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मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्ट्राइक, करीब 2 दर्जन SP के ट्रांसफर की सूची, जानिए कौन-कौन शामिल

भोपाल  मध्य प्रदेश में IPS अफसरों की ट्रांसफर को लेकर हलचल तेज है। होली, रंगपंचमी बीत चुके हैं और ईद आने वाली है और साथ ही हिंदू नववर्ष भी शुरु होने वाला है। अब प्रशासनिक स्ट्राइक की बारी है। एमपी में आईपीएस अफसरों की तबादला सूची लगभग तैयार हो चुकी है। मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर तबादलों की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार करीब 20 जिलों में एसपी बदले जा सकते हैं और जल्द ही तबादला सूची जारी होने की संभावना है। प्रस्तावित सूची में करीब 20 जिलों में नए एसपी की पदस्थापना हो सकती है। जिन जिलों में बदलाव की संभावना है। इनकी सूची नीचे है… इन जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं शाजापुर से यशपाल सिंह राजपूत, शिवपुरी से अमन सिंह राठौर,डिंडौरी से वाहिनी सिंह, मंडला से  रजत सकलेचा, छतरपुर से अगम जैन, बुरहानपुर से देवेंद्र कुमार पाटीदार, निवाड़ी से राय सिंह नरवरिया, नीमच से अंकित जायसवाल, दमोह से श्रुतकीर्ति सोमवंशी, सिवनी से सुनील कुमार मेहता, आगर मालवा से विनोद कुमार सिंह, ग्वालियर से धर्मवीर सिंह, उज्जैन से प्रदीप शर्मा, जबलपुर से संपत उपाध्याय के नाम शामिल हैं। कहा जा रहा है कि  गृह विभाग इसा दिशा में तैयारी कर चुका है और कभी भी आदेश जारी हो सकते हैं। तबादला सूची में सबसे ज्यादा फायदा 2020 बैच के पांच आईपीएस अफसरों को होगा, जिन्हें जिलों में एसपी पद की कमान सौंपी जाएगी। क्योंकि अब तक 2019 बैच के आईपीएस भी जिलों में एसपी पद पर आ चुके हैं। इसके अलावा कोर्ट के आदेश से प्रमोटी आईपीएस बने अधिकारी भी जिले के एसपी बन सकते हैं।

हरियाणा में 23 IAS अधिकारियों के तबादले, प्रशासनिक फेरबदल की घोषणा

चंडीगढ़  हरियाणा में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्यपाल के आदेशानुसार कई IAS अधिकारियों की पोस्टिंग और तबादले तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। इस फैसले का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और विभिन्न विभागों में सुचारु संचालन सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। नए आदेश के तहत अधिकारियों को उनके नए पदों पर जल्द से जल्द कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

पांच राज्यों के चुनाव में एमपी के 40 IAS अधिकारियों की ड्यूटी, आयोग ने किए ऑब्जर्वर तैनात

भोपाल  देश के विभिन्न राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के लिए मध्य प्रदेश कैडर के 40 भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को चुनाव आयोग द्वारा अलग-अलग राज्यों में प्रेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में तैनात किया गया है। इससे प्रदेश सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ और अनुभवी आईएएस अधिकारियों को चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए तैनात किया गया है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी चुनावी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना, निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर नजर रखना होगी।  जिन राज्यों में इन अधिकारियों को प्रेक्षक बनाया गया है, उनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, केरला, पुडुचेंरी और आसाम शामिल हैं। इन राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने के लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती की गई है। मध्य प्रदेश से जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है, उनमें प्रमुख रूप से प्रमुख सचिव संदीप यादव, जॉन किंग्सले, श्रीमन शुक्ला, स्वतंत्र कुमार सिंह, शिल्पा गुप्ता, सिबी चक्रवर्ती, अजय कटसेरिया, निधि निवेदिता, रोहित सिंह और अनुराग वर्मा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा राहुल फटिंग हरिदास, दीपक आर्य, हरहिका सिंह, आशीष भार्गव, अभिजीत अग्रवाल, दिलीप कुमार, वंदना वैद्य, सपना निगम, केवीएस चौधरी, मनीष सिंह, प्रबल सिपाहा, सौरव सुमन, अवि प्रसाद, सतेंद्र सिंह और बुद्धेश वैद्य सहित अन्य अधिकारी भी चुनाव ड्यूटी पर भेजे गए हैं। सूत्रों के अनुसार सूची जारी होने के बाद कुछ अधिकारियों ने अपनी चुनावी ड्यूटी निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के स्तर पर ही लिया जाएगा। वहीं, यह भी चर्चा है कि इनमें कई अधिकारी राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत हैं। ऐसे में उनके चुनावी ड्यूटी पर जाने से विभागीय कामकाज की गति कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है।   

IAS मनु की संपत्ति सबसे बड़ी, मुख्य सचिव से 4 गुना ज्यादा; MP के 12 कलेक्टरों के पास नहीं है अपना घर

भोपाल   प्रदेश में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) मनु श्रीवास्तव एमपी में तैनात एसीएस स्तर के अफसरों में सबसे अमीर आइएएस हैं। उनके पास 19.50 करोड़ की अचल संपत्ति है। जबकि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा एसीएस अशोक बर्णवाल पगार के अलावा अपनी संपत्तियों से सबसे अधिक कमाने वाले अफसर हैं। बर्णवाल के पास 7.50 करोड़ की संपत्ति है। इससे उन्हें हर साल 23.68 लाख रुपए आय हो रही है।  MP में 391 IAS अधिकारियों में अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव सबसे अमीर हैं। उनके पास 19 करोड़ 50 लाख रुपए की संपत्ति है, जबकि मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास 4 करोड़ 15 लाख रुपए की संपत्ति है। इस तरह मनु श्रीवास्तव की संपत्ति अनुराग जैन से लगभग 4.7 गुना अधिक है। इसके अलावा प्रदेश के 55 जिलों के कलेक्टरों में से 12 जिलों के कलेक्टरों के पास न तो अपना घर है और न ही खेती की जमीन है। इन अधिकारियों ने अपनी अचल संपत्ति निल बताई है। वहीं 17 कलेक्टर ऐसे भी हैं, जिनके पास मकान और दुकान के साथ-साथ खेती की जमीन भी है। कलेक्टरों में किशोर कन्याल सबसे अमीर जिला कलेक्टरों में गुना कलेक्टर किशोर कन्याल सबसे अधिक संपत्ति वाले अधिकारी हैं। उनके पास करीब 3 करोड़ 18 लाख रुपए की संपत्ति है। उनके पास दो मकान, एक प्लॉट और कृषि भूमि है, जो भोपाल, उत्तर प्रदेश और नोएडा में स्थित है। विवेक अग्रवाल के पास सबसे अधिक जमीन केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी विवेक अग्रवाल के पास सबसे अधिक जमीन है। उनके पास भटिंडा, गंगानगर, सिरसा, मुक्तसर, पंचकुला, मुल्लानपुर, इंदौर और भोपाल में मिलाकर करीब 65 एकड़ किसान जमीन है। इसके अलावा इंदौर के अपर कलेक्टर नवजीवन पवार के पास सबसे अधिक 20 अलग-अलग प्रॉपर्टी दर्ज हैं। 16 साल में 4.5 लाख का प्लॉट घटकर 1 लाख का हुआ इन सबके बीच नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीणा का मामला अलग नजर आता है। वर्ष 2010 में उन्होंने 4.5 लाख रुपए में एक प्लॉट खरीदा था। आमतौर पर समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती है, लेकिन इस मामले में उल्टा हुआ। 4 लाख 50 हजार रुपए का वह प्लॉट अब घटकर केवल 1 लाख रुपए का रह गया है। यानी करीब 16 साल में उस प्लॉट की कीमत लगभग 4.5 गुना कम हो गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास कुल 4.14 करोड़ की संपत्ति मध्य प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया यानी प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास कुल 4.14 करोड़ कीमत की अचल संपत्ति है. हालांकि उनके पास 3 राज्यों में संपत्ति है. इसमें भोपाल के प्रेमपुरा नगर में भूखंड, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 79 लाख कीमत का एक अंडरकंस्ट्रक्शन फ्लैट, जयपुर में एक फ्लैट और शिवाजी नगर भोपाल में 2 करोड़ 72 लाख कीमत का एक मकान है। अलका उपाध्याय के पास करोड़ों की संपत्ति,नहीं दर्शाई कीमत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में सेक्रेटरी और मध्य प्रदेश कैडर की 1990 बैच की आईएएस अलका उपाध्याय के पास दिल्ली, गुडगांव और भोपाल में मकान, भूखंड हैं. गुडगांव में 2930 स्क्वायर फीट का फ्लैट, दिल्ली में 3244 स्क्वायर फीट पर निर्मित मकान, भोपाल में करीब 1 हजार स्क्वायर मीटर का प्लॉट है. इसके अलावा नर्मदापुरम जिले में 2 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जो उन्हें अपने पिता से मिली है. उन्होंने प्रॉपर्टी की मौजूदा कीमत नहीं बताई है।  अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा भी करोड़पति 1990 बैच के आईएएस अधिकारी और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा के पास भोपाल के मिंडोरी में 163.4 एकड़ कृषि भूमि है. इसकी कीमत उन्होंने 48 लाख रुपए बताई है. गुजरात के अहमदाबाद में 50 लाख रुपए कीमत का एक ऑफिस, मिंडोरी में 0.25 एकड़ भूमि इसकी कीमत 27 लाख रुपए दिखाई गई है. भोपाल के सेमरी बजाफ्त में 0.580 हेक्टेयर भूमि कीमत 28.92 लाख और मिडोरी में 0.25 एकड़ कृषि भूमि है. इसकी कीमत 20 लाख दिखाई गई है।  अशोक वर्णवाल के पास 7 करोड़ 50 लाख की संपत्ति वर्ष 1990 बैच के अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल के पास कुल अचल संपत्ति 7 करोड़ 50 लाख है. भोपाल के बिसनखेड़ी में 0.202 हेक्टेयर कृषि भूमि, झारखंड के डुमरी में 1200 स्क्वायर फीट का दो मंजिला मकान, बिसनखेड़ी में 0.202 हेक्टेयर कृषि भूमि और बावड़िया कला में फ्लैट भी है. इसके अलावा बावड़िया कला भोपाल में 2 फ्लैट हैं. इनकी कीमत 4.50 करोड़ रुपए है।  मनोज गोविल के पास 2 करोड़ 64 लाख की अचल संपत्ति 1991 बैच के आईएएस अधिकारी दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ मनोज गोविल ने कुल अचल संपत्ति 2 करोड़ 64 लाख दशाई है. भोपाल के तुलसी नगर में उनका एक फ्लैट, गुडगांव, हरियाणा में एक फ्लैट है।  अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव के पास 20 करोड़ की अचल संपत्ति 1991 बैच के नवकरर्णीय ऊर्जा में अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव का प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में पुस्तैनी 699.86 स्क्वायर मीटर का मकान है, इसकी कीमत 16 करोड़ रुपए है. इसके अलावा गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश में 3.50 करोड़ रुपए कीमत का एक प्लॉट है।  आशीष श्रीवास्तव भी करोड़पति, नहीं दर्शाई संपत्ति की कीमत 1992 बैच के आईएएस और दिल्ली में केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ आशीष श्रीवास्तव के पास भोपाल के गौंदरमऊ में 240 स्क्वायर मीटर प्लॉट और हरियाणा गुरूग्राम में 2 फ्लैट हैं. इसकी खरीद के समय कीमत 66 लाख रुपए दर्शाई गई है. अपर मुख्य सचिव कैलाश चंद्र गुप्ता के पास करोड़ों की संपत्ति 1992 बैच के आईएएस अपर मुख्य सचिव कैलाश चंद्र गुप्ता के पास जाटखेड़ी, भोपाल में 3858 स्क्वायर फीट पर निर्मित मकान, कटारा, भोपाल में 0.1़6 हेक्टेयर कृषि भूमि, गौहरगंज रायसेन में 220 स्क्वायर मीटर का प्लॉट, इंदौर में 6877 स्क्वायर फीट का प्लॉट और अरेरा कॉलोनी, भोपाल में 588 स्क्वायर मीटर पर मकान है, जिसकी खरीद के समय कीमत 3.95 करोड़ रुपए थी।  वीएल कांताराव के पास भोपाल, तमिलनाडु में करोड़ों की संपत्ति 1992 बैच के आईएएस और केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पदस्थ वीएल कांताराव का कटारा हिल्स, भोपाल में 0.75 एकड़ भूमि और कांजीपुरम, तमिलनाडु में 2500 स्क्वायर फीट का प्लॉट है।  अनिरूद्ध मुखर्जी के पास 8 करोड़ 45 लाख की संपत्ति 1993 बैच … Read more

एमपी में प्रमोशन में देरी के कारण प्रशासनिक कैडर में गड़बड़ी, 68 IAS, 48 IPS और 87 IFS पद खाली

भोपाल  मध्यप्रदेश में अखिल भारतीय सेवाओं के प्रमोशन में लगातार हो रही देरी अब प्रशासनिक ढांचे पर सीधा असर डालने लगी है। हालात यह हैं कि राज्य में आईएएस,आईपीएस और आईएफएस कैडर के कुल 203 पद खाली पड़े हैं। इससे प्रशासनिक कामकाज, कानून-व्यवस्था और वन प्रबंधन तीनों क्षेत्रों में दबाव बढ़ गया है। 3 कैडर, 203 पद खाली सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में आईएएस के 68 पद, आईपीएस के 48 पद और आईएफएस के 87 पद रिक्त हैं। इन पदों के खाली रहने से कई जिलों में स्थायी कलेक्टर, एसपी और डीएफओ की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। प्रमोटी अफसरों को नहीं मिल पा रहा पूरा मौका प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा और राज्य वन सेवा से प्रमोट होकर आने वाले अधिकारियों को सीमित अवसर मिल पा रहे हैं। कई अफसर वर्षों से प्रतीक्षा सूची में हैं, लेकिन केंद्र से समय पर स्वीकृति और कैडर रिव्यू नहीं होने से प्रमोशन अटका हुआ है। केंद्र–राज्य समन्वय की कमी सूत्रों के अनुसार, अखिल भारतीय सेवाओं में भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया केंद्र सरकार से जुड़ी होती है। कैडर स्ट्रेंथ बढ़ाने और रिक्त पद भरने के प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन लंबे समय से निर्णय नहीं हो पाया है। इसका सीधा असर राज्य के प्रशासनिक संचालन पर पड़ रहा है। जिले और विभाग अतिरिक्त प्रभार पर कई जिलों में एक ही अधिकारी के पास दो-दो या तीन-तीन जिलों का प्रभार है। वहीं, पुलिस और वन विभाग में भी वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे निर्णय प्रक्रिया धीमी हो रही है और फील्ड लेवल पर निगरानी कमजोर पड़ रही है। आने वाले समय में और बढ़ेगी चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही प्रमोशन और नई भर्ती की प्रक्रिया तेज नहीं की गई, तो आगामी वर्षों में रिटायरमेंट के चलते स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसका असर विकास कार्यों,कानून-व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण पर साफ दिखाई देगा। प्रमोशन समय पर हों तो सुधार की गुंजाइश इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग की भर्ती के अलावा राज्यों में प्रमोशन से भरने वाले पदों के जरिये इस रिक्तता को कम किया जा सकता है लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग और वन विभाग के अफसरों की लापरवाही और देरी के चलते तीनों ही कैडर की डीपीसी समय से नहीं हो रही है और इसका असर पद रिक्त होने के रूप में साफ दिख रहा है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक अनुभव की टाइम लिमिट को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है। प्रशासनिक और नीतिगत कामों पर सीधा असर अधिकारियों का मानना ​​है कि स्वीकृत पदों के न भर पाने से कई दिक्कतें होती हैं। हालांकि पद रिक्त रहने के कई संरचनात्मक कारण भी बताए जा रहे हैं। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से वार्षिक भर्ती सीमित है, जबकि हर साल सेवानिवृत्ति जारी हैं। राज्य सिविल सेवाओं से आईएएस में अधिकारियों की पदोन्नति में देरी ने भी इस अंतर को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा कई राज्यों ने भर्ती में समानुपातिक वृद्धि किए बिना अपने कैडर की संख्या बढ़ा दी है।  

