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जल्द खत्म होगा खरमास, अप्रैल में शुरू होगा विवाह मुहूर्त का सीजन – जानें तारीखें

हिंदू पंचांग के मुताबिक अप्रैल 2026 का महीना शुभ कार्यों के लिहाज से खास रहने वाला है. महीने की शुरुआत में भले ही मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी, लेकिन जैसे ही यह समय खत्म होगा, शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रमों की रौनक बढ़ने लगेगी. जो लोग विवाह की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह समय अच्छे अवसर लेकर आएगा. दरअसल, अप्रैल के मध्य तक सूर्य मीन राशि में रहते हैं, जिसे खरमास कहा जाता है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश या मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. लेकिन 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही यह अवधि समाप्त हो जाती है. इसके बाद 15 अप्रैल से सभी मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं. तो आइए जानते हैं कि अप्रैल को कब से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे।  अप्रैल 2026 विवाह मुहूर्त की पूरी लिस्ट अप्रैल 2026 में शादी के लिए कई अच्छे मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें अलग-अलग तारीखों पर शुभ नक्षत्र और समय का खास संयोग देखने को मिलेगा. अगर आप इस महीने विवाह की योजना बना रहे हैं, तो ये तारीखें आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।  15 अप्रैल, बुधवार को उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में दोपहर 3:22 बजे से रात 10:31 बजे तक का समय बेहद शुभ और सफल वैवाहिक जीवन की शुरुआत के लिए अच्छा माना जा रहा है।  20 अप्रैल, सोमवार को रोहिणी नक्षत्र में सुबह 4:35 बजे से 7:28 बजे तक विवाह के लिए अनुकूल मुहूर्त है।  21 अप्रैल, मंगलवार को मृगशिरा नक्षत्र में सुबह 4:15 बजे से 5:52 बजे तक का समय अच्छा माना गया है।  25 अप्रैल, शनिवार की बात करें तो इस दिन भी विवाह करना शुभ रहेगा, क्योंकि उस समय संधि काल का प्रभाव कम रहेगा।  26 अप्रैल, रविवार को मघा नक्षत्र में सुबह 5:47 बजे से रात 8:27 बजे तक लंबा और अनुकूल समय है।  27 अप्रैल, सोमवार को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रात 9:18 बजे से 9:35 बजे तक का छोटा लेकिन शुभ मुहूर्त बन रहा है, जो दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है।  28 अप्रैल, मंगलवार को भी पूरे दिन विवाह के लिए अच्छा समय उपलब्ध रहेगा और नक्षत्र का प्रभाव सकारात्मक रहेगा।  महीने के अंत में 29 अप्रैल, बुधवार को हस्त नक्षत्र के दौरान सुबह 5:59 बजे से शाम 7:52 बजे तक का समय शादी के लिए काफी शुभ माना गया है।  अबूझ मुहूर्त अक्षय तृतीया इस महीने का सबसे खास दिन अक्षय तृतीया का माना जा रहा है, जो 19 अप्रैल 2026 को पड़ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एक ऐसा दिन है, जिसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है. यानी इस दिन बिना ज्यादा गणना किए भी शादी या कोई भी शुभ काम किया जा सकता है. कहा जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान का फल कभी समाप्त नहीं होता और इससे जीवन में स्थिरता और सुख-समृद्धि बनी रहती है, ग्रहों का गोचर और वैवाहिक सुख अप्रैल 2026 में शादी-ब्याह के लिए ग्रहों की चाल भी काफी अनुकूल मानी जा रही है. इस दौरान गुरु और शुक्र दोनों ही अच्छी स्थिति में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, गुरु रिश्तों में समझ और स्थिरता लाते हैं, जबकि शुक्र प्रेम, आकर्षण और सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है. इन ग्रहों का शुभ होना वैवाहिक जीवन के लिए अच्छा संकेत देता है. खास बात यह है कि इस महीने के अधिकतर मुहूर्तों में भद्रा और पंचक जैसे अशुभ योग नहीं बन रहे, जिससे शादी के लिए समय और भी बेहतर हो जाता है। 

