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जल जीवन मिशन घोटाला: मास्टरमाइंड संजय बड़ाया थाईलैंड फरार, जांच तेज

 जयपुर राजस्थान की पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान हुए 960 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई तेज हो गई है. दिल्ली से पूर्व रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद, अब पूर्व मंत्री महेश जोशी एसीबी की गिरफ्त में हैं और 5 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं. एसीबी की पूछताछ में इस घोटाले के तार विदेश तक जुड़ते नजर आ रहे हैं. सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड और मुख्य दलाल संजय बड़ाया (Sanjay Badaya) गिरफ्तारी के डर से थाईलैंड भाग गया है. संजय बड़ाया क्या करता था? सूत्रों के मुताबिक, संजय बड़ाया इस पूरे घोटाले की अहम कड़ी है. वह पूर्व मंत्री महेश जोशी और रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल, दोनों का बेहद करीबी माना जाता है. एसीबी की जांच में सामने आया है कि बड़ाया के जिम्मे पैसों के लेन-देन का प्रबंधन करना, अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में दलाली खाना, अपने चहेते लोगों को PWD विभाग में लगवाना और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करवाकर ठेके दिलवाना जैसे काम थे. एसीबी की टीम को भनक लगने से पहले ही वह एक शादी में शामिल होने के बहाने थाईलैंड भाग गया. अब एसीबी उसके भारत लौटते ही उसे गिरफ्तार करने की तैयारी में है. कैसे हुआ 960 करोड़ का फर्जीवाड़ा? साल 2023 में दर्ज हुए इस मुकदमे में जांच एजेंसियों ने पाया कि मंत्री रहते हुए महेश जोशी ने टेंडर प्रक्रिया में जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाईं. 'मैसर्स गणपति ट्यूबवेल' और 'मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल' को नियमों के विपरीत जाकर करोड़ों के टेंडर बांटे गए. इन दोनों कंपनियों ने इरकॉन इंटरनेशनल (Ircon International) के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर गैर-कानूनी तरीके से ये टेंडर हासिल किए थे. एसीबी इन दोनों कंपनियों के मालिकों सहित अब तक 11 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है. महेश जोशी से ACB पूछ रही ये सवाल एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता के अनुसार, महेश जोशी से गहन पूछताछ जारी है. एसीबी की टीम मुख्य रूप से इन तीन सवालों के जवाब तलाश रही है. पहला सवाल- घोटाले का पैसा कहां गया और उसे कहां ठिकाने लगाया गया है? दूसरा सवाल- टेंडर प्रक्रिया में किस प्रकार की शिकायतें थीं और पद का दुरुपयोग कैसे किया गया? तीसरा सवाल- संजय बड़ाया और अन्य फरार आरोपियों के साथ वित्तीय लेन-देन की क्या व्यवस्था थी?

ACB का एक्शन जारी: 15 ठिकानों पर छापेमारी के बाद पूर्व मंत्री हिरासत में

जयपुर जेजेएम घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की है. एसीबी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया. 960 करोड़ रुपए से जुड़े मामले में एसीबी ने कार्रवाई की है. इससे पहले एसीबी रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर चुकी है. अब मामले में ये बड़ी कार्रवाई की गई है.   15 ठिकानों पर पड़े थे छापे इसी मामले में ईडी ने 2025 में पूर्व मंत्री को गिरफ्तार किया था. इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी. 17 फरवरी को एसीबी ने करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी कर 10 लोगों को गिरफ्तार किया था. 960 करोड़ के घोटाले का आरोप जेजेएम योजना के तहत आरोप है कि फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल ने फर्जी दस्तावेज से टेंडर हासिल किए थे. इन दोनों फर्मों के प्रोपराइटर महेश मित्तल और पदमचंद जैन पर आरोप है कि उन्होंने इरकॉन इंटरनेशनल कंपनी के फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए थे. आरोप है कि इन सभी में पूर्व मंत्री महेश जोशी भी शामिल थे.   किरोड़ी लाल मीणा ने दिया था धरना दरअसल पूरा मामला 20 जून 2023 से शुरू हुआ. जब डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने राजधानी जयपुर के अशोक नगर थाने के बाहर इस मामले में FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर दो दिन तक धरना दिया. मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा. कई अन्य नेता भी अशोक नगर थाने पहुंचे. जमकर राजनीतिक बयानबाजी हुई. 2023 के विधानसभा चुनाव के वक्त भी यह मामला सियासी गलियारों में खूब चर्चा का विषय बना. 

JJM घोटाले में सुबोध अग्रवाल से ACB की पूछताछ जारी, कोर्ट में रिमांड पर बहस तेज

अजमेर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को आज जेजेएम घोटाले के मामले में फिर से कोर्ट में पेश किया गया, जिसमें एसीबी ने उन्हें 960 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के लिए गिरफ्तार किया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एसीबी की 5 दिन की रिमांड की मांग पर 3 दिन का रिमांड दिया था. बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए जाने का हवाला देकर इसका विरोध किया था. इस दौरान एसीबी ने करीब 125 सवाल तैयार किए थे, जिन्हें सुबोध अग्रवाल से पूछा गया. सुधांश पंत क‍ा ल‍िया नाम कोर्ट के बाहर मीडिया के सवालों पर सुबोध अग्रवाल ने कहा, "मैंने पूछताछ में पूरा सहयोग किया है, जो भी सवाल मुझसे पूछे गए, मैंने बता दिए. फाइनेंस कमेटी के 37 प्रकरणों में से 4 मेरे हैं, बाकी 33 सुधांश पंत के समय के हैं, जिसमें 600 करोड़ का मामला है. मैंने एसीबी से बार-बार कहा कि जिसमें पैसा नहीं दिया गया उसका नाम ले रहे हो, उसकी जांच कर रहे हैं, जिसमें पैसा देकर गबन हुआ, उसकी जांच नहीं कर रहे." ACB ने 3 दिन की रिमांड मांगी आज एसीबी ने फिर से 3 दिन की रिमांड मांगी. इसका विरोध करते हुए अग्रवाल के वकील ने कहा कि उन्हें रिमांड प्रार्थना पत्र की कॉपी नहीं दी गई, जो कानूनन आरोपी के वकील को दी जानी चाहिए, ताकि बचाव किया जा सके. एसीबी के वकील ने जवाब दिया कि यह केस डायरी का हिस्सा है, इसलिए नहीं दे सकते. कोर्ट ने एसीबी को अपनी बात का समर्थन करने के लिए आदेश या कानूनी प्रावधान पेश करने के लिए 15 मिनट का समय दिया है.