गरीबी में पला-बढ़ा बेटा बना IAS अफसर, पिता की मेहनत ने बदली किस्मत

जयपुर कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, रास्ता निकल ही आता है। यह बात सच साबित करते हैं देशल दान चरण, जिन्होंने बेहद साधारण परिवार से निकलकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा पास की और आईएएस बनने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर देशल दान चरण मूल रूप से राजस्थान के सुमलाई गांव से आते हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। उनके पिता कुशल दान चरण एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। इसी दुकान की कमाई से दस लोगों का परिवार चलता था। घर की हालत ऐसी थी कि रोजमर्रा के खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता था। कई बार बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए पिता को कर्ज लेना पड़ता था। लेकिन उन्होंने कभी भी बच्चों को पढ़ाई छोड़कर काम करने के लिए मजबूर नहीं किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह रास्ता है जो गरीबी से बाहर निकाल सकता है। पिता का विश्वास बना सबसे बड़ी ताकत देशल के पिता हमेशा कहते थे कि हालात चाहे जैसे हों, पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। घर में पैसों की कमी थी, लेकिन सपनों की नहीं। यही सोच बच्चों के अंदर भी बैठ गई। कम संसाधनों में पढ़ाई करना आसान नहीं था। न अच्छे कोचिंग संस्थान, न सुविधाएं, न पढ़ाई का माहौल। लेकिन देशल ने ध्यान भटकने नहीं दिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस रखा और हर परिस्थिति को चुनौती की तरह लिया। परिवार पर टूटा बड़ा दुख, फिर भी नहीं डगमगाए जब देशल दसवीं कक्षा में थे, तब उनके परिवार पर एक बड़ा दुख आ पड़ा। उनके बड़े भाई, जो नौसेना में थे, एक पनडुब्बी दुर्घटना में शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। घर का माहौल बदल गया। दुख, जिम्मेदारियां और आर्थिक दबाव सब एक साथ आ गए। लेकिन इसी समय देशल ने ठान लिया कि अब उन्हें अपने परिवार को संभालने के लिए कुछ बड़ा करना है। उन्होंने इस दर्द को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया। इंजीनियर बनने का सपना और पहली बड़ी सफलता देशल का सपना इंजीनियर बनने का था। उन्होंने जेईई मेन परीक्षा की तैयारी शुरू की। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और पहले ही प्रयास में परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर ली। इसके बाद उन्हें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जबलपुर में दाखिला मिला। यह उनके जीवन का पहला बड़ा मोड़ था। गांव से निकलकर एक प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुंचना उनके संघर्ष का पहला फल था। यहां से बदला सोचने का नजरिया इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान देशल ने महसूस किया कि वह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं। यहीं से उनके मन में सिविल सेवा में जाने का विचार आया। उन्होंने तय किया कि अब लक्ष्य होगा देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में जाना। यह रास्ता आसान नहीं था, क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा माना जाता है। यूपीएससी की तैयारी, अनुशासन और धैर्य की परीक्षा यूपीएससी की तैयारी केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि धैर्य, मानसिक मजबूती और लगातार मेहनत की मांग करती है। देशल ने बिना किसी शोर-शराबे के, बिना दिखावे के, चुपचाप तैयारी शुरू की। उन्होंने अपनी दिनचर्या सख्त बनाई। समय का पूरा उपयोग किया। कमजोर विषयों पर ज्यादा मेहनत की और लगातार खुद को बेहतर बनाते रहे। उनकी रणनीति साफ थी, कम संसाधन हैं तो मेहनत दोगुनी करनी होगी। संघर्ष से निकली सफलता की कहानी देशल दान चरण ने यह साबित कर दिया कि सफलता किसी बड़े शहर, अमीर परिवार या महंगी कोचिंग की मोहताज नहीं होती। अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत ईमानदार हो, तो एक चाय बेचने वाले का बेटा भी आईएएस बन सकता है। उनकी कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है जो एक पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई पर रखा, और उस बेटे की जिसने उस विश्वास को सच कर दिखाया।

मध्य प्रदेश में 2026 में होगा पावर स्ट्रक्चर में बदलाव, 32 आईएएस-आईपीएस अधिकारियों की सेवानिवृत्ति