खरमास की शुरुआत: अगले 30 दिन इन कामों से बचें, वरना पड़ सकता है नुकसान

  पंचांग के अनुसार, साल में कुछ ऐसे समय आते हैं जब मांगलिक और शुभ कार्यों को करने से परहेज किया जाता है. ऐसा ही एक विशेष समय खरमास होता है, जिसे कई जगहों पर मलमास भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है. पंचांग के अनुसार साल 2026 में खरमास की शुरुआत 15 मार्च से हो चुकी है, जो 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा. इस पूरे एक महीने के दौरान धार्मिक रूप से कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है. क्या होता है खरमास? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों यानी धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है. इस समय सूर्य की स्थिति ऐसी मानी जाती है कि मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं बन पाता. इसलिए इस अवधि में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे बड़े और शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है. हालांकि खरमास भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल न माना जाता हो, लेकिन यह समय भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. खरमास में क्यों नहीं किए जाते मांगलिक कार्य? धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय सूर्य की गति और स्थिति ऐसी होती है कि शुभ कार्यों के लिए ग्रहों का पूर्ण सहयोग नहीं मिल पाता. इसी कारण से शास्त्रों में कहा गया है कि इस अवधि में नए और बड़े कार्य शुरू करने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते. इसलिए परंपरा के अनुसार लोग इन कार्यों को खरमास खत्म होने के बाद ही करते हैं. खरमास में कौन-कौन से काम करने से बचें? खरमास के दौरान कुछ मांगलिक कार्यों को करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है.     विवाह और सगाई     गृह प्रवेश     नए घर का निर्माण शुरू करना     नया व्यवसाय या दुकान शुरू करना     मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार     बड़े शुभ आयोजन  

खरमास की शुरुआत 15 मार्च से, एक महीने तक नहीं होंगे शुभ कार्य

सनातन धर्म में खरमास का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है। यह एक ऐसी अवधि होती है जिसे परंपरागत रूप से अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। मार्च 2026 में भी खरमास लगने जा रहा है, लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल है कि खरमास 14 मार्च से शुरू होगा या 15 मार्च से। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इसका सही समय स्पष्ट हो गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि खरमास कब से शुरू होगा और इस दौरान शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते। 2026 में खरमास कब से शुरू होगा? ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य देव 15 मार्च 2026 को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह राशि परिवर्तन रात 01 बजकर 08 मिनट पर होगा। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी। इस दिन मीन संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा। खरमास प्रारंभ: 15 मार्च 2026 समाप्ति: 14 अप्रैल 2026 इस पूरे एक महीने की अवधि को ज्योतिष में शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसलिए इस दौरान शादी-विवाह समेत कई मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। खरमास में कौन-कौन से काम नहीं किए जाते? खरमास के दौरान परंपरागत रूप से कई शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में निम्न कार्य नहीं किए जाते: शादी-विवाह, सगाई या रोका, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार, नया व्यापार या बिजनेस शुरू करना और किसी बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत। हालांकि इस समय पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्यों को बहुत शुभ माना जाता है। खरमास में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते? धर्म शास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की अवधि शुरू होती है। इन दोनों राशियों का स्वामित्व गुरु बृहस्पति के पास होता है। ज्योतिष के अनुसार इस दौरान सूर्य की ऊर्जा और प्रभाव थोड़ा मंद हो जाता है, जिससे उनकी शुभता कम हो जाती है। किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य को सफल बनाने के लिए सूर्य और गुरु दोनों ग्रहों का मजबूत और शुभ होना जरूरी माना जाता है। लेकिन जब सूर्य इन राशियों में प्रवेश करते हैं, तो गुरु का प्रभाव भी कमजोर हो जाता है। यही कारण है कि इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। खरमास में क्या करना होता है शुभ? खरमास को भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह समय पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान इन कार्यों को करना लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है। भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा। गरीबों को दान देना। गीता या धार्मिक ग्रंथों का पाठ। तीर्थ यात्रा। ध्यान और साधना। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 15 मार्च 2026 से खरमास की शुरुआत होगी, जो 14 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस दौरान शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों को टालना शुभ माना जाता है। हालांकि यह समय पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भगवान की भक्ति और सेवा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

