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Janmashtami 2026: भोपाल में भव्य जन्माष्टमी उत्सव, 21 स्थानों पर मटकी फोड़ और राजा भोज देंगे पर्यावरण संदेश

भोपाल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार, 4 सितंबर को राजधानी में भक्ति और संस्कृति का रंग देखने को मिलेगा। शहर में अलग-अलग स्थानों पर धार्मिक आयोजन होंगे। श्री हरिहर महोत्सव समिति की ओर से 14वीं बार भव्य जन्माष्टमी शोभायात्रा निकाली जाएगी, वहीं इस्कॉन पटेल नगर में विशेष जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित होगा। दोनों आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। 21 जगह माखन-मटकी फोड़ेंगे श्रीकृष्ण श्री हरिहर महोत्सव समिति की शोभायात्रा श्रीजी मंदिर लखेरापुरा से दोपहर 12:30 बजे शुरू होगी। शोभायात्रा में 21 स्थानों पर श्रीकृष्ण ग्वालों के साथ माखन-मटकी फोड़ते नजर आएंगे। कैलाश पर्वत पर शिव-पार्वती, झूले पर राधा-कृष्ण और वासुदेव द्वारा श्रीकृष्ण को ले जाते हुए झांकियां भी शामिल होंगी। राजा भोज की जीवंत झांकी देगी पर्यावरण बचाने का संदेश इस बार शोभायात्रा का खास आकर्षण राजा भोज की जीवंत झांकी होगी। इसमें राजा भोज पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश देते नजर आएंगे। झांकी के जरिए प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। शोभायात्रा में भगवान श्रीजी की प्रतिमा के साथ मंडला-डिंडोरी की नृत्य टोलियां, नरसिंहगढ़ और ब्यावरा के बैंड, 21 ढोल, डीजे बैंड, घोड़ा-बग्गी और दुलदुल घोड़ी भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इन रास्तों से निकलेगी शोभायात्रा शोभायात्रा श्रीजी मंदिर लखेरापुरा से शुरू होकर चौक बाजार, लोहा बाजार, जुमेराती गेट, छोटे भैया कॉर्नर, घोड़ा निक्कास, मां कर्मा देवी रोड, मंगलवारा चौराहा, जैन मंदिर रोड, इतवारा चौराहा, इलेक्ट्रिकल मार्केट, चिंतामण चौराहा, पीपल चौक और लखेरापुरा होते हुए भवानी चौक, सोमवारा पहुंचेगी, जहां इसका समापन होगा। शुभारंभ से पहले पंडित हेमकांत शर्मा ‘मुखिया जी’ के सानिध्य में विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना होगी। इस्कॉन में एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद दूसरी ओर इस्कॉन पटेल नगर, हरे कृष्ण लैंड, रायसेन रोड पर भी 4 सितंबर को भव्य जन्माष्टमी महोत्सव होगा। आयोजकों के मुताबिक करीब एक लाख श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के पहुंचने की संभावना है। यहां श्री श्री गौर राधा वल्लभ जी के विशेष दर्शन और भव्य श्रृंगार होंगे। मंदिर को जैसलमेर की पारंपरिक थीम पर सजाया जाएगा। थाईलैंड से मंगाए गए विशेष ऑर्किड फूल भी सजावट का हिस्सा होंगे।  महामंत्र कीर्तन से लेकर रुक्मिणी कल्याणम् तक इस्कॉन परिसर में लगातार हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन, श्रीकृष्ण कथा और भक्तिमय नाट्य प्रस्तुति ‘रुक्मिणी कल्याणम्’ प्रमुख आकर्षण रहेगी। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की भी व्यवस्था की जाएगी। शहर में दिखेगा भक्ति और संस्कृति का संगम जन्माष्टमी के दोनों बड़े आयोजनों में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। एक ओर लखेरापुरा से निकलने वाली शोभायात्रा में श्रीकृष्ण की लीलाएं, झांकियां और लोक कला आकर्षण रहेंगी, वहीं इस्कॉन में भव्य श्रृंगार, कीर्तन, कथा और नाट्य प्रस्तुति श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक माहौल देंगी। शहर में कई जगह आयोजन किए जाएंगे। 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से बाजार में आएगी रौनक, देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक व्यापार का अनुमान

नई दिल्ली  देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर है। बड़े पैमाने पर लोग खरीदारी कर रहे हैं। घरों और मंदिरों को सजाया है। जन्माष्टमी सिर्फ आस्था का ही त्योहार नहीं है, बल्कि भारत की 'सनातन अर्थव्यवस्था' का एक जीता-जागता प्रतीक है। इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद की जा रही है। रक्षाबंधन के दौरान हुए जबरदस्त व्यापार के बाद इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने का अनुमान है।  कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) की ओर से यह अनुमान अलग-अलग सेक्टर में होने वाली संभावित बिक्री, घर और धार्मिक कामों के लिए खरीदारी, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले खर्च, देशभर में बड़े पैमाने पर होने वाले जश्न और धार्मिक पर्यटन से जुड़े खर्चों पर आधारित है। सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सिर्फ भक्ति और आस्था का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों का एक अद्भुत संगम भी है। जन्माष्टमी एक अनोखा त्योहार है जहां आस्था सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों में बदल जाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "वोकल फॉर लोकल" (स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने) के आह्वान का असर देश भर के त्योहारों वाले बाजारों में साफ दिख रहा है। भारतीय उत्पादों को ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है। जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को काफी बढ़ावा मिल रहा है। पूजा के सामान से लेकर सजावट और धार्मिक उत्पादों तक, जन्माष्टमी के दौरान स्वदेशी सामान की भारी मांग रहती है। प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ी हर रस्म और जश्न लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। किसान, डेयरी उत्पादक, फूल उगाने वाले, मिठाई बनाने वाले, कपड़े के व्यापारी, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, होटल और रेस्टोरेंट के मालिक और कई तरह की सेवाएं देने वाले लोग इस त्योहार से सीधे या परोक्ष रूप से फायदा उठाते हैं। सीएआईटी के अनुसार, 2024 में जन्माष्टमी के दौरान व्यापार लगभग 25 हजार करोड़ रुपए था और 2025 में यह बढ़कर लगभग 30 हजार करोड़ रुपए हो गया। इस वर्ष, ग्राहकों की ज्यादा मांग, सामान और सेवाओं की कीमतों में बदलाव, बढ़ते सामाजिक उत्सव, धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी, और मॉडर्न रिटेल व डिजिटल कॉमर्स के विकास के कारण, व्यापार में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि होने और इसके 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होने की उम्मीद है। प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि इस साल जिन उत्पादों की मांग खास तौर पर ज्यादा है, उनमें माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद, मिठाइयां, फल, सूखे मेवे, पूजा का सामान, फूलों की मालाएं, सजावटी तोरण, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी, मोर पंख, आभूषण और त्योहार के खास कपड़े शामिल हैं। खंडेलवाल की ओर से इस बात पर जोर दिया गया है कि भारतीय त्योहारों को सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन मानना ​​उनके असली महत्व को कम करके आंकना होगा। दिवाली, होली, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, करवा चौथ, छठ पूजा और कई अन्य त्योहार लाखों व्यापारियों, कारीगरों, शिल्पकारों, किसानों, महिला उद्यमियों, स्वरोजगार करने वाले लोगों और सेवा प्रदाताओं के लिए आर्थिक अवसरों का एक बड़ा नेटवर्क बनाते हैं। जन्‍माष्‍टमी पर कहां कितना खर्च करेंगे लोग?  कैट के आकलन के अनुसार जन्माष्टमी से जुड़े व्यापार में कई चीजों की हिस्‍सेदारी रहने वाली है. खंडेलवाल ने बताया कि इस वर्ष बाजारों में माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों, मिठाइयों, फलों, सूखे मेवों, पूजा सामग्री, फूल-मालाओं, बंदनवार, झूलों, लड्डू गोपाल की मूर्तियों, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, आभूषणों और विशेष परिधानों की मांग विशेष रूप से बढ़ी हुई है।  मिठाई, माखन-मिश्री और डेयरी उत्पाद पर 20% तो पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत और पूजन किट पर 10% खर्च कर सकते हैं. वहीं फूल, मालाएं और सजावट सामग्री पर 12%, पारंपरिक परिधान और वस्त्र पर 10%, फल, सूखे मेवे और प्रसाद सामग्री पर 10% खर्च किया जा सकता है. लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले और श्रृंगार सामग्री पर 8%, उपहार, खिलौने और घरेलू सजावटी सामग्री पर 5%, धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं पर 15% और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर 10% खर्च कर सकते हैं।  राष्‍ट्रीय महामंत्री बोले- वोकल फॉर लोकल की ताकत  कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल श्रद्धा और भक्ति का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपरा, सामाजिक सहभागिता और आर्थिक गतिविधियों का अद्भुत संगम भी है. जन्माष्टमी ऐसा पर्व है, जिसमें आस्था सीधे आर्थिक गतिविधियों में परिवर्तित होती दिखाई देती है।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान का प्रभाव त्योहारों के बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. अब उपभोक्ता बड़ी संख्या में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को व्यापक लाभ मिल रहा है।  किसान, फल-फूल विक्रेता से होटल-रेस्‍तरां व्‍यवसाई तक को लाभ   जन्माष्टमी के अवसर पर पूजा सामग्री से लेकर सजावटी वस्तुओं और धार्मिक उत्पादों तक अधिकांश मांग स्वदेशी वस्तुओं की है. खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ा प्रत्येक अनुष्ठान और आयोजन किसी न किसी रूप में लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है. किसान, दुग्ध उत्पादक, फूल उत्पादक, मिठाई कारोबारी, वस्त्र विक्रेता, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्टर, होटल व्यवसायी, रेस्तरां संचालक और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग इस पर्व से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं।  2024 में 25,000 करोड़, 2025 में 30,000 करोड़ का कारोबार  कैट के अनुसार वर्ष 2024 में जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर में लगभग ₹25,000 करोड़ का व्यापार हुआ था, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग ₹30,000 करोड़ तक पहुंच गया. इस वर्ष उपभोक्ता मांग में वृद्धि, वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन, त्योहारों के बढ़ते सामाजिक विस्तार, धार्मिक पर्यटन में वृद्धि और आधुनिक रिटेल एवं डिजिटल खरीदारी के विस्तार को देखते हुए लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि के साथ व्यापार ₹40,000 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है।  सनातन अर्थव्‍यवस्‍था की ताकत  उन्‍होंने कहा कि भारत के त्योहारों को … Read more

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहा खास संयोग, 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र में जन्मेंगे कान्हा; जानें पूजा का समय

भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी आते ही देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं.भक्त इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं. रात के समय उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं.धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था.इस वजह से जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के पूजा मुहूर्त को खास महत्व दिया जाता है. इस साल 4 सितंबर, शुक्रवार को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।  जन्माष्टमी की तारीख क्या है? साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी.इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करेंगे. दिनभर व्रत और भक्ति के बाद रात में कान्हा के जन्म के समय विशेष पूजा की जाती है।  जन्माष्टमी के मौके पर घरों और मंदिरों में कृष्ण की झांकियां सजाई जाती हैं. कई जगह बाल गोपाल को पालने में झुलाने और उनका विशेष श्रृंगार करने की परंपरा है. रात 12 बजे के आसपास मंदिरों में जन्मोत्सव शुरू होता है. आरती के साथ भक्त भगवान के जन्म की खुशी मनाते हैं।  मथुरा में कब होगा कृष्ण जन्मोत्सव? श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव विशेष रूप से भव्य होता है. यहां आधी रात के समय भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है।  मथुरा के लिए पंचांग के अनुसार निशीथ पूजा का शुभ समय रात 11:56 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा.इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा, अभिषेक और आरती की जाएगी।  निशीथ काल को जन्माष्टमी की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण का प्राकट्य हुआ था।  जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस बार जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र की मौजूदगी भी रहेगी.कृष्ण जन्म से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र का विशेष स्थान है।  पंचांग गणना के अनुसार रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात करीब 11:04 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है. वहीं अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात करीब 12:13 बजे तक रहेगी. ऐसे में जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है।  जन्माष्टमी का व्रत कब खोलें? जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में भक्त भगवान कृष्ण के जन्म तक व्रत रखते हैं. मथुरा की गणना के अनुसार व्रत का पारण 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे के बाद किया जा सकता है. हालांकि अलग-अलग परंपराओं में व्रत खोलने के नियम अलग हो सकते हैं. इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार पारण कर सकते हैं।  5 सितंबर को दही हांडी और नंदोत्सव कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन यानी 5 सितंबर, शनिवार को दही हांडी और नंदोत्सव मनाया जाएगा. भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी माखन चोरी की लीलाओं की याद में कई स्थानों पर दही हांडी का आयोजन किया जाता है।  दही से भरी मटकी को ऊंचाई पर लटकाया जाता है.  गोविंदा की टोलियां मानव पिरामिड बनाकर उसे फोड़ती हैं. वहीं ब्रज क्षेत्र में कृष्ण जन्म के बाद नंदोत्सव की परंपरा भी बड़े उत्साह के साथ निभाई जाती है।  जन्माष्टमी पर क्या है खास? इस बार जन्माष्टमी का पर्व इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 4 सितंबर को अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा. रात में निशीथ काल के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा. मथुरा-वृंदावन में इस मौके पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम होंगे। 

उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में जन्माष्टमी की धूम, कृष्ण-बलराम-सुदामा के लिए तैयार खास पोशाक; भव्य पूजा की तैयारी

उज्जैन  भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली के रूप में प्रसिद्ध उज्जैन का गुरु सांदीपनि आश्रम जन्माष्टमी के अवसर पर एक बार फिर आस्था और भक्ति के रंग में रंगने जा रहा है. 4 सितंबर को जन्माष्टमी के महापर्व पर आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना और भगवान श्रीकृष्ण के विशेष श्रृंगार की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. इस बार भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के लिए विशेष नीले रंग के मखमली वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं. इन वस्त्रों की खासियत यह है कि सभी के वस्त्र एक ही रंग की थीम पर तैयार किए जा रहे हैं।  भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबा उज्जैन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन स्थित गुरु सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी. कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने यहां 64 दिनों में 64 कलाओं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया था. भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके बड़े भाई बलराम और मित्र सुदामा भी शिक्षा ग्रहण करते थे. यही वजह है कि उज्जैन का सांदीपनि आश्रम भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और शिक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है. जन्माष्टमी के अवसर पर यहां होने वाले आयोजन का विशेष धार्मिक महत्व है।  चार महीने पहले शुरू हो जाता है वस्त्रों का काम जन्माष्टमी के लिए भगवान के वस्त्र तैयार करने की प्रक्रिया एक-दो सप्ताह पहले नहीं, बल्कि करीब चार महीने पहले से शुरू हो जाती है. आश्रम में भगवान के लिए किस तरह का कपड़ा, किस रंग का वस्त्र और किस प्रकार की कारीगरी की जाएगी, इसका चयन काफी पहले कर लिया जाता है।  सांदीपनि आश्रम के पुजारी ने बताई पूरी प्रक्रिया सांदीपनि आश्रम के पुजारी परिवार की पंडित कीर्ति रूपम व्यास ने बताया, "जन्माष्टमी की तैयारियां काफी समय पहले शुरू हो जाती है. कच्चा सामान और विशेष कपड़ों का चयन करने में समय लगता है. करीब चार महीने पहले यह तय किया जाता है कि इस बार भगवान के लिए मखमली कपड़े इस्तेमाल किए जाएंगे या सूती कपड़े. इसके साथ ही कपड़ों के रंग क्या होंगे और उन पर किस रंग के रेशमी व जड़ाऊ धागों से कारीगरी की जाएगी। जयपुर, कोलकाता और सूरत से आया विशेष मोती उन्होंने आगे बताया, " भगवान के कपड़ों के लिए सूरत, जयपुर और कोलकाता सहित अलग-अलग स्थानों से कपड़े, मोती और कारीगरी का सामान मंगवाया जाता है. इस बार विशेष रूप से मखमली कपड़े का चयन किया गया है. इसमें रंग-बिरंगे जड़ाऊ और रेशमी धागों से कारीगरी की जा रही है. मोती और धागों का चयन जयपुर और कोलकाता से किया गया है, जबकि कुछ विशेष मोती सूरत से भी मंगवाए गए हैं।  इस रंग के होंगे कृष्ण, बलराम और सुदामा के कपड़े इस बार सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के वस्त्रों में एकरूपता दिखाई देगी. सभी के लिए नीले रंग के वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं. वस्त्रों पर आकर्षक कढ़ाई, रेशमी धागों और मोतियों से सजावट की जा रही है।  लड्डू गोपाल के लिए सफेद-गुलाबी पोशाक पंडित कीर्ति रूपम व्यास के अनुसार, भगवान के वस्त्रों के साथ मुकुट, हार और अन्य श्रृंगार सामग्री भी तैयार की जा रही है. जन्माष्टमी से एक दिन पहले यानी 3 सितंबर तक इन सभी तैयारियों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि 4 सितंबर को जन्माष्टमी के दिन भगवान का विशेष श्रृंगार किया जा सके।  जहां श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा और गुरु परिवार के लिए नीले रंग के वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं, वहीं पालने में विराजने वाले लड्डू गोपाल के लिए इस बार अलग रंग की पोशाक तैयार की जा रही है. लड्डू गोपाल के लिए सफेद और गुलाबी रंग के वस्त्रों का चयन किया गया है. इन वस्त्रों को मोतियों की कारीगरी से सजाया जा रहा है. जन्माष्टमी की रात जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा, तब पालने में विराजमान लड्डू गोपाल का यह विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगा।