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मध्य प्रदेश में ₹2,387 करोड़ की नर्मदा सिंचाई परियोजना शुरू, किसानों को मिलेगा फायदा

धार   नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचेगा तो आदिवासी अंचल में खेती की तस्वीर बदलने की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 24 अक्टूबर को दोपहर में सरदारपुर में 2387.60 करोड़ रुपये की नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का शुभारंभ किया। इससे धार-झाबुआ के 260 गांवों के 57,422 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है। परियोजना से झाबुआ के 194 और धार की सरदारपुर तहसील के 66 गांव लाभान्वित होंगे। चंदनखेड़ी के पास नर्मदा नदी से 186.62 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उठाकर भूमिगत दबावयुक्त पाइपलाइन से खेतों तक पहुंचाने की योजना है। 2.5 हेक्टेयर के चक तक 20 मीटर दबाव से पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान है। किसान ड्रिप और स्प्रिंकलर से जरूरत के अनुसार सिंचाई कर सकेंगे। इससे खरीफ के साथ रबी की फसलों का रकबा बढ़ने, उत्पादन में सुधार और किसानों की आय बढ़ने की संभावना है। खेती से जुड़े रोजगार, स्थानीय व्यापार और ग्रामीण बाजारों को भी गति मिल सकती है। परियोजना को 2018 में 2050.70 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी, जिसे 2024 में बढ़ाकर 2387.60 करोड़ रुपये किया। नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचेगा तो आदिवासी अंचल में खेती की तस्वीर बदलने और किसानों के घर समृद्धि आने की उम्मीद है। इससे धार-झाबुआ के 260 गांवों के 57,422 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है। कम वर्षा से जूझ रहे क्षेत्र में यह परियोजना खेती को नई ताकत दे सकती है। हालांकि, इस वर्ष पानी की कमी के कारण किसान बुआई का रकबा घटाने को मजबूर हैं। ऐसे में उनकी निगाहें नर्मदा जल पर टिकी हैं।इस योजना के माध्यम से माही नदी में भी पानी छोड़ा जाएगा। इसे सूख के साल में भी माही जीवंत रहेगी। कम पानी, घटती बुआई और उम्मीद     सरदारपुर क्षेत्र में इस वर्ष कम वर्षा और तालाबों में पर्याप्त पानी नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ी है। पटलावदिया के सुधीर भावसार ने बताया कि पानी की व्यवस्था नहीं होने से गेहूं-चने की बुआई नहीं की है।नर्मदा-माही परियोजना का पानी खेतों या माही नदी में आने पर ही बुआई करेंगे।     खरेली के अंतरसिंह पटेल ने पांच बीघा में गेहूं बोया है और एक सिंचाई के बाद अगली सिंचाई के लिए नर्मदा जल की उम्मीद कर रहे हैं।     मोरगांव के रविंद्र पाटीदार के पास करीब 40 बीघा जमीन है, लेकिन पानी की कमी से 15 बीघा में ही बुआई कर पा रहे हैं।     हातोद के राधेश्याम पटेल ने बताया कि हर वर्ष 60 बीघा में खेती करते हैं, लेकिन इस बार पानी की उपलब्धता के अनुसार 30 बीघा में ही बुआई की है। शेष जमीन पर भी सिंचाई का पानी मिलने की आस है। खेती से बढ़ेगी आय, बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था परियोजना से झाबुआ के 194 और धार की सरदारपुर तहसील के 66 गांव लाभान्वित होंगे। चंदनखेड़ी के पास नर्मदा नदी से 186.62 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उठाकर भूमिगत दबावयुक्त पाइपलाइन से खेतों तक पहुंचाने की योजना है। 2.5 हेक्टेयर के चक तक 20 मीटर दबाव से पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान है। किसान ड्रिप और स्प्रिंकलर से जरूरत के अनुसार सिंचाई कर सकेंगे। इससे खरीफ के साथ रबी की फसलों का रकबा बढ़ने, उत्पादन में सुधार और किसानों की आय बढ़ने की संभावना है। खेती से जुड़े रोजगार, स्थानीय व्यापार और ग्रामीण बाजारों को भी गति मिल सकती है। परियोजना को 2018 में 2050.70 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी, जिसे 2024 में बढ़ाकर 2387.60 करोड़ रुपये किया गया।  

छत्तीसगढ़ में सिंचाई और विकास को बढ़ावा

छत्तीसगढ़ में सिंचाई और विकास को बढ़ावा जशपुर जिले में मैनी एनीकट निर्माण के लिए 70.99 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों के विकास और किसानों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इसके तहत जशपुर जिले के विकासखंड-कांसाबेल अंतर्गत मैनी एनीकट के निर्माण कार्य के लिए 70 करोड़ 99 लाख 57 हजार रुपये (70.99 करोड़ रुपये) की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस एनीकट के निर्माण से क्षेत्र में भू-जल स्तर में सुधार होगा और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।               जशपुर के किसानों को कृषि के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिलेगा। इस योजना से कुल 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। खरीफ फसल के 1300 हेक्टेयर क्षेत्र में और रबी फसल के 200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। इस एनीकट के बनने से क्षेत्र के किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि उत्पादन को भी नया संबल मिलेगा। स्थानीय नागरिकों के लिए निस्तारी और पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। इस परियोजना से क्षेत्र में आवागमन की सुविधा भी सुगम होगी।

राजनांदगांव और मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 17.42 करोड़ रुपये स्वीकृत

राजनांदगांव और मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 17.42 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर, छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा राजनांदगांव और मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के सिंचाई योजनाओं के विभिन्न कार्यों के लिए 17 करोड़ 42 लाख 31 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में राजनांदगांव जिले के पार्रीकला एनीकट कम काजवे निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 94 लाख 06 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 120 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। कोपेडीह जलाशय जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य केलिए 2 करोड़ 55 लाख 31 हजार रूपए स्वीकृत किए गए हैं। योजना के कार्य पूर्ण होने से 71 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। अण्डी जलाशय जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 35 लाख 01 हजार रूपए स्वीकृत किए गए हैं। योजना के कार्य पूर्ण होने से 81 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसी तरह से पिनकापार जलाशय जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 3 करोड़ 20 लाख 82 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 145 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के बिरझूटोला जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 2 करोड़ 37 लाख 11 हजार रूपए स्वीकृत किए गए हैं।

कबीरधाम जिले में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 15.86 करोड़ रुपये स्वीकृत

कबीरधाम जिले में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 15.86 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर  छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा कबीरधाम जिले विभिन्न सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए 15 करोड़ 86 लाख 8 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं।    जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में कबीरधाम जिले के नरसिंहपुर जलाशय के शीर्ष कार्य एवं नहरों का मरम्मत कार्य के लिए एक करोड़ 71 लाख 47 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 45 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। विकासखण्ड पंडरिया के कामठी जलाशय के नहरों का लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 82 लाख 98 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 112 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। विकासखण्ड पंडरिया की मोहपार जलाशय के शीर्ष कार्य एवं नहरों का जीर्णेाद्धार तथा लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 99 लाख 15 हजार रूपए स्वीकृत किए गए हैं। योजना के कार्य पूर्ण होने से 95 हेक्टेयर क्षेत्र मंे सिंचाई सुविधा मिलेगी।     इसी तरह से विकासखण्ड सहसपुर लोहारा की दमऊनाला व्यपवर्तन के नहर का लाईनिंग कार्य के लिए 3 करोड़ 76 लाख रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 75 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। छिरहा डायवर्सन के गेट उन्नयन एवं नहर लाईनिंग कार्य एवं पक्के संरचनाओं का निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 31 लाख 72 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 48 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।

