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काशी में भक्तिभाव का संगम: शिव–पार्वती विवाह हेतु माता वैष्णो देवी का दिव्य उपहार

वाराणसी महाशिवरात्रि के दिव्य पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में सनातन परंपरा को समृद्ध करने वाला एक शुभ और भावपूर्ण नवाचार इस वर्ष साकार हो रहा है. इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व के नवाचार में कई प्रसिद्ध देवालयों और देवी देवताओं द्वारा भगवान विश्वनाथ के इस महापर्व पर शुभेच्छपूर्वक उपहार प्रेषित किए जाने का विहंगम प्रयोग है. इसी श्रृंखला में महाशिवरात्रि उत्सव के दृष्टिगत 7 फरवरी को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड  की ओर से भगवान श्री विश्वेश्वर (श्री काशी विश्वनाथ महादेव) के लिए उपहार और प्रसाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास कार्यालय में प्राप्त हुआ. इस पावन भेंट के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास मां वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के प्रति आभार व्यक्त करता है. यह नवाचार महाशिवरात्रि पर्व के महोत्सव को और ज्यादा आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान करने वाली है. माता वैष्णो देवी शक्ति स्वरूप की ओर से काशी में स्थित भगवान विश्वनाथ को अर्पित यह पावन उपहार शाश्वत शक्ति–शिव संबंध का सजीव प्रतीक है. महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर प्राप्त यह उपहार श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष माध्यम बनेगा और सनातन संस्कृति की मूल भावना को जनमानस के समक्ष सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान श्री विश्वेश्वर के लिए यह पावन उपहार प्रेषित करने के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के प्रति हार्दिक धन्यवाद और कृतज्ञता ज्ञापित करता है. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास मां वैष्णो देवी के प्रधान उत्सव पर भगवान विश्वनाथ की ओर से मां वैष्णो देवी को भी उपहार प्रेषित कर सनातन आस्था के केंद्रों के मध्य स्थाई पुण्य संबंधों को सशक्त करने के प्रति संकल्पित है. चेलेंग और गसोमा’ धारण करेंगे बाबा विश्वनाथ और मइया पार्वती इसके अलावा अन्य जगहों से भी बाबा विश्वनाथ और गौरा मइया के लिए उपहार आ रहे हैं. इस बार महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा को जो परिधान धारण कराए जाएंगे, वह असम के ऐतिहासिक नगर शिवसागर से विशेष रूप से मंगाए गए हैं. बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा को असमिया पुरुष परिधान ‘चेलेंग और गसोमा’ धारण कराया जाएगा. इस परिधान में बाबा का स्वरूप अत्यंत राजसी और दिव्य दिखाई देगा, जो शिव-विवाह की गरिमा को और भी भव्य बनाएगा.