भोपाल   नया साल 2026 मध्य प्रदेश की नौकरशाही और पुलिस महकमे के लिए बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। मध्य प्रदेश कैडर के 16 आईपीएस और 16 आईएएस अधिकारी अगले वर्ष अपनी सेवाएं पूरी कर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इनमें पुलिस महानिदेशक से लेकर मुख्य सचिव, एडीजी, आईजी, कलेक्टर और संभागायुक्त स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों के बाहर जाने से शासन और पुलिस व्यवस्था में व्यापक फेरबदल तय माना जा रहा है। गृह विभाग की ओर से जारी सूची के अनुसार प्रदेश के मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाणा भी 2026 में रिटायरमेंट की सूची में शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो साल होना जरूरी है, इसी कारण उनकी रिटायरमेंट तिथि बढ़ाई गई है।  डीजी से लेकर एसपी तक खाली होंगे पद वर्तमान सूची के मुताबिक 2026 में पुलिस विभाग से डीजी रैंक के 4 अधिकारी, एडीजी के 2, आईजी के 5, डीआईजी के 3 और एसपी रैंक के 2 अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे। इससे पुलिस मुख्यालय से लेकर रेंज और जिला स्तर तक कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हो जाएंगे। इसमें डीजीपी कैलाश मकवाना, अजय कुमार शर्मा, आलोक रंजन, सोनाली मिश्रा, संजीव समी, आशुतोष राय, ए साई मनोजर, संजय तिवारी, अंशुमान सिंह, अरविंद सक्सेना, हिमानी खन्ना, मिथिलेस शुक्ला, शशिकांत शुक्ला, महेश चंद्र जैन, सविता सोहाने और जगदीश डावर शामिल हैं।    आईएएस कैडर में भी बड़ा बदलाव सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सेवा में भी 2026 अहम रहने वाला है। 16 आईएएस अधिकारी अगले साल रिटायर होंगे। इनमें सबसे बड़ा नाम मुख्य सचिव अनुराग जैन का है, जिनका कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को पूरा होगा। यदि केंद्र सरकार उन्हें दोबारा सेवा विस्तार नहीं देती है, तो राज्य को नया मुख्य सचिव चुनना पड़ेगा।  मुख्य सचिव के अलावा एसीएस स्तर की अलका उपाध्याय और आशीष श्रीवास्तव, चंबल संभाग के कमिश्नर सुरेश कुमार, शिवपुरी कलेक्टर रविंद्र चौधरी और शहडोल कलेक्टर केदार सिंह भी 2026 में रिटायरमेंट की सूची में हैं। इसके साथ ही शिक्षा, खनिज, राजस्व, आयुष और लोकायुक्त जैसे विभागों से जुड़े वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी सेवा से बाहर होंगे। यह आईएएस होंगे रिटार्यड  सितंबर में- मुख्य सचिव अनुराग जैन, अलका उपाध्याय, आशीष श्रीवास्तव, स्मिता भारद्वाज, उमाकांत उमराव, अरुणा गुप्ता, माल सिंह भयडिया, उर्मिला शुक्ला, ललित दाहिमा, सुरेश कुमार, चंद्रशेखर वालिम्बे, रविंद्र कुमार चौधरी, संजय कुमार, संजय कुमार मिश्रा, केदार सिंह और जीएस धुर्वे शामिल हैं।     

मध्य प्रदेश के IAS अधिकारियों को मोदी सरकार में नई जिम्मेदारी, दो अफसरों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

भोपाल   मध्य प्रदेश कैडर के प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जलवा बरकरार है। नए साल की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय नियुक्ति समिति की मंजूरी के बाद जारी इस सूची में मध्य प्रदेश कैडर के दो वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इनका हुआ प्रमोशन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार केरालिन खोंगवार देशमुख (IAS, 1996 बैच) को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद से स्थानांतरित कर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। वहीं, असित गोपाल (IFS, 1990 बैच) को टेक्सटाइल मंत्रालय में पदोन्नति दी गई है। अब वे अतिरिक्त सचिव के बजाय विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे। दिल्ली में एमपी कैडर का दबदबा मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी अपनी कार्यकुशलता के कारण केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर हमेशा प्राथमिकता पाते रहे हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड और विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की स्थिति कुछ इस प्रकार है। केंद्र में एमपी से तीन दर्जन अधिकारी वहीं, मध्य प्रदेश कैडर के करीब 35 से 40 आईएएस अधिकारी वर्तमान में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सचिव, अतिरिक्त सचिव, संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर पर तैनात हैं। इनमें से कई अधिकारी पीएमओ और नीति आयोग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में सक्रिय हैं। आईपीएस अधिकारियों का भी दबदबा एमपी कैडर के लगभग 25 से 30 आईपीएस अधिकारी केंद्रीय एजेंसियों जैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), सीबीआई (CBI), बीएसएफ (BSF) और सीआरपीएफ (CRPF) में प्रतिनियुक्ति पर हैं। कई अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) कार्यालय से भी जुड़े रहे हैं। भारतीय वन सेवा के अधिकारी भी वन क्षेत्र में मध्य प्रदेश के समृद्ध अनुभव को देखते हुए केंद्र में 10 से 12 आईएफएस अधिकारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ-साथ अन्य मंत्रालयों में वित्तीय सलाहकार और सचिव स्तर के पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। इसलिए चुना जाता है MP विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक क्षमता और मध्य प्रदेश की भौगोलिक-सामाजिक परिस्थितियों के अनुभव के कारण इन अफसरों को केंद्र में नीति निर्धारण और वित्तीय प्रबंधन जैसे संवेदनशील कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है।  

