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प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता-कूनो में 57 हुये चीते

भोपाल मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क अब चीतों का केवल आश्रय स्थल नहीं रहा, बल्कि एक सफल चीता प्रजनन केन्द्र के रूप में दुनिया भर में अलग पहचान बना चुका है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहां की जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र में पूरी तरह से रच बस गये हैं। कूनो की धरती अब आये दिन नन्हे शावकों की किलकारियों से गूंज रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का लुप्त हो चुके चीतों के देश में फिर से बसाने का सपना ‘प्रोजेक्ट चीता’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केन्द्र-राज्य के विभागों के समन्वय और प्रबंधन से वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में नये इतिहास लिखे जाने के साथ साकार हो रहा है। चुनौतियों पर विजय के बाद मिली ऐतिहासिक सफलता प्रोजेक्ट चीता का प्रारंभिक चरण शुरुआती चुनौतियों से भरा हुआ था, लेकिन कूनो की आबोहवा और विभाग के विशेषज्ञों के कुशल प्रबंधन ने सभी चुनौतियों से पार पाते हुए वन्य-जीव संरक्षण की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लुप्त प्रजाति की पुनर्स्थापना का सफलतम पर्याय बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और पर्याप्त शिकार चीतों के प्रजनन के लिए बेहद अनुकूल सिद्ध हुए हैं। मादा चीतों द्वारा लगातार शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि वे तनावमुक्त हैं और कूनो को अपना प्राकृतिक आवास मान चुकी हैं। बढ़ता कुनबा : प्रोजेक्ट चीता की नई उड़ान              नए शावकों का जन्म: अप्रैल 2026 में मादा चीता गामिनी ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इससे पहले फरवरी-मार्च 2026 में ज्वाला, निर्वा और आशा भी शावकों को जन्म दे चुकी हैं।              कुल संख्या: कूनो में चीतों की संख्या अब 57 हो चुकी है।              भारत में जन्मे शावक: 27 से अधिक शावकों का जन्म भारत में ही हुआ है, जो इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता है।              विदेशी सहयोग: फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 8-9 नए चीते लाए गए, जिससे परियोजना को और मजबूती मिली। पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट कूनो का ब्रीडिंग सेंटर बनना केवल पर्यावरणीय उपलब्धि नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चीतों की बढ़ती संख्या के साथ यहां वाइल्डलाइफ टूरिज्म की संभावनाएं कई गुना बढ़ गई हैं। इससे श्योपुर और आसपास के जिलों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय युवाओं के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं। प्रोजेक्ट चीता-एक ऐतिहासिक यात्रा              17 सितंबर 2022: प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो में छोड़ा— यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बिग प्रेडेटर स्थानांतरण पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट था।              फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते आए।              मार्च 2023: ज्वाला ने 70 वर्षों बाद भारत में पहले शावकों को जन्म दिया।              2024: आशा और गामिनी जैसी मादा चीतों ने नई पीढ़ी को जन्म दिया, जिसमें गामिनी ने एक साथ 5 शावकों का रिकॉर्ड बनाया।              2025-26: नई खेप के साथ प्रोजेक्ट का विस्तार और शावकों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती गई। नई पीढ़ी और भविष्य की दिशा कूनो में अब दूसरी पीढ़ी के चीते भी विकसित हो रहे हैं। मुखी जैसी भारत में जन्मी मादा चीता का शावकों को जन्म देना पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट में जैनेटिक ब्रीडिंग के रूप में मील का पत्थर माना जा रहा है। वन विभाग अब शावकों की पहचान नामों के बजाय कोड (जैसे KP-1, KP-2) से कर रहा है, ताकि उनकी वंशावली को वैज्ञानिक तरीके से ट्रैक किया जा सके। आगे की योजना-दूसरा घर तैयार कूनो पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे घर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे प्रोजेक्ट चीता को और विस्तार मिलेगा और भारत में चीतों की स्थायी वापसी सुनिश्चित होगी। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या और सफल प्रजनन ने यह साबित कर दिया है कि भारत में चीतों की वापसी का सपना अब साकार हो रहा है। यह परियोजना न केवल वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण बन रही है, बल्कि पर्यावरण, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था — तीनों क्षेत्रों में एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है। कूनो नेशनल पार्क : ‘प्रोजेक्ट चीता’ की विस्तृत टाइमलाइन शुरुआत और ऐतिहासिक आगमन (2022)              17 सितंबर 2022: प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने जन्मदिन पर नामीबिया से लाए गए 8 चीतों (5 मादा, 3 नर)को कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ा।              यह दुनिया का पहला अंतर्महाद्वीपीय मांसाहारी प्रजाति (प्रेडेटर) का बड़ा स्थानांतरण था, जिसने भारत में चीतों की वापसी की ऐतिहासिक शुरुआत की। विस्तार और पहली बड़ी सफलता (2023)              18 फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से12 और चीते कूनो लाए गए, जिससे कुल संख्या 20 हो गई।              27 मार्च 2023: नामीबियाई मादा चीता सियाया (ज्वाला)ने 4 शावकों को जन्म दिया — यह 70 वर्षों बाद भारत में जन्मे पहले चीते थे।              मई–अगस्त 2023: संक्रमण व अन्य कारणों से कुछ चीतों और शावकों की मृत्यु हुई। इसके बाद सभी चीतों को स्वास्थ्य परीक्षण हेतु बोमामें रखा गया। पुनर्वास और नई पीढ़ी का उदय (2024)              जनवरी 2024: मादा चीता आशा ने 3 शावकों को जन्म दिया।              इसके बाद ज्वालाने दोबारा 4 शावकों को जन्म देकर प्रजनन क्षमता साबित की।              मार्च 2024: मादा चीता गामिनीने एक साथ 5 शावकों को जन्म देकर रिकॉर्ड बनाया।              अगस्त–दिसंबर 2024: चीतों को धीरे-धीरे फिर से खुले जंगलमें छोड़ा गया, जिससे उनका प्राकृतिक व्यवहार पुनर्स्थापित हुआ। नई उपलब्धियां और विस्तार (2025–2026)              नवंबर 2025: भारत में जन्मी मादा चीता मुखी ने वयस्क होकर 5 शावकों को जन्म दिया — इसे ‘जेनेटिक मील का पत्थर’ माना गया।              फरवरी 2026: प्रोजेक्ट को विस्तार देते हुए बोत्सवाना से 9 नए चीते (6 मादा, 3 नर) कूनो लाए गए।              मार्च–अप्रैल 2026: गामिनी, निर्वा और ज्वालाने नए शावकों को जन्म दिया, जिससे भारत में जन्मे चीतों की संख्या तेजी से बढ़ी।              अप्रैल 2026: कूनो में चीतों की कुल संख्या (शावकों सहित) 57 तक पहुंच गई है। पहचान और नामकरण की विशेष व्यवस्था              कूनो में चीतों की पहचान नाम, लिंग और मूल देश के आधार पर की जाती है।              2022–23 में आए चीतों के विदेशी नामों को बदलकर भारतीय नाम दिए गए। नामीबिया से आए प्रमुख चीते (2022) … Read more

