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योगी सरकार ने खोले दरवाजे, हर अपवंचित बच्चे को मिल रहा शिक्षा का अधिकार

लखनऊ.  जिन घरों में कभी अच्छी शिक्षा एक सपना थी, वहां अब उम्मीद ने दस्तक दे दी है। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत योगी सरकार ने एक बार फिर यह साबित किया है कि नीतियां कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर बदलाव का माध्यम बन रहीं हैं। वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश में अब तक 1,03,439 बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा चुका है, जिससे हजारों गरीब और वंचित परिवारों के सपनों को नई दिशा मिली है। आंकड़ों का यह शुरुआती रुझान संकेत दे रहा है कि आने वाले चरणों में यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी, क्योंकि नामांकन प्रक्रिया अभी जारी रहेगी। राज्य के लखनऊ, वाराणसी, बुलंदशहर और बंदायू जनपद नामांकन में आगे हैं। आंकड़ों के अनुसार लखनऊ में 7,952, वाराणसी में 4,957, बुलंदशहर 4154 और बदायूं में 3599 बच्चों का नामांकन हुआ है। अभिभावकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है और वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों पर पड़ा है। अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी निजी विद्यालयों में पढ़ाई के अवसर मिलने लगे हैं, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर की मजबूत नींव रखी जा रही है। यह कदम शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में भी एक परिवर्तनकारी पहल साबित हो रहा है। सरकार की पारदर्शी नीति से हो रहा संभव अपने अधिकारों, सुविधाओं या अवसरों से वंचित बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर योगी सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया है। ऑनलाइन आवेदन और चयन प्रणाली के माध्यम से पात्र बच्चों को बिना किसी भेदभाव के लाभ मिल रहा है। यही कारण है कि योजना के प्रति आमजन में विश्वास और सहभागिता लगातार बढ़ रही है। बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि जुलाई तक चलने वाली नामांकन प्रक्रिया के दौरान और अधिक पात्र बच्चों को इस योजना से जोड़ा जा सकेगा। आरटीई नामांकन में टॉप 10 जनपद जनपद                        नामांकन लखनऊ                 7952 वाराणसी                4957 बुलंदशहर                4154 बदायूं                      3599 मुरादाबाद                3246 आगरा                     3086 कानपुर नगर            2476 गोरखपुर                  2352 अलीगढ़                  2320 गाजियाबाद             2209

कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 के शेष हिस्से में जल्द शुरू होंगी यात्री सेवाएं, कॉरिडोर-2 का भी तेज गति से हो रहा निर्माण

कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 और 2 का विस्तारीकरण प्रगति पर, मार्च 2027 तक होगा पूरा कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 के शेष हिस्से में जल्द शुरू होंगी यात्री सेवाएं, कॉरिडोर-2 का भी तेज गति से हो रहा निर्माण कानपुर मेट्रो के विस्तार से शहर को मिलेगी आधुनिक यातायात व्यवस्था और औद्योगिक विकास को रफ्तार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत विकास के विजन के अनुरूप प्रदेश के प्रमुख शहरों में तेज, भविष्योन्मुखी और प्रदूषण रहित मेट्रो परियोजनाओं का विकास किया जा रहा है। इस क्रम में औद्योगिक नगरी कानपुर में मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के तहत विकसित हो रही मेट्रो परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। जिसके तहत कानपुर मेट्रो परियोजना के कॉरिडोर-1 में आईआईटी कानपुर से कानपुर सेंट्रल तक मेट्रो सेवा का सुगम परिचालन हो रहा है, शेष भाग का कार्य इस वर्ष तक पूरा हो जाएगा। जिसमें बारादेवी से नौबस्ता तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों में टेस्टिंग और ट्रायल रन चल रहा है। वहीं कॉरिडोर-2 के तहत सीएसए यूनिवर्सिटी से बर्रा मेट्रो स्टेशन तक निर्माण कार्य भी तेज गति से चल रहा है, जिसके मार्च 2027 तक पूरा होने की संभावना है। कॉरिडोर-1 के 5 एलिवेटेड स्टेशनों में चल रहा है ट्रायल रन कानपुर मेट्रो का कॉरिडोर-1, जो आईआईटी से नौबस्ता तक लगभग 23 किलोमीटर लंबा है, इसमें से 15.4 किलोमीटर का सेक्शन परिचालन में है। शेष हिस्से में अंडरग्राउंड व एलिवेटेड दोनों सेक्शन का निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। इसके तहत झकरकट्टी से ट्रांसपोर्ट नगर तक दो अंडरग्राउंड स्टेशनों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, इनमें फिनिशिंग का कार्य भी समाप्ति की ओर है। टीबीएम सुरंग की अप लाइन में ट्रैक बिछाया जा चुका है, जबकि डाउन लाइन में कार्य अंतिम चरण में है। वहीं, बारादेवी से नौबस्ता तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों का भी संरचनात्मक कार्य पूरा हो चुका है, फिनिशिंग का कार्य तेज गति से चल रहा है। इस सेक्शन में जनवरी 2026 से ट्रेन टेस्टिंग और ट्रायल रन किया जा रहा है, जिससे जल्द ही इस हिस्से में यात्री सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। सीएसए यूनिवर्सिटी से बर्रा तक कॉरिडोर-2 में हो रहा तेज गति से विकास कानपुर मेट्रो परियोजना के तहत सीएसए यूनिवर्सिटी से बर्रा तक लगभग 8.6 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर-2 का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस कॉरिडोर के तहत रावतपुर से डबल पुलिया तक तीन भूमिगत स्टेशनों का निर्माण कार्य जारी है, टीबीएम सुरंग का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके अलावा सीएसए यूनिवर्सिटी/विजय नगर से बर्रा तक पांच एलिवेटेड स्टेशनों का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। ये सभी निर्माण कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कानपुर मेट्रो परियोजना के पूरा होने से शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे न केवल ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या में कमी आएगी, बल्कि शहर के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। कानपुर मेट्रो परियोजना, शहर को आधुनिक, सुगम और पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

