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CM भजनलाल का मास्टर प्लान: 72 बीट्स, ज्यादा पुलिस और ITMS से बदलेगा जयपुर ट्रैफिक

 जयपुर जयपुर की सड़कों पर लगने वाले लंबे जाम और ट्रैफिक की किच-किच को खत्म करने के लिए राजस्थान सरकार ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आदेश पर बनी इस योजना का मकसद सिर्फ ट्रैफिक रोकना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को हाई-टेक और स्मार्ट बनाना है. अब जयपुर का ट्रैफिक सिस्टम पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि नई तकनीक और ज्यादा पुलिस फोर्स के साथ चलेगा. अफसरों की संख्या बढ़ी, हर इलाके पर होगी पैनी नजर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए सरकार ने पुलिस अधिकारियों की टीम को काफी बड़ा कर दिया है. पहले निगरानी के लिए एडीसीपी ट्रैफिक के 2 पद थे जिन्हें अब बढ़ाकर 4 कर दिया गया है. इसी तरह एसीपी ट्रैफिक के पदों को 4 से बढ़ाकर 8 और ट्रैफिक इंस्पेक्टरों की संख्या 15 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है. इससे फायदा यह होगा कि जयपुर के हर कोने में एक बड़ा अधिकारी मौजूद रहेगा और जमीनी स्तर पर काम बेहतर होगा. ड्रोन कैमरों से निगरानी, 72 बीट्स का शहर को बांटा अब ट्रैफिक पुलिस सिर्फ चौराहों पर खड़ी नजर नहीं आएगी, बल्कि आसमान से भी ड्रोन के जरिए आप पर नजर रखी जाएगी. पूरे शहर को 72 ट्रैफिक बीट्स में बांटा गया है, जहां अलग-अलग टीमें तैनात रहेंगी ताकि पीक ऑवर्स में जाम की स्थिति न बने. इसके साथ ही ट्रैफिक पुलिस को 20 मॉडिफाइड मोटरसाइकिलें दी गई हैं, ताकि पुलिसकर्मी भीड़भाड़ वाली तंग गलियों में भी तुरंत पहुंच सकें और जाम खुलवा सकें. टोंक रोड को बनाया जाएगा सबसे बेहतरीन रास्ता इस नए प्लान के तहत सबसे पहले टोंक रोड की सूरत बदली जाएगी. यादगार से लेकर सांगानेर तक के रास्ते को एक 'मॉडल रोड' के तौर पर विकसित किया जा रहा है. यहां सड़कों के डिजाइन को इस तरह ठीक किया जाएगा कि बेवजह के कट्स बंद हों और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ साफ मिले. सड़क पर यू-टर्न और क्रॉसिंग को वैज्ञानिक तरीके से सेट किया जाएगा ताकि गाड़ियों की रफ्तार न थमे. अतिक्रमण और गलत पार्किंग पर चलेगा डंडा जाम की एक बड़ी वजह सड़कों पर होने वाले कब्जे और गलत तरीके से खड़ी गाड़ियां हैं. अब सरकार इसे लेकर बहुत सख्त है. सड़कों और फुटपाथों से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे और अवैध पार्किंग के खिलाफ अतिरिक्त क्रेनें तैनात की जाएंगी. शहर में पार्किंग और नो-पार्किंग जोन के बोर्ड साफ-साफ लगाए जाएंगे ताकि जनता को पता रहे कि गाड़ी कहां खड़ी करनी है. गाड़ियों की संख्या देखकर बदलेगी लाइट अब आपको लाल बत्ती पर बेवजह लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. सरकार 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' लागू करने जा रही है, जिससे सिग्नल अब 'डायनेमिक' होंगे. यानी लाइटें खुद गाड़ियों की भीड़ को देखकर तय करेंगी कि किधर का रास्ता कितनी देर खोलना है. सरकार का मानना है कि अगर जनता और प्रशासन मिलकर साथ दें, तो जयपुर की सड़कों को वाकई में जाम मुक्त और सुरक्षित बनाया जा सकता है.

सीकर रोड पर जाम से फंसे VIP, लापरवाही पड़ गई भारी, पहली बार बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज

जयपुर राजधानी जयपुर में 9 मार्च को आयोजित एक हाई-प्रोफाइल शादी समारोह अब पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। लाडनू से कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर के विवाह समारोह के दौरान सीकर रोड पर लगे कई किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में एक आईपीएस अधिकारी समेत कुल 6 पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। बताया जा रहा है कि जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से इस घटना को गंभीरता से लिया गया था और स्पेशल सीपी स्तर पर इसकी विस्तृत जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजे जाने के बाद विजिलेंस टीम ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। सूत्रों के मुताबिक, जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। शादी समारोह बना जाम की वजह जानकारी के अनुसार 9 मार्च को हरमाड़ा क्षेत्र में सीकर रोड स्थित एक रिसॉर्ट में विधायक मुकेश भाकर और आरजेएस अधिकारी कोमल मीणा का विवाह समारोह आयोजित हुआ था। इस समारोह में सत्ता और विपक्ष के कई बड़े नेता, वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस के आला अधिकारी शामिल हुए थे। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल के आसपास वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया, जिससे सीकर रोड पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालात ऐसे हो गए कि कई किलोमीटर तक वाहन रेंगते नजर आए और आम लोगों के साथ-साथ कई वीआईपी मेहमान भी जाम में फंस गए। वायरलेस मैसेज के बावजूद नहीं खुला जाम सूत्रों के अनुसार, जाम की स्थिति को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम और वायरलेस सेट पर लगातार संदेश प्रसारित किए जा रहे थे। बावजूद इसके, मौके पर ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने में काफी देरी हुई। कई वीआईपी को जाम से निकलने में लंबा समय लग गया, जिससे पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और मामले की जांच के आदेश दिए गए। स्पेशल कमिश्नर ने सौंपी जांच रिपोर्ट मामले की जांच स्पेशल कमिश्नर ओमप्रकाश को सौंपी गई थी। उन्होंने मौके की परिस्थितियों, ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की भूमिका और ट्रैफिक मैनेजमेंट की स्थिति का आकलन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी। रिपोर्ट में लापरवाही के बिंदुओं को चिन्हित किया गया, जिसके आधार पर विजिलेंस टीम ने कार्रवाई शुरू की है। इन अधिकारियों को माना गया जिम्मेदार पुलिस जांच में जिन अधिकारियों को प्राथमिक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें एसीपी चोमू आईपीएस उषा यादव, एसीपी ट्रैफिक किशोर सिंह भदोरिया, ट्रैफिक इंस्पेक्टर मंजू चौधरी, संपत राज, नवरत्न धौलिया और हरमाड़ा थाना अधिकारी उदय सिंह शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है और उनसे पूछा गया है कि ट्रैफिक प्रबंधन में चूक क्यों हुई। जांच के दौरान हुए तबादले गौरतलब है कि जांच प्रक्रिया के दौरान ही एसीपी चोमू उषा यादव का तबादला कर उन्हें हाड़ी रानी बटालियन में कमांडेंट नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जयपुर के डीसीपी ट्रैफिक का भी ट्रांसफर किया जा चुका है। हालांकि इन तबादलों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन इसे इस मामले से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पहली बार उच्च अधिकारियों पर भी गिरी गाज सूत्रों के मुताबिक, यह पहला मामला है जब ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति के लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि उच्च अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। पुलिस मुख्यालय का यह कदम यह संकेत देता है कि अब ट्रैफिक प्रबंधन में किसी भी स्तर की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। आगे क्या? अब सभी की नजर संबंधित अधिकारियों के जवाब पर टिकी हुई है। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो विभागीय कार्रवाई के तहत चार्जशीट, सस्पेंशन या अन्य अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।