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ज्योति की बेल अपील सुप्रीम कोर्ट में, हरियाणा-पंजाब के 2 मामले आधार बनेंगे

हिसार  भारत की पाकिस्तान पर हुई 'ऑपरेशन सिंदूर' एयर स्ट्राइक के बाद देश के खिलाफ जासूसी के आरोपों में घिरी ट्रैवल ब्लॉगर ज्योति मल्होत्रा ने अब सलाखों से बाहर आने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली है। पिछले एक साल से हिसार की जेल में बंद ज्योति की जमानत याचिका निचली अदालतों से दो बार खारिज हो चुकी है। अब उसके कानूनी सलाहकार पंजाब और हरियाणा के उन दो मामलों का हवाला देकर बेल मांगने की जुगत में हैं, जिनमें सीक्रेट एक्ट के तहत पकड़े गए आरोपियों को राहत मिल चुकी है। पाकिस्तानी एंबेसी से लेकर चीन यात्रा तक का संदिग्ध सफर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर ज्योति तब आई थी, जब साल 2024 में उसकी यात्राओं का एक अजीब पैटर्न सामने आया। ज्योति 17 अप्रैल से 15 मई तक पाकिस्तान में रही और वहां से लौटने के महज 25 दिन बाद ही चीन के दौरे पर निकल गई। जांच में यह भी सामने आया कि पाकिस्तान यात्रा के दौरान उसने करतारपुर कॉरिडोर पर नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज का इंटरव्यू किया था। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, ज्योति केवल एक ब्लॉगर नहीं थी, बल्कि उसने राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में जाकर सैन्य शिविरों और कश्मीर के महत्वपूर्ण बांधों के संवेदनशील वीडियो बनाकर पाकिस्तानी एजेंटों तक पहुंचाए थे। ISI गुर्गों और उच्चायोग अधिकारियों से 'सीधी सेटिंग' पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों के पास मौजूद सबूतों के अनुसार, ज्योति के तार सीधे तौर पर पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी एहसान-उर-रहीम दानिश अली से जुड़े थे। मोबाइल डेटा की जांच में ISI के गुर्गे शाकिर, हसन अली और नासिर ढिल्लों के साथ उसकी नियमित बातचीत और बैठकों का खुलासा हुआ है। चार्जशीट में यह भी दर्ज है कि ज्योति को पाकिस्तान जाने से पहले दी गई ट्रैवल एडवाइजरी का उसने जानबूझकर उल्लंघन किया और संवेदनशील जानकारी साझा करने के बदले संपर्क बनाए रखे। युवाओं को हनीट्रैप और पैसों का लालच ज्योति मल्होत्रा का मामला उन सात चर्चित गिरफ्तारियों में से एक है, जो 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद हरियाणा और पंजाब से की गई थीं। जांच एजेंसियां मानती हैं कि पाकिस्तान 20 से 35 साल के मध्यमवर्गीय युवाओं को हनीट्रैप और पैसों के लालच में फंसाकर देश के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। ज्योति के मामले में वकील रविंद्र सिंह ढुल का तर्क है कि जब समान धाराओं (सीक्रेट एक्ट) वाले अन्य आरोपियों को जमानत मिल सकती है, तो ज्योति को क्यों नहीं? अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या वह इन दलीलों को स्वीकार कर ज्योति को राहत देगा या फिर सुरक्षा एजेंसियों के ठोस सबूत उस पर भारी पड़ेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पकड़े गए थे जासूस बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद हरियाणा और पंजाब से कई जासूस पकड़े गए थे। सबसे पहले 8 मई को मालेरकोटला में 2 जासूस पकड़े गए। 13 मई को पानीपत से नोमान इलाही गिरफ्तार हुआ। इसके बाद पुलिस ने हिसार, नूंह, कैथल और जालंधर से गिरफ्तारियां कीं। इन सभी की गिरफ्तारियों के बाद कुछ कॉमन चीजें सामने आई हैं। इसमें जासूसी के 6 आरोपियों के वीजा को लेकर नई दिल्ली में पाकिस्तानी एंबेसी से संपर्क हुआ। हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के तो पाकिस्तानी एंबेसी अधिकारी दानिश से लिंक तक मिले। इन सभी ने पाकिस्तान की यात्रा भी की। खास बात ये भी है कि ये सभी 20 से 35 साल की उम्र के यानी युवा हैं। इस उम्र में पैसे और हनीट्रैप के लालच से फंसाना आसान है। वहीं सभी मिडिल क्लास फैमिलीज से हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही पाकिस्तान से जुड़े लोगों पर नजर थी। इनकी कॉल और चैटिंग को इंटरसेप्ट किया गया तो इनके पाकिस्तानी जासूस होने का पता चला। इसके बाद इन्हें अरेस्ट कर लिया गया। सैन्य शिविरों के वीडियो पाकिस्तानी एजेंटों तक पहुंचाए बता दें कि ज्योति मल्होत्रा को 16 मई को पूछताछ के बाद उसके घर से पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने ज्योति से अलग-अलग पूछताछ की थी। ज्योति से पाकिस्तान के लिए जासूसी और पहलगाम मामले में टेरर कनेक्शन की भी जांच की गई। इसके बाद पुलिस ने 90 दिन की जांच रिपोर्ट की बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। चार्जशीट से जानकारी समाने आई थी कि ज्योति ने न केवल कश्मीर डैम के वीडियो बनाए बल्कि राजस्थान के बॉर्डर एरिया में जाकर सैन्य शिविरों के भी वीडियो पाकिस्तानी एजेंटों तक पहुंचाए। वह लगातार पाकिस्तानी एजेंटों से बातचीत करती थी। पाकिस्तानी एजेंटों से की मीटिंग पुलिस का दावा है कि ज्योति को पाकिस्तान यात्रा से पहले ही ट्रैवल एडवाइजरी बता दी गई थी। इसके बावजूद ज्योति ने उसका उल्लंघन किया। पाकिस्तानी एजेंटों से नंबर शेयर किए। उनसे मीटिंग भी की। पुलिस का दावा है कि ज्योति के मोबाइल फोन से पाकिस्तान उच्चायोग के अफसर एहसान-उर-रहीम दानिश अली के साथ व्यापक बातचीत का पता चला है। इसके अलावा आईएसआई के गुर्गे शाकिर, हसन अली और नासिर ढिल्लों के साथ नियमित संपर्क का भी पता चला है। पाकिस्तान और चीन की यात्रा से शक के घेरे में आई थी ज्योति ट्रैवल ब्लॉगर ज्योति मल्होत्रा सुरक्षा एजेंसियों की नजर में तब आई जब वह पिछले साल 2024 में 2 महीने के भीतर पाकिस्तान और फिर चीन गई थी। ज्योति मल्होत्रा के यूट्यूब पर अपलोड वीडियो की डेट के अनुसार वह 17 अप्रैल 2024 को पाकिस्तान गई थी। 15 मई तक वह पाकिस्तान में ही रही। इसके बाद भारत लौटी। पाकिस्तान से लौटने के 25 दिन बाद ही 10 जून को वह चीन चली गई। 9 जुलाई तक चीन में रही और फिर वहीं से 10 जुलाई को नेपाल में काठमांडू पहुंच गई। इससे पहले वह करतारपुर कॉरिडोर से पाकिस्तान गई तो वहां पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री और पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ से मिली और उनका इंटरव्यू तक किया।

जीवन की कठिनाइयाँ, रिश्तों की कसौटी और बदलता समाज

जीवन की कठिनाइयाँ, रिश्तों की कसौटी और बदलता समाज मनुष्य की यात्रा का एक गहरा सच मनुष्य का जीवन एक लंबी और जटिल यात्रा है। इस यात्रा में कभी उजाले के दिन आते हैं तो कभी अंधेरी रातें। कभी लगता है कि संसार हमारे साथ खड़ा है, और कभी ऐसा भी समय आता है जब भीड़ के बीच भी मनुष्य स्वयं को अकेला महसूस करता है। यही जीवन का स्वभाव है, यही उसका सत्य है। जब एक मनुष्य जन्म लेता है, तब उसके पास कोई पद, प्रतिष्ठा या संपत्ति नहीं होती। उसके पास केवल संबंध होते हैं। मां का स्नेह, पिता का संरक्षण, परिवार का साथ और समाज की गोद। यही वे आधार होते हैं जिन पर मनुष्य का व्यक्तित्व धीरे धीरे आकार लेता है। समय के साथ जीवन आगे बढ़ता है। बचपन से युवावस्था, युवावस्था से परिपक्वता और फिर वृद्धावस्था तक का सफर अनेक अनुभवों से भरा होता है। इस यात्रा में मनुष्य कई लोगों से मिलता है। कुछ लोग क्षणिक रूप से जीवन में आते हैं और चले जाते हैं, जबकि कुछ ऐसे होते हैं जो मन की गहराइयों में अपनी स्थायी जगह बना लेते हैं। जीवन के शुरुआती वर्षों में मनुष्य सपनों से भरा होता है। उसके मन में भविष्य को लेकर उत्साह होता है। उसे लगता है कि दुनिया उसके लिए खुली हुई है और हर रास्ता उसके लिए संभावनाओं से भरा हुआ है। इस समय उसके आसपास मित्रों की भीड़ होती है। रिश्तेदारों का स्नेह मिलता है। समाज भी उसे आशा की दृष्टि से देखता है। धीरे धीरे जीवन का वास्तविक स्वरूप सामने आने लगता है। जिम्मेदारियां बढ़ती हैं। संघर्ष बढ़ते हैं। जीवन की राहें उतनी सरल नहीं रह जातीं जितनी बचपन में प्रतीत होती थीं। यही वह समय होता है जब मनुष्य को समझ में आता है कि जीवन केवल उत्सव नहीं है, यह एक परीक्षा भी है। जीवन में ऐसे अनेक अवसर आते हैं जब मनुष्य को सफलता मिलती है। जब उसकी मेहनत रंग लाती है। जब लोग उसकी प्रशंसा करते हैं। जब समाज उसे सम्मान की दृष्टि से देखता है। ऐसे समय में मनुष्य के आसपास लोगों की संख्या भी बढ़ जाती है। मित्रों का दायरा बड़ा हो जाता है। कई लोग उसके साथ जुड़ना चाहते हैं। लेकिन जीवन का पहिया हमेशा एक दिशा में नहीं घूमता। समय बदलता है और परिस्थितियां भी बदल जाती हैं। कभी व्यापार में कठिनाई आ जाती है, कभी आर्थिक संकट सामने खड़ा हो जाता है, कभी स्वास्थ्य साथ नहीं देता और कभी समाज की परिस्थितियां भी मनुष्य के लिए चुनौती बन जाती हैं। ऐसे समय में मनुष्य को एक अलग ही अनुभव होता है। वह देखता है कि जो लोग कभी उसके बहुत करीब दिखाई देते थे, उनमें से कई धीरे धीरे दूर होने लगते हैं। जिन लोगों के साथ कभी हर दिन बातचीत होती थी, वे अचानक व्यस्त हो जाते हैं। जिनके साथ कभी घंटों बैठकर बातें होती थीं, वे मिलने से बचने लगते हैं। कभी कभी तो यह स्थिति इतनी गहरी हो जाती है कि लगता है जैसे लोग किसी की शक्ल तक देखना नहीं चाहते। यही वह क्षण होता है जब मनुष्य को जीवन का सबसे कठोर सत्य समझ में आता है। रिश्तों की वास्तविकता अक्सर कठिन समय में ही सामने आती है। जब सब कुछ ठीक होता है, तब रिश्ते बहुत सहज और मजबूत दिखाई देते हैं। लेकिन जैसे ही परिस्थितियां बदलती हैं, वैसे ही कई रिश्तों की परतें भी खुलने लगती हैं। यह कहना उचित होगा कि जीवन में हर रिश्ता एक समान नहीं होता। कुछ रिश्ते केवल सुविधा पर आधारित होते हैं। कुछ रिश्ते परिस्थिति पर आधारित होते हैं। लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो समय और कठिनाइयों की कसौटी पर भी टिके रहते हैं। ऐसे रिश्ते बहुत कम होते हैं, लेकिन वही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति बन जाते हैं। समाज की संरचना भी इसी प्रकार के संबंधों पर आधारित होती है। जब समाज में विश्वास, सहयोग और संवेदनशीलता का भाव मजबूत होता है, तब समाज स्थिर और मजबूत बनता है। लेकिन जब रिश्तों में स्वार्थ बढ़ने लगता है और संवेदनशीलता कम होने लगती है, तब समाज के ताने बाने में भी दरारें आने लगती हैं। आज का समय बहुत तेज गति से बदल रहा है। तकनीक ने जीवन को सरल भी बनाया है और जटिल भी। संचार के साधन बढ़ गए हैं, लेकिन संवाद की गहराई कहीं न कहीं कम होती जा रही है। लोग एक दूसरे से जुड़े तो दिखाई देते हैं, लेकिन उनके बीच भावनात्मक दूरी भी बढ़ती जा रही है। आज के समाज में प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। हर व्यक्ति अपने लक्ष्य को पाने की दौड़ में लगा हुआ है। इस दौड़ में कई बार मनुष्य अपने आसपास के लोगों की भावनाओं को समझने का समय नहीं निकाल पाता। यही कारण है कि आज रिश्तों में वह सहजता और स्थायित्व कम दिखाई देता है जो पहले हुआ करता था। पहले समाज में यह परंपरा थी कि सुख हो या दुख, लोग एक दूसरे के साथ खड़े रहते थे। एक व्यक्ति की परेशानी पूरे समाज की चिंता बन जाती थी। लेकिन आज परिस्थितियां बदलती हुई दिखाई देती हैं। लोग अधिक आत्मकेंद्रित होते जा रहे हैं। यह परिवर्तन केवल समाज की संरचना का परिणाम नहीं है, बल्कि जीवन की बदलती प्राथमिकताओं का भी परिणाम है। फिर भी यह कहना गलत होगा कि आज के समय में रिश्तों का महत्व समाप्त हो गया है। वास्तव में आज भी मनुष्य को सबसे अधिक आवश्यकता संबंधों की ही होती है। चाहे वह परिवार हो, मित्र हों या समाज, मनुष्य अकेले जीवन नहीं जी सकता। कठिन समय मनुष्य को बहुत कुछ सिखाता है। यह उसे यह समझने में मदद करता है कि वास्तव में उसके जीवन में कौन लोग महत्वपूर्ण हैं। जो लोग कठिन समय में भी साथ खड़े रहते हैं, वही जीवन के सच्चे साथी होते हैं। ऐसे लोग बहुत अधिक नहीं होते, लेकिन वही जीवन की असली पूंजी होते हैं। जीवन की कठिनाइयां मनुष्य को मजबूत भी बनाती हैं। जब मनुष्य संघर्ष से गुजरता है, तब वह अपने भीतर की शक्ति को पहचानता है। वह समझता है कि जीवन केवल बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं … Read more

ज्योति ऑस्ट्रेलिया में जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम की अगुवाई करेंगी

नई दिल्ली डिफेंडर ज्योति सिंह 23 सदस्यीय भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम का नेतृत्व करेंगी, जो 26 सितंबर से दो अक्टूबर तक कैनबरा के राष्ट्रीय हॉकी केंद्र में होने वाले पांच मैचों में खेलने के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाएगी। भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया की जूनियर महिला टीम के खिलाफ तीन मैच खेलेगी। इसके बाद वह आस्ट्रेलिया की हॉकी वन लीग में भाग लेने वाले क्लब कैनबरा चिल के खिलाफ दो मैच खेलेगी। यह दौरा एफआईएच हॉकी महिला जूनियर विश्व कप 2025 की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण होगा, जो दिसंबर में चिली के सैंटियागो में आयोजित किया जाएगा। भारतीय टीम में निधि और एंगिल हर्षा रानी मिंज गोलकीपिंग की जिम्मेदारी संभालेंगी, जबकि डिफेंस में मनीषा, ज्योति, लालथंतलुआंगी, ममिता ओरम, साक्षी शुक्ला, पूजा साहू और नंदनी शामिल हैं। मिडफील्ड में प्रियंका यादव, साक्षी राणा, खैदेम शिलेमा चानू, रजनी केरकेट्टा, बिनिमा धान, इशिका, सुनेलिता टोप्पो और अनिशा साहू जबकि फॉरवर्ड पंक्ति में लालरिनपुई, निशा मिंज, पूर्णिमा यादव, सोनम, कनिका सिवाच और सुखवीर कौर शामिल हैं।