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वर्षा जल संरक्षण में डिंडोरी ने देश में प्राप्त किया पहला स्थान, खंडवा दूसरे स्थान पर

जल गंगा संवर्धन अभियान वर्षा जल संरक्षण में प्रदेश का जनजातीय जिला डिंडोरी देश में प्रथम स्थान पर, खंडवा देश में दूसरे स्‍थान पर जिलों की सूची में खंडवा देश में दूसरे स्‍थान पर भोपाल  मध्यप्रदेश ने केंद्र सरकार के जल संचय जन भागीदारी अभियान में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 22 अप्रैल को जारी रैंकिंग में प्रदेश का डिंडोरी जिला देश में पहले और खंडवा जिला दूसरे स्थान पर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्षा जल संरक्षण के आह्वान के अनुरूप प्रदेश सरकार मिशन मोड में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक “जल गंगा संवर्धन अभियान” संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन करना और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है। अभियान के तहत प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। खेत तालाब, कूप रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर, बोरवेल रिचार्ज सिस्टम, रिचार्ज शाफ्ट और रूफटॉप वर्षा जल संचयन जैसी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही जलाशयों और गड्ढों का पुनरुद्धार भी किया जा रहा है। डिंडोरी में 1.23 लाख से अधिक जल संरचनाएं जल संचय जनभागीदारी अभियान के राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी एवं आयुक्त अवि प्रसाद ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा डैशबोर्ड के माध्यम से प्रदेश में किए जा रहे कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। 22 अप्रैल की रैंकिंग में डिंडोरी जिले में देश में सर्वाधिक 1 लाख 23 हजार से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। खंडवा जिले में 87 हजार से अधिक संरचनाएं निर्मित की गई हैं। प्रदेश में 3.97 लाख से अधिक जल संरचनाएं निर्मित प्रदेश में अब तक 3 लाख 97 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। वर्षा जल संरक्षण के इस कार्य में मध्यप्रदेश का उल्लेखनीय योगदान है। प्रधानमंत्री का संदेश: “जहां गिरे, जब गिरे, वर्षा जल का संग्रह करें” जल संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा “जल संचय, जनभागीदारी अभियान” संचालित किया जा रहा है। यह पहल “जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के अंतर्गत 6 सितंबर 2024 से प्रारंभ की गई है। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जल प्रबंधन के समग्र दृष्टिकोण पर आधारित है। जनभागीदारी से सुदृढ़ हो रहा जल संरक्षण अभियान का प्रमुख उद्देश्य वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, भूजल पुनर्भरण को सुदृढ़ करना और जल संरक्षण में जनभागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके लिए कम लागत वाली वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत बोरवेल रिचार्ज सिस्टम, रिचार्ज शाफ्ट, रूफटॉप वर्षा जल संचयन, जलाशयों एवं गड्ढों का पुनर्निर्माण और पुनरुद्धार जैसे कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” के माध्यम से इन कार्यों को गति दी जा रही है। इस पहल के तहत विभिन्न संस्थाओं, संगठनों और नागरिकों को जल संरक्षण कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही जन-जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से जल संरक्षण तथा उसके कुशल उपयोग के प्रति व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। जल संचय, जनभागीदारी अभियान जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक प्रभावी और दीर्घकालिक पहल है। यह सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।  

जल गुणवत्ता निगरानी पर जल वाहिनियों का प्रशिक्षण सफल

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के तहत जल वाहिनियों का चौथा रिफ्रेशर प्रशिक्षण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। खड़गवा विकासखंड के विभिन्न ग्राम पंचायतों में आयोजित इस प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण में फील्ड टेस्ट किट (FTK) के माध्यम से जल गुणवत्ता जांच, रासायनिक-भौतिक तत्वों की पहचान और परिणामों के विश्लेषण की जानकारी दी गई। साथ ही जल जनित बीमारियों से बचाव और स्वच्छ जल के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा हुई। व्यवहारिक सत्र में प्रतिभागियों को स्वयं जल परीक्षण कराकर उनकी दक्षता बढ़ाई गई तथा WQMIS पोर्टल पर डेटा एंट्री और रजिस्टर संधारण की प्रक्रिया सिखाई गई। विभाग ने जल स्रोतों की नियमित जांच और जनजागरूकता पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जल वाहिनियों की क्षमता में वृद्धि हो रही है, जिससे ग्रामीण स्तर पर जल गुणवत्ता निगरानी और स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूती मिल रही है।

जल गुणवत्ता निगरानी को मिली मजबूती: जल वाहिनियों का चौथा रिफ्रेशर प्रशिक्षण सफल

जल गुणवत्ता निगरानी को मिली मजबूती: जल वाहिनियों का चौथा रिफ्रेशर प्रशिक्षण सफल मनेन्द्रगढ़/एमसीबी ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने की दिशा में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के तहत जल वाहिनियों का चौथा रिफ्रेशर प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। विकासखंड खड़गवां के ग्राम पंचायत पेंड्री, बोडेमुड़ा, रतनपुर, कोचका, बेल्कामर, गिधमुड़ी, लकरापारा, कटकोना, मंगोरा एवं उधनापुर में चरणबद्ध रूप से आयोजित इस प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में जल वाहिनियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फील्ड टेस्ट किट (FTK) के माध्यम से जल गुणवत्ता जांच की पूरी प्रक्रिया सिखाई गई। पानी में मौजूद रासायनिक एवं भौतिक तत्वों की पहचान, मानकों का परीक्षण और परिणामों के विश्लेषण की विधियों पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, नियमित जांच के जरिए जल स्रोतों की सतत निगरानी के महत्व को भी समझाया गया। विशेषज्ञों ने डायरिया, टाइफाइड और हैजा जैसी जल जनित बीमारियों के खतरों और उनके बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। जल वाहिनियों को अपने-अपने गांवों में स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। कार्यक्रम में व्यवहारिक प्रशिक्षण को प्रमुखता दी गई, जिसमें प्रतिभागियों ने स्वयं FTK किट से जल परीक्षण कर अपनी दक्षता बढ़ाई। साथ ही, जल गुणवत्ता रजिस्टर संधारण, परीक्षण रिपोर्ट तैयार करने और WQMIS पोर्टल पर डेटा एंट्री की प्रक्रिया का भी प्रशिक्षण दिया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जल वाहिनियों की कार्यक्षमता में वृद्धि हो रही है और वे ग्रामीण स्तर पर जल गुणवत्ता निगरानी में अहम भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल तकनीकी सशक्तिकरण का माध्यम बना, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुरक्षा और जनजागरूकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।

जल गंगा संवर्धन अभियान-2026: प्रदेश में जल संरक्षण को मिल रही नई दिशा

जल गंगा संवर्धन अभियान-2026: प्रदेश में जल संरक्षण को मिल रही नई गति अभियान में 6242 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे 2 लाख 44 हजार से अधिक कार्य भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश में बड़ी संख्या में खेत तालाब, अमृत सरोवर, रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सूखे कुँओं को नया जीवन देने का कार्य किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा समूचे अभियान की निरंतर निगरानी रखी जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अभियान के तहत पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के 2 लाख 44 हजार से अधिक कार्य किए जा रहे हैं, जिसकी लागत 6242 करोड़ रुपये हैं। इस वर्ष के जल गंगा संवर्धन अभियान में पूर्व के कार्य की पूर्णता पर विशेष जोर दिया गया है। मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त अवि प्रसाद ने बताया कि इस साल जल गंगा संवर्धन अभियान: 2025 के लंबित कार्यों तथा महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत चल रहे पानी से संबंधित कार्यों की पूर्णता लक्षित की गई है। लक्ष्य के अनुक्रम में 84 हजार से अधिक कार्य पूरे प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान: 2026 की प्रगति भी दिखाई देने लगी है। 19 मार्च से शुरू हुए अभियान के तीसरे चरण को महज 20 दिन ही पूरे हुए और 84 हजार से अधिक कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। ये वे कार्य हैं जो पिछले वर्ष अधूरे रह गए थे। जल गंगा संवर्धन अभियान में टॉप 5 जिले जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा, उज्जैन, खरगोन, डिंडौरी और बालाघाट टॉप 5 जिलों में शामिल हैं।  

बलौदाबाजार : ग्राम पंचायत तेलासी में पहुंचा हर घर नल से जल,प्रमाणीकरण के साथ संचालन व्यवस्था हस्तांतरित

बलौदाबाजार  भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन,हर घर जल के अंतर्गत विकासखंड पलारी के ग्राम पंचायत तेलास में ग्राम के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। इसके साथ हर घर जल प्रमाणीकरण प्राप्त किया है। उपलब्धि के उपरांत जलापूर्ति योजना का विधिवत हस्तांतरण ग्राम पंचायत को कर दिया गया है। योजना के सफल क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। ग्राम पंचायत स्तर पर पाइपलाइन विस्तार, घरेलू नल कनेक्शन एवं जल संरचनाओं का निर्माण गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया गया।योजना के दीर्घकालिक संचालन एवं रख-रखाव को सुनिश्चित करने हेतु ग्राम पंचायत में आवश्यक व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं।योजना के संचालन हेतु प्रति परिवार ₹80 प्रतिमाह जल कर निर्धारित किया गया है।जल आपूर्ति के नियमित संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर पंप ऑपरेटर नियुक्त कोयन गया है। योजना के संचालन, रख-रखाव एवं निगरानी की जिम्मेदारी ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति को सौंपी गई है।जल वाहिनी टीम द्वारा समय-समय पर जल की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जा रही है।

बिराजपाली में हर घर जल योजना से आई क्रांति, नल से जल से जीवन में आई सरलता

हर घर जल से बदली बिराजपाली की तस्वीर, हर घर में नल से जल पहुंचने से जीवन हुआ आसान रायपुर  महासमुंद जिलें के पिथौरा विकासखंड का ग्राम बिराजपाली आज “हर घर जल” के लक्ष्य का हासिल कर लिया है। कभी पेयजल के लिए हैंडपंप और दूरस्थ स्रोतों पर निर्भर रहने वाले ग्रामीण अब घर बैठे स्वच्छ पानी का लाभ उठा रहे हैं। इस सुविधा ने न केवल उनकी दिनचर्या को सरल बनाया है, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाया है। ग्राम बिराजपाली में 21 फरवरी 2026 को “हर घर जल” का सफल प्रमाणीकरण किया गया। योजना के तहत गांव के 182 घरों को नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे प्रत्येक परिवार तक नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। जल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 94.27 लाख रुपये की लागत से 40 किलोलीटर क्षमता की ओवरहेड टंकी का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही करीब 2270 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है, जिसके जरिए घर-घर पानी पहुंचाया जा रहा है। गांव में 13 हैंडपंप और 3 पावर पंप भी उपलब्ध हैं, जो जल स्रोतों को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करते हैं। योजना के सुचारू संचालन और रखरखाव के लिए ग्राम जल समिति का गठन किया गया है, जो प्रत्येक परिवार से 60 रुपये प्रतिमाह जलकर के रूप में संग्रहित कर रही है। इस उपलब्धि में सरपंच श्री एतराम साहू और सचिव श्रीमती पुष्पलता चौहान के नेतृत्व तथा ग्रामीणों के सहयोग की अहम भूमिका रही है। श्रीमती श्याम बाई बताती हैं कि अब पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। यह सुविधा उनके दैनिक जीवन में एक सुखद बदलाव बनी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति

नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति  जल जीवन मिशन से हर घर पहुंचा नल जल नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा, क्षेत्र में बदलाव की शुरुआत रायपुर  केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन ने सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित ग्राम सालातोंग में बदलाव की नई इबारत लिख दी है। 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में इसी लक्ष्य को साकार करते हुए नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत कोंटा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम सालातोंग में अब हर घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंच रहा है। ग्राम सालातोंग, जो कोंटा से लगभग 100 किमी तथा जिला मुख्यालय सुकमा से 90 किमी दूर स्थित है, लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट से जूझता रहा। गांव के लगभग 80 घरों के लोग पीने और घरेलू उपयोग के लिए एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के मौसम में जब महीनों तक बारिश नहीं होती थी, तब नाले का जलस्तर इतना घट जाता था कि ग्रामीणों को बेहद सीमित मात्रा में पानी निकालना पड़ता था। कई बार पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष परेशानी होती थी। अब जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव में 100 नल कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य तेजी से किया गया, जिससे ग्रामीणों को घर बैठे शुद्ध जल उपलब्ध होने लगा है। मिशन के लागू होने के बाद गांव में न केवल जल संकट दूर हुआ, बल्कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जलजनित बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है। जल जीवन मिशन के तहत सालातोंग में जल संरक्षण और जल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। गांव के जल स्रोतों सोलर आधारित सिस्टम एवं हैंडपंप का नियमित रूप से जल गुणवत्ता परीक्षण किया जा रहा है। इस कार्य में “जल बहिनियाँ” भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और गांव की शिक्षित महिलाएं शामिल हैं। इन्हें जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है, ताकि वे स्वयं पानी की जांच कर ग्रामीणों को सुरक्षित जल उपलब्धता सुनिश्चित कर सकें। ग्रामीणों ने इस मिशन के लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता, घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे हमारा जीवन आसान और सुरक्षित हुआ है। जल जीवन मिशन ने सालातोंग में स्वच्छ जल पहुंचाकर यह साबित कर दिया है कि सरकार की योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जल गंगा संवर्धन अभियान में स्टॉप डैम और चेक डैम का मरम्मत व नवीनीकरण कार्य

जल गंगा संवर्धन अभियान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 1.0 में निर्मित स्टॉप डैम एवं चेक डैम की मरम्मत एवं नवीनीकरण के किए जाएंगे कार्य वाटरशेड विकास के अंतर्गत 68 कंटूर ट्रेंच, 91 गेबियन संरचनाएं, 842 खेत-तालाब, 26 स्टॉप डैम, 204 चेक डैम, 281 तालाब, 76 रिचार्ज शाफ्ट सहित 19 अन्य जल संरचनाओं का किया जाएगा निर्माण भोपाल  जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान अभियान चलाया जा रहा है। 19 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 30 जून 2026 तक चलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह महाअभि‍यान केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास, ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण एवं भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन-अभियान के रूप में चल रहा है। इस वर्ष अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास के कार्यों को भी शामिल किया गया है। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत 68 कंटूर ट्रेंच, 91 गेबियन संरचनाएं, 842 खेत-तालाब, 26 स्टॉप डैम, 204 चेक डैम, 281 तालाब, 76 रिचार्ज शाफ्ट तथा 19 अन्य जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन कार्यों के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण, मृदा संरक्षण एवं जल उपलब्धता में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। इससे किसानों को सिंचाई सुविधा में विस्तार एवं कृषि उत्पादन में वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्‍त हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 1.0 के अंतर्गत पूर्व में निर्मित स्टॉप डैम एवं चेक डैम की मरम्मत एवं नवीनीकरण के कार्य भी किए जाएंगे। इससे न केवल इन संरचनाओं की कार्यक्षमता पुनर्स्थापित होगी, बल्कि जल संरक्षण के पूर्व प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता एवं सतत निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकी का उपयोग किया जाएगा। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की निगरानी WMS पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे कार्यों की वास्तविक समय पर प्रगति का आंकलन संभव हो सकेगा। वाटरशेड विकास 1.0 के कार्यों का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर से कर उन्हें मनरेगा पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे उनके अनुश्रवण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।  

जल गंगा संवर्धन अभियान – 2026: जनभागीदारी से पुनर्जीवित हो रहे प्राचीन जल स्रोत

जल गंगा संवर्धन अभियान – 2026: जनभागीदारी से पुनर्जीवित हो रहे प्राचीन जल स्रोत सागर संभाग में फलीभूत हो रहा जल गंगा संवर्धन अभियान तालाबों, नदियों और बावड़ियों के संरक्षण का संकल्प बन रहा जन-आंदोलन भोपाल  सागर संभाग में जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' धरातल पर फलीभूत होने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सागर संभाग के सभी जिलों में प्राचीन तालाबों, नदियों, पोखरों और बावड़ियों को पुनर्जीवित करने के लिए चलाए गए पिछले वर्षों के अभियान के सुखद और अपेक्षित परिणाम सामने आए हैं। इसी कड़ी में इस वर्ष भी 19 मार्च, 2026 से संभाग के प्रत्येक जिले में इस अभियान का उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया है। जनभागीदारी की अनूठी मिसाल जल गंगा संवर्धन अभियान की सबसे बड़ी विशेषता 'जनभागीदारी' रही है। सागर संभाग के हजारों नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों ने कंधे से कंधा मिलाकर इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग दे रहे हैं। श्रमदान के माध्यम से प्राचीन जल स्रोतों की गाद निकालने, साफ-सफाई करने और उनके मूल स्वरूप को लौटाने का कार्य निरंतर जारी है। इस अभियान के तहत सागर जिले में नगर पालिका खुरई के तालाब घाट की सफाई के साथ इस वर्ष का आगाज हुआ। संभागीय मुख्यालय पर ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील के चकराघाट पर जल पूजन और सफाई कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं खुरई की अम्मावाड़ी झील को भी स्वच्छ किया गया। छतरपुर जिले में तालाबों का कायाकल्प और ''जल महोत्सव'' आयोजित छतरपुर जिले में विधायक श्रीमती ललिता यादव और जिला प्रशासन के नेतृत्व में सांतरी तलैया से स्वच्छता कार्य शुरू किया गया। जनपद नौगांव की ग्राम पंचायत विकौरा और लवकुशनगर के छठी बम्होरी में तालाबों का कायाकल्प किया जा रहा है। इसी प्रकार निवाड़ी जिले के ग्राम काछीपुरा में विधायक अनिल जैन के नेतृत्व में 'जल महोत्सव 2026' के तहत भव्य जल रैली निकाली गई और ग्रामीणों को जल शपथ दिलाई गई। पन्ना और टीकमगढ़ जिले में नवांकुर संस्थाओं की पहल पन्ना और टीकमगढ़ जिलों में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के माध्यम से नवांकुर संस्थाओं ने कमान संभाली है। पन्ना के ग्राम बड़ागांव स्थित मिढ़ासन नदी के उद्गम स्थल 'महरा धाम' की सफाई की गई, तो वहीं टीकमगढ़ के गंगासागर तालाब और अचर्रा में गाद निकालने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। दमोह जिले में जनभागीदारी से मजबूत हुआ ''जल गंगा संवर्धन अभियान'' दमोह जिले में भी जल गंगा संवर्धन अभियान को विकास कार्यों से जोड़ा गया है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री लखन पटेल ने ग्राम रजवांस में तालाब की साफ-सफाई में श्रमदान किया। इस अवसर पर क्षेत्र के विकास के लिए सामुदायिक भवनों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया गया। साथ ही जल निगम की परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को जल सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' केवल जल स्रोतों की सफाई का जरिया नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महा-संकल्प है। सागर संभाग के हर जिले से आ रही सकारात्मक खबरें इस बात का प्रमाण हैं कि जब समाज और सरकार मिलकर प्रयास करते हैं, तो प्रकृति का संरक्षण सहज और प्रभावी हो जाता है।  

जल जीवन मिशन के लिए केंद्र से बड़ी मदद, 4000 करोड़ फंड और कर्ज सीमा में बढ़ोतरी

भोपाल  जल जीवन मिशन में खर्च हुई राशि को देने के केंद्र ने अपनी सहमति दे दी है। मप्र ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल को बताया कि वर्ष 2024-25 का 4500 करोड़ और 2025-26 का 5000 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है। मप्र ने खुद 9000 करोड़ लगाकर योजना को चालू रखा है। योजना को पूरा करने का वक्त 2028 तय है, लेकिन 2026 में अभी तक मप्र ने 99% काम पूरा कर लिया। पाटिल ने इसकी बधाई दी और राशि देने पर सहमति दे दी। मार्च 2026 से पहले मप्र को जल जीवन मिशन के 4000 करोड़ रुपए मिल सकते हैं। सीआर पाटिल से मिलने के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से मिले। इसमें सीएम ने कहा कि मप्र की औसत ग्रोथ 10% है। वर्ष 2026-27 में जीएसडीपी बढ़कर 18 लाख 48 हजार करोड़ होगा। लिहाजा इसी आधार पर मप्र को बाजार से कर्ज लेने की सीमा तय की जाए। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी इस दौरान सीएम के साथ थे। वित्त का कहना है कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने सहमति दे दी है। इससे मप्र को कई प्रकार से लाभ मिलेगा। सीएम गुरुवार को 5 मुद्दों को लेकर दिल्ली गए थे। इसमें सिंहस्थ के लिए राशि की मांग करना भी शामिल रहा। निकायों का पैसा मांगा     सीएम ने नगरीय तथा ग्रामीण निकायों के लिए 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित पूरी राशि को देने की बात रखी। अभी कम पैसा मिला है। निकायों से संबंधित मामले में वित्तीय वर्ष 2023-24 की 512 करोड़ एवं 2025-26 की 1,181 करोड़ की राशि मिलना है।     पंचायती राज मंत्रालय व जल शक्ति मंत्रालय ने वर्ष 2025-26 के लिए ही 1097 करोड़ जारी करने का अनुरोध है। हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के लिए 4,600 करोड़ के विरूद्ध 3,690 करोड़ ही मिले हैं।