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उच्च स्तरीय समिति ने कई जिलों से दस्तावेजों की विस्तृत मांग की

 रांची जिलों के कोषागार से अवैध वेतन निकासी मामले में चल रही उच्च स्तरीय जांच समिति की जांच का दायरा अब बढ़ गया है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव वरिष्ठ आइएएस अधिकारी डा. अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय जांच समिति के पास बोकारो व हजारीबाग के अलावा रांची, रामगढ़, देवघर व चाईबासा में भी अवैध निकासी मामले की जांच की जिम्मेदारी मिल गई है। अब जांच समिति ने इन चारों जिलों से भी जांच से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज की मांग की गई है। समिति ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों से वहां के संबंधित विभाग में स्वीकृत व कार्यरत बल, बजट एवं आवंटन संचिका, जिला बल पंजी, मास्टर रोल पंजी, वेतन ज्ञापन, विपत्र पंजी, स्थापना मद से संबंधित दस्तावेज, डीडीओ तथा लिपिकों का विवरण, भुगतान एवं बैंक खाता का विवरण सहित कई अन्य बिंदुओं की जानकारी मांगी है। अब समिति अवैध वेतन निकासी के सभी प्रमुख बिंदुओं का सूक्ष्य अध्ययन व समीक्षा करेगी, ताकि आरोपितों पर कार्रवाई हो सके, कमियों को दूर कर भविष्य में इस तरह की होने वाली घटना को रोका जा सके। किस जिलें में अवैध वेतन निकासी का क्या है मामला बोकारो : बोकारो जिले में वहां के एसपी कार्यालय के लेखा शाखा में सबसे पहले अवैध वेतन निकासी का मामला सामने आया था। एजी की रिपोर्ट में खुलासे के बाद वित्त विभाग के आदेश पर पूरे मामले की जांच के बाद बोकारो में प्राथमिकी दर्ज हुई और लेखा शाखा से मुख्य आरोपित कौशल पांडेय को वहां की पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा। बाद में मामला सीआइडी के पास आया और सीआइडी ने तीन अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया। इन तीन आरोपितों में लेखा शाखा का एएसआइ अशोक भंडारी, गृह रक्षक सतीश कुमार व काजल मंडल शामिल हैं। बोकारो में अब तक की जांच में करीब 11 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला उजागर हो चुका है। हजारीबाग : हजारीबाग में भी वहां के एसपी कार्यालय के लेखा शाखा में करीब 31 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आ चुका है। इस मामले में पहले हजारीबाग पुलिस ने मुख्य आरोपित सिपाही शंभू कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में इस केस में शंभू कुमार सिंह की पत्नी काजल कुमारी, उसके सहयोगी सिपाही रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह, रजनीश कुमार सिंह की पत्नी खुशबू कुमारी, सहयोगी धीरेंद्र कुमार सिंह, व रिश्तेदार सौरभ कुमार को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। चाईबासा : चाईबासा के एसपी कार्यालय के लेखा से अवैध वेतन निकासी मामले में चाईबासा मुफ्फसिल थाने की पुलिस ने मुख्य आरोपित देवनारायण मुर्मू के अलावा सरकार हेम्ब्रम, अरुण मार्डी व गोराचंद मांर्डी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। चाईबासा में करीब तीन करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। रांची : रांची के कोतवाली थाने में पशुपालन विभाग में 2.93 करोड़ रुपये की अवैध वेतन निकासी का मामला दर्ज हुआ था। इसमें इंस्टीच्यूट आफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन के दो कर्मचारी मुनिंद्र कुमार व संजीव कुमार पर हेराफेरी का आरोप लगा था। पुलिस ने मुनिंद्र कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, दूसरा आरोपित फरार है। रामगढ़ : रामगढ़ के जिला पशुपालन कार्यालय में अवैध वेतन निकासी मामले में करीब 34.25 लाख रुपये की अवैध व फर्जी निकासी का मामला सामने आ चुका है। इस मामले की भी जांच जारी है। देवघर : देवघर के सरवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 99 लाख रुपये की अवैध वेतन निकासी मामले का खुलासा हुआ है। देवघर डीसी की जांच में खुलासे के बाद इस मामले में मुख्य आरोपित स्वास्थ्य विभाग की पूर्व लेखा लिपिक सविता कुमारी को फर्जी तरीके से रुपये निकालकर गबन करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा है। रिमांड पर पूछताछ के बाद CID ने शेष 7 आरोपितों को भी भेजा जेल 72 घंटे तक पूछताछ के बाद सीआइडी ने बोकारो व चाईबासा के भी सभी सातों आरोपितों को शनिवार को जेल भेज दिया। जिन्हें जेल भेजा गया है, उनमें बोकारो केस में एएसआइ अशोक भंडारी, गृह रक्षक सतीश कुमार व सिपाही काजल मंडल तथा चाईबासा केस में सिपाही देवनारायण मुर्मू, सरकार हेम्ब्रम, अरुण मार्डी व गोराचंद मांर्डी शामिल हैं। सभी आरोपितों से पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर सीआइडी की एसआइटी अब आगे की पूछताछ करेगी।

हरनौत में कृषि सखियों की बहाली पर गड़बड़ी का आरोप, डीएम ने जांच के दिए आदेश

हरनौत राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत सभी प्रखंडों में पिछले साल दो-दो कृषि सखियों की बहाली की गयी है। इनका काम किसानों से आंकड़ा जुटाना और उन्हें प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करना था। जीविका की अनुशंसा पर कृषि विभाग द्वारा बहाली की जानी थी। इस बहाली में अब गड़बड़ी की आशंका सामने आ रही है। हरनौत प्रखंड की दो महिलाओं ने डीएम को आवेदन देकर जांच की मांग की है। इस मामले पर जिला कृषि पदाधिकारी व जीविका डीपीएम के विरोधाभाषी बयान देकर आमने-सामने आ गये हैं। वहीं डीएम कुंदन कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया है।आवेदन के अनुसार जीविका की ओर से दोनों का चयन किया गया था। जीविका के प्रखंड परियोजना प्रबंधक ने दोनों के नामों की अनुशंसा कर पत्र प्रखंड कृषि कार्यालय को भेजा था। बाद में पता चला कि उनके स्थान पर किसी और की बहाली कर ली गयी है। यानि, जीविका की अनुशंसा की अनदेखी की गयी। जीविका के सूत्रों की मानें तो कई प्रखंडों से ऐसे मामले सामने आये हैं। जीविका की ओर से भेजे गये नामों को हटाकर अन्य की बहाली कर ली गयी। क्या है आरोप हरनौत के प्रेमलता देवी व मुन्नी देवी ने डीएम को बताया कि जीविका की ओर से उन्हें चुना गया था। बीपीएम ने पत्र देकर उन्हें सूचना दी थी। उन्होंने जिला कृषि कार्यालय में मिट्टी जांच की ट्रेनिंग भी ली। इसके बाद उन्हें किसानों की सूची तैयार करने का काम दिया गया। गांव-गांव घूमकर उन्होंने किसानों से जानकारी लेकर सूची बनायी। प्रखंड कृषि कार्यालय में इस जानकारी को कंम्प्यूटर पर अपलोड कराया। करीब तीन महीने तक उन्होंने काम किया। इसके बाद प्रखंड कृषि कार्यालय से बताया गया कि किसी दूसरे का चयन कर लिया गया है। एक दूसरे पर टाल रहे कृषि विभाग-जीविका के अधिकारी इस मामले को कृषि विभाग व जीविका के अधिकारी एक-दूसरे पर टाल रहे हैं। कृषि विभाग इसका ठीकरा जीविका पर फोड़ रहा है। वहीं, जीविका का कहना है कि उन्होंने नामों की अनुशंसा की थी। बहाली का काम कृषि विभाग का था। दोनों महिलाएं एक से दूसरे विभागों में चक्कर लगा रही हैं। डीएओ ने स्पष्ट रूप से कहा कि बहाली हो गयी है। अब इस मामले में कुछ नहीं हो सकता है। जानकार बताते हैं कि यह बात तय है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी हुई है। गड़बड़ी किसने और क्यों की है, यह जांच का विषय है।