेयर सोसाइटी की प्रमुख दीपा शर्मा ने बताया कि संस्था को इन बच्चों की तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर आरपीएफ के साथ मिलकर रात भर स्टेशन पर निगरानी की गई। सुबह करीब 5 बजे जैसे ही संदिग्ध ट्रेन स्टेशन पर पहुंची टीम ने तत्काल कार्रवाई कर ट्रेन को चेन पुलिंग के ज़रिए रोका।  कार्रवाई के दौरान कुल 34 लोगों को ट्रेन से उतारा गया जिनमें से 20 बच्चे नाबालिग पाए गए। मौके पर हड़कंप मच गया, कुछ तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले लेकिन 6 तस्करों को गिरफ्तार कर लिया गया है। दीपा शर्मा ने आगे बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कुछ बच्चे ट्रेन से आगे निकल चुके हैं जिन्हें उज्जैन स्टेशन पर रेस्क्यू करने की तैयारी की जा रही है। रेस्क्यू किए गए बच्चों को अब बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा और उसके बाद अस्थाई रूप से बाल संप्रेषण गृह में रखा जाएगा। फिलहाल जीआरपी थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह और उनकी टीम पकड़े गए तस्करों से पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि वे पूरे तस्करी नेटवर्क का खुलासा करने के लिए हर पहलू की गहन जांच कर रही है। मानव तस्करी क्या है ("मानव तस्करी" का अर्थ)? मानव तस्करी एक संगठित अपराध है जिसमें लोगों को धोखे से, जबरदस्ती या लालच देकर उनका शोषण करने के लिए कहीं और ले जाया जाता है, जैसे कि जबरन मजदूरी या यौन शोषण के लिए। "मानव तस्करी" से कैसे बचा जा सकता है? लोगों को जागरूक बनाकर, बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखकर, और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस या सामाजिक संस्थाओं को देकर मानव तस्करी से बचा जा सकता है। "मानव तस्करी" की सूचना कहां दी जा सकती है? आप 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन), 100 (पुलिस) या किसी भी नजदीकी थाने या सामाजिक संस्था को "मानव तस्करी" की जानकारी दे सकते हैं। क्या बच्चों को काम पर लगाना "मानव तस्करी" में आता है? अगर किसी नाबालिग को जबरन या धोखे से मजदूरी करवाई जा रही है, तो वह मानव तस्करी और बाल शोषण दोनों की श्रेणी में आता है। क्या "मानव तस्करी" के लिए सज़ा का प्रावधान है? हाँ, भारत में "मानव तस्करी" एक गंभीर अपराध है। दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास तक की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है।