खरमास की शुरुआत: 14 या 15 मार्च? जानिए कब से बंद हो जाएंगी शादियां और शुभ काम

सनातन धर्म में खरमास का बहुत महत्व माना जाता है. खरमास एक माह की अशुभ अवधि मानी जाती है, इसलिए इस दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन संस्कार जैसे शुभ और मांगलिक काम करने की मनाही होती है. खरमास साल में दो बार तब लगता है, जब ग्रहों के राजा भगवान सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं. मार्च के इस माह में खरमास लगने वाला है, लेकिन लोगों के मन में संशय है कि 14 या 15 मार्च आखिर खरमास कब से लग रहा है? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं. साथ ही जानते हैं कि खरमास में शुभ काम क्यों नहीं किए जाते? खरमास कब से शुरू हो रहा है? ज्योतिष गणना अनुसार, आत्मा के कारक सूर्य देव इस साल 15 मार्च को कुंभ राशि से निकलेंगे और इसी दिन 01 बजकर 08 मिनट पर उनका प्रवेश मीन राशि में होगा. मीन राशि में सूर्य देव के प्रवेश करते ही 15 मार्च से खरमास की शुरुआत हो जाएगी. भगवान सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने पर मीन संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. वहीं, 14 अप्रैल को खरमास का समापन होगा. इस साल 15 मार्च से शादी-विवाह समेत तमाम शुभ और मागंलिक काम रोक दिए जाएंगे. यही नहीं खरमास के दौरान न किसी बिजनेस की शुरूआत की जाएगी और न ही नया प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा. खरमास में क्यों नहीं होते शुभ काम? ज्योतिष मान्यताओं और धर्म शास्त्रों के अनुसार, जब सूर्य देव का प्रवेश धनु या मीन राशि में होता है, तो उनकी गति और ऊर्जा थोड़ी मंद हो जाती है. इससे उनकी शुभता में कमी आ जाती है. धनु और मीन राशि का स्वामित्व गुरु बृहस्पति के पास है. सूर्य जब इन दोनों राशि में प्रवेश करते हैं, तो गुरु का प्रभाव भी कम हो जाता है. शुभ कार्यों को करने के लिए सूर्य और गुरु का शुभ होना जरूरी है. यही कारण है कि खरमास में तमाम तरह के शुभ और मांगलिक काम रोक दिए जाते हैं.

खरमास 2026: मार्च में कब से कब तक रहेगा, शादी के कितने मुहूर्त हैं उपलब्ध?

सनातन धर्म में खरमास अशुभ समय माना जाता है. ये एक माह की अवधि होती है. अशुभ माने जाने की वजह से इस अवधि में कोई शुभ काम नहीं किया जाता है. एक साल में दो बार खरमास लगता है. पहला खरमास मार्च या अप्रैल में लगता है, तो दूसरा खरमास नवंबर या दिसंबर में लगता है. पंचांग के आधार पर ग्रहों के राजा सूर्य देव के गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करने पर खरमास लगता है. खरमास के दौरान गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह आदि शुभ काम सब रोक दिए जाते हैं. मान्यता है कि जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो सूर्य के प्रभावों में कमी आ जाती है. वहीं गुरु के शुभ प्रभाव भी कम हो जाते हैं. शुभ कामों विशेषकर विवाह के लिए सूर्य और गुरु की शुभता आवश्क मानी जाती है. मार्च के माह में खरमास लगने वाला है. ऐसे में आइए जानते हैं कि खरमास से पहले मार्च के महीने में कितने विवाह मुहूर्त हैं. मार्च में कब लग रहा है खरमास? अभी सूर्य देव श​नि की राशि कुंभ में गोचर कर रहे हैं. पंचांग के अनुसार, सूर्य मीन राशि में 15 मार्च दिन रविवार को 1 बजकर 8 मिनट पर प्रवेश करेंगे. उस समय सूर्य की मीन संक्रांति होगी. उसके साथ ही मार्च के खरमास का प्रारंभ हो जाएगा. ये खरमास एक माह तक रहेगा. इसके बाद सूर्य का मेष राशि में गोचर 14 अप्रैल को सुबह में 9 बजकर 38 मिनट पर होगा. इसी दिन खरमास का समापन होगा. मार्च 2026 में विवाह मुहूर्त 2 मार्च- सोमवार, 3 मार्च- मंगलवार, 4 मार्च- बुधवार, 7 मार्च- शनिवार, 8 मार्च- रविवार, 9 मार्च- सोमवार, 11 मार्च- बुधवार, 12 मार्च- गुरुवार. विवाह मुहूर्त तय करते समय रखें इन बातों ध्यान     अभिजीत मुहूर्त और गोधूलि बेला विवाह के लिए अत्यंत शुभ कही जाती है.     शुभ करण: किस्तुघ्न, बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज     विवाह के लिए शुभ तिथियां: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, एकादशी, त्रयोदशी     विवाह के लिए शुभ वार:सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त को सबसे सात्विक और सकारात्मक ऊर्जा वाला होता है. यही कारण है कि प्राचीन काल में विवाह प्रातःकाल या सूर्यास्त के समय होते थे.  