कानपुर:3500 करोड़ की ठगी का खुलासा, रजिस्ट्री ऑफिस में आयकर टीम ने मारा छापा

 कानपुर   कानपुर रजिस्ट्री विभाग एक बार फिर आयकर विभाग की कार्रवाई की जद में आया है।  विभाग के जोन-3 में आयकर विभाग ने सर्वे किया। सिविल लाइंस स्थित कार्यालय में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। छह घंटे की जांच में लगभग 3500 करोड़ की विसंगतियों के साक्ष्य मिले हैं। आयकर विभाग को लगभग 800 करोड़ के टैक्स का चूना लगा है। फिलहाल रजिस्ट्री अधिकारियों को दस दिन का समय देकर कागजात प्रस्तुत करने को कहा गया है। आयकर निदेशक (आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण) के निर्देश पर रजिस्ट्री कार्यालय के जोन वन में सहायक निदेशक विमलेश राय की अगुवाई में अचल संपत्ति की रजिस्ट्री की जांच के लिए सर्वे किया गया। टीम में आयकर निरीक्षक कुलदीप गुप्ता, देव अनंत श्रीवास्तव, कय्यूम अहमद, रवि पासवान के साथ भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। आयकर अधिकारियों ने वर्ष 2020 से 2025 तक की रजिस्ट्री की जांच की। सर्वे टीम का कहना है कि अब तक जिन दस्तावेजों की छानबीन हुई है, उसके अनुसार, 3500 करोड़ रुपये की विसंगतियां मिली हैं। एक हजार पैन में नंबर मनमर्जी के मिलेः आयकर सर्वे के दौरान कई रजिस्ट्री में मनमर्जी पैन लिखा गया। लगभग एक हजार पैन में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी मिलीं। गलत मोबाइल नंबर तक लिखे गए। सर्वे टीम का आकलन है कि ऐसा जानबूझकर किया गया। इसकी आड़ में आयकर विभाग की आंखों में धूल झोंकने का पूरा प्रयास किया गया। रजिस्ट्री विभाग की ओर से संपत्तियों की रजिस्ट्री का जो डाटा आयकर विभाग को भेजा गया, वह वास्तविक रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था। डिजिटल और मैनुअल दोनों प्रकार के रिकॉर्ड, स्टांप शुल्क की गणना से संबंधित विवरण और डाटा ट्रांसफर प्रक्रिया की पड़ताल की गई। 34 दिन में तीसरी बड़ी कार्रवाई, अभी और रडार में : रजिस्ट्री विभाग के खिलाफ आयकर विभाग की 34 दिन में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। 26 दिसंबर को जोन वन में सर्वे किया गया था, जिसमें 2500 करोड़ की हेराफेरी का मामला सामने आया था। वहीं 30 दिसंबर को जोन टू में सर्वे के दौरान 1100 करोड़ की विसंगतियां मिली थीं। जोन-3 में तो 3500 करोड़ का खेल सामने आया है। विभाग को तीनों जोन में लगभग 2 हजार करोड़ के टैक्स का चूना लगने की बात कही जा रही है।

कानपुर निवासी लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास ने नई दिल्ली स्थित ‘आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल’ के कमांडेंट का पदभार संभाला

नई दिल्ली , कानपुर निवासी प्रतिष्ठित ई.एन.टी. सर्जन लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास, जिन्होंने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में लगभग चार दशकों तक अनुकरणीय सेवाये दी हैं, ने नई दिल्ली स्थित सशस्त्र बलों के प्रसिद्ध एवं महत्वपूर्ण अस्पताल, 'आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल' (आर एंड आर हॉस्पिटल) के कमांडेंट के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है। लेफ्टिनेंट जनरल दास का सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा है। अपने सेवा काल के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल दास द्वारा चिकित्सा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के साथ-साथ प्रशासनिक एवं कमांड पदों पर रहते हुये महत्वपूर्ण कार्य किया गया है।  पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज से स्नातक लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास ने नई दिल्ली स्थित आर्मी के बेस हॉस्पिटल एवं कमांड हॉस्पिटल लखनऊ में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में भी कार्य किया है। कमांडेंट, सी.एच. (एन.सी.) रहते हुए उन्होंने कमांड हॉस्पिटल, उधमपुर को नए अत्याधुनिक एवं सुसज्जित अस्पताल भवन में स्थानांतरित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने दीर्घ और विशिष्ट करियर के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल दास ने असाधारण नेतृत्व और सेवा भावना का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्हें चीफ आफ आर्मी स्टाफ (सी.ओ.ए.एस.), चीफ ऑफ इंटिग्रेटेड स्टाफ कमेटी (सी.आई.एस.सी.) तथा जी.ओ.सी. इन सी. प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जा चुका है। 'आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल' के कमांडेंट के रूप में उनकी नियुक्ति से अस्पताल में उत्कृष्टता के मानकों में और वृद्धि होने की अपेक्षा है, जिससे सशस्त्र बलों के साथ – साथ नागरिक समुदाय को भी उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्राप्त होंगी। कमांडेंट के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल दास का उद्देश्य अस्पताल की गौरवशाली परंपरा को बनाए रखते हुए चिकित्सा सेवा, अनुसंधान तथा शिक्षण के क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्ता के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित करना है। वे अस्पताल की सामर्थ्य को और सुदृढ़ बनाने, अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को विकसित करने तथा चिकित्सा उत्कृष्टता एवं नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।