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टेंपल मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत, मंत्री ने कहा—धार्मिक संस्थानों में मिलेगी उपयोगी ट्रेनिंग

भोपाल मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और आस्था के बढ़ते दायरे के बीच अब मंदिरों की व्यवस्थाओं को प्रोफेशनल तरीके से संचालित करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार पहली बार एमबीए पाठ्यक्रम के तहत टेंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू करने जा रही है। इसकी शुरुआत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि प्रदेश के बड़े धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए अब प्रशिक्षित और प्रोफेशनल मैनेजमेंट की जरूरत महसूस की जा रही है।  मंदिरों में तेजी से बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या मंत्री ने कहा कि महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर, ओरछा और प्रदेश के दूसरे बड़े धार्मिक स्थलों पर हर दिन हजारों से लेकर लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पहले जहां विशेष पर्व, शिवरात्रि या सावन जैसे मौकों पर ही भारी भीड़ दिखाई देती थी, वहीं अब हर शनिवार-रविवार और छुट्टियों में भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उज्जैन में अब सामान्य दिनों में भी एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सुविधाओं को व्यवस्थित रखना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। क्या पढ़ाया जाएगा टेंपल मैनेजमेंट कोर्स में? इस नए कोर्स में सिर्फ धार्मिक पहलुओं पर नहीं बल्कि आधुनिक मैनेजमेंट सिस्टम पर फोकस किया जाएगा। छात्रों को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग सिस्टम, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिरों में चढ़ने वाले फूल-माला, नारियल और अन्य पूजन सामग्री के उपयोग और डिस्पोजल की वैज्ञानिक व्यवस्था पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। धार्मिक स्थलों की आंतरिक व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। चर्च और मस्जिद में भी काम आएगा यह मैनेजमेंट इंदर सिंह परमार ने साफ कहा कि यह कोर्स केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट के सिद्धांत हर जगह एक जैसे होते हैं। जो छात्र यहां प्रशिक्षण लेंगे, वे चर्च, मस्जिद और अन्य धार्मिक या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी बेहतर तरीके से व्यवस्थाएं संभाल सकेंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसकी शुरुआत मंदिरों से इसलिए की है क्योंकि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहले उज्जैन में पायलट प्रोजेक्ट, फिर दूसरे विश्वविद्यालयों में  सरकार फिलहाल इस कोर्स को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उज्जैन में शुरू करेगी। इसके बाद छात्रों की रुचि, एडमिशन और परिणामों को देखकर आगे का फैसला लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अगले साल इसे इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में भी शुरू करने की कोशिश की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बाद में जबलपुर समेत अन्य विश्वविद्यालयों में भी यह कोर्स लागू किया जा सकता है। युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर सरकार का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशिक्षित मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित लोगों के आने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, मंदिरों की व्यवस्थाएं ज्यादा प्रोफेशनल होंगी और धार्मिक स्थलों का संचालन अधिक संवेदनशील और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। विपक्ष के सवालों पर मंत्री का जवाब विपक्ष द्वारा इस कोर्स को राजनीति और धर्म से जोड़ने पर मंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह व्यवस्थाओं और मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों पर बेहतर प्रबंधन और श्रद्धालुओं को सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसे राजनीति के नजरिए से देख रहे हैं, वे इसकी वास्तविक जरूरत को समझ नहीं पा रहे हैं। सरकार समय की मांग के अनुसार धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रही है।  

मध्यप्रदेश पारदर्शी तरीके से हितलाभ राशि अंतरण में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल

हितग्राहियों को पारदर्शी तरीके से हितलाभ राशि अंतरण के मामले में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में है शामिल प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में हुई जिला विकास सलाहकार समिति की प्रथम बैठक जिले को कुपोषणमुक्त बनाने सहित समयावधि में योजनाओं का लाभ एवं विकास कार्यों की पूर्णता सुनिश्चित करने के दिए गए निर्देश भोपाल जिले को कुपोषणमुक्त बनाने के उद्देश्य से विभागीय कार्यक्रम व गतिविधियों के क्रियान्वयन के साथ सामाजिक उत्तदायित्व भी आवश्यक है। गरीब व पात्र हितग्राहियों के हक का पैसा पारदर्शी तरीके से सीधे बैंक खाते में पहुंचाने वाले प्रदेशों की श्रेणी में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। जिले के सर्वांगीण विकास के लिए सर्वसमाज की सहभागिता जरूरी है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री तथा पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार ने शनिवार को कलेक्टर कार्यालय के सभागार में संपन्न हुई जिला विकास सलाहकार समिति की प्रथम बैठक में कहीं। इस समिति का गठन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में किया गया है। जिले के प्रभारी मंत्री बतौर उपाध्यक्ष समिति में शामिल हैं। बैठक में प्रभारी मंत्री परमार ने विभागवार क्रियान्वित योजनाओं के प्रगति की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा में शासन की योजनाओं का लक्ष्य पूर्ण करने तथा विकास कार्यों की पूर्णता के लिए निर्देशित किया गया। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों से समिति में शामिल सदस्यों के आवश्यक सुझाव प्राप्त कर आगामी कार्ययोजना व समग्र विकास के रूपरेखा पर चर्चा की गई। बैठक में 12.65 करोड़ राशि से डायमण्ड पार्क तथा 20 करोड़ लागत राशि से बनने वाले डायमण्ड म्यूजियम के एक स्थल पर लगभग 32 एकड़ भूमि पर निर्माण के संबंध में सर्वसम्मति एवं सहमति से महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किया गया। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री ने दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत पोषण से भरपूर कल्दा महुआ लड्डू एवं शहद के लोगो का विमोचन किया। प्रभारी मंत्री ने बैठक के अवसर पर प्रदेश सरकार की दो वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में सबसे पहले बड़ा कदम उठाते हुए लाड़ली लक्ष्मी योजना की शुरूआत की। इस योजना के जरिए बेटियों की शिक्षा और भविष्य के स्वावलंबन की नींव रखी गई। प्रदेश सहित जिले में लाड़ली बहना योजना के माध्यम से भी बड़ी संख्या में महिलाएं लाभांवित हो रही हैं। इसी तरह सामाजिक न्याय विभाग की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में बेटियों को 49 हजार रूपए की राशि हस्तांतरित की जा रही है। जिले में टिकुरिहा, जिगदहा और लक्ष्मीपुर में नवीन विद्युत सब स्टेशन स्वीकृत हुए हैं। किसानों को निर्बाध रूप से 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराना और विद्युतविहीन कुछ राजस्व ग्राम व मजरा टोला में विद्युतीकरण का भी लक्ष्य है। बैठक में खनिज मद की स्थिति सहित शिक्षा विभाग के छात्रवृत्ति वितरण, बालिका छात्रावासों की स्थिति, साईकिल व गणवेश वितरण, सांदीपनि विद्यालय के गुणवत्तापूर्ण भवन निर्माण सहित शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास तथा स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं के विकास के बारे में जानकारी लेकर जरूरी निर्देश दिए गए। प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में हो चिकित्सक की तैनाती प्रभारी मंत्री ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यकता मुताबिक बांड चिकित्सकों की पदस्थापना के संबंध में भी निर्देश दिए। इस दौरान अवगत कराया गया कि ग्राम जनवार में पीपीपी मोड पर बनने वाले चिकित्सा महाविद्यालय की भूमि का सीमांकन 18 दिसम्बर को कराया जाएगा। वर्तमान जिला अस्पताल के 300 बेड के अलावा मेडिकल कॉलेज की निर्माण संस्था द्वारा पृथक से भी 200 बिस्तर की स्थापना की जाएगी। आगामी दिवस में मुख्यमंत्री द्वारा भूमिपूजन उपरांत निर्बाध रूप से चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण शुरू हो जाएगा। प्रभारी मंत्री ने स्वास्थ्य केन्द्रों में रिक्त पदों की जानकारी लेकर सभी स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से मुख्यालय पर निवास करने, 108 एम्बुलेंस सेवा को बेहतर बनाने, अस्पताल संचालन समय में चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक सहित आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों के वेतन भुगतान मामले पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निजी एजेंसी द्वारा राशि के एवज में कर्मचारियों की नियुक्ति के मामले की विधिवत जांच कर लापरवाही प्रमाणित पाए जाने पर कंपनी के विरूद्ध कार्रवाई करें। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा आउटसोर्स कर्मियों पर अपना नियंत्रण रखा जाए। इन कर्मचारियों के कार्यों का मूल्यांकन एजंेसी पर न छोड़ा जाए, बल्कि अपने स्तर पर स्वयं कार्यों का आकलन करें। इस दौरान अस्पताल एवं स्वास्थ्य केन्द्रों में उपकरणों के क्रय के बाद नियमित रूप से इनके संचालन की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया। नल जल परियोजनाओं की एनओसी के लिए जपं सीईओ को करें अधिकृत बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं जल जीवन मिशन अंतर्गत ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए जिले में संचालित परियोजनाओं के कार्यों की समीक्षा भी हुई। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री द्वारा समयबद्ध रूप से परियोजना का कार्य पूर्ण करने तथा कार्यपूर्णता पर एनओसी के लिए जनपद पंचायत सीईओ को अधिकृत करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी नल जल योजनाओं के सफल संचालन के लिए सही व उचित जल स्त्रोत का चिन्हांकन आवश्यक है। पन्ना विधायक द्वारा अजयगढ़ क्षेत्र में गुणवत्ताहीन पाइपलाइन बिछाने तथा सड़क मरम्मत कार्य में लापरवाही बरतने संबंधी जानकारी से अवगत कराने पर प्रभारी मंत्री द्वारा तत्काल समिति का गठन कर जांच के लिए निर्देशित किया गया। उर्वरक वितरण व्यवस्था की समीक्षा के दौरान यूरिया एवं डीएपी खाद की पन्ना जिले के लिए पृथक रैक की उपलब्धता, धरमपुर में वितरण केन्द्र बनाने तथा किसानों को सोलर पम्प जैसी स्कीम से लाभांवित करने के निर्देश भी दिए गए। प्रभारी मंत्री ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक एवं आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने तथा कीटनाशक व खाद के सीमित उपयोग के लिए किसानों को जागरूक किया जाए। अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के लिए संचालित योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन तथा विद्यार्थियों के शत प्रतिशत छात्रवृत्ति प्रकरणों के निराकरण सहित केन-बेतवा लिंक परियोजना से छूटे जिले के शेष ग्रामों में भी कृषि सिंचाई के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। प्रत्येक मजरे टोले तक सड़क निर्माण तथा पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में माइनिंग ब्रांच के संचालन तथा प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में उच्च शिक्षा के नवीन … Read more

रोजगार की दृष्टि से जापानी एवं जर्मनी भाषा सिखाने के लिए बनाएं कार्ययोजना: मंत्री परमार

उद्योगजगत की जरूरत और भारतीय ज्ञान परम्परा समावेशी पाठ्यक्रम का निर्माण करें : मंत्री परमार रोजगार की दृष्टि से जापानी एवं जर्मनी भाषा सिखाने के लिए बनाएं कार्ययोजना: मंत्री परमार तकनीकी शिक्षा मंत्री परमार ने विभागीय गतिविधियों एवं कार्यों की समीक्षा की भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने मंगलवार को मंत्रालय में तकनीकी शिक्षा विभाग की बैठक में विविध विभागीय गतिविधियों एवं कार्यों के क्रियान्वयन एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। तकनीकी शिक्षा मंत्री परमार ने निर्माण कार्यों एवं एसएफसी उपरांत स्वीकृत कार्यों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सेवा भर्ती नियम-2004 के अंतर्गत नियुक्त उच्च पदों पर पूर्व से कार्यरत शिक्षकों के पेंशन प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने शासकीय तकनीकी शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता नियमों का पुनरावलोकन कर समसामयिक बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के झाबुआ स्थित परिसर में संचालित यूआईटी (यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) के लिए यथावत सतत् संचालन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को भी कहा। उन्होंने तकनीकी शिक्षण संस्थानों में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के मापदंडों के अनुरूप शैक्षणिक पदों की भर्ती एवं प्रयोगशालाओं आदि के लिए आवश्यक मानव संसाधन की पूर्ति शीघ्र करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने उद्योग जगत की आवश्यकता अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण के लिए क्षेत्रीय आवश्यकताओं एवं मांगों के व्यापक अध्ययन के साथ क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परम्परा के समावेश के लिए आवश्यक क्रियान्यवन करने को कहा। मंत्री परमार ने तकनीकी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को जापानी एवं जर्मनी भाषा सिखाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। इससे विद्यार्थियों को वहां रोजगार के अवसरों के अनुरूप संवाद में भाषाई सहजता प्राप्त हो सकेगी और देशों के मध्य सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे। बैठक में तकनीकी शिक्षण संस्थानों में आईआईटी की तर्ज पर एमपीआईटी की स्थापना, कोडिंग लैब्स, डिजिटल यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की प्रगति, संस्थानों में शोध, अनुसंधान एवं पेटेंट की अद्यतन स्थिति, संस्थानों में तकनीकी शब्दकोश की उपलब्धता, संस्थान परिसरों में विद्यावन स्थापना की प्रगति, शुजालपुर में आरजीपीवी अंतर्गत यूआईटी की स्थापना, इनोवेट एमपी की दृष्टि से सृजन कार्यक्रम की अद्यतन स्थिति सहित विभिन्न विभागीय विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा मनीष सिंह एवं आयुक्त तकनीकी शिक्षा अवधेश शर्मा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

उच्च शिक्षा विभाग का फैसला: प्रदेश के विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं के विशेष पाठ्यक्रम शुरू

भोपाल  महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भाषाई विवाद चर्चा का विषय है. भाषा को लेकर पैदा हो रहे तनाव और सामाजिक असंतुलन को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने एक बड़ी पहल की घोषणा की है. प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें भारतीय भाषाओं से जुड़े विशेष कोर्स भी शामिल किए जाएंगे. इसके जरिए न सिर्फ छात्रों को नई भाषाओं का ज्ञान मिलेगा, बल्कि देश की विविधता में एकता का संदेश भी जाएगा.  मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा, ''मध्य प्रदेश अब भाषाई एकता का केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का युवा देश के किसी भी राज्य या क्षेत्र में जाए तो वहां के निवासियों से सहजता और आत्मीयता से संवाद कर सके. भारत में कुल 12 राष्ट्रीय और 22 क्षेत्रीय भाषाएं हैं. इनमें से 12 से 15 भाषाओं को विश्वविद्यालयों में पढ़ाने की प्रक्रिया इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू कर दी जाएगी.'' मंत्री का कहना है कि भाषा के आधार पर उत्पन्न संघर्षों को रोकने और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इसके साथ ही एमपी देश में एक आदर्श के रूप में उभरकर अन्य राज्यों के लिए मार्गदर्शक बनेगा. सरकारी पहल का उद्देश्य इस योजना के पीछे सरकार की मंशा स्पष्ट है– भारतीय विविधता को सम्मान देना और संवाद की भाषा के रूप में भाषा को जोड़ने का माध्यम बनाना. प्रदेश में ऐसे युवाओं की बड़ी संख्या है जो नौकरी, व्यवसाय या शिक्षा के लिए अन्य राज्यों में जाना चाहते हैं, लेकिन भाषा की बाधा के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इस पहल के माध्यम से प्रदेश के छात्र न सिर्फ अपनी मातृभाषा में पढ़ाई कर सकेंगे बल्कि अन्य राज्यों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं से परिचित होंगे. इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि आपसी विश्वास और संवाद भी मजबूत होगा. विपक्ष का विरोध हालांकि, इस योजना का विरोध भी शुरू हो गया है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह योजना केवल चुनावी लाभ के लिए लाई गई है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में दूसरी भाषाओं को पढ़ाने से व्यावहारिक लाभ नहीं होगा. उनका आरोप है कि इससे छात्रों को वास्तविक फायदा नहीं मिलेगा और यह योजना केवल प्रचार का हिस्सा है. कांग्रेस का यह भी कहना है कि पहले से चल रही हिंदी माध्यम की योजनाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ा, ऐसे में नई योजना भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी.

उच्च शिक्षा मंत्री परमार की बैठक में विभागीय समीक्षा, सुधार के लिए दिए अहम निर्देश

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने मंत्रालय में, उच्च शिक्षा विभाग के विभिन्न विभागीय विषयों एवं गतिविधियों की समीक्षा की। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में लंबित विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के निलंबन से संबंधित गंभीर एवं अनावश्यक रूप से लंबित विभागीय प्रकरणों को, सामान्य प्रशासन के नियमानुरूप समय पर निराकृत करने के निर्देश भी दिए। परमार ने जनभागीदारी समिति के नियमों का पुनर्वलोकन कर, वर्तमान परिदृश्य अनुरूप समसामयिक बनाने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। मंत्री परमार ने सार्थक ऐप पर अनुचित रूप से फर्जी उपस्थिति दर्ज करने वाले प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी और अतिथि विद्वानों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। परमार ने क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक कार्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करने को कहा। परमार ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने की दृष्टि से, महाविद्यालयों में एकल संकाय को बहुसंकाय में उन्नयन करने की कार्यवाही को यथाशीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन एवं आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।