खरमास में जहां उत्तर भारत में रुकते हैं शुभ काम, वहीं दक्षिण में क्यों नहीं? जानिए वजह

पंचांग के अनुसार, 16 दिसंबर 2025 से खरमास का आरंभ होता है और यह पूरे एक महीने यानी 14 जनवरी तक चलता है, तब देश के एक हिस्से में मांगलिक और शुभ कार्य थम जाते हैं, तो वहीं दूसरे हिस्से में भक्ति और आध्यात्म का एक पवित्र महीना शुरू हो जाता है. उत्तर भारत और दक्षिण भारत की परंपराएं इस एक महीने की अवधि को लेकर पूरी तरह से विपरीत रुख रखती हैं. आइए विस्तार से जानते हैं कि जब उत्तर भारत में खरमास के कारण शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है, तब दक्षिण का रिवाज क्या कहता है और क्यों यह अवधि वहां ‘सबसे पवित्र’ मानी जाती है. उत्तर भारत: खरमास की परंपरा और शुभ कार्यों पर प्रतिबंध खरमास की परंपरा मुख्य रूप से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों, जैसे बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रचलित है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि (धनु संक्रांति) या मीन राशि (मीन संक्रांति) में प्रवेश करते हैं, तो उस पूरे एक महीने की अवधि को ‘खरमास’ या ‘मलमास’ कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि सूर्य का बृहस्पति (धनु और मीन राशि के स्वामी) की राशियों में प्रवेश करने से उनका प्रभाव कम हो जाता है, जिससे ऊर्जा और शुभता में कमी आती है. इस अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नई संपत्ति की खरीद या बड़े व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक और शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है. दक्षिण भारत: मार्गज़ी का पवित्र महीना उत्तर भारत के विपरीत, दक्षिण भारत की परंपरा खरमास को उस रूप में नहीं मानती है और न ही शुभ कार्यों पर उस तरह का कोई प्रतिबंध लगाती है. दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु) में यह अवधि एक अलग नाम और अत्यंत पवित्र महत्व के साथ जानी जाती है. दक्षिण भारत के कैलेंडर में, 16 दिसंबर से शुरू होने वाली इस अवधि को ‘मार्गज़ी’ महीने के रूप में जाना जाता है. मार्गज़ी महीने को दक्षिण भारत में भगवान की आराधना के लिए और मांगलिक कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है. क्या दक्षिण भारत में शुभ कार्यों पर रोक होती है? दक्षिण भारत में खरमास के कारण शादी-विवाह या अन्य शुभ कार्यों पर कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं होता है. हालांकि, कुछ समुदाय अपनी परंपरा के अनुसार मुहूर्त देखते हैं, लेकिन इसे अशुभ काल नहीं माना जाता है. इसलिए भारतीय परंपराओं में, एक ही खगोलीय घटना को लेकर दो भिन्न दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं, उत्तर भारत में लोग इस अवधि को ‘अशुभ’ मानकर शुभ कार्यों को टाल देते हैं. वहीं, दक्षिण भारत में इसे शुभ और ईश्वर को समर्पित महीना मानकर भक्ति और आध्यात्म में लीन हो जाते हैं.

