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Bhopal Administration सख्त, 15 दिन में देना होगा परमिशन का रिकॉर्ड; 576 अवैध कॉलोनियां निशाने पर

भोपाल भोपाल प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. कोलार इलाके की 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें उन्हें 15 दिनों के भीतर संबंधित अनुमति दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है. पूरे शहर में कुल 576 अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई है, और उनसे जुड़े मामलों के संबंध में अब तक 300 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. कॉलोनी सेल की एक बैठक के दौरान, सभी ज़ोनल अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करें, जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।  हालांकि पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। शहर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गईं और बड़ी संख्या में एफआईआर भी दर्ज हुईं, लेकिन किसी भी मामले में कार्रवाई अंतिम परिणाम तक नहीं पहुंच सकी। आंकड़ों में सख्ती, जमीनी स्तर पर असर नहीं प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों के तहत राहत देते हुए वैधीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया गया। बाकी कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। 300 एफआईआर दर्ज, फिर भी नहीं हुई गिरफ्तारी अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई जगहों पर केवल औपचारिक कार्रवाई के तहत बाउंड्रीवाल या निर्माण के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में विकास कार्य लगातार जारी रहे। आंकड़ों में बड़ी कार्रवाई, जमीन पर नतीजे शून्य प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों में छूट देकर वैध करने की प्रक्रिया शुरू की गई। शेष कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणाएं तो हुईं, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। 300 एफआईआर दर्ज, गिरफ्तारी एक भी नहीं अवैध कॉलोनियों के मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई स्थानों पर केवल प्रतीकात्मक तौर पर बाउंड्रीवाल या निर्माण का हिस्सा तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में गतिविधियां जारी रहीं। कोलार की इन 15 कॉलोनियों पर कार्रवाई नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र में 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा क्षेत्र की कई निर्माणाधीन कॉलोनियां शामिल हैं। संबंधित कॉलोनाइजरों से स्वीकृत नक्शे, डायवर्जन और अन्य वैधानिक अनुमतियों के दस्तावेज मांगे गए हैं। फिर शुरू हुआ नोटिस अभियान 1 जून को हुई कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध निर्माण या बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। कोलार क्षेत्र की 15 कॉलोनियां जांच के दायरे में नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र के रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा सहित विभिन्न इलाकों में विकसित हो रही 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। कॉलोनाइजरों से सभी आवश्यक वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। इन कॉलोनाइ्रजर्स को नगर निगम का नोटिस मनीष शर्मा (चित्रांश ग्रुप, ग्राम रतनपुर), खान, (राधापुरम, ग्राम बैरागढ़ चीचली), दूलीचंद यादव (माइल स्टोन स्कूल के पास, ग्राम अकबरपुर), संजय राठौर, (ऐन्जल होम्स कान्हाकुंज के पास, ग्राम अकबरपुर), घनश्याम पाटीदार (ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन पलिया, (हेवेन्स पार्क, ग्राम बैरागढ़ चीचली),चंदप्रताप सिंह, (कुसुमा विहार, ग्राम बैरागढ़ चीचली), राघवेंद्र सिंह (ग्राम बैरागढ़ चीचली), दीपक शर्मा, (हिल्स व्यू सिटी, ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन मारन (दुर्गा विहार कॉलोनी, नयापुरा कोलार रोड), दिनेश पाल (व्यंकटेश्वर धाम, नयापुरा कोलार), रमेश मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), गोविंद मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), अशोक पवार (ग्राम बैरागढ़ चीचली) और अशोक मीणा (सांई रेसीडेन्सी, ग्राम बैरागढ़ चीचली) बाहरी दीवारें गिराकर खानापूर्ति रिकॉर्ड बताते हैं कि अवैध कॉलोनियों पर अब तक 300 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद एक भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई और किसी भी मामले में अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कुछ स्थानों पर दीवारें गिराकर खानापूर्ति की गई। सिटी प्लानर अनिल साहनी के अनुसार 1 जून को हुई 10 सदस्यीय कॉलोनी सेल की बैठक के बाद 15 नए नोटिस जारी किए गए हैं। सेल में जिला प्रशासन, नगर निगम, टीएंडसीपी, सहकारिता और भू-संसाधन प्रबंधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। जोन अधिकारी बना रहे कार्रवाई की सूची सभी जोन अधिकारियों को अवैध कॉलोनियों की लिस्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार के निर्माण की सूचना मिलने या संदिग्ध पाए जाने पर उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। – नीरज आनंद लिखार, ग्राम तथा नगर निवेश सभी ज़ोन को मिले जांच और नई सूची बनाने के निर्देश कॉलोनी सेल की बैठक में अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा कि आम जनता की गाढ़ी कमाई को ठगने वाले भू-माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। सभी जोन के अधिकारियों को अपने इलाकों में सक्रिय अवैध कॉलोनियों की पूरी जांच करने और उनकी सूची अपडेट करने को कहा गया है। इसके साथ ही आम लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे किसी भी नई कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीदने से पहले नगर निगम या रेरा (RERA) से उसके वैध होने की जांच जरूर कर लें। फिर शुरू हुआ अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान 1 जून को आयोजित कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों और संदिग्ध निर्माण गतिविधियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