जल संरक्षण से बदली कृषि की तस्वीर, जीपीएम में सिंचाई क्षमता में बड़ा इजाफा

जल संरक्षण और सिंचाई विस्तार की उपलब्धि, जीपीएम में सिंचाई क्षमता छह गुना से अधिक बढ़ी जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों की विकास यात्रा ने बदली कृषि की तस्वीर, 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हुई सिंचाई क्षमता रायपुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों की विकास यात्रा ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र में आए महत्वपूर्ण बदलावों को रेखांकित करती है। राज्य निर्माण के बाद जिले में सिंचाई अधोसंरचना के विस्तार से सिंचाई क्षमता 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2026 में 25,936 हेक्टेयर हो गई है। राज्य गठन के समय सीमित थीं सिंचाई सुविधाएं           राज्य गठन के समय जिले में जल संसाधन अधोसंरचना सीमित थी। 1 नवंबर 2000 से पूर्व जिले में कुल 28 जल संसाधन परियोजनाएं निर्मित थीं। इनमें 17 जलाशय, 4 व्यपवर्तन योजनाएं, 2 स्टॉप डेम और 5 एनीकट शामिल थे। इन परियोजनाओं से मात्र 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो पाती थी। सिंचाई के सीमित साधनों के कारण कृषि मुख्यतः मानसूनी वर्षा पर निर्भर थी। 25 वर्षों में 57 नई परियोजनाओं का निर्माण           राज्य गठन के पश्चात जल संसाधन विभाग ने चरणबद्ध तरीके से सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया। पिछले 25 वर्षों में जिले में 57 नई जल संसाधन परियोजनाओं का निर्माण पूर्ण किया गया। पूर्व की 28 परियोजनाओं और नई 57 परियोजनाओं को मिलाकर जिले में कुल 85 जल संसाधन योजनाओं का आधार तैयार हुआ है।           पुरानी नहरों के जीर्णाेद्धार और विस्तार के साथ दूर-दराज के खेतों तक पानी पहुंचाने के प्रयास किए गए। कम पानी में अधिक क्षेत्र में सिंचाई के लिए माइक्रो एवं लिफ्ट इरिगेशन को बढ़ावा दिया गया। सोलर पंप और डिजिटल तकनीक के उपयोग से जल वितरण की निगरानी जैसे नवाचार भी किए गए। इसके साथ ही नदियों के संरक्षण, एनीकट निर्माण और भू-जल संवर्धन की दिशा में भी कार्य किया गया। 4,458 से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हुई सिंचाई क्षमता            जल संसाधन विभाग के प्रयासों का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम जीपीएम की सिंचाई क्षमता में दिखाई देता है। राज्य गठन के समय जहां 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई संभव थी, वहीं वर्ष 2026 तक यह क्षमता बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हो गई है। इस प्रकार 25 वर्षों में सिंचाई क्षमता में 21,476 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि राज्य गठन के समय की तुलना में छह गुना से अधिक है। सिंचाई के विस्तार से कृषि को मिला नया आधार            सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि की तस्वीर में बदलाव आया है। खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को स्थानीय स्तर पर कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने और बहुफसलीय खेती की दिशा में बढ़ने का अवसर मिला है। सिंचाई का दायरा बढ़ने से कृषि उत्पादन में सुधार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।           जीपीएम जिले की प्रमुख जल संरचनाओं में ग्राम देवरगांव का मलनिया जलाशय, ग्राम आंदुल का जोगीडोंगरी जलाशय तथा ग्राम बनझोरका का एनीकट शामिल हैं। ये जल संरचनाएं जिले में विकसित जल अधोसंरचना और जल संरक्षण के प्रयासों को प्रदर्शित करती हैं। जल प्रबंधन में आधुनिक तकनीक और संरक्षण पर जोर           जीपीएम में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ जल के बेहतर उपयोग और संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है। माइक्रो एवं लिफ्ट इरिगेशन, सोलर पंप तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से जल प्रबंधन को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। नदियों के संरक्षण, एनीकट निर्माण और भू-जल संवर्धन जैसे प्रयास जल की उपलब्धता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।           जल संरचनाओं के निर्माण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का सीधा संबंध खेतों में पानी की उपलब्धता, कृषि गतिविधियों के विस्तार और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक संभावनाओं से है। जिले में सिंचाई क्षमता का 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर होना इस दीर्घकालीन प्रयास का महत्वपूर्ण परिणाम है।           प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन में जल, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इसी व्यापक दृष्टि के अनुरूप जल संसाधनों का बेहतर उपयोग, सिंचाई अधोसंरचना का विस्तार और आधुनिक तकनीक का समावेश ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का जोर भी प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और किसानों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने पर है। जीपीएम में जल संसाधन विभाग की उपलब्धियां इस दिशा में जिले में हुए अधोसंरचनात्मक विस्तार को दर्शाती हैं। नई योजनाओं से सिंचाई क्षमता में और विस्तार की उम्मीद           जिले में वर्तमान में भी कई नई सिंचाई योजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनके पूर्ण होने के बाद सिंचाई क्षमता में और विस्तार होगा। इससे कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त आधार मिलेगा और जल प्रबंधन की अधोसंरचना और मजबूत होगी।           जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों की यह यात्रा केवल जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेतों तक पहुंचते पानी, बढ़ती कृषि संभावनाओं, ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों की विकास गाथा भी है। गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले की यह उपलब्धि जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और जनकल्याण को विकास के साथ जोड़ने की दिशा में किए गए निरंतर प्रयासों को रेखांकित करती है।

किसानों को मिलेगी बेहतर सिंचाई सुविधा! छत्तीसगढ़ में 7 सिंचाई योजनाओं के लिए ₹30.74 करोड़ स्वीकृत

छत्तीसगढ़- सात सिंचाई योजनाओं के लिए 30.74 करोड़ रूपए स्वीकृत किसानों को मिलेगी बेहतर सिंचाई सुविधा बलौदाबाजार-भाटापारा और रायपुर जिले के हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को मिलेगा फायदा रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार के जल संसाधन विभाग ने राज्य में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सात प्रमुख सिंचाई योजनाओं के लिए कुल 30 करोड़ 74 लाख 39 हजार रूपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इस राशि का उपयोग नहरों के जीर्णाेद्धार, रिमॉडलिंग, सीसी लाइनिंग और भूमिगत पाइपलाइन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाएगा।               जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिलेवार स्वीकृत कार्यों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला के बलौदा शाखा नहर (वितरक 11 एवं 12)में रिमॉडलिंग, सीसी लाइनिंग एवं पक्के निर्माण कार्यों के लिए 4.99 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं, इससे 339.05 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होगी। इसी प्रकार सोंढूर परियोजना (बेन्द्री वितरक नहर) के भाटापारा शाखा नहर के बेन्द्री वितरक नहर की रिमॉडलिंग व सीसी लाइनिंग के लिए 4.82 करोड़ मंजूर। इससे 355 हेक्टेयर क्षेत्र को पानी मिलेगा।              रायपुर जिला (धरसींवा विकासखंड) के भाटापारा शाखा नहर कार्य में महानदी परियोजना अंतर्गत विभिन्न सुधार कार्यों हेतु 4.20 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 14) के आर.डी. 2700 मीटर से 3500 मीटर तक नहर को ह्यूम पाइप के माध्यम से भूमिगत करने के लिए 4.90 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं। मांढ़र ब्रांच केनाल सर्विस रोडरू आर.डी. 31600 मीटर से 32900 मीटर तक डामर रोड निर्माण के लिए 1.90 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 8 व माइनर 1) में भूमिगत पाइपलाइन तथा कंक्रीट व मुरमीकरण रोड निर्माण के लिए 4.92 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 11।, 13, 14 व माइनर्स) महानदी परियोजना समूह के अंतर्गत जीर्णाेद्धार कार्यों के लिए 4.97 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है।            जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत इन विकास कार्यों से क्षेत्र में जल प्रबंधन बेहतर होगा और अंतिम छोर (टेल एरिया) तक किसानों के खेतों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।

मध्यप्रदेश में सिंचाई क्रांति की तैयारी, 14 जिलों के लिए केन-मंदाकिनी लिंक प्रोजेक्ट का प्रस्ताव केंद्र को भेजा

भोपाल  मध्य प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में बताया कि प्रदेश के 14 जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है और अगले छह माह में इनके लोकार्पण के साथ लगभग 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी। वहीं, केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है और स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन भी जल्द किया जाएगा।इससे 93 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा का विकास होगा। वहीं, नर्मदा को सोन नदी से जोड़ने वाली स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन भी शीघ्र किया जाएगा। 14 जिलों की सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इसकी तैयारी के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मंडला जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है। अब इनका लोकार्पण होना है। अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना पर फोकस केन-मंदाकिनी लिंक अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजना से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा। 20 किलोमीटर लंबी टनल भी बनाई जाएगी। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र के दस जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई के साथ 130 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन होगा। परियोजना में भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के तहत अवार्ड पारित कर 90 प्रतिशत भुगतान किया चुका है। बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्य परियोजना में चकरपुर एवं मड़िया बांध का काम पूरा हो गया है। संशोधित पार्वती काली सिंध चंबल अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के पुनर्निर्माण के काम पूरा हो गया है। सिंहस्थ को लेकर तैयारी सिंहस्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82 प्रतिशत काम हो चुका है। कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66 प्रतिशत काम प्रगति पर है। शिप्रा तट पर 29 किलोमीटर लंबाई में बनाए जा रहे घाटों का निर्माण कार्य भी 60 प्रतिशत पूरा हो गया है। जल्द होगा स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन बरगी नहर से ढाई लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी बैठक में मुख्यमंत्री ने नर्मदा को सोन नदी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन की तैयारी के निर्देश दिए। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक डिस्चार्ज करयिंग कैपेसिटी वाली नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के लगभग डेढ़ हजार गांव की करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करेगी। टनल का काम डेढ़ दशक से चल रहा था, जो लगभग पूर्ण हो चुका है।  

रायपुर : दो सिंचाई योजना के लिए 6.12 करोड़ रुपये स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बालोद जिले की दो सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 6 करोड़ 12 लाख 46 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। स्वीकृत योजनाओं में विकासखण्ड-डौण्डीलोहारा की भंवरमरा जलाशय के शीर्ष कार्य नहर रिमाडलिंग, लाईनिंग एवं अन्य 05 पक्के कार्यों को कराने के लिए 2 करोड़ 51 लाख 12 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। इस योजना के प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने के उपरांत, सिंचाई  क्षमता 120 हेक्टेयर के विरूद्ध 84.40 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति तथा बचत जल से 10.51 हेक्टेयर अतिरिक्त सहित कुल 130.51 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसी तरह से विकासखण्ड-गुण्डरदेही की भन्डेरानाला पर एनीकट का निर्माण कार्य हेतु 3 करोड़ 61 लाख 34 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। योजना के निर्माण से निस्तारी, पेयजल, भू-जल संवर्धन की सुविधा उपलब्ध होगी।    

राज्य के सिंचाई जलाशयों में 67% से अधिक जल भराव, पिछले दो सालों से बेहतर जल उपलब्धता

राज्य के सिंचाई जलाशयों में अभी 67 प्रतिशत से अधिक जल भराव पिछले दो सालों की तुलना में जल उपलब्धता की स्थिति काफी बेहतर रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य के 12 वृहद एवं 34 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में इस वर्ष जल भराव की स्थिति काफी बेहतर है। वर्तमान में राज्य के कुल 46 प्रमुख सिंचाई जलाशयों में औसत रूप से 67.43 प्रतिशत जल भराव है, जो कि वर्ष 2025 मेें इसी अवधि में औसत रूप से 45.23 प्रतिशत तथा वर्ष 2024 के 42 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। यह स्थिति राज्य में बेहतर वर्षा, सुनियोजित जल प्रबंधन तथा जलाशयों के प्रभावी संचालन का परिणाम है। राज्य के 12 वृहद सिंचाई परियोजनाओं में वर्तमान में 68.19 प्रतिशत जल भराव है, जबकि वर्ष 2025 में यह 45.84 प्रतिशत तथा वर्ष 2024 में 38.62 प्रतिशत था। प्रमुख वृहद जलाशयों में शामिल मनियारी जलाशय में 90.41 प्रतिशत, मुरूमसिल्ली में 86.85 प्रतिशत, खारंग में 84.99 प्रतिशत, दुधावा में 84.54 प्रतिशत, रविशंकर सागर में 76.72 प्रतिशत, सोंढूर में 70.65 प्रतिशत एवं तांदुला में 66.19 प्रतिशत में जल उपलब्ध है। वहीं मिनीमाता बांगो जलाशय में 63.86 प्रतिशत तथा केलो में अभी 51.83 प्रतिशत जल भराव है। कोडार जलाशय में अपेक्षाकृत कम 35.45 प्रतिशत जल उपलब्ध है।  इसी प्रकार राज्य की 34 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में वर्तमान में 63.38 प्रतिशत जल भराव है, जो कि वर्ष 2025 के 44.62 प्रतिशत एवं वर्ष 2024 के 45.38 प्रतिशत से अधिक है। मध्यम जलाशयों में छिरपानी जलाशय मेें 92.23 प्रतिशत, खपरी में 92.98 प्रतिशत, पिपरिया नाला में 89.69 प्रतिशत, गोंडली में 85.53 प्रतिशत, सुतियापाट में 79.82 प्रतिशत, सारोदा में 77.57 प्रतिशत एवं कोसारटेडा में 77.46 प्रतिशत जल भराव अपने उच्च स्तर पर हैं।  प्रदेश में उपलब्ध जल का उपयोग किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं से नियंत्रित एवं चरणबद्ध रूप से जल छोड़ा जा रहा है। रविशंकर सागर (गंगरेल) परियोजना से नहरों के माध्यम से धमतरी एवं रायपुर क्षेत्रों में निस्तारी एवं सिंचाई जल उपलब्ध कराया जा रहा है। दुधावा जलाशय से मुख्य नहरों के जरिए पानी दिया जा रहा है। सोंढूर परियोजना से नहर प्रणाली के माध्यम से जल छोड़ा जा रहा है। कोडार जलाशय से लगभग 6.84 क्यूमेक्स (घन मीटर प्रति सेकण्ड) जल नहरों के माध्यम से छोड़ा जा रहा है। इसके अतिरिक्त परालकोट परियोजना से दाएं एवं बाएं तट नहरों के जरिए जल वितरण किया जा रहा है। मध्यम परियोजनाओं में भी खरखरा, गोंडली, पिपरिया, सारोदा, जुमका, केदार नाला एवं अन्य जलाशयों से आवश्यकता अनुसार नहरों एवं स्लुइस गेट के माध्यम से जल छोड़ा जा रहा है, जिससे रबी फसलों की अंतिम सिंचाई एवं ग्रीष्मकालीन फसलों एवं निस्तारी के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जा सके। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जल का सदुपयोग तथा सभी सिंचित क्षेत्रों को आवश्यकतानुसार पानी मिल सके। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए जल संसाधनों का वैज्ञानिक एवं प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष जलाशयों में बेहतर जल भराव समन्वित प्रयासों का परिणाम है। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश के किसानों को समय पर पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध हो, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हो और किसानों की आय में सुधार हो। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जलाशयों के जल स्तर की सतत निगरानी करते हुए जल का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

