samacharsecretary.com

भारत में कर्ज़ का भार: ये 10 राज्य सबसे ज्यादा ऋणग्रस्त, पंजाब और पश्चिम बंगाल शामिल

नई दिल्ली भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की रफ्तार तेज है और ये दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. वर्ल्ड बैंक से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तक ने इसका लोहा माना है. लेकिन तेजी से बढ़ते देश में, क्या आप जानते हैं कि कौन से राज्य सबसे ज्यादा कर्ज में डूबे हुए हैं? तो भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर नजर डाल लें, जिनसे पता चलता है कि कई बड़े राज्यों को कर्ज के बोझ तले दबकर अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा इनके ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ता है.  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के FY2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि कई बड़े राज्यों में कर्ज के ब्याज का भुगतान उसके अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42% तक हिस्सा ले लेता है. इस तगड़े ब्याज भुगतान की वजह से इन राज्यों के पास सड़क, स्कूल, हेल्थ सर्विसेज और नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने के लिए पैसों की कमी हो जाती है. कर्ज की मार झेल रहे भारत के 10 टॉप राज्यों के बारे में बात करें, तो… पश्चिम बंगाल वित्त वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल पर ब्याज भुगतान का बोझ अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था. राज्य को टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू से 1.09 लाख करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन सिर्फ ब्याज भुगतान पर 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए. इसका मतलब हुआ कि उसके राजस्व का 42% हिस्सा तो ब्याज चुकाने में ही चला गया.  पंजाब-बिहार दूसरे पायदान पर पंजाब रहा, जिसने अर्जित रेवेन्यू का 34% हिस्सा ब्याज भुगतान करने में खर्च कर दिया. Punjab का राजस्व कलेक्शन 70,000 करोड़ रुपये था और इसने कर्ज के ब्याज भुगतान पर करीब 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद तीसरे नंबर पर Bihar का नाम आता है, जिसने 62,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू में से लगभग 21 हजार करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया और ये इसका 33% रहा.  केरल-तमिलनाडु केरल द्वारा FY2025 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू कलेक्शन किया गया था और इसका 28% या करीब 29,000 करोड़ रुपये तो ब्याज के पेमेंट में ही चला गया. पांचवे नंबर पर तमिलनाडु रहा, जिसने अपने कलेक्शन में से 62,000 करोड़ रुपये या 28% का ब्याज पेमेंट किया था. इसके टैक्स रेवेन्यू सबसे अधिक रहा, लेकिन कर्ज की मार से ये राज्य भी बेहाल रहा.  हरियाण-राजस्थान और आंध्र प्रदेश Top-10 कर्ज के तले दबे राज्यों में अगला नंबर हरियाणा का है और इसने 94,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के बाद इसमें से 27% या करीब 25,000 करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया. सातवें पायदान पर राजस्थान था और राज्य ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में से 38,000 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया. इसके अलावा आंध्र प्रदेश ने 1.2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व पर 29 हजार करोड़ रुपये ब्याज भरा था.  MP-कर्नाटक लिस्ट में नौवें स्थान पर मध्य प्रदेश शामिल हैं और इसका वित्त वर्ष 2025 में टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू 1.23 लाख करोड़ रुपये रहा था, जिसमें से ब्याज के भुगतान पर 27,000 करोड़ रुपये या कुल कलेक्शन का करीब 22% खर्च हुआ. बात दसवें पायदान की करें, तो यहां पर कर्नाटक है, जिसका कलेक्शन 2.03 लाख करोड़ रुपये का था और ब्याज भुगतान 19% यानी 39,000 करोड़ रुपये रहा. 

भारत करेगा कमाल: ट्रंप टैरिफ के बावजूद 2038 तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