खरमास 2025: सूर्य के धनु राशि में प्रवेश से शुरू होगा खरमास, अगले 30 दिन इन 6 गलतियों से बचें

इस बार खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर यानी कल से होने जा रही है. खरमास को मलमास और धनु संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो जाती है. खरमास की इस 30 दिन की अवधि में सभी मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं. मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कोई शुभ कार्य करना बहुत अशुभ होता है, ऐसा करने से व्यक्ति समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. खरमास वो समय होता है जब सूर्य देव की गति कम प्रभावशाली होती है. तो आइए जानते हैं कि 15 जनवरी 2026 तक कौन से कार्य करने की मनाही है.  – खरमास के दौरान शादी-विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, अन्नप्राशन और वास्तु पूजा जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. इस समय कुल 16 संस्कार करना वर्जित माना गया है.  – इसके अलावा, खरमास की 30 दिन की अवधि में तुलसी के पत्ते तोड़ना बहुत ही अशुभ माना जाता है क्योंकि खरमास में श्रीहरि की पूजा भी होती है. और तुलसी भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय मानी जाती है.  – खरमास के दौरान सिर्फ सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए. इस समय लहसुन, प्याज, मांस-मछली और अंडे जैसे तामसिक भोजन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए वरना सूर्यदेव नाराज हो जाते हैं.  – खरमास में घर बनवाना या जमीन-मकान खरीदना और बेचना भी शुभ नहीं माना जाता है. कहते हैं कि इस दौरान किए गए ऐसे कामों में रुकावटें और परेशानियां आ सकती हैं.  – खरमास के दौरान नया बिजनेस शुरू करना भी ठीक नहीं माना जाता है, क्योंकि इससे पैसों से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं. इसलिए, इस समय नई नौकरी जॉइन करने या बड़ा निवेश करने से भी बचना चाहिए. – खरमास में नए घर में प्रवेश करना भी अशुभ माना जाता है. दरअसल, ऐसा करने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है. 

Kharmas 2025: दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक विवाह पर रोक, जानें फरवरी 2026 में कब होंगे शुभ मुहूर्त

 हिंदू धर्म में विवाह और अन्य शुभ संस्कार हमेशा शुभ मुहूर्त में ही किए जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि शुभ समय में किए गए कार्य देवताओं की कृपा और ग्रहों के अनुकूल प्रभाव से सफल होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं. लेकिन जैसे ही खरमास शुरू होता है, वैसे ही विवाह, मुंडन जैसे बड़े शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है. इस बार खरमास 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है, इसलिए इस अवधि में शादियां नहीं होंगी. इसके अलावा, खरमास से पहले ही विवाह पर एक और कारण से विराम लग जाता है. दरअसल, 11 दिसंबर 2025 को शुक्र ग्रह अस्त हो चुके हैं. शुक्र को प्रेम, दांपत्य सुख और विवाह का कारक ग्रह माना जाता है. शुक्र के अस्त होने के कारण भी शादियों के शुभ मुहूर्त नहीं माने जाते हैं. इस तरह से 11 दिसंबर 2025 से ही विवाह समारोहों पर रोक लग चुकी हैं, जो आगे आने वाले समय तक बनी रहेगी. अब सवाल यह है कि यह रोक कब तक रहेगी और फिर से विवाह के शुभ मुहूर्त कब शुरू होंगे. शादियों पर रोक कब तक रहेगी? खरमास 15 जनवरी 2026 को समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद आमतौर पर शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है. लेकिन इस बार विवाह के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा. दरअसल, शुक्र ग्रह 53 दिनों तक अस्त रहेंगे और 1 फरवरी 2026 को फिर से उदय होंगे. ज्योतिष के अनुसार, शुक्र के उदय होने के बाद ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्य शुरू किए जाते हैं. इसलिए शादियों का सीजन फरवरी 2026 से ही शुरू होगा. फरवरी 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त फरवरी 2026 में विवाह के लिए कुल 12 शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं, जिनकी तिथियां कुछ इस प्रकार हैं- 5 फरवरी, 6 फरवरी, 8 फरवरी, 10 फरवरी, 12 फरवरी, 14 फरवरी, 19 फरवरी, 20 फरवरी, 21 फरवरी, 24 फरवरी, 25 फरवरी और 26 फरवरी. बसंत पंचमी पर विवाह क्यों नहीं होंगे? बसंत पंचमी को आमतौर पर विवाह के लिए बहुत शुभ दिन माना जाता है, क्योंकि यह सिद्ध व अबूझ मुहूर्त होता है. लेकिन, साल 2026 में बसंत पंचमी पर भी विवाह का मुहूर्त नहीं होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि 23 जनवरी को पड़ने वाली बसंत पंचमी शुक्र ग्रह के अस्त रहने की अवधि में आएगी, और इस दौरान शादियां करना शुभ नहीं माना जाता है.

खरमास में शुक्र का दो बार गोचर, इन 3 राशियों को मिलेगी आर्थिक और सामाजिक सफलता

इस साल का खरमास बेहद ही खास रहने वाला है। दैत्यों  के गुरु शुक्र (Shukra) दो बार गोचर करने वाले हैं। पहला गोचर 20 दिसंबर को धनु राशि में होगा। वहीं दूसरा गोचर 13 जनवरी 2026 को मकर राशि में होगा। इसका प्रभाव इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जीवन पर पड़ेगा। किसी को फायदा तो किसी को नुकसान होगा। जातकों के जीवन में कई बदलाव आ सकते हैं। सूर्य देव के प्रवेश धनु राशि में प्रवेश के साथ खरमास मास की शुरुआत होती है। हिंदू धर्म में इसका बेहद ही विशेष महत्व होता है। इस समय शुभ और मांगलिक कार्यक्रमों को करना अशुभ माना जाता है। गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह जैसे कार्यक्रम की मनाही होती है। खरमास की शुरुआत 14 दिसंबर से होने वाली है। इसका समापन 14 जनवरी 2026 को होगा। कई राशियों के लिए यह समय किसी वरदान के से का कम नहीं होगा। असुराचार्य शुक्र (Shukra Gochar) की खास कृपा बरसेगी। आइए जानें किन लोगों को इस दौरान सबसे अधिक फायदा होने वाला है? मेष राशि (Mesh Rashi) मेष राशि के जातकों पर धन के दाता शुक्र की खास कृपा बरसेगी। लोगों के साथ आपके संपर्क बढ़ेंगे। नए दोस्त बन सकते हैं। यात्रा की योजना भी बनेगी। प्रोफेशनल लाइफ में सकरात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। कारोबार में मुनाफा होगा। वैवाहिक जीवन में भी खुशहाली आएगी। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। छात्रों को उच्च शिक्षा में सफलता मिलेगी।  प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अच्छा प्रदर्शन रहेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रुझान बढ़ेगा। आर्थिक तंगी भी दूर होगी। कन्या राशि (Kanya Rashi) कन्या राशि के जातकों के लिए खरमास अनुकूल रहेगा। शुक्र की खास कृपा बरसेगी। घर परिवार में खुशहाली आएगी। माता के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे। धार्मिक और शुभ कार्यक्रमों का आयोजन भी हो सकता है। लग्जरी आइटम की खरीदारी होगी। भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति होगी। लव लाइफ भी अच्छी रहने वाली है। अटका हुआ पैसा वापस मिलेगा।  बिजनेस करने वाले लोगों को इस दौरान मुनाफा होगा। अपने लाइफ पार्टनर के साथ अच्छा समय व्यतीत करने का मौका मिलेगा। तुला राशि (Tula Rashi) तुला राशि के जातकों के लिए शुक्र का दोनों गोचर लाभकारी साबित होगा। राइटिंग और लिटरेचर से जुड़े लोगों को इस दौरान फायदा होगा। तरक्की के प्रबल योग बन रहे हैं।   कम्युनिकेशन स्किल में भी सुधार आएगा। रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को सफलता मिलेगी। भाई बहनों के साथ यात्रा की योजना बन सकती है। करियर में भी कई मौके मिलेंगे। निवेश पर मुनाफा होगा। बिजनेस का विस्तार होगा। पर्सनल लाइफ भी अच्छी रहेगी। आपकी सेहत में सुधार आएगा। हालांकि परिवार के सदस्यों का ख्याल रखने की जरूरत है।

खरमास कब होगा शुरू —15 या 16 दिसंबर? जानिए सही तारीख और पूरी जानकारी

हिंदू धर्म में खरमास  को एक ऐसा समय माना जाता है जब लगभग एक महीने तक सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. साल 2025 का आखिरी महीना दिसंबर जल्द ही शुरू होने वाला है, और इसके साथ ही लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि खरमास की शुरुआत 15 दिसंबर को होगी या 16 दिसंबर को? अगर आपके मन में भी यही उलझन है, तो यहां पंचांग और ज्योतिषीय गणना के आधार पर हम आपकी यह कन्फ्यूजन दूर कर रहे हैं. खरमास 2025 कब से हो रहा है शुरू?     पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2025 में खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 से होगी.     खरमास शुरू होने की तिथि: 16 दिसंबर 2025, मंगलवार     समापन की तिथि: 14 जनवरी 2026, बुधवार (मकर संक्रांति के दिन)     अवधि: लगभग 30 दिन खरमास की शुरुआत धनु संक्रांति के साथ होगी. इस दिन सूर्य देव वृश्चिक राशि से निकलकर अपने मित्र ग्रह बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करेंगे. सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू हो जाएगा. वहीं खरमास का समापन 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के दिन होगी, जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसके साथ ही एक बार फिर विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की रौनक लौट आएगी. खरमास को अशुभ क्यों माना जाता है? मान्यताओं के अनुसार, खरमास का समय ज्योतिष शास्त्र में मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि के लिए शुभ नहीं माना जाता है. इसके पीछे मुख्य ज्योतिषीय कारण हैं: सूर्य का धनु राशि में गोचर: सूर्य जब गुरु (बृहस्पति) की राशियों (धनु और मीन) में प्रवेश करते हैं, तो उस काल को खरमास कहा जाता है. गुरु का प्रभाव कमजोर होना: ज्योतिष के अनुसार, बृहस्पति को शुभ कार्यों का कारक माना जाता है. जब सूर्य, धनु राशि (जिसके स्वामी गुरु हैं) में गोचर करते हैं, तो सूर्य के तेज के कारण गुरु का प्रभाव कुछ कम हो जाता है. इस कारण मांगलिक कार्यों में शुभ फल की कमी मानी जाती है. सूर्य की धीमी गति: इस दौरान सूर्य की चाल भी धीमी हो जाती है, जिसे मलमास भी कहा जाता है. नए कार्यों या बड़े आयोजनों को शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल नहीं माना जाता. खरमास में कौन से कार्य वर्जित हैं? विवाह और सगाई: शादी-विवाह और सगाई जैसे समारोहों को पूरी तरह से वर्जित माना जाता है. गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश (गृह प्रवेश) या किसी भी नए निर्माण कार्य की शुरुआत करना. मुंडन और कर्णवेध: बच्चों के मुंडन संस्कार या कान छेदन जैसे संस्कार. नया व्यापार या नौकरी: किसी भी बड़े नए व्यापार या व्यवसाय की शुरुआत करना. जनेऊ संस्कार (उपनयन संस्कार): यह संस्कार भी इस दौरान नहीं किया जाता है. खरमास में क्या करना शुभ होता है? खरमास का समय धार्मिक और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस अवधि में आप निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं: पूजा-पाठ: भगवान सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करना बहुत फलदायी होता है. दान: गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना शुभ माना जाता है. तीर्थ यात्रा: पवित्र नदियों में स्नान और तीर्थ यात्रा करना इस दौरान बहुत ही पुण्यकारी माना गया है. मंत्र जाप: ध्यान, जप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना.