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कैसा होगा कलयुग का अंत? धर्मग्रंथों में बताए गए हैं ये संकेत और भविष्यवाणियां

 कल्पना कीजिए उस समय की, जब दुनिया में धर्म का नाम लेने वाला कोई नहीं होगा. जब इंसानों की उम्र लगातार घटती जाएगी और आखिर में मनुष्य की औसत आयु महज 20 साल रह जाएगी. जब छोटी उम्र में ही बाल सफेद होने लगेंगे और इंसान का जीवन पाप, लालच और अधर्म से घिर जाएगा. धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में कलयुग के अंतिम चरण को लेकर कई तरह के वर्णन मिलते हैं. इन वर्णनों के अनुसार, जैसे-जैसे कलयुग अपने चरम पर पहुंचेगा, वैसे-वैसे धर्म, सत्य, दया, पवित्रता, क्षमा और मनुष्य की आयु में कमी आती जाएगी. लेकिन सवाल है कि आखिर कलयुग का अंत कैसा होगा? क्या समुद्र और नदियां सूख जाएंगी? और सबसे बड़ा सवाल, इस घोर अधर्म के बीच भगवान विष्णु का कल्कि अवतार कैसे होगा? आइए जानते हैं पुराणों में बताए गए कलयुग के अंतिम समय की उस कथा के बारे में. जब 20 साल की उम्र ही बन जाएगी बुढ़ापे की निशानी धार्मिक ग्रंथों में कलयुग के अंतिम चरण को बेहद भयावह बताया गया है. मान्यता है कि इस दौर में मनुष्य की आयु लगातार कम होती जाएगी. आज जहां 20 साल की उम्र को युवावस्था की शुरुआत माना जाता है, वहीं कलयुग के अंतिम चरण में यही उम्र जीवन के अंतिम पड़ाव के करीब मानी जाएगी. कहा गया है कि इंसानों के शरीर में भी समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण दिखाई देने लगेंगे. कम उम्र में ही बाल सफेद होने लगेंगे और शारीरिक शक्ति तेजी से घटने लगेगी. यानी जिस उम्र में आज के युवा अपना करियर और भविष्य बनाने के बारे में सोचते हैं, उस समय इंसान अपने जीवन के अंत के करीब पहुंच चुका होगा. रिश्ते और परिवार भी कमजोर पड़ जाएंगे कलयुग के अंतिम समय को लेकर शास्त्रों में सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के पतन का भी वर्णन मिलता है. धर्म, सत्य, पवित्रता, दया, क्षमा और संयम जैसी चीजें धीरे-धीरे समाप्त होती जाएंगी. पति-पत्नी के रिश्तों में भी विश्वास और सम्मान कम होता जाएगा. लोग स्वार्थ और अपनी इच्छाओं को रिश्तों से ऊपर रखने लगेंगे. परिवार की जगह धन और व्यक्तिगत लाभ को ज्यादा महत्व दिया जाएगा. धार्मिक वर्णनों में तो यहां तक कहा गया है कि उस समय अच्छे चरित्र की पहचान भी व्यक्ति के आचरण से नहीं, बल्कि उसके पास मौजूद धन से की जाएगी. जिसके पास धन होगा, वही सम्मानित माना जाएगा कलयुग के अंतिम चरण में धन ही प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा आधार बन जाएगा. जिस व्यक्ति के पास जितना ज्यादा धन होगा, समाज उसे उतना ही प्रभावशाली और गुणवान समझेगा. उसके परिवार और कुल की प्रतिष्ठा भी धन के आधार पर तय की जाएगी.  वहीं गरीब व्यक्ति को अपमानित और अयोग्य समझा जाएगा. धन के लिए लोग अपने ही रिश्तेदारों और मित्रों के खिलाफ खड़े हो जाएंगे. लालच इतना बढ़ जाएगा कि इंसान अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटेगा. धर्म की जगह अधर्म का बोलबाला होगा कलयुग के अंतिम समय में धर्म का पालन करने वाले लोगों की संख्या बेहद कम रह जाने की बात कही गई है. लोग धार्मिक ग्रंथों और वेदों की बातें तो करेंगे, लेकिन उनके जीवन में उनका पालन दिखाई नहीं देगा. कुछ धार्मिक गुरु भी अपने स्वार्थ के लिए लोगों का इस्तेमाल करेंगे. वे ज्ञान की बातें करेंगे, लेकिन उनके आचरण में धर्म और सदाचार की कमी होगी. वहीं चालाक, लोभी और स्वार्थी व्यक्ति को ही बुद्धिमान और सफल माना जाएगा. धरती पर अन्न उगना भी मुश्किल हो जाएगा. पुराणों में कलयुग के अंतिम चरण में प्राकृतिक असंतुलन का भी वर्णन मिलता है. मान्यता है कि धरती की उर्वरता कम होती जाएगी और अन्न का उत्पादन प्रभावित होगा. बारिश अनियमित हो जाएगी और मौसम का संतुलन बिगड़ जाएगा. कहीं भयंकर गर्मी होगी तो कहीं कड़ाके की ठंड. आंधी, बाढ़ और दूसरे प्राकृतिक संकट बढ़ सकते हैं. कुछ धार्मिक वर्णनों में तो यह भी कहा गया है कि सूर्य का तेज इतना बढ़ जाएगा कि नदियां और समुद्र तक सूखने लगेंगे. जब तीर्थों की जगह छोटे तालाबों को महत्व मिलेगा कलयुग के अंत से जुड़े धार्मिक वर्णनों में यह भी कहा गया है कि लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराओं में इतना बदलाव आ जाएगा कि पवित्र तीर्थों के महत्व को भी लोग भूलने लगेंगे. लोग दूर स्थित पवित्र नदियों और तीर्थस्थलों की जगह अपने आसपास मौजूद छोटे जलस्रोतों को ही तीर्थ मानने लगेंगे. यह वर्णन सिर्फ भौगोलिक बदलाव की बात नहीं करता, बल्कि उस समय मनुष्य की सोच और धार्मिक मूल्यों में आने वाले बदलाव की ओर भी संकेत करता है. कलयुग का सबसे बड़ा प्रतीक होगा कली पुरुष धार्मिक मान्यताओं में कली पुरुष को कलयुग के अधर्म और बुराइयों का प्रतीक माना गया है. जैसे-जैसे अधर्म बढ़ेगा, कली की शक्ति भी बढ़ती जाएगी. उसका प्रभाव मनुष्यों की सोच और व्यवहार पर पड़ने लगेगा. लोग धीरे-धीरे लोभ, क्रोध, हिंसा, छल और स्वार्थ के रास्ते पर जाने लगेंगे. कहा जाता है कि कली पुरुष को सबसे ज्यादा शक्ति अधर्म से ही मिलेगी. जितना अधर्म बढ़ेगा, उतना ही उसका प्रभाव भी बढ़ता जाएगा. फिर होगा भगवान कल्कि का अवतार लेकिन सनातन परंपरा में एक बात हमेशा कही गई है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए ईश्वर अवतार लेते हैं. कलयुग के अंत में भगवान विष्णु के दसवें अवतार भगवान कल्कि के अवतार की मान्यता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब अधर्म अपने चरम पर पहुंच जाएगा और धर्म लगभग समाप्त हो जाएगा, तब भगवान कल्कि अवतार लेकर अधर्म का नाश करेंगे और धर्म की दोबारा स्थापना करेंगे. मान्यता है कि भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर प्रकट होंगे. उनके घोड़े का नाम देवदत्त बताया जाता है. वे हाथ में तलवार धारण करके अधर्म और अत्याचार का अंत करेंगे. भगवान कल्कि के गुरु होंगे परशुराम भगवान कल्कि से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में भगवान परशुराम का भी विशेष स्थान बताया गया है. परशुराम को विष्णु का छठा अवतार माना जाता है और वे चिरंजीवी माने गए हैं. मान्यता है कि भगवान परशुराम ही भगवान कल्कि को युद्ध और धर्म का ज्ञान देंगे. धार्मिक प रंपराओं में यह भी कहा जाता है कि परशुराम आज भी महेंद्र पर्वत पर तपस्या कर रहे … Read more