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राजस्थान का पहला एयरपोर्ट, जल संरक्षण में जयपुर इंटरनेशनल ने रचा इतिहास

जयपुर जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने 'वॉटर पॉजिटिव' का दर्जा हासिल किया है, जो सतत (सस्टेनेबल) संचालन की दिशा में एक बड़ा कदम है.  इस उपलब्धि के साथ जयपुर एयरपोर्ट भारत के चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल हो गया है, और राजस्थान का पहला एयरपोर्ट बन गया है, जिसने यह मान्यता प्राप्त की है. यह प्रमाण ग्लोबल कंसल्टिंग कंपनी ब्यूरो वेरिटास ने एयरपोर्ट की जल प्रबंधन प्रणाली के विस्तृत मूल्यांकन के बाद दिया है. वॉटर पॉजिटिव एयरपोर्ट के रूप में, जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपनी प्रभावी जल प्रबंधन व्यवस्था के जरिए जितना पानी उपयोग करता है, उससे अधिक पानी का संरक्षण रीसायक्लिंग एवं पुनर्भरण के माध्यम से करता है. 18 गहरे एक्वीफर रिचार्ज पिट्स स्थापित   जल संकट वाले क्षेत्र में स्थित जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हमेशा से ही जिम्मेदार प्रबंधन, परिचालन स्थिरता और दीर्घकालिक स्थिरता के माध्यम से जल के कुशल प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध रहा है. पिछले कुछ वर्षों में, हवाई अड्डे ने जल के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसी दिशा में वर्षा जल संचयन और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए 18 गहरे एक्वीफर रिचार्ज पिट्स भी स्थापित किए गए हैं. 100% ट्रीटेड पानी का रीसायकल इस उपलब्धि पर जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रवक्ता ने कहा, "यह उपलब्धि एयरपोर्ट के लगातार प्रयासों का परिणाम है, जो वॉटर पॉजिटिव बनने की दिशा में किए गए हैं.  इस प्रमाणन के पीछे तीन मुख्य आधार है, 100% ट्रीटेड पानी का रीसायकल और पुनः उपयोग, ताजे पानी की खपत में कमी करना, और प्रभावी  वर्षा जल संचयन व्यवस्था." एयरपोर्ट ने सेंसर आधारित नल लगाए जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट 100% अपशिष्ट पानी (wastewater) को रीसायकल कर उसे बागवानी और हरियाली में उपयोग करता है. पानी की खपत कम करने के लिए एयरपोर्ट ने सेंसर आधारित नल लगाए हैं, और वॉटरलेस यूरिनल जैसी तकनीकों को अपनाने पर काम कर रहा है. इसके अलावा, पानी के उपयोग की निगरानी के लिए डिजिटल वॉटर फ्लो मीटर भी लगाए गए हैं, जिससे जल प्रबंधन और अधिक प्रभावी हो सके.

ईरान-इजराइल तनाव का राजस्थान पर ‘साइड इफेक्ट’, शेखावाटी के हजारों प्रवासियों का वतन लौटना हुआ मुश्किल

जयपुर/सीकर  पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने राजस्थान के लोगों और उनके सुनहरे सपनों के बीच एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा साइड इफेक्ट अब जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर साफ नजर आ रहा है। खाड़ी देशों को जोड़ने वाली लाइफलाइन कही जाने वाली उड़ानें न केवल रद्द हो रही हैं, बल्कि जो बची हैं, उनका किराया आसमान छू रहा है। 24 घंटे की देरी और रूट का फेरबदल ईरान के ऊपर से हवाई क्षेत्र बंद होने और सुरक्षा कारणों से विमान कंपनियों ने जयपुर से अपनी उड़ानों में भारी कटौती की है। इसका सबसे बुरा असर जयपुर-अबू धाबी और दुबई रूट पर पड़ा है। पहले जहां जयपुर से रोजाना दो उड़ानें संचालित होती थीं, अब केवल एक शाम की फ्लाइट ही उड़ान भर पा रही है। दुबई की दोनों नियमित उड़ानें लगातार रद्द चल रही हैं, जबकि मस्कट की फ्लाइट अब सप्ताह में केवल दो दिन ही संचालित हो रही है। शेखावाटी (सीकर, चूरू, झुंझुनूं) के हजारों प्रवासी, जो ईद या छुट्टियों पर घर आने की तैयारी में थे, अब अधर में लटके हैं। किराया नहीं, 'करंट' लगा रही हैं टिकटें युद्ध के कारण विमानों को अब लंबे रूट से उड़ान भरनी पड़ रही है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है। इसका बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ा है। इटली और खाड़ी देशों से भारत आने वाली टिकटें, जो पहले 50,000 रुपये के आसपास थीं, अब 1,50,000 रुपये तक पहुंच गई हैं। एक सामान्य मजदूर या कामगार के लिए तीन गुना किराया देना नामुमकिन साबित हो रहा है। शेखावाटी के प्रवासियों का छलका दर्द सीकर के जालेऊ निवासी हसन खान की कहानी उन हजारों लोगों की बानगी है जो इस समय खाड़ी देशों के एयरपोर्ट पर फंसे हैं। हसन बताते हैं, 'मेरी शारजाह-जयपुर फ्लाइट बिना सूचना रद्द कर दी गई। मुझे दुबई से टैक्सी के जरिए मस्कट भेजा गया और वहां से दूसरी फ्लाइट लेकर जयपुर पहुंच सका। इस सफर में जितना पैसा खर्च हुआ, उससे कहीं ज्यादा मानसिक तनाव झेलना पड़ा।' कई प्रवासियों को डर है कि अगर तनाव और बढ़ा, तो उनका वतन लौटना तो दूर, वहां नौकरी बचाना भी मुश्किल हो जाएगा। व्यापार और पर्यटन पर भी संकट जयपुर एयरपोर्ट से होने वाला 'कार्गो व्यापार' भी प्रभावित हुआ है। कीमती पत्थर, रत्न और हस्तशिल्प का निर्यात करने वाले व्यापारियों के ऑर्डर फंसे हुए हैं। पर्यटन सीजन के अंत में विदेशी सैलानियों की आवाजाही में भी गिरावट दर्ज की गई है।