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जमशेदपुर में नई पहल, बुके के बजाय किताब और पौधों से होगा स्वागत और फिजूलखर्ची पर लगेगी रोक

जमशेदपुर जमशेदपुर स्थित मानगो नगर निगम की नवनिर्वाचित मेयर सुधा गुप्ता ने पदभार ग्रहण करते ही सादगी और सेवा की अनूठी मिसाल पेश की है. सोमवार को उन्होंने नगर निगम के उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार को पत्र लिखकर अपनी सभी सरकारी सुविधाओं में कटौती करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि वह नगर निगम में सुविधाओं का लाभ लेने नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने आई हैं. तत्काल प्रभाव से वापस ली जाएं गाड़ी मेयर सुधा गुप्ता ने अपने पत्र में कहा है कि उनके लिए आवंटित सरकारी गाड़ी को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए. उन्होंने घोषणा की है कि वह जनसेवा का कार्य अपने प्राइवेट गाड़ी से ही करेंगी. इसके अलावा, उन्होंने निगम के कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची रोकने के लिए गुलदस्ता परिपाटी को खत्म करने को कहा है. अब अतिथियों का स्वागत बुके के बजाय पौधे या किताब देकर किया जाएगा. मेयर ने मानदेय का किया परित्याग मेयर पद के लिए मिलने वाले मासिक मानदेय को सुधा गुप्ता ने स्वेच्छा से त्याग दिया है. यह राशि अब मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा होगी. उन्होंने अपने पत्र में कार्यालय के लिए किसी विशेष सजावट या अतिरिक्त फंड के खर्च पर रोक लगाने की बात कही है. उन्होंने सादगीपूर्ण कार्यस्थल की इच्छा जतायी है. उन्होंने कहा है कि टैक्स पेयर्स के पैसे का दुरुपयोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मेयर ने निगम के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे भी इसी सेवा भाव के साथ कार्य करें और जनहित को प्राथमिकता दें. फिजूलखर्ची की निगम में जगह नहीं: सुधा गुप्ता उन्होंने कहा कि मैं इस पद पर सेवा भाव से कार्य करने आई हूं न कि सुविधाओं का लाभ लेने के लिए. जनता के पैसे का एक-एक पाई सिर्फ विकास कार्यों में खर्च होना चाहिए. दिखावे और फिजूलखर्ची की निगम में कोई जगह नहीं होगी.

रिश्तों की कड़वाहट हुई खत्म, नोएडा में परिवार के साथ रह रहे ज्योति और आलोक मौर्या

प्रयागराज यूपी की पीसीएस अधिकारी ज्योति मौर्या और उनके पति आलोक मौर्या के बीच विवाद याद है न, अब इस विवाद का सुखद अंत हो गया है। दोनों के बीच करीब ढाई साल तक चले विवाद में समझौता हो गया है। दोनों एकसाथ रहने को तैयार हो गए हैं। आलोक मौर्य UPPCS के साक्षात्कार तक पहुंचे मिल रही जानकारी के मुताबिक, ढाई साल बाद दोनों में समझौता हो गया है और दोनों साथ रह रहे हैं। ज्योति मौर्या का प्रमोशन हो गया है और वह इस समय नोएडा में पोस्टेड है। वहीं, आलोक मौर्य अपना और परिवार का भविष्य संवारने में जुट गए हैं। साथ ही वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इस बार आलोक यूपीपीसीएस के साक्षात्कार तक पहुंचे थे, लेकिन वह अंतिम सूची से बार हो गए थे। ज्योति मौर्या और आलोक मौर्य की 2010 में हुई शादी ज्योति मौर्या और आलोक मौर्या की शादी 2010 में हुई थी। शादी के बाद शुरुआत में कुछ दिनों तक सबकुछ सामान्य रहा। इस बीच 2015 में ज्योति मौर्या का चयन पीसीएस में हो गया। एसडीएम के रूप में जिम्मेदारी संभाली। एसडीएम बनने के बाद ज्योति मौर्या और आलोक मौर्या के रिश्तों में दरार आनी शुरू हो गई। जहां ज्योति मौर्या एसडीएम के पद पर काम कर रही थीं तो वहीं आलोक पंचायती राज विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में काम कर रहे थे। ढाई साल बाद विवाद खत्म आलोक मौर्या ने दावा किया था कि उन्होंने अपनी पत्नी की पढ़ाई में पूरी सहायता की, लेकिन एसडीएम बनने के बाद ही उन्हें नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर कई गंभीर आरोप लगाए। करीब ढाई साल तक चले विवाद के बाद अब दोनों एकसाथ आ गए हैं। बताया जा रहा है कि परिवार और करीबी लोगों की पहल के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। अंतत: दोनों एकसाथ आने के लिए राजी हो गए। दोनों इस समय नोएडा में परिवार के साथ रह रहे हैं।