बोत्सवाना से उड़कर भारत पहुंचे 9 चीते, कूनो पार्क में क्वारंटीन, केंद्रीय मंत्री ने किया प्रतीकात्मक रिलीज

श्योपुर चीता परियोजना के लिए दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना से 9 चीते सुरक्षित रूप से कूनो नेशनल पार्क पहुंच चुके हैं। लगभग 12 घंटे की हवाई यात्रा के बाद वे ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां से तीन हेलीकॉप्टरों के जरिए उन्हें कूनो लाया गया। नई खेप के साथ देश में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो गई है।  हेलीकॉप्टर से पहुंची 9 चीतों की खेप कुनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से आए 9 चीतों की खेप पहुंचने के बाद भारत में चीता प्रोजेक्ट के इतिहास में एक और नया अध्याय जुड़ गया है. 2022 में पहली बार भारत की धरती पर चीतों की वापसी हुई थी. इसके बाद से लगातार चीतों के बढ़ने का सफर जारी है. शनिवार सुबह करीब 9.30 पर हेलीकॉप्टर से चीतों की खेप बोत्सवाना से ग्वालियर एयरबेस पर पहुंची. केंद्रीय मंत्री ने किया प्रतीकात्मक रिलीज इस मौके पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव कूनो में मौजूद रहे। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से क्रेट का हैंडल घुमाकर चीतों को विशेष क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ा। नई खेप में 6 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे कूनो में लिंगानुपात संतुलित होगा और भविष्य में प्रजनन की संभावनाएं मजबूत होंगी। निर्धारित कार्यक्रम के तहत केंद्रीय मंत्री सुबह नई दिल्ली से रवाना होकर ग्वालियर पहुंचे। वहां से वे हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो पहुंचे और सुबह करीब 9:30 बजे चीतों को पार्क में रिलीज किया गया। बढ़ गया कूनो में चीतों का कुनबा नए चीतों के आने से अब भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 48 हो चुकी है. अब तक कूनो नेशनल पार्क में 36 चीते थे, जिनमें 26 व्यस्क और 10 शावक थे. व्यस्कों में 14 नर चीते और 12 मादा चीता रह रही हैं. वहीं अब 9 नए वयस्क चीतों के आने से कूनो में कुल 45 वयस्क चीते हो गए हैं, वहीं नर चीतों की संख्या 17 और मादा चीतों की संख्या 18 हो गई है. इनके अलावा मध्य प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य में भी 3 चीते शिफ्ट किए जा चुके हैं. फरवरी के माह में ही चीता प्रोजेक्ट के लिए दूसरी खुशखबरी है. इससे पहले हाल ही में कूनो में रह रही मादा चीता गामिनी ने शावकों को जन्म दिया था. पहले तीन शावक पैदा होने की जानकारी सामने आई थी. लेकिन शुक्रवार को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने चौथे चीता शावक की अधिकारिक जानकारी सोशल मीडिया के जरिए साझा की थी. जेनेटिक विविधता होगी मजबूत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब बोत्सवाना से चीतों के आने से कूनो में जेनेटिक विविधता और सुदृढ़ होगी। पार्क में अब 18 मादा और 16 नर वयस्क चीते हैं। सभी नए चीतों को लगभग एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाएