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छतरपुर के 54 गांवों की जमीन अधिग्रहित होगी, केन-बेतवा प्रोजेक्ट पर तेजी से बढ़ा काम

छतरपुर  बुंदेलखंड क्षेत्र के कायाकल्प के लिए प्रस्तावित महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना अब तेजी से धरातल पर उतर रही है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए छतरपुर जिले के 54 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने तीव्र गति पकड़ ली है। वहीं, परियोजना के विस्तार के क्रम में उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में भी प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो गई है। कलेक्टर की वर्तमान गाइडलाइन दर का चार गुना मुआवजा मिलेगा। छतरपुर में धारा 11 का प्रकाशन पूरा छतरपुर जिले में परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया ने बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। परियोजना की कार्यपालन यंत्री उमा गुप्ता ने बताया कि जिले के 54 प्रभावित गांवों के लिए भूमि अधिग्रहण की धारा 11 वैधानिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। धारा 19 की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नहर परियोजना प्रभावित किसानों को उनकी जमीन के बदले सरकारी गाइडलाइन से चार गुना अधिक मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्रशासन अब मुआवजा वितरण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए तत्पर है। उत्तर प्रदेश में भी प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार परियोजना की व्यापकता को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश में भी कार्य ने गति पकड़ी है। केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में आने वाले गांवों की भूमि की नपाई (सीमांकन) के लिए 15 जून 2026 को निविदा जारी कर दी गई है। यह निविदा झांसी जिले में केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के तहत नहर निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के हिस्से में आने वाले गांवों की भूमि की नपाई के कार्य के लिए जारी की गई है, जिससे परियोजना के इस हिस्से में भी निर्माण कार्य की नींव रखी जा सके। पारदर्शिता का अधिकार मुआवजे की राशि तय करने के लिए गांव की सरकारी गाइडलाइन और क्षेत्र में हाल ही में हुई जमीनों की रजिस्ट्री की औसत दर में से जो भी अधिक होगा, उसी को आधार मानकर भुगतान किया जाएगा। एक्सपेरिमेंट ने बर्बाद किए कीमती दो साल परियोजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार शुरुआत में अधिकारियों ने 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के एक बड़े हिस्से (लगभग 65 किमी) को भूमिगत सुरंग के जरिए ले जाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रयोगात्मक मॉडल के पीछे तर्क दिया गया था कि इससे भूमि अधिग्रहण कम होगा और पानी का वाष्पीकरण रुकेगा। लेकिन हकीकत के धरातल पर यह योजना अत्यधिक महंगी और जोखिम भरी साबित हुई। लंबे समय तक चले विचार-मंथन के बाद अंतत: इस टनल प्रस्ताव को अव्यावहारिक मानकर निरस्त कर दिया गया है। इस तकनीकी हेर-फेर के चक्कर में परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से लिंक नहर का काम दो साल पिछड़ गया है। नहर का मार्ग आबादी वाले क्षेत्रों के बाहर से निर्धारित किया गया है. जिससे किसी भी गांव के पूर्ण विस्थापन का संकट नहीं है। नहर की मुख्य संरचना और सर्विस रोड के निर्माण के लिए 100 मीटर चौड़ी पट्टी में भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल बुंदेलखंड के सिंचाई संकट को दूर करेगी, बल्कि कानून के तहत मिलने वाले उचित मुआवजे से स्थानीय किसानों के आर्थिक स्तर में भी बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएगी। 218 किमी लंबी नहर और चार गुना मुआवजा केन नदी पर निर्माणाधीन ढोड़न बांध से बेतवा नदी तक बनने वाली यह 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर बुंदेलखंड के सिंचाई संकट को दूर करने के लिए संजीवनी साबित होगी। छतरपुर जिले से होकर गुजरने वाले इसके 107 किलोमीटर के हिस्से के लिए किसानों को मध्य प्रदेश भूमि अर्जन पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के तहत मुआवजा दिया जा रहा है। जिसको लेकर राज्य केबिनेट ने भी बीते माह चार गुना मुआवजा पर मुहर लगाई थी। परियोजना के लिए कुल 1488.42 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है जिसमें 54 गांवों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है। विकासखंड/तहसील गांवों की संख्या मुख्य प्रभावित गांव छत्तरपुर विकासखंड 17-बंधीकला, ईशानगर, लहेरा, दिदौल, राजापुरवा आदि महाराजपुर तहसील 12-मऊ, नुना, पड़वाहा आदि राजनगर विकासखंड 11- गंज, करी, पहरा, सीलोन, कोटा, बरद्वाहा आदि नौगांव विकासखंड 07 – लुगासी, नयागांव, तिंदनी आदि बिजावर व सटई तहसील 07-करोदिया, दिदौनियां आदि

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के मुआवजे पर छतरपुर में विरोध, प्रशासन के आश्वासन से खत्म हुआ आंदोलन

छतरपुर  केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले 14 गांवों के ग्रामीणों का आंदोलन फिलहाल थम गया है। मुआवजे और पुनर्वास में अनियमितताओं के आरोपों के बीच छतरपुर जिला प्रशासन ने झुकते हुए दोबारा सर्वे कराने का फैसला लिया है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल द्वारा गठित विशेष संयुक्त टीमों ने  ही जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन और विसंगतियों की जांच शुरू कर दी है। 7 दिन की डेडलाइन प्रशासन ने इस री-सर्वे को कैंपेन मोड में चलाने के निर्देश दिए हैं। संयुक्त टीमों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अगले 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और नए प्रस्ताव पेश करें। इस कदम का उद्देश्य उन पात्र लाभार्थियों को शामिल करना है जो पहले छूट गए थे और उन अपात्रों को बाहर करना है जिन्होंने गलत तरीके से लाभ लेने की कोशिश की है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है: किसी भी पात्र व्यक्ति का हक नहीं छिनना चाहिए और किसी भी अपात्र को सूची में जगह नहीं मिलनी चाहिए। पारदर्शिता ही हमारी प्राथमिकता है। पारदर्शिता के लिए दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों की ड्यूटी मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने एक अनूठी पहल की है। री-सर्वे की जिम्मेदारी उन स्थानीय कर्मचारियों को नहीं दी गई है जिन पर पहले पक्षपात के आरोप लगे थे। इसके बजाय, बिजावर सब-डिवीजन और अन्य तहसीलों के एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों को मैदान में उतारा गया है। ये टीमें स्वतंत्र रूप से वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल और स्कूल रिकॉर्ड के जरिए पात्रता की जांच करेंगी। प्रभावितों के लिए क्या है खास? कुल प्रभावित गांव 14 गांव सर्वे की समय सीमा 7 कार्य दिवस (रिपोर्ट सबमिशन) जांच का आधार वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल, स्कूल रिकॉर्ड टीम का गठन एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों की संयुक्त टीम अतिरिक्त लाभ भूमिहीन परिवारों के लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाएं

यूथ कांग्रेस नेताओं पर FIR, 25 नामजद; केन-बेतवा लिंक परियोजना आंदोलनकारियों से मिलने पहुंचे थे छतरपुर में

छतरपुर   केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावितों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद के मामले में बमीठा थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार सहित करीब 50 अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने यह कदम शासकीय कर्मचारियों के साथ अभद्रता और सरकारी काम में बाधा डालने के बाद उठाया है।  वन कर्मचारियों व यूथ कांग्रेस नेताओं के बीच बहस बिजावर क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ढोडन बांध पर उचित मुआवजा को लेकर पिछले 10 दिन से आंदोलन पर बैठे आदिवासी, किसानों, ग्रामीणों से मिलने पहुंचे यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार को वन विभाग के अधिकारियों ने भुसोर गेट के अंदर नही जाने दिया. आरोप है कि इसके बाद यूथ कांग्रेस नेताओं ने भुसोर गेट तोड़कर अधिकारिओ से अभद्रता की. यहां बाहरी लोगों के प्रवेश पर आने-जाने पर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने प्रतिबंध लगाया था।  पुलिस ने वीडियो को बनाया साक्ष्य प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम का वीडियो यूथ कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किया. इसके बाद पुलिस ने रेंजर की शिकायत पर कार्रवाई की. पुलिस का कहना है कि वीडियो साक्ष्य में प्रदर्शनकारियों द्वारा शासकीय संपत्ति के साथ छेड़छाड़ और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार स्पष्ट दिख रहा है. वहीं, फिलहाल धरना 10 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है. अगर प्रशासन ने आन्दोलनकारियो की मांगें नही मानी तो फिर आंदोलन होनी की चेतावनी है।  25 लोगों की शिनाख्त, जल्द होगी गिरफ्तारी टीआई बमीठा बाल्मीक चौबे ने बताया "राजेन्द्र कुमार सोलंकी वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा थाना में आवेदन दिया गया. अभिषेक परमार एवं उसके 50 से अधिक लोगों के खिलाफ भुसोर गेट पर ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियो के कार्य मे बाधा डालना एवं शासकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने पर के मामले में धारा 223,132,191(2),190 बीएनएस 3(1) लोक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है. 20 से 25 लोगों की पहचान कर ली है. सभी की गिरफ्तारी  होगी।  इस मामले में यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया का कहना है "गरीब,आदिवासियों और किसानों के साथ हमेशा से यूथ कांग्रेस खड़ी है. उनकी हम लड़ाई लड़ रहे हैं. प्रशासन ने हमारे साथियों को रोकने का काम किया है. हम गरीबों की आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।