यूपी का लौटा सांस्कृतिक वैभव, नये साल का जश्न मनाने तीर्थस्थल पहुंच रहे युवा

काशी के पर्यटन में रिकार्ड वृद्धि, वर्ष 2025 में पहुंचे 7 करोड़ 26 लाख श्रद्धालु, जिसमें 80 फीसदी युवा  यूपी का लौटा सांस्कृतिक वैभव, नये साल का जश्न मनाने तीर्थस्थल पहुंच रहे युवा  सांस्कृति पुनर्जागरण की लहर, नये साल पर काशी विश्वनाथ का दर्शन करने पहुंचे 30 लाख से अधिक युवा  वाराणसी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी विजन ने वाराणसी को न केवल आध्यात्मिक नगरी के रूप में पुनर्स्थापित किया है, बल्कि वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित किया है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के साथ गंगा घाटों, प्राचीन मंदिरों, सड़कों और चौराहों का जिस तरह से सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विकास हुआ है, इसका प्रमाण वर्ष 2025 में रिकार्ड 7 करोड़ 26 लाख से अधिक पर्यटकों ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किये। इसमें महाकुम्भ के पलट प्रवाह और महाशिवरात्रि के अवसर पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सर्वधिक रही। वहीं नये साल का जश्न मनाने भी लाखों की संख्या में युवा काशी पहुंचे।   काशी में वर्ष 2025 में पहुंचे रिकार्ड संख्या में पर्यटक वाराणसी में भव्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण और गंगा जी के घाटों और मंदिरों के जीर्णोद्धार के बाद काशी आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पर्यटन विभाग के अनुसार पिछले वर्ष 2025 में काशी में 7,26,76,780 पर्यटकों ने काशी के मनोरम घाटों और मंदिरों का दर्शन किया। इस आंकड़े में प्रयागराज महाकुंभ के 'पलट प्रवाह' के दौरान आए 2 करोड़ 87 लाख श्रद्धालुओं की संख्या भी शामिल है। जिन्होंने महाकुम्भ में त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान के बाद काशी विश्वनाथ के भी दर्शन किये। साथ ही महाशिवरात्रि पर्व और पवित्र सावन माह में काशी विश्वनाथ का दर्शन पूजन करने वालों की संख्या सर्वाधिक रही, जिसके लिए मंदिर प्रबंधन कमेटी और काशी प्रशासन ने विशेष इंतजाम किये थे।  नये साल का जश्न मानाने 30 लाख से अधिक युवा पहुंचे काशी   सीएम योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में उठी सांस्कृतिक पुनर्जागरण की लहर ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी में धार्मिक स्थलों और तीर्थों के प्रति श्रद्धा में भी बढ़ोतरी की है। इसका जीवंत प्रमाण हमें नये साल के जश्न के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों पर उमड़ी अपार भीड़ के रूप में देखने को मिला। जहां 24 दिसंबर 2025 से 01 जनवरी 2026 के दौरान 3075769 श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए। इस संबंध में काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने विश्व भूषण मिश्र ने कहा कि सनातन संस्कृति उत्सव, उत्साह एवं उल्लास की आश्रयस्थली है। विश्व के समस्त उत्सव सनातन मान्यता में उत्कर्ष प्राप्त करते हैं। उत्सवों में प्रायः लोक तात्कालिक सत्ता के आचरण को प्रतिबिंबित करता है। अतः स्वाभाविक ही है कि वर्तमान काल में प्रत्येक पर्व पर चाहे वह भारतीय हो अथवा पश्चिम का पर्व, सनातन आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं का प्रवाह अभूतपूर्व है। साथ ही सीएम योगी के प्रयासों से काशी, प्रयागराज और अयोध्या को जिस सैक्रेड ट्रायएंगल के रूप में विकसित किया जा रहा है, उससे इन तीर्थों में पर्यटकों की सख्यां में भारी मात्रा में वृद्धि दर्ज की जा रही है।

स्लीपर सेल हुई सक्रिय, अयोध्या-काशी और राम मंदिर पर था आतंकी हमला तय

लखनऊ अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक अयोध्या का राम मंदिर और वाराणसी आतंकियों के निशाने पर था, जिसके लिए उन्होंने मॉड्यूल तैयार कर रखा था. अयोध्या में भी आतंकी विस्फोट करना चाहते थे. इसके लिए गिरफ्तार हो चुकी शाहीन ने अयोध्या के स्लीपर मॉड्यूल को एक्टिवेट कर रखा था. अयोध्या में ये सारे घटनाक्रम को अंजाम तक पंहुचाते उससे पहले ही इन आतंकियों की गिरफ्तारी और विस्फोटक बरामद हो गए. सूत्र बताते हैं की दरअसल, लाल किला में ब्लास्ट करने की योजना नहीं थी. ऐसा अभी तक जांच में लग रहा है. क्योंकि विस्फोटक में टाइमर या किसी दूसरी चीज़ो का इस्तेमाल नहीं किया गया. हड़बड़ी और जल्दबाज़ी में ब्लास्ट हो गया. अस्पताल और भीड़भाड़ वाली जगहें निशाने पर थीं आतंकियों से पूछताछ में पता चला है की ये मॉड्यूल अस्पतालो को टारगेट करना चाहता था ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को नुकसान हो. इन आतंकियों के हिट लिस्ट में अस्पताल और भीड़ भाड़ वाली जगह थी. लगातार छापेमारी के बाद भारी मात्रा में विस्फोटक व हथियार बरामद करने के बाद सुरक्षा एजेंसीज के सामने इस वक़्त सबसे बड़ी चुनौती है बचे हुए 300 किलोग्राम के अमोनियम नाइट्रेट को बरामद करना. जिसका अभी तक पता नहीं चल पाया है. सूत्रों की माने तो 2900 किलोग्राम विस्फोटक अबतक एजेंसी बरामद कर चुकी है. 300KG अमोनियम नाइट्रेट की खोज जारी अलग-अलग जरियों से आया 300 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट अभी भी आतंकियों ने कहीं छिपा रखा है, जिसके लिए देश के कई हिस्सों में छापेमारी चल रही है. जांच और सुरक्षा एजेंसियां लगातार छापेमारी कर पूरे मॉड्यूल का खुलासा करने की कोशिश कर रही है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार आतंकियों तक ये विस्फोटक बांग्लादेश के रास्ते नेपाल और फिर हिन्दुस्ततान आया था. किसी फर्टीलाइजर से उक्त अमोनियम नाइट्रेट को चोरी से हासिल किया गया है. आतंकियों द्वारा कुल 3200 किलोग्राम की खेप आई है.  