नए साल पर मध्य प्रदेश में करीब 200 अधिकारियों को प्रमोशन, मोहन यादव सरकार का तोहफा

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 200 से ज्यादा आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को नए साल का गिफ्ट दिया है. इन सभी अधिकारियों को प्रमोशन दिया गया है. देर रात राज्य सरकार ने प्रमोशन आदेश जारी कर दिए. प्रमोशन किए गए आईएएस अधिकारियों में उप सचिव, अपर सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी मुख्य रूप से शामिल हैं. इसी तरह 18 आईपीएस अफसरों का भी प्रमोशन किया गया है. इन अधिकारियों को एडीजी से स्पेशल डीजी पद पर पदोन्नति दी गई है. इन IAS अधिकारियों का हुआ प्रमोशन सामान्य प्रशासन विभाग कार्मिक में सचिव पद पर पदस्थ एम सेलवेन्द्रन को प्रमोशन देकर उन्हें प्रमुख सचिव बनाया गया है. हालांकि उनका विभाग नहीं बदला गया है. उधर मध्य प्रदेश कैडर के वर्ष 2010 बैच के आईएएस अधिकारियों को सुपर टाइम स्केल (पे मेट्रिक-14) में प्रमोशन देकर उन्हें सचिव बनाया गया है. प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों में मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर में प्रबंध संचालक अनय द्विवेदी, भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी, खाद्य, नागरिक आपूर्ति के कमिश्नर कर्मवीर शर्मा और कोष एवं लेखा विभाग के कमिश्नर भास्कर लक्षकार हैं. उज्जैन संभाग के कमिश्नर आशीष सिंह, आबकारी आयुक्त अभितीज अग्रवाल, पंचायत संचालक छोटे सिंह, स्वास्थ्य एवं नियंत्रण खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश श्रीवास्तव, राजस्व मंडल ग्वालियर सचिव सपना निगम का भी प्रमोशन किया गया है. 2010 बैच के अधिकारी और आयुक्त जनसंपर्क दीपक कुमार सक्सेना, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरएस जादोन का भी प्रमोशन किया गया है. इन अधिकारियों का बदला विभाग उधर राज्य सरकार ने पदोन्नति के बाद राजस्व विभाग में अपर सचिव संजय कुमार को सचिव मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल एवं कल्याण आयुक्त बनाया है. श्रम विभाग में अपर सचिव बसंत कुर्रे को सह संचालक कौशल विकास बनाया गया है. सुरेश कुमार को संभाग आयुक्त चंबल संभाग मुरैना बनाया गया. चंद्रशेखर वालिबे को सचिव मुख्यमंत्री, शीलेंद्र सिंह को सचिव नगरीय विकास एवं अवास विभाग बनाए गए हैं. आईपीएस अधिकारियों का भी हुआ प्रमोशन उधर आईपीएस अधिकारियों का भी प्रमोशन किया गया है. 1994 बैच के अधिकारी एडीजी अजाक आशुतोष राय को प्रमोशन देकर विशेष पुलिस महानिदेशक (अजाक) बनाया गया. 2001 बैच के आईजी जबलपुर प्रमोद वर्मा को प्रमोशन देकर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जबलपुर जोन बनाया गया. 1999 और 2008 बैच के अधिकारियों को पुलिस महानिरीक्षक (वेतन मैट्रिक्स-14) के पद पर प्रमोशन किया गया है, जिसमें आईजी साइबर निरंजन बी. वायंगणकर, पुलिस मुख्यालय, पुलिस महानिरीक्षक, साइबर, पुलिस मुख्यालय सियाज ए, पुलिस महानिरीक्षक, शिकायत एवं मानव अधिकार ललित शाक्यवार को प्रमोट किया गया है. एसपी राकेश सगर, राघवेन्द्र सिंह बेलवंशी, किरणलता केरकेट्टा, रियाज इकबाल, असित यादव, कुमार प्रतीक, शिवदयाल को प्रमोशन देकर आईजी बनाया गया है. डीआईजी के पद पर पदोन्नति एसपी खंडवा मनोज कुमार राय, रेल एसपी भोपाल राहुल कुमार लोढ़ा, रेल एसपी जबलपुर सिमाला प्रसाद, धार एसपी मयंक अवस्थी और भोपाल डीसीपी विवेक सिंह को डीआईजी बनाया गया. इसी तरह प्रवर श्रेणी 2012 और 2013 बैच के 11 अधिकारियों को वेतन मैट्रिक्स-13 में स्वीकृत किया गया है. इसमें एसपी बड़वानी जगदीश डाबर और टीकमगढ़ एसपी मनोहर सिंह मण्डलोई शामिल हैं.

मध्य प्रदेश के 32 प्रमुख प्रशासनिक चेहरे 2026 में होंगे रिटायर, मुख्य सचिव और डीजीपी समेत कई IAS-IPS के नाम

भोपाल  मध्य प्रदेश प्रशासनिक गलियारे के लिए साल 2026 बड़े बदलावों वाला साबित होने वाला है। प्रदेश कैडर के 16 आईएएस और 16 आईपीएस अधिकारी अगले साल सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इन प्रमुख नामों में प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन भी शामिल हैं, जो सितंबर 2026 में रिटायर होंगे। उन्हें दोबारा विस्तार नहीं मिला, तो सरकार को नए प्रशासनिक मुखिया की नियुक्ति करनी होगी। पदों के लिए मचेगी होड़ इतनी बड़ी संख्या में सीनियर अधिकारियों के रिटायर होने से सरकार के सामने एडीजी इंटेलिजेंस, आईजी लॉ एंड ऑर्डर और माध्यमिक शिक्षा मंडल जैसे अहम पदों के लिए नए चेहरों की तलाश की चुनौती होगी। साथ ही, मुख्य सचिव अनुराग जैन को यदि दोबारा विस्तार नहीं मिला, तो प्रशासनिक मुखिया का पद भी खाली हो जाएगा। गौरतलब है कि साल 2025 में भी 29 अधिकारी रिटायर हुए थे, जिनमें से मुख्य सचिव और डीजीपी को विशेष सेवा वृद्धि (एक्सटेंशन) दी गई थी। यह आईएएस हैं शामिल 16 वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अपनी सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। मार्च 2026 में माध्यमिक शिक्षा मंडल की चेयरमैन स्मिता भारद्वाज, अप्रैल में राजस्व विभाग के अपर सचिव संजय कुमार, मई में केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय, जून के महीने में एमपी खादी ग्राम उद्योग बोर्ड के एमडी माल सिंह भयड़िया, अगस्त में खनिज साधन विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव और बालाघाट के अपर कलेक्टर जी.एस. धुर्वे, सितंबर में मुख्य सचिव अनुराग जैन और चंबल संभाग के कमिश्नर सुरेश कुमार रिटायर हो रहे हैं। अक्तूबर से दिसंबर तक ये IAS रिटायर होंगे अक्टूबर माह में लोकायुक्त संगठन की सचिव अरुणा गुप्ता और गृह मंत्रालय में पदस्थ आशीष श्रीवास्तव, नवंबर में राजस्व विभाग के अपर सचिव चंद्रशेखर वालिम्बे, कलेक्टर—शिवपुरी के रविंद्र कुमार चौधरी और शहडोल के केदार सिंह, दिसंबर 2026 में राजस्व मंडल के सचिव ललित दाहिमा और आयुष विभाग के अपर सचिव संजय कुमार मिश्रा, आर्कियोलॉजी विभाग की कमिश्नर उर्मिला शुक्ला भी इसी वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों की सूची में शामिल हैं। रिटायर होने वाले आईपीएस की लिस्ट जनवरी: जगदीश डावर (एसपी, बड़वानी) फरवरी: अंशुमान सिंह (आईजी, लॉ एंड ऑर्डर) मार्च: हिमानी खन्ना (आईजी, सागर रेंज) अप्रैल: सविता सोहाने (डीआईजी, शहडोल) मई: महेश चंद्र जैन (डीआईजी, नारकोटिक्स, इंदौर) जून: संजीव शमी (स्पेशल डीजी, टेलीकॉम) और संजय तिवारी (आईजी, प्लानिंग) जुलाई: आलोक रंजन (डायरेक्टर, एनसीआरबी), अरविंद सक्सेना (आईजी, ग्वालियर रेंज) और शशिकांत शुक्ला (आईजी, एफएसएल) अगस्त: अजय कुमार शर्मा (चेयरमैन, पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन), आशुतोष राय (एडीजी, आजाक पीएचक्यू), ए. साई मनोहर (एडीजी, इंटेलिजेंस) और मिथलेश शुक्ला (आईजी, नर्मदापुरम) अक्टूबर: सोनाली मिश्रा (डीजी, रेलवे पुलिस बोर्ड) दिसंबर: कैलाश मकवाना (डीजीपी)