 नई दिल्ली        भारत पर भले ही अमेरिका ने 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया है, लेकिन इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार पर ऐसी किसी भी बाधाओं का असर नहीं होगा. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि ईवाई इंडिया की रिपोर्ट में ऐसा अनुमान जताया गया है. इसमें कहा गया है कि भारत 2038 तक 34.2 ट्रिलियन डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद (पीपीपी) के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. EY इकोनॉमी वॉट अगस्त 2025 में कहा गया है कि भारत टैरिफ दबाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद ये कमाल करेगा.   टैरिफ टेंशन के बावजूद इकोनॉमी में दम  ईवाई इंडिया की ओर से कहा गया है कि तमाम चुनौतियों से उबरते हुए भारत दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना है. मजबूत आर्थिक बुनियाद के साथ देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. टैरिफ दबाव और धीमे व्यापार जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं के बाद भी इंडियन इकोनॉमी घरेलू डिमांड पर उसकी निर्भरता और आधुनिक तकनीकों में बढ़ती क्षमताओं से मजबूत बनी हुई है. रिपोर्ट में अनुमान जाहिर करते हुए कहा गया कि आने वाले पांच साल में यानी 2030 तक भारत की इकोनॉमी 20.7 ट्रिलियन डॉलर (पीपीपी) तक पहुंच सकती है प्रोफेशनल सर्विसेज कंपनी ईवाई ने बुधवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि भारत इस समय चीन और अमेरिका के बाद पीपीपी के आधार पर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पीपीपी के संदर्भ में 14.2 लाख करोड़ डॉलर रहा जो बाजार विनिमय दरों पर आंकी गई अर्थव्यवस्था से लगभग 3.6 गुना अधिक है। भारत छोड़ेगा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पीछे रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर 2030 के बाद, भारत और अमेरिका 2028-2030 के दौरान (IMF के पूर्वानुमानों के मुताबिक) क्रमशः 6.5% और 2.1% की औसत वृद्धि दर बनाए रखते हैं, तो भारत 2038 तक PPP के मामले में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ सकता है। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा, “भारत की तुलनात्मक क्षमता, युवा और कुशल कार्यबल, मज़बूत बचत और निवेश दरें और अपेक्षाकृत टिकाऊ लोन प्रोफाइल, अस्थिर ग्लोबल परिवेश में भी उच्च विकास को बनाए रखने में मदद करेंगे।” उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में लचीलापन और उन्नत क्षमताओं का निर्माण करके 2047 तक भारत अपनी विकसित भारत आकांक्षाओं के करीब पहुंचने की अच्छी स्थिति में है। चीन के 2030 तक 42.2 ट्रिलियन डॉलर के GDP तक पहुंचने का अनुमान चीन के 2030 तक 42.2 ट्रिलियन डॉलर के GDP तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन उसे बढ़ती उम्र की आबादी और बढ़ते लोन से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका मजबूत बना हुआ है, लेकिन उसे GDP के 120% से अधिक लोग और धीमी ग्रोथ का सामना करना पड़ रहा है। जर्मनी और जापान, हालांकि उन्नत अर्थव्यवस्थाएं हैं, फिर भी वृद्ध आबादी और ग्लोबल व्यापार पर भारी निर्भरता के कारण सीमित हैं। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत, भारत में एक डॉलर में अमेरिका के एक डॉलर की तुलना में अधिक वस्तुएं और सेवाएं खरीदी जा सकती हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था मार्केट विनिमय दरों की तुलना में बड़ी दिखाई देती है। भारत के 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की भी उम्मीद भारत के 2028 तक बाजार विनिमय दर के संदर्भ में जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की भी उम्मीद है। यहां तक कि GDP के 0.9% को प्रभावित करने वाले अमेरिकी टैरिफ जैसी संभावित चुनौतियों का भी न्यूनतम प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि मजबूत घरेलू मांग और निर्यात विविधीकरण किसी भी मंदी को केवल 0.1% अंक तक सीमित रखने में सक्षम हैं। भारत की ताकत ईवाई का आकलन है कि भारत एवं अमेरिका के क्रमशः 6.5% एवं 2.1% की औसत वृद्धि दर बनाए रखने की स्थिति में भारत 2038 तक पीपीपी के संदर्भ में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ सकता है। उस समय भारत की जीडीपी 34.2 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी। इस दौरान वर्ष 2028 तक भारत बाजार विनिमय दरों पर जर्मनी को पछाड़ते हुए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन सकता है। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी के श्रीवास्तव ने कहा, 'युवा एवं कुशल कार्यबल, मजबूत बचत एवं निवेश दर और टिकाऊ ऋण प्रोफाइल जैसी भारत की तुलनात्मक मजबूती, वैश्विक अस्थिरता के बावजूद उच्च वृद्धि दर को बनाए रखने में मददगार होंगी। भारत जरूरी प्रौद्योगिकियों में क्षमताएं विकसित कर ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।' अमेरिका को एक्सपोर्ट हालांकि यह रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ लगा देने से भारत की जीडीपी को 0.9% तक का झटका लग सकता है। हालांकि यदि एक-तिहाई प्रभाव मांग में कमी के रूप में आता है, तो कुल प्रभाव जीडीपी के 0.3% तक सीमित रह सकता है। ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, उचित नीतिगत उपायों के सहारे इस प्रभाव को जीडीपी के केवल 0.1% तक भी सीमित रखा जा सकता है। ऐसा होने पर चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.5% से घटकर 6.4% तक रह सकती है। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका के हाई टैरिफ का प्रभाव भारतीय निर्यात के 48 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाले उत्पादों पर पड़ेगा। इनमें वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, झींगा, चमड़ा, जूते-चप्पल, रसायन, पशुउत्पाद और यांत्रिक व विद्युत मशीनरी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि दवा, ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर यह शुल्क लागू नहीं है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। लेकिन हाई टैरिफ के कारण भारतीय उत्पाद वहां काफी महंगे हो जाएंगे।