गंगा तट पर सजेगा दिव्य दीपमाल: काशी में जलेगा 25 लाख दीप, गूंजेगी आतिशबाजी

वाराणसी। काशी के अर्धचंद्राकार घाट, कुंड और तालाब आज दीपों की आभा से जगमगाएंगे। 84 घाट, 96 कुंड और तालाबों पर 25 लाख दीप जगमग होंगे। देव दीपावली पर बुधवार को घाट दीपों की पंक्तियों से सजेंगे। अस्सी से नमो घाट तक आयोजन होंगे और कहीं लेजर शो, ग्रीन आतिशबाजी और रंगोली आकर्षण का केंद्र होगी। देव दीपावली का शुभारंभ सभी घाटों पर दीप प्रज्ज्वलन से शाम 5:15 से 5:50 बजे तक होगा। इसके बाद प्रमुख घाट नमो घाट, दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट और अस्सी घाट पर विशेष गंगा आरती शाम छह बजे से 6:50 बजे तक संपन्न होगी। चेत सिंह घाट पर दर्शकों के लिए तीन चरणों में प्रोजेक्शन व लेजर शो होगा। पहला शो शाम 6:15 से 6:45 बजे, दूसरा 7:15 से 7:45 बजे और तीसरा शो 8:15 से 8:45 बजे तक चलेगा। ललिता घाट के सामने रेती पर रात आठ बजे से 8:15 बजे तक ग्रीन आतिशबाजी होगी। पूरे आयोजन को लेकर सुरक्षा, सफाई और यातायात की विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। घाटों और गलियों को सजाने के लिए पर्यटन विभाग ने नगर निगम से समन्वय स्थापित कर आकर्षक रोशनी की व्यवस्था की है। गंगा तटों पर इस दौरान दीपों की रोशनी और आसमान में रंग-बिरंगी आतिशबाजी का संगम एक अलौकिक दृश्य रचेगा। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के विजन पर सजेगी दिव्य और हरित काशी पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक देव दीपावली काशी की आत्मा और आस्था का उत्सव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आज काशी अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वैभव के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भी उदाहरण बन रही है। हमारा लक्ष्य है कि श्रद्धालु इस पावन पर्व पर न केवल दिव्यता का अनुभव करें, बल्कि ‘स्वच्छ, हरित और विश्व स्तर की काशी’ के संदेश को भी महसूस करें। देव दीपावली पर खास     दशाश्वमेध और राजघाट पर ऑपरेशन सिंदूर की विशेष झलक     घाटों पर नारी सशक्तीकरण थीम के तहत विशेष सजावट     बूंदी परकोटा पर भगवान बुद्ध, जैन घाट पर अहिंसा परमो धर्मः और गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव थीम पर सजावट     घाटों पर दीप प्रज्ज्वलन के लिए 83 समितियां होंगी शामिल     गंगा पार रेत पर भी दीप प्रज्ज्वलन होगा     हेरिटेज स्टोरी टेलिंग सत्र का आयोजन     ग्रीन आतिशबाजी का भव्य आयोजन  

