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Jhiram Ghati Case: 13 साल बाद आया बड़ा फैसला, 10 दोषियों को मृत्युदंड; हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन

रायपुर  2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या के मामले में जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इनमें 2 महिला और 8 पुरुष शामिल हैं।25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। NIA के मुताबिक इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। करीब 13 साल चली सुनवाई में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज दर्ज किए गए। यह सजा हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही लागू होगी। तब तक सभी दोषी केंद्रीय जेल जगदलपुर में रहेंगे। 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। अभियोजन पक्ष ने फांसी की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने दलील में सजा कम करने की मांग की थी। न्यायालय के फैसले का सम्मान, लेकिन न्याय की लड़ाई जारी झीरम नक्सली हमले के मामले में न्यायालय के फैसले के बाद पीड़ितों की प्रतिक्रिया सामने आई है. हमले में घायल हुए शिवनारायण द्विवेदी ने न्यायालय के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए इसका स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी. द्विवेदी के मुताबिक, झीरम हमले में बड़े नेताओं समेत कई निर्दोष लोगों की हत्या हुई थी. वे खुद भी इस हमले में घायल हुए थे और आज भी उस घटना के पीड़ित हैं. उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले का सम्मान है, लेकिन न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।  क्या था झीरम घाटी हमला ? झीरम घाटी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में दरभा इलाके के पास स्थित है। 25 मई 2013 को CPI (माओवादी) के सदस्यों ने कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर हमला किया। NIA के रिकॉर्ड के मुताबिक हमला करीब शाम 4:15 बजे NH-221 के झीरम घाटी क्षेत्र में हुआ था। हमले में माओवादी दस्ते ने काफिले को निशाना बनाया। NIA के अनुसार 27 लोगों की मौके पर मौत हुई थी, जिनमें 10 पुलिसकर्मी शामिल थे और 38 लोग घायल हुए थे। सार्वजनिक रिपोर्टों में बाद में मृतकों की संख्या 29 बताई गई, जिसमें बाद में चोटों के कारण हुई मौतें भी शामिल हैं। हमला किसने किया था? जांच एजेंसी के अनुसार हमला CPI (Maoist) के सदस्यों ने किया था। NIA के मामले में इसी संगठन के सदस्यों पर काफिले पर हमले, हत्या और साजिश समेत विभिन्न अपराधों के आरोप लगाए गए। 2026 में हुई सुनवाई में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया और 16 सितंबर को इन्हीं 10 को मृत्युदंड सुनाया गया। हालांकि आरोपपत्र में इससे अधिक लोगों के नाम आरोपी के तौर पर दर्ज थे और कुछ आरोपी फरार/वांछित बताए गए हैं। आखिर हमला क्यों किया गया था? हमले के उद्देश्य को लेकर जांच और सार्वजनिक रिपोर्टों में कांग्रेस के राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाने की बात सामने आई है। खास तौर पर तत्कालीन कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा माओवादियों के निशाने पर बताए गए, क्योंकि वे माओवादी विरोधी सलवा जुडूम अभियान से जुड़े प्रमुख नेताओं में थे। हालांकि पूरे हमले के पीछे के उद्देश्य को एक ही कारण तक सीमित करना उचित नहीं होगा। उस समय बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा, सुरक्षा अभियानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर तनाव पहले से मौजूद था। कांग्रेस के कौन-कौन से बड़े नेता मारे गए? झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए। इस हमले में कांग्रेस नेताओं, आम नागरिकों और 10 सुरक्षाकर्मियों समेत 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। मारे गए लोगों में प्रमुख कांग्रेस नेताओं में… विद्या चरण शुक्ल – पूर्व केंद्रीय मंत्री, हमले में गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मृत्यु हुई नंद कुमार पटेल – तत्कालीन छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश पटेल – नंद कुमार पटेल के बेटे महेंद्र कर्मा – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष उदय मुदलियार – कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक इनके अलावा पार्टी कार्यकर्ता, आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी हमले में मारे गए। उस दिन क्या हुआ था? कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाली थी। यात्रा के बाद नेताओं का काफिला बस्तर के रास्ते लौट रहा था। झीरम घाटी के पास माओवादियों ने काफिले को घेर लिया और हमला शुरू कर दिया। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार हमले में हथियार और गोला-बारूद भी लूटा गया था। जांच में दो AK-47 राइफल, एक 9mm पिस्टल, हैंड ग्रेनेड और अन्य सामान के लूटे/गायब होने का उल्लेख है। जांच कैसे आगे बढ़ी? हमले के बाद मामला पहले छत्तीसगढ़ पुलिस ने दर्ज किया। केंद्र सरकार ने इसके बाद NIA को जांच सौंपी। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार ने घटना की न्यायिक जांच के लिए तत्कालीन हाईकोर्ट जज न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में आयोग बनाया था। NIA की जांच के बाद मामला अदालत में पहुंचा और लंबे समय तक सुनवाई चलती रही। 5 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने ट्रायल का सामना कर रहे 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। 16 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 को मृत्युदंड सुनाया। झीरम घाटी हमला इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? झीरम घाटी हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एक बड़े हिस्से का नेतृत्व एक ही हमले में मारा गया था। घटना ने राज्य की राजनीति और माओवादी हिंसा के बीच संबंधों पर देशभर में चर्चा छेड़ दी थी। 13 साल बाद आया अदालत का फैसला अब इस मामले की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। मृत्युदंड के फैसले के बाद दोषियों के पास कानून के तहत उपलब्ध आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता रहेगा। वे माओवादी जिन्हें आरोपी बनाया गया था, अब मिली फांसी झीरम घाटी के हमले को नक्सली संगठन के टॉप लीडरों ने प्लान किया है। जानकारी के अनुसार, झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड हिडमा था। 25 मई 2013 को यह हमला हुआ था। माओवादियों ने बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र के झीरम घाटी इलाके में एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ पर घात लगाकर हमला किया था। हमला करने वाले सभी नक्सली संगठन के मेंबर थे। आरोपियों में जो शामिल थे, उनमें…     … Read more

झीरम घाटी हमले के दोषियों पर कोर्ट का फैसला, 13 साल बाद सभी 10 आरोपी दोषी करार

रायपुर  छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे काले और दहला देने वाले अध्यायों में से एक, झीरम घाटी नक्सल हमले के मामले में आखिरकार न्याय की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एनआईए की विशेष अदालत ने करीब 13 साल पुराने इस मामले में शनिवार को अहम फैसला सुनाते हुए सभी 10 बचे हुए आरोपियों को दोषी करार दिया है। लंबे समय से फैसले का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवारों और समर्थकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है। 25 मई 2013 को हुआ था नरसंहार यह वीभत्स घटना 25 मई 2013 की है, जब कांग्रेस पार्टी की 'परिवर्तन यात्रा' के दौरान दरभा की झीरम घाटी में नक्सलियों ने घात लगाकर सुनियोजित हमला किया था। इस भीषण नक्सल हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 32 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के दो दिन बाद 27 मई 2013 को केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी थी। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की विशेष अदालत ने 2013 के झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में सभी 10 आरोपियों को शनिवार को दोषी ठहराया. इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी.बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने बताया कि जगदलपुर में एनआईए के विशेष न्यायाधीश अभय सिंह राजपूत की अदालत ने दो महिलाओं समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया।  उन्होंने बताया कि अदालत ने सजा की अवधि पर आदेश 16 सितंबर के लिए सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए.चौधरी ने कहा कि हम इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे. हमें अभी तक फैसले की प्रति नहीं मिली है. इसके बाद ही अपील के आधार के बारे में बता पाएंगे।  कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर घात लगाकर हुआ था हमला यह हमला 25 मई 2013 को हुआ था जब माओवादियों ने बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र के झीरम घाटी इलाके में एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा' पर घात लगाकर हमला किया था।  इस हमले में कांग्रेस नेताओं, आम नागरिकों और 10 सुरक्षाकर्मियों समेत कम से कम 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे.मारे गए लोगों में कांग्रेस की प्रदेश इकाई के तत्कालीन अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश, विपक्ष के पूर्व नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल तथा वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे।  एनआईए ने 40 मुख्य आरोपियों समेत 150 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज की थी, जिनमें से 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी, जबकि शेष 10 आरोपी हिरासत में थे। इस केस में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। न्यायिक आयोग का भी हुआ था गठन यह रैली 2013 के अंत में हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित की गई थी.घटना के बाद राज्य पुलिस ने मामला दर्ज किया था, लेकिन रमन सिंह नीत तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने हमले के दो दिन के भीतर ही इसकी जांच एनआईए को सौंप दी थी. राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का भी गठन किया था।  अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों के नाम एनआईए कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए गए 10 आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:     प्रमिला मोडियम     चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना     सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम     मुक्का मांडवी     कोसा कवासी उर्फ कोसाराम     आयत मरकाम     मड़कामी देवा     जोग मड़कामी     बंजमी सेना उर्फ चमरू उर्फ देंगा     महादेव