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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जल गंगा संवर्धन अभियान में स्टॉप डैम और चेक डैम का मरम्मत व नवीनीकरण कार्य

जल गंगा संवर्धन अभियान प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 1.0 में निर्मित स्टॉप डैम एवं चेक डैम की मरम्मत एवं नवीनीकरण के किए जाएंगे कार्य वाटरशेड विकास के अंतर्गत 68 कंटूर ट्रेंच, 91 गेबियन संरचनाएं, 842 खेत-तालाब, 26 स्टॉप डैम, 204 चेक डैम, 281 तालाब, 76 रिचार्ज शाफ्ट सहित 19 अन्य जल संरचनाओं का किया जाएगा निर्माण भोपाल  जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान अभियान चलाया जा रहा है। 19 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 30 जून 2026 तक चलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह महाअभि‍यान केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास, ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण एवं भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन-अभियान के रूप में चल रहा है। इस वर्ष अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास के कार्यों को भी शामिल किया गया है। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत 68 कंटूर ट्रेंच, 91 गेबियन संरचनाएं, 842 खेत-तालाब, 26 स्टॉप डैम, 204 चेक डैम, 281 तालाब, 76 रिचार्ज शाफ्ट तथा 19 अन्य जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन कार्यों के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण, मृदा संरक्षण एवं जल उपलब्धता में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। इससे किसानों को सिंचाई सुविधा में विस्तार एवं कृषि उत्पादन में वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्‍त हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड विकास 1.0 के अंतर्गत पूर्व में निर्मित स्टॉप डैम एवं चेक डैम की मरम्मत एवं नवीनीकरण के कार्य भी किए जाएंगे। इससे न केवल इन संरचनाओं की कार्यक्षमता पुनर्स्थापित होगी, बल्कि जल संरक्षण के पूर्व प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता एवं सतत निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकी का उपयोग किया जाएगा। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की निगरानी WMS पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे कार्यों की वास्तविक समय पर प्रगति का आंकलन संभव हो सकेगा। वाटरशेड विकास 1.0 के कार्यों का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर से कर उन्हें मनरेगा पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे उनके अनुश्रवण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।  

जल गंगा संवर्धन अभियान – 2026: जनभागीदारी से पुनर्जीवित हो रहे प्राचीन जल स्रोत

जल गंगा संवर्धन अभियान – 2026: जनभागीदारी से पुनर्जीवित हो रहे प्राचीन जल स्रोत सागर संभाग में फलीभूत हो रहा जल गंगा संवर्धन अभियान तालाबों, नदियों और बावड़ियों के संरक्षण का संकल्प बन रहा जन-आंदोलन भोपाल  सागर संभाग में जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' धरातल पर फलीभूत होने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप सागर संभाग के सभी जिलों में प्राचीन तालाबों, नदियों, पोखरों और बावड़ियों को पुनर्जीवित करने के लिए चलाए गए पिछले वर्षों के अभियान के सुखद और अपेक्षित परिणाम सामने आए हैं। इसी कड़ी में इस वर्ष भी 19 मार्च, 2026 से संभाग के प्रत्येक जिले में इस अभियान का उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया है। जनभागीदारी की अनूठी मिसाल जल गंगा संवर्धन अभियान की सबसे बड़ी विशेषता 'जनभागीदारी' रही है। सागर संभाग के हजारों नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों ने कंधे से कंधा मिलाकर इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग दे रहे हैं। श्रमदान के माध्यम से प्राचीन जल स्रोतों की गाद निकालने, साफ-सफाई करने और उनके मूल स्वरूप को लौटाने का कार्य निरंतर जारी है। इस अभियान के तहत सागर जिले में नगर पालिका खुरई के तालाब घाट की सफाई के साथ इस वर्ष का आगाज हुआ। संभागीय मुख्यालय पर ऐतिहासिक लाखा बंजारा झील के चकराघाट पर जल पूजन और सफाई कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं खुरई की अम्मावाड़ी झील को भी स्वच्छ किया गया। छतरपुर जिले में तालाबों का कायाकल्प और ''जल महोत्सव'' आयोजित छतरपुर जिले में विधायक श्रीमती ललिता यादव और जिला प्रशासन के नेतृत्व में सांतरी तलैया से स्वच्छता कार्य शुरू किया गया। जनपद नौगांव की ग्राम पंचायत विकौरा और लवकुशनगर के छठी बम्होरी में तालाबों का कायाकल्प किया जा रहा है। इसी प्रकार निवाड़ी जिले के ग्राम काछीपुरा में विधायक अनिल जैन के नेतृत्व में 'जल महोत्सव 2026' के तहत भव्य जल रैली निकाली गई और ग्रामीणों को जल शपथ दिलाई गई। पन्ना और टीकमगढ़ जिले में नवांकुर संस्थाओं की पहल पन्ना और टीकमगढ़ जिलों में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के माध्यम से नवांकुर संस्थाओं ने कमान संभाली है। पन्ना के ग्राम बड़ागांव स्थित मिढ़ासन नदी के उद्गम स्थल 'महरा धाम' की सफाई की गई, तो वहीं टीकमगढ़ के गंगासागर तालाब और अचर्रा में गाद निकालने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। दमोह जिले में जनभागीदारी से मजबूत हुआ ''जल गंगा संवर्धन अभियान'' दमोह जिले में भी जल गंगा संवर्धन अभियान को विकास कार्यों से जोड़ा गया है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री लखन पटेल ने ग्राम रजवांस में तालाब की साफ-सफाई में श्रमदान किया। इस अवसर पर क्षेत्र के विकास के लिए सामुदायिक भवनों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया गया। साथ ही जल निगम की परियोजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को जल सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' केवल जल स्रोतों की सफाई का जरिया नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महा-संकल्प है। सागर संभाग के हर जिले से आ रही सकारात्मक खबरें इस बात का प्रमाण हैं कि जब समाज और सरकार मिलकर प्रयास करते हैं, तो प्रकृति का संरक्षण सहज और प्रभावी हो जाता है।  

जल जीवन मिशन के लिए केंद्र से बड़ी मदद, 4000 करोड़ फंड और कर्ज सीमा में बढ़ोतरी

भोपाल  जल जीवन मिशन में खर्च हुई राशि को देने के केंद्र ने अपनी सहमति दे दी है। मप्र ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल को बताया कि वर्ष 2024-25 का 4500 करोड़ और 2025-26 का 5000 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है। मप्र ने खुद 9000 करोड़ लगाकर योजना को चालू रखा है। योजना को पूरा करने का वक्त 2028 तय है, लेकिन 2026 में अभी तक मप्र ने 99% काम पूरा कर लिया। पाटिल ने इसकी बधाई दी और राशि देने पर सहमति दे दी। मार्च 2026 से पहले मप्र को जल जीवन मिशन के 4000 करोड़ रुपए मिल सकते हैं। सीआर पाटिल से मिलने के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से मिले। इसमें सीएम ने कहा कि मप्र की औसत ग्रोथ 10% है। वर्ष 2026-27 में जीएसडीपी बढ़कर 18 लाख 48 हजार करोड़ होगा। लिहाजा इसी आधार पर मप्र को बाजार से कर्ज लेने की सीमा तय की जाए। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी इस दौरान सीएम के साथ थे। वित्त का कहना है कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने सहमति दे दी है। इससे मप्र को कई प्रकार से लाभ मिलेगा। सीएम गुरुवार को 5 मुद्दों को लेकर दिल्ली गए थे। इसमें सिंहस्थ के लिए राशि की मांग करना भी शामिल रहा। निकायों का पैसा मांगा     सीएम ने नगरीय तथा ग्रामीण निकायों के लिए 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित पूरी राशि को देने की बात रखी। अभी कम पैसा मिला है। निकायों से संबंधित मामले में वित्तीय वर्ष 2023-24 की 512 करोड़ एवं 2025-26 की 1,181 करोड़ की राशि मिलना है।     पंचायती राज मंत्रालय व जल शक्ति मंत्रालय ने वर्ष 2025-26 के लिए ही 1097 करोड़ जारी करने का अनुरोध है। हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के लिए 4,600 करोड़ के विरूद्ध 3,690 करोड़ ही मिले हैं।