प्रकाश, श्रद्धा और आस्था का संगम — काशी की देव दीपावली

वाराणसी वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा की रात गंगा के अर्ध चंद्राकार घाटों की छटा देवलोक का अहसास कराती है। देखने वाले को महसूस होता है कि गंगा तट पर देवलोक की छवि उतर आई है। काशी की देव दीपावली का यह नजारा अद्भुत होता है। बजते घंटे-घड़ियाल, शंखों की गूंज व हिलोरे लेती आस्था, जिसे देखने के लिए देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु काशी आते हैं। काशी में लक्खा मेले की प्राचीन परम्परा है। इसमें एक लाख से अधिक लोग एकत्र होते हैं। नाटी इमली का भरत मिलाप, तुलसी घाट की नाग नथैया, चेतगंज की नक्कटैया और रथयात्रा मेले की शृंखला में यह काशी का पांचवां लक्खा मेला है। इस अवसर पर गंगा के 84 घाटों पर सात किलोमीटर तक शृंखलाबद्ध दीप जलाए जाते हैं। शाम होते ही ये सभी घाट दीपों की रोशनी में नहा उठते हैं और गंगा की धारा में इन दीपों की अलौकिक छटा निखरती है। शंकराचार्य की प्रेरणा से प्रारंभ होने वाला यह दीपोत्सव पहले केवल पंचगंगा घाट की शोभा हुआ करता था लेकिन धीरे-धीरे काशी के सभी घाटों पर दीपों की शृंखला बढ़ती चली गई और दो दशकों से देव दीपावली ने महापर्व का स्वरूप ले लिया है। इस तरह देव दीपावली सांस्कृतिक राजधानी काशी की खास पहचान बन गई है। अहिल्याबाई होल्कर ने स्थापित किया था हजारा दीपस्तंभ काशी की देव दीपावली प्राचीनता और परम्परा का अद्भुत संगम है। इतिहास में इसका जिक्र मिलता है। महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने पंचगंगा घाट पर पत्थरों से बना खूबसूरत हजारा दीपस्तंभ स्थापित किया था। यह दीपस्तंभ देव दीपावली की परम्परा का साक्षी है। काशी में देव दीपावली की शुरूआत भी यहीं से हुई थी। यह दीपस्तंभ देव दीपावली के दिन 1001 से अधिक दीपों की लौ से जगमगाता है। इस दृश्य को यादों में सहेजने के लिए देश ही नहीं, विदेशों से पर्यटक काशी पहुंचते हैं। मां गंगा की अष्टधातु की प्रतिमा का होता है दर्शन-पूजन देव दीपावली के अवसर पर मां गंगा की अष्टधातु की प्रतिमा को गंगा घाट पर विराजमान किया जाता है। मां गंगा की यह प्रतिमा साल में दो बार गंगा दशहरा और देव दीपावली पर ही लोगों के दर्शन-पूजन के लिए स्थापित की जाती है। इस तरह काशी में कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान की यह परम्परा देव आराधना का महापर्व बन जाती है। काशी की गंगा आरती तो देशभर में प्रसिद्ध है ही, देव दीपावली पर आरती का नजारा और भी अद्भुत होता है। देव दीपावली की पृष्ठभूमि में एक पौराणिक कथा भी है। त्रिपुरासुर राक्षस ने ब्रह्माजी की तपस्या कर वरदान पा लिया था और तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य जमा लिया था। इसके बाद देवताओं ने भगवान शिव से उसका अंत करने की प्रार्थना की। उन्होंने इसी दिन त्रिपुरासुर का वध किया था। इस खुशी में देवताओं ने दीपावली मनाई, जिसे आगे चलकर देव दीपावली के रूप में मान्यता मिली इसलिए देव दीपावली को ‘त्रिपुरी’ के नाम से भी जाना जाता है।

काशी दर्शन का नया अंदाज़: नमो घाट से उड़ान भरेंगे हेलिकॉप्टर, दिखेगा दिव्य देव दीपावली दृश्य

वाराणसी काशी के घाटों, मंदिरों और गंगा आरती का नजारा अब आसमान से भी देखने को मिलेगा। देव दीपावली से पहले वाराणसी में पर्यटकों, श्रद्धालुओं के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू हो जाएगी। सर्वे, सुरक्षा सहित परीक्षण के दूसरे काम पूरे हो गए हैं। हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने वाली कंपनी के अफसरों ने मंजूरी के लिए बाबतपुर एयरपोर्ट अथॉरिटी से संपर्क कर सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है। इस सेवा के तहत श्रद्धालु और पर्यटक 7-8 मिनट की हवाई यात्रा में काशी के प्रमुख स्थलों के अद्भुत दर्शन कर सकेंगे। कंपनी के एक अफसर के अनुसार नमो घाट पर बने हेलिपैड से उड़ान शुरू की जाएगी। यहां से तीन सीटर और छह-सीटर हेलिकॉप्टर उड़ान भरेंगे। करीब 7-8 मिनट की इस यात्रा में पर्यटक काशी के हवाई दर्शन कराएंगे। नमो घाट से श्री काशी विश्वनाथ धाम, मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र सहित सभी घाट, गोदौलिया क्षेत्र, चौक, काल भैरव मंदिर और रामनगर पुल दिखाए जाएंगे। हेलिपैड के बाद एचटी लाइन सहित कुछ अन्य दिक्कतें थीं जिसे दूर कर लिया गया है। हेलिकॉप्टर संचालन का प्रस्ताव स्मार्ट सिटी, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग को दिया गया था। हरी झंडी मिलने के बाद इस दिशा में काम शुरू किया गया। अधिकारी ने बताया कि हेलिकॉप्टर सेवा का किराया अभी नहीं तय किया गया है लेकिन बुकिंग ऑनलाइन ही होगी। इसी सप्ताह विभागीय अफसरों के साथ बैठक होगी। इसमें किराया तय कर उसकी घोषणा की जाएगी। स्काई टूरिज्म का मिलेगा लाभ पर्यटन विभाग से जुड़े एक अफसर ने कहा कि यह पहल वाराणसी को ‘स्काई टूरिज्म’ के नए केंद्र के रूप में पहचान दिलाएगी। इससे स्थानीय रोजगार और पर्यटन कारोबार को बड़ा लाभ मिलेगा। क्या बोले अधिकारी हेलिकॉप्टर सेवा का प्रस्ताव मिला है। परीक्षण कराया जा रहा है। हेलिकॉप्टर सेवा शुरू होती है तो जरूर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटकों को काशी का एक नया और अद्भुत अनुभव मिलेगा। -सत्येंद्र कुमार, डीएम  

सावन माह के दूसरे सोमवार को छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ में शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ी

वाराणसी सावन के दूसरे सोमवार को वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर समेत तमाम शिव मंदिरों में भक्त उमड़ पड़े हैं. इसके साथ ही भोले बाबा को जल चढ़ाने के लिए कांवड़ियों का जत्था भी पहुंच गया है. रविवार रात से ही कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के बाहर दर्शन और जल अर्पण करने के लिए कांवड़ियों की लाइन लग गई. सोमवार सुबह से ही भोले के गीत गाते श्रद्धालु मंदिरों की ओर बढ़ते रहे. इसी क्रम में आगरा देवाधिदेव महादेव की भक्ति में डूब गया है. आगरा में रविवार शाम चार बजे से शिव भक्त अपने अपने क्षेत्र से परिक्रमा को निकले तो शहर में बम बम भोले के जयकारे गूंजने लगे. माथे पर बाबा के नाम का चंदन, मुंह पर हर-हर महादेव के नारे संग नंगे पैर ही शिव भक्त नाचते और गाते आगे बढ़े. देर रात से महादेव मंदिर में शिव भक्त जलाभिषेक कर रहे हैं. सुबह बल्केश्वर महादेव मंदिर पर जलाभिषेक के बाद परिक्रमा पूरी होगी. रविवार देर शाम बल्केश्वर महादेव मंदिर का उद्घाटन हो गया है. बता दें कि आगरा के चारों कोने पर प्राचीन शिव मंदिर हैं. जिनमें पूर्व में बल्केश्वर महादेव मंदिर, पश्चिम में पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर, उत्तर में कैलाश महादेव मंदिर और दक्षिण में राजेश्वर महादेव मंदिर स्थित हैं. शहर के बीच में बाबा मनकामेश्वर महादेव विराजमान हैं. जिससे शहर में ऊं नम शिवाय और बम-बम के जयघोष गूंज रहे हैं. सावन के दूसरे सोमवार को बल्केश्वर महादेव मंदिर मेला की पूर्व संध्या पर आगरा में लाखों श्रद्धालु 42 किमी की नगर परिक्रमा कर रहे हैं. लाखों श्रद्धालु नंगे पैर रातभर शहर के चारों कोनों पर स्थित महादेव मंदिर में शिवलिंग का जलाभिषेक करेंगे. परिक्रमा के मार्ग में जगह-जगह पर भंडारे लगते हैं.  प्रयागराज के सोमेश्वर महादेव में उमड़ी भक्तों की भीड़  पवित्र महीने सावन के दूसरे सोमवार सोमेश्वर महादेव में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने और पूजा-अर्चना करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिर में जुटने लगे थे. मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन, जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है. इस मंदिर का पुराणों में भी उल्लेख मिलता है.मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं. मंदिर के महंत ब्रम्हचारी श्रीधरानंद बताते हैं कि स्कंद पुराण और पदम पुराण में कामेश्वर पीठ का वर्णन है, यह वही कामेश्वर धाम है. काम को भस्म करके भगवान शिव स्वयं यहां पर विराजमान हुए हैं. साथ ही ये भी बताया कि त्रेता काल में वनवास जाते वक्त प्रभु राम ने भी यहां शिव का पूजन और जलाभिषेक किया था. 'छोटी काशी' में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब, भीड़ के दबाव से रेलिंग टूटी लखीमपुर खीरी में सावन माह के दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। तड़के से ही शिव मंदिरों में भीड़ उमड़ने लगी। भक्तों ने लंबी-लंबी कतारों में खड़े होकर शिवलिंग के दर्शन किए और जलाभिषेक किया। गोला गोकर्णनाथ के पौराणिक शिव मंदिर में भगवान शिवन के दर्शन करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। यहां भारी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन के इंतजाम भी ध्वस्त हो गए। मंदिर के मुख्य मार्ग पर लोहे के एंगल से बनाई गई दीर्घा भीड़ को रोक नहीं पाई और टूटकर गिर गई। हालांकि किसी के घायल होने की खबर नहीं है। घटनास्थल पर चप्पल-जूतों का ढेर बिखरा नजर आया।  मंदिर में जलाभिषेक के लिए दोपहर 12 बजे के बाद तक कांवड़ियों की कतार लगी रही। कछला और हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए कांवड़ियों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।  रविवार शाम गोला मार्ग पर कावड़ियों के जत्थे गोला गोकर्णनाथ के लिए रवाना होते रहे। कावड़ियों के जत्थे में भजनों की धुन पर नाचते हुए आगे बढ़ रहे थे। बच्चे और महिलाएं भी कांवड़ लेकर जाती दिखीं।  लखीमपुर शहर के प्रमुख प्राचीन मंदिरों, भुईफोरवनाथ और जंगली नाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भुईफोरवनाथ मंदिर में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग लाइनें बनाई गई, जिससे व्यवस्था सुचारू रही।  ओयल स्थित मेंढक मंदिर में भी शिवभक्तों की भीड़ उमड़ी। भक्तों ने शिवलिंग पर दूध, जल और बेल पत्र चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिर परिसर जयकारों से गूंजता रहा।  अयोध्या में उमड़े शिवभक्त, सरयू में डुबकी लगाकर किया जलाभिषेक भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में सुबह से ही सावन के दूसरे सोमवार के मौके पर शिवभक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा है। बड़ी संख्या में कावड़िये, रामनगरी के स्थानीय जनमानस के अलावा आसपास के जिलों के श्रद्धालु भी रामनगरी पहुंचे हैं। भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की ओर से स्थापित सिद्धपीठ नागेश्वर नाथ मंदिर में दर्शन पूजन कर रहे हैं।  सुबह से ही श्रद्धालु मां सरयू में डुबकी लगाकर जल लेकर भगवान शिव के दरबार में कतारबद्ध होकर जलाभिषेक कर रहे हैं। भोर से ही दर्शन पूजन शुरू हो गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से व्यापक इंतजाम किए हैं। बड़ी संख्या में सुरक्षा बल की तैनाती रामनगरी के प्रत्येक शिवालय और सरयू के घाटों पर की गई है। सावन का पवित्र माह शुरू हो चुका है।  आज सावन का दूसरा सोमवार है। लिहाजा रामनगरी भगवान शिव के जयकारों से गूंज रही है। भोलेनाथ के पूजन का विशेष दिन सावन माह में रहता है। इस बार सावन में पांच सोमवार मिलेगा। इस दौरान भगवान शिव का रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और पूजन-अर्चन का विशेष महत्व रहेगा। दूर-दराज से अयोध्या पहुंचे श्रद्धालु भोलेनाथ का दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे हैं।  श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ से अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए आशीर्वाद भी मांगा। अयोध्या पहुंचे श्रद्धालु खुद को अभिभूत मानते हुए भगवान शिव का दर्शन पूजन कर रहे हैं। भोर में तीन बजे से ही दर्शन पूजन का दौर शुरू हुआ है। देर शाम तक चलता रहेगा। बरेली में कावड़ियों ने थाने के सामने कार पर बरसाए ईंट-पत्थर  बीसलपुर रोड पर एक कार की कावड़िए को साइड लगने के बाद गुस्साए साथियों ने कार में तोड़फोड़ कर दी. इतना ही नहीं, कावड़ियों ने थाने के सामने पुलिस की मौजूदगी में कार पर ईंट-पत्थर बरसा कर कार में तोड़फोड़ की. पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर जांच कर कार्रवाई की बात कर रही है. पीलीभीत के बिलसंडा का कावड़ियों का एक जत्था रविवार को … Read more