धमतरी: नगरी क्षेत्र में नई संजीवनी, फुटहामुड़ा नहर परियोजना से सुधरेगा ग्रामीण सिंचाई परिदृश्य

 धमतरी : नगरी क्षेत्र को सिंचाई में नई संजीवनीः फुटहामुड़ा नहर परियोजना से बदलेगा ग्रामीण परिदृश्य धमतरी धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में बहुप्रतीक्षित फुटहामुड़ा नहर निर्माण परियोजना अब तेज गति से आगे बढ़ रही है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है, जिससे किसानों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। फुटहामुड़ा नहर परियोजना से बदलेगा ग्रामीण परिदृश्य       फुटहामुड़ा नहर का निर्माण गंगरेल जलाशय के सैंडल डैम, ग्राम फुटहामुड़ा से प्रारंभ होकर लगभग 19.74 किलोमीटर लंबाई में किया जा रहा है। परियोजना के पूर्ण होने पर नगरी विकासखंड के 22 ग्रामों के लगभग 1940 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों का रकबा भी बढ़ेगा और किसानों की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।       परियोजना के क्रियान्वयन में प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक प्रगति हो चुकी है। मुख्य नहर से प्रभावित 10 ग्रामों में कुल 14.33 हेक्टेयर भूमि का भू-अर्जन पूर्ण कर लिया गया है। वहीं वन प्रकरण से प्रभावित 24.42 हेक्टेयर भूमि की अंतिम चरण की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। इसके साथ ही निर्माण कार्य में आने वाली सभी प्रमुख प्रशासनिक बाधाएं दूर हो गई हैं, जिससे कार्य अब निर्बाध गति से आगे बढ़ रहा है।        जिला प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग द्वारा बताया गया कि यह परियोजना केवल सिंचाई सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। सिंचाई सुनिश्चित होने से किसानों की आय बढ़ेगी, कृषि आधारित रोजगार के अवसर सृजित होंगे और पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।       कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने परियोजना को नगरी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा, “फुटहामुड़ा नहर परियोजना नगरी विकासखंड के किसानों के लिए दीर्घकालीन लाभ देने वाली योजना है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूर्ण हो। यह परियोजना कृषि समृद्धि के साथ-साथ क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा देगी।”        उल्लेखनीय है कि पिछले माह उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा स्थल का दौरा कर निर्माण प्रगति, तकनीकी पक्षों एवं आवश्यक संसाधनों का गहन निरीक्षण किया गया था। अधिकारियों के मार्गदर्शन में अब कार्य को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। फुटहामुड़ा नहर परियोजना नगरी अंचल में हरित क्रांति की नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।