मध्यप्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई, शहर और गांव में खत्म होगा भेदभाव, समान नियम होंगे लागू

 भोपाल  मध्यप्रदेश में अब शहर और गांव की कॉलोनियों में कोई भेदभाव नहीं होगा, जिनमें एक समान नियम लागू होंगे। नगरीय सीमा से 16 किलोमीटर का क्षेत्र मध्यप्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम-2026 में शामिल होगा। इससे पंचायतों में भी वही नियम लागू होंगे, जो अभी नगरीय निकायों में होते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में कटने वाली अवैध कॉलोनियों पर रोक लग सकेगी। पांच साल की तय अवधि में कॉलोनी विकसित होने के बाद 45 दिन में कार्यपूर्ति प्रमाण-पत्र मिल जाएगा, जिससे डीम्ड परमिशन (स्वत: मंजूर) की व्यवस्था लागू मानी जाएगी। यह जानकारी भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय शहरी प्रबंधन संस्थान में आयोजित दो दिवसीय प्रदेश के नगरीय निकायों के सेमिनार में अधिकारियों ने दी है। उन्होंने साफ किया है कि नया कानून लागू होते ही अवैध कॉलोनाइजरों पर सख्ती शुरू हो जाएगी। नए प्रावधान में सजा भी शामिल जानकारी के अनुसार नए प्रविधान के तहत अवैध कॉलोनी काटने वाले अब आसानी से नहीं बच पाएंगे। इसके तहत सजा को सात साल से बढ़ाकर 10 साल तक की कैद और दो करोड़ रुपये तक जुर्माना करने की तैयारी है। नया कानून लागू होते ही 10 लाख जुर्माना भरकर बचने वाले बिल्डरों के लिए रास्ता बंद हो जाएगा और दो करोड़ की मोटी राशि जमा करनी होगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई तय समयसीमा में की जाएगी। इस नियम के तहत अवैध कॉलोनी का पता चलने पर तीन चरणों में प्रशासन कार्रवाई करेगा। इसमें पहला 15 दिन के अंदर नोटिस जारी होगा और संबंधित को खुद निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन अगले 15 दिन में खुद अतिक्रमण हटाएगा और जमीन जब्त कर लेगा। शहर व गांव के लिए मिलेगा एक ही लाइसेंस नये कानून में ईमानदार बिल्डरों को राहत देने की तैयारी है। एक ही लाइसेंस से शहर और गांव दोनों में कालोनी विकसित की जा सकेगी। पांच साल में विकास पूरा होने पर 45 दिन में कंप्लीशन सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा। देरी होने पर स्वत: अनुमति लागू मानी जाएगी। प्रशासनिक अधिकारों में भी बड़ा बदलाव होगा। नगर निगम क्षेत्रों में आयुक्त और अन्य क्षेत्रों में कलेक्टर को सीधे कार्रवाई का अधिकार मिलेगा। जरूरत पड़ने पर एसडीएम को भी अधिकृत किया जा सकेगा। दावा है कि इस कानून के बाद अवैध कालोनियों का नेटवर्क तोड़ा जाएगा और जवाबदेही तय होगी। इनका कहना है     दो दिवसीय प्रशिक्षण में मध्यप्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम 2026 को लेकर चर्चा हुई है। जिस पर अभी शासन स्तर पर विचार किया जा रहा है, जैसे निर्देश मिलेंगे उसके आधार पर कार्य किया जाएगा- संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग।