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बांग्लादेश में पाकिस्तान जैसे हालात बन रहे हैं, भारत को सतर्क रहना होगा : जीतन राम मांझी

गया  बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि बांग्लादेश पाकिस्तान के रास्ते पर चल रहा है। वहां लगातार हिंदुओं को मारा जा रहा है, जो कि ठीक नहीं है। वर्तमान सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। गया में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि बांग्लादेश और दूसरे पड़ोसी देशों में हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। बंटवारे के बाद भारत में अल्पसंख्यक आबादी 7 फीसदी थी। आज यह 18 फीसदी है, क्योंकि हमने उन्हें शरण दी और उनका पालन-पोषण किया। पाकिस्तान में बंटवारे के समय हिंदुओं की आबादी 11 फीसदी थी, लेकिन आज वे सिर्फ 1 फीसदी हैं। बांग्लादेश भी उसी रास्ते पर चलता दिख रहा है। हिंदुओं को मारा जा रहा है। हमारी सरकार को इन अत्याचारों पर ध्यान देना चाहिए और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे इस तरह के उत्पीड़न के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनसे गलती हो गई। उन्हें बांग्लादेश को अलग नहीं करवाना चाहिए था। उस समय भी हमें लगता था कि बांग्लादेश हमारे लिए आंख का कांटा बनेगा और बांग्लादेश के ताजा हालात उसे साबित कर रहे हैं। बांग्लादेश में जितना हक मुसलमानों को है, उतना हिंदुओं को भी है, लेकिन उन्हें चुन-चुनकर मारा जा रहा है। दूसरे देशों का जिक्र करते हुए मांझी ने कहा कि चीन के अलावा अन्य राष्ट्रों में हिंदू हैं, लेकिन वहां सब ठीक है। बांग्लादेश में यह क्यों हो रहा है? भारत के लोगों और भारत के नेताओं को संज्ञान लेना चाहिए, बात करनी चाहिए और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि यह सरकारी आदेश है और इसका पालन करना ही होगा। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर जो फैसले लिए जाते हैं, उसमें हमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। रेलवे किराए में बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने कहा कि देखिए, महंगाई बढ़ रही है। यह स्वाभाविक है। सुविधाएं दी जा रही हैं और रेल खंड बनाए जा रहे हैं। इसके लिए अगर आम जनता से सहयोग लिया जाए तो गलत नहीं है। यह रेल मंत्रालय की ओर से लोगों की भलाई के लिए किया जा रहा है। रेल मंत्री काफी ईमानदार हैं। जनता के पैसे का सदुपयोग होगा।

शराबबंदी पर जीतन राम मांझी का बयान— कानून सही, बदनामी की असली वजह कुछ और

भोजपुर बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शराबबंदी कानून को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी अब तक का सबसे अच्छा कानून है और इससे बढ़कर कोई कानून हो ही नहीं सकता। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि शराब ने उनके परिवार में भी कई मुश्किलें पैदा की थीं, जिसके बाद उन्होंने शराब छोड़ने की सलाह दी। शराबबंदी बेहद जरूरी इस वजह से बताया उन्होंने कहा कि शराब छोड़ने के बाद ही वे शिक्षा हासिल कर आगे बढ़ पाए और उनका भाई इंस्पेक्टर बना, लेकिन आज वो इस दुनिया में नहीं है। मांझी ने कहा कि शराब इंसान को निशाचर बना देती है। इसलिए शराबबंदी बेहद जरूरी है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि पदाधिकारी और ब्रोकर्स की वजह से बिहार शराबबंदी की बदनामी झेलते आया है। मांझी ने आरोप लगाया कि कई पदाधिकारी और ब्रोकर्स मिलकर शराबबंदी को बदनाम कर रहे हैं। 'असर कमज़ोर पड़ रहा' पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून की मंशा साफ है लेकिन बीच की कड़ी में भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण इसका असर कमज़ोर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को निगरानी तंत्र को और मजबूत करना चाहिए ताकि गलत तरीके से शराब बेचने वाले और कानून का दुरुपयोग करने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई हो सके। मांझी के इस बयान ने एक बार फिर शराबबंदी को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जीतन राम मांझी का अल्टीमेटम: सम्मानजनक सीटें नहीं तो चुनाव नहीं

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बुधवार को बड़ा धमाका करते हुए कहा कि अगर उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) को 15 सीटें नहीं दी गईं, तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे. मांझी ने साफ शब्दों में कहा कि वे और उनकी पार्टी खुद को “अपमानित” महसूस कर रहे हैं और अब इस अपमान का घूंट और नहीं पिएंगे. दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि “हम अपने आप को अपमानित महसूस कर रहे हैं. हमारे लोगों को मतदाता सूची नहीं दी गई, हमें बैठकों में नहीं बुलाया गया. ये अपमान का घूंट हम कब तक पिएंगे? मैंने हमेशा एनडीए का साथ दिया है, तो एनडीए का फर्ज बनता है कि हमें अपमानित महसूस न होने दें” मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी 15 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, ताकि उनमें से कम से कम 8-9 सीटों पर जीत हासिल की जा सके. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर 15 सीटें नहीं मिलीं तो हम चुनाव नहीं लड़ेंगे.” “चिराग से नहीं आपत्ति, पर सम्मान चाहिए” जीतन राम मांझी ने यह भी कहा कि उन्हें चिराग पासवान से कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है. लेकिन, एनडीए में उनकी पार्टी के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, वह उन्हें और उनके समर्थकों को आहत कर रहा है. उन्होंने कहा कि वे हमेशा गठबंधन के प्रति वफादार रहे हैं, लेकिन अब वे चाहते हैं कि उनकी पार्टी को “सम्मानजनक स्थान” मिले. हालांकि मांझी ने इशारों ही इशारों में निशाना साधते हुए कहा कि जिनके पास एक सीट भी नहीं है वो बड़ी-बड़ी डिमांड कर रहे हैं. हमारे पास विकल्प खुले हैं: मांझी मांझी ने आगे कहा कि उनकी पार्टी के पास सभी विकल्प खुले हैं. “70-80 सीटें ऐसी हैं जहां हमारे बीस हजार वोट पक्के हैं. हम मान्यता प्राप्त पार्टी हैं और छह फीसदी से ज्यादा वोट ला सकते हैं। लेकिन यह हमारा अंतिम विकल्प होगा. हम नहीं चाहते कि हालात वहां तक पहुंचें.” मांझी ने बताया कि 10 अक्टूबर को पटना में पार्टी की पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला लिया जाएगा. उन्होंने संकेत दिया कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वह चुनाव भी नहीं लड़ेंगे. NDA के लिए मुश्किल स्थिति एनडीए के अंदर पहले ही चिराग पासवान की सीट डिमांड को लेकर पेच फंसा हुआ है, अब मांझी की यह सख्त बयानबाजी बीजेपी के लिए नई चुनौती लेकर आई है. बीजेपी मांझी को पुराने फॉर्मूले के तहत 7 सीटें देने की पेशकश कर चुकी है, लेकिन मांझी पुराने फॉर्मूले को “अपमानजनक” बताते हुए 15 सीटों पर अड़े हुए हैं.

जीतनराम मांझी का बड़ा बयान: एनडीए से मांगी 15 सीटें, चुनाव को बताया करो या मरो

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए में सीट शेयरिंग पर घमासान छिड़ा हुआ है। केंद्रीय मंत्री एवं हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) के सुप्रीमो जीतनराम मांझी कम से कम 15 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं। मांझी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेताओं को यह तक कह दिया है कि वह 15 सीटों के लिए भीख मांग रहे हैं, क्योंकि उनके लिए इस बार करो या मरो की स्थिति है। मांझी ने सहयोगियों पर दबाव बढ़ाते हुए यह भी कहा कि अगर उनकी मांग के अनुसार सीटें नहीं मिली तो हम पार्टी आगामी बिहार चुनाव में 100 सीटों पर अकेले लड़ जाएगी। हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतनराम मांझी ने सोमवार को पटना में मीडिया से बातचीत में कहा कि वह अपनी पार्टी के लिए एनडीए में 15 से 20 सीटों की मांग कर रहे हैं। इस मांग के पीछे पार्टी की मान्यता बड़ी वजह है। हम पार्टी बीते 10 सालों से निबंधित पार्टी है, अभी तक उसे प्रदेश स्तरीय राजनीतिक दल की मान्यता नहीं मिल पाई है। उसे मान्यता दिलाने के लिए कम से कम 7-8 विधायक या 6 प्रतिशत वोट होना जरूरी है। मांझी ने एनडीए के नेताओं से कहा कि कम से कम हम पार्टी को इतनी सीटें दें कि बिहार विधानसभा में मान्यता प्राप्त पार्टी का दर्जा मिल जाए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह अपनी पार्टी की मान्यता के लिए एनडीए के नेताओं से भीख मांग रहे हैं, इन सीटों पर उनका कोई दावा नहीं है। अगर कम से कम 15 सीटें लड़ने के लिए मिलेंगी, तभी 8-10 सीटें जीतकर हम मान्यता प्राप्त पार्टी बन सकेगी। गौरतलब है कि हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ने 2020 विधान सभा चुनाव में एनडीए के साथ मिलकर 7 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। उनमें से मांझी की पार्टी ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी को 0.89 फीसदी वोट मिले थे। जीतनराम मांझी 2024 में गया से लोकसभा सांसद चुने गए और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी हैं। हालांकि, उनकी पार्टी अभी तक बिहार में 6 प्रतिशत वोट हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाई है। दरअसल, चुनाव आयोग से मान्यता मिलने के बाद राजनीतिक दल को कई तरह की सुविधाएं मिल जाती हैं। मान्यता प्राप्त पार्टी का चुनाव चिह्न स्थायी हो जाता है। साथ ही चुनाव में अधिकतम 40 स्टार प्रचारक रखने की मंजूरी मिल जाती है। इसके अलावा टीवी और रेडियो पर राजनीतिक प्रसारण का टाइम स्लॉट और वोटर लिस्ट हासिल करने जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।