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एनएच-31/231 पर 143 किमी फोरलेन निर्माण तेज, कोसी-सीमांचल को मिलेगा बड़ा लाभ

भागलपुर  राष्ट्रीय राजमार्ग-31/231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को फोरलेन में तब्दील करने की बहुप्रतीक्षित परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। इस 3936 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को लेकर रविवार को बरौनी में पथ निर्माण मंत्री इं. कुमार शैलेंद्र ने एनएचएआई और पीआईयू-बेगूसराय के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। यह परियोजना सीमांचल और कोसी क्षेत्र के विकास के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है। हाल ही में केंद्र सरकार की कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद अब इस परियोजना के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि परियोजना का अवार्ड अगस्त 2026 तक होने की संभावना है। लगभग 90 प्रतिशत भूमि पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे निर्माण कार्य शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। ढाई वर्ष में पूरा होगा निर्माण कार्य परियोजना के तहत निर्माण कार्य की अवधि ढाई वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि इसके बाद 27.5 वर्षों तक रखरखाव का प्रावधान रहेगा। कुल 143.53 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन सड़क को आधुनिक मानकों के अनुसार विकसित किया जाएगा। पूर्णिया में 6.73 किलोमीटर लंबा नया बाइपास भी बनाया जाएगा, जिससे शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा। इसके साथ ही सड़क पर एक इंटरचेंज, नौ फ्लाइओवर, 29 अंडरपास, तीन फुट ओवरब्रिज, 30 बस-बे और आठ ट्रक ले-बाय का निर्माण प्रस्तावित है। कोशी नदी पर बनेगा 1090 मीटर लंबा पुल परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में कुरसेला में कोशी नदी पर 1090 मीटर लंबा दो लेन का मेजर ब्रिज बनाया जाएगा। इसके अलावा चार अन्य बड़े पुल और छह छोटे पुल भी प्रस्तावित हैं। अधिकारियों के अनुसार यह संरचना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी और यातायात को सुगम बनाएगी। इससे लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्याओं में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सर्विस रोड और आधुनिक डिजाइन स्पीड घनी आबादी वाले क्षेत्रों और प्रमुख जंक्शनों को ध्यान में रखते हुए परियोजना में 65 किलोमीटर सर्विस रोड और करीब 101 किलोमीटर स्लिप रोड का प्रावधान किया गया है। हाईवे को 100 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड के अनुरूप तैयार किया जाएगा। सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक और सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। इससे दुर्घटनाओं में कमी आने और यातायात संचालन में सुधार की उम्मीद है। सीमांचल-कोसी क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद खगड़िया से पूर्णिया की दूरी मात्र दो घंटे में तय की जा सकेगी। इससे खगड़िया, मानसी, महेशखूंट, पसराहा, नारायणपुर, बिहपुर, खरीक, नवगछिया, भागलपुर, कुरसेला, कटिहार और पूर्णिया जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय से इस परियोजना को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

गति शक्ति और आत्मनिर्भर भारत के विजन से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर, बढ़ता भारतः रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से खुलेगा तरक्की का द्वार गति शक्ति और आत्मनिर्भर भारत के विजन से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान रायपुर  भारत आज तीव्र गति से आधुनिक बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और सुदृढ़ आर्थिक नेटवर्क के निर्माण की दिशा में अग्रसर है। सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स को एकीकृत करते हुए देश को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास निरंतर जारी है। विकास के इसी दूरदर्शी दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर है। यह कॉरिडोर केवल दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह ष्नए भारत की नई रफ्तारष् का प्रतीक है, जो उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए क्षितिज खोलने जा रहा है। मध्य-पूर्वी समुद्री तट को जोड़ने वाला महामार्ग            रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर देश के मध्य भाग को पूर्वी समुद्री तट से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक मार्ग है। यह छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी (संपर्क) स्थापित करेगा, जिससे सड़क परिवहन, लॉजिस्टिक नेटवर्क और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इस परियोजना को प्रधानमंत्री की “गति शक्ति” और “आत्मनिर्भर भारत” की सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विकास का मूलमंत्र           किसी भी राज्य या देश के विकास का सबसे मजबूत आधार उसका इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। जहां विश्वस्तरीय सड़कें, सुगम परिवहन और अत्याधुनिक लॉजिस्टिक सुविधाएं होती हैं, वहां उद्योगों का तेजी से विस्तार होता है और निवेश आकर्षित होता है। यह कॉरिडोर माल परिवहन को अधिक तीव्र, सुरक्षित और लागत प्रभावी (कम खर्चीला) बनाएगा। इसके परिणामस्वरूप उद्योगों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा और तैयार उत्पाद कम से कम समय में बाजार तक पहुंच सकेंगे।           चूंकि विशाखापट्टनम बंदरगाह देश के प्रमुख समुद्री द्वारों में से एक है, इसलिए इस कॉरिडोर के माध्यम से छत्तीसगढ़ को सीधे पोर्ट कनेक्टिविटी मिलेगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि राज्य के उद्योगों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच स्थापित होगी, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी। छत्तीसगढ़ को मिलने वाले प्रमुख लाभ           रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। छत्तीसगढ़ खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, कृषि और वनोपज से समृद्ध राज्य है। यहाँ लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और स्टील उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। पूर्व में बेहतर परिवहन और लॉजिस्टिक नेटवर्क के अभाव के कारण उद्योग अपनी पूरी क्षमता का लाभ नहीं उठा पाते थे, परंतु यह कॉरिडोर इन चुनौतियों को समूल समाप्त कर देगा। औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन           कॉरिडोर के निर्माण से रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी, कांकेर और जगदलपुर जैसे क्षेत्रों में नए औद्योगिक क्लस्टर्स विकसित होंगे। स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) और एमएसएमई (लघु उद्योगों) को एक नई ऊर्जा मिलेगी, जिससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का रुझान इस क्षेत्र की ओर तेजी से बढ़ेगा। रोजगार के नए अवसरों का सृजन        इतनी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना के आने से रोजगार के अवसर भी आनुपातिक रूप से बढ़ते हैं। सड़क निर्माण, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क्स, नई औद्योगिक इकाइयों और परिवहन सेवाओं के माध्यम से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में जीविकोपार्जन के साधन मिलने से पलायन की समस्या पर काफी हद तक रोक लगेगी। बस्तर क्षेत्र का कायाकल्प          यह कॉरिडोर बस्तर संभाग के लिए विशेष रूप से परिवर्तनकारी सिद्ध होगा। लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से कटे क्षेत्रों में बेहतर सड़क और व्यापारिक संपर्क स्थापित होगा। बस्तर के बहुमूल्य वन उत्पाद, अनूठे हस्तशिल्प, कृषि उपज और लघु उद्योगों को बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी, जिससे आदिवासी समुदायों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। कृषि और वनोपज को सही मूल्य               छत्तीसगढ़ देश में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त यहाँ मक्का, दलहन, फल और लघु वनोपज का भी प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है। बेहतर परिवहन व्यवस्था से किसानों और वनोपज संग्राहकों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में सुगमता होगी। परिवहन लागत घटने से सीधे तौर पर किसानों का मुनाफा बढ़ेगा। पर्यटन उद्योग को नई उड़ान            चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर और बस्तर के सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुगम होने से राज्य में पर्यटन उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा। इससे होटल, गाइड, स्थानीय परिवहन और हस्तशिल्प व्यवसायियों की आय दोगुनी होगी। व्यापार और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि            विशाखापट्टनम पोर्ट तक आसान और तेज पहुंच से छत्तीसगढ़ के उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता (कॉम्पिटिटिवनेस) बढ़ेगी। संक्षेप में कहें तो, रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर महज एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया महामार्ग है। यह छत्तीसगढ़ को देश के एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक हब के रूप में स्थापित करने का सामर्थ्य रखता है।            मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही सशक्त अर्थव्यवस्था की नींव होता है, और यही परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। नए भारत की नई रफ्तार का यह कॉरिडोर देश के हर कोने को प्रगति की साझा मुख्यधारा से जोड़ने का एक जीवंत माध्यम है। मुख्यमंत्री का विजनः छत्तीसगढ़ की समृद्धि का महामार्ग          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर हमारे छत्तीसगढ़ की आर्थिक रीढ़ बनने जा रहा है। हमारा राज्य खनिज संपदा, कृषि और समृद्ध वनोपज से परिपूर्ण है, लेकिन वैश्विक बाजारों तक सीधी और तीव्र पहुंच न होने से हमारे उद्यमियों और किसानों को अपनी क्षमता का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। यह कॉरिडोर हमारी इस भौगोलिक चुनौती को अवसर में बदल देगा। विशाखापट्टनम बंदरगाह से सीधे जुड़ने के बाद छत्तीसगढ़ का स्टील, हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपनी धाक जमाएंगे। हमारी सरकार का संकल्प है कि इस मार्ग के किनारे अत्याधुनिक औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जाएं, ताकि स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिले और बस्तर सहित पूरे राज्य में खुशहाली का एक नया … Read more

कुशीनगर से वाराणसी और नेपाल सीमा से प्रयागराज तक बनेंगे फोर लेन हाईवे

 लखनऊ  प्रदेश में प्रस्तावित किए गए छह नार्थ-साउथ हाईवे कारिडोर में से दो कारिडोर का काम जल्द शुरू होने जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई, भूमि अधिग्रहण का काम शुरू किए जाने की तैयारी है। पहला कारिडोर कुशीनगर-देवरिया-दोहरीघाट-गाजीपुर-जमानिया होते हुए वाराणसी तक तथा दूसरा कारिडोर पिपरी (भारत-नेपाल सीमा)-बांसी-सिद्धार्थनगर से प्रयागराज तक के बीच बनेगा। दोनों कारिडोर में पीडब्ल्यूडी द्वारा कराए जाने वाले कार्यों में से तीन खंडों का काम स्वीकृत होने के साथ ही हुए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हाईवे कारिडोर का काम लोक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) द्वारा किया जाना है। दोनों कारिडोर का निर्माण कार्य पूरा होने पर पूर्वांचल के दर्जन भर पिछड़े जिले आपस में फोर लेन हाईवे से जुड़ जाएंगे। प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी अजय चौहान ने बताया है कि कुशीनगर-देवरिया-गाजीपुर-वाराणसी हाईवे में 31.5 किमी कसया-देवरिया मार्ग तथा 21.75 किमी देवरिया-बरहज मार्ग का निर्माण कार्य स्वीकृत कर दिया गया है। वहीं पिपरी (भारत नेपाल सीमा)-बांसी-सिद्धार्थनगर से प्रयागराज तक प्रस्तावित हाईवे में 9.4 किमी बर्डपुर पिपरहवा मार्ग का काम भी स्वीकृत किया गया है। अन्य खंडों के काम भी जल्द स्वीकृत किए जाएंग। विशेष सचिव प्रभुनाथ के मुताबिक हाईवे कारिडोर के 62 किमी कार्य के लिए 725 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। अभी 235 किमी कार्य स्वीकृत किए जाना शेष है। मुख्य अभियंता (मुख्यालय-एक) अनिल कुमार दुबे के मुताबिक दोनों कारिडोर का काम दो वर्ष में पूरा होगा। भूमि अधिग्रहण के साथ ही निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। कुशीनगर-वाराणसी हाईवे कारिडोर कुशीनगर-देवरिया-दोहरीघाट-गाजीपुर-जमानिया होते हुए वाराणसी तक बनने वाले कारिडोर की कुल लंबाई 220 किमी है। दोहरीघाट-मऊ-गाजीपुर खंड तथा गाजीपुर-वाराणसी पहले से चार लेन हैं। कुशीनगर-देवरिया और देवरिया-दोहरीघाट खंड का कार्य लोक निमार्ण द्वारा किया जाना है। जिसकी अनुमानित लागत 342 करोड़ रुपये है। कॉरिडोर-1 (कुशीनगर से वाराणसी) के जिले इस रूट पर आने वाले मुख्य जिले:     कुशीनगर     देवरिया     मऊ (दोहरीघाट खंड के जरिए)     गाजीपुर     वाराणसी नेपाल सीमा पिपरी-प्रयागराज कारिडोर पिपरी (भारत-नेपाल सीमा)-सिद्धार्थनगर- प्रयागराज कारिडोर की लंबाई 295 किलोमीटर है। पहला हिस्सा 9.4 किमी पिपरी-बर्डपुर का काम स्वीकृत कर दिया गया है। यह कारिडोर शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और विंध्य एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। इसमें 107 किमी के तीन खंडो का काम पीडब्ल्यूडी 642 करोड़ रुपये से और 123 किलोमीटर का काम सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) 738 करोड़ की लागत से करेगा। इस रूट की कनेक्टिविटी इन जिलों को कवर करेगी:     सिद्धार्थनगर (पिपरी-बर्डपुर-बांसी खंड)     बस्ती (सिद्धार्थनगर से प्रयागराज के रास्ते में)     संत कबीर नगर     अमेठी (पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक के जरिए)     सुलतानपुर     प्रतापगढ़     प्रयागराज  

पटना से मुजफ्फरपुर तक बनेंगे आधुनिक टाउनशिप, अलग-अलग थीम पर होगा विकास

पटना बिहार में शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए 11 सेटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रत्येक सेटेलाइट टाउनशिप का विकास एक खास थीम पर किया जाना है। थीम का चयन स्थानीय विशेषता और जरूरत के अनुसार किया जाएगा। नगर विकास विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। विभाग ने 11 सेटेलाइट टाउनशिप क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। मास्टर प्लान बनने तक यह रोक जारी रहेगी। सड़क, पार्क, स्कूल, मैदान या अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए जमीन चिह्नित करने के बाद रोक हटा दी जाएगी। टाउनशिप को कोर और विशेष क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। कोर क्षेत्र का विकास सबसे पहले किया जाना है। इसी क्षेत्र के मास्टर प्लान में थीम का चयन किया जाएगा। हालांकि, किस टाउनशिप को किस थीम पर विकसित किया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय होना बाकी है। बावजूद नगर विकास विभाग के विशेषज्ञों ने इसकी रूपरेखा बना ली है। उदाहरण के लिए राजधानी पटना के पास बन रही पाटलिपुत्र टाउनशिप को एजुकेशन-स्पोर्ट्स सिटी और लॉजिस्टिक हब के रूप में पहचान दी जाएगी। इसी तरह गयाजी के पास बन रही मगध टाउनशिप को बोधगया और गयाजी के सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटकीय महत्व की पहचान दी जाएगी। मुजफ्फरपुर के पास बन रही तिरहुत टाउनशिप को औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा सोनपुर के पास विकसित हो रहे हरिहरनाथपुरम को एयरोसिटी की तर्ज पर विकसित किया जाना है। थीम की जरूरत के हिसाब से यहां बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। जरूरत की बुनियादी सुविधाएं विकसित होंगी इसी तरह अन्य सेटेलाइट टाउनशिप के थीम की योजना बनाई जा रही है। बिहार शहरी आयोजना स्कीम नियमावली 2026 के अनुसार टाउनशिप की योजना थीम के आधार पर बनेगी। इसमें सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक सुविधाओं के लिए प्लॉट, अवसंरचना, उद्यान, खुले क्षेत्र, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आवास आदि की भी सुविधा होगी। सेटेलाइट टाउनशिप की स्थानीय खासियत ● पाटलिपुत्र (पटना) : लॉजिस्टिक्स हब, एजुकेशनल-स्पोर्ट्स सिटी। ● हरिहरनाथपुरम (सोनपुर): पौराणिक महत्व, एरोसिटी। ● मगध (गया): पर्यटन और धार्मिक – सांस्कृतिक महत्व। ● मिथिला (दरभंगा): मेडिकल हब, सांस्कृतिक विरासत। ● तिरहुत (मुजफ्फरपुर): औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र। ● सीतापुरम (सीतामढ़ी): धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन। ● कोसी(सहरसा): व्यावसायिक केंद्र। ● पूर्णिया (पूर्णिया): मेडिकल हब, आर्थिक गतिविधियों का केंद्र। ● अंग (मुंगेर): विरासत और वाणिज्यिक केंद्र। ● विक्रमशिला (भागलपुर): शिक्षा और सांस्कृतिक केंद्र। ● सारण (छपरा): आवासीय और औद्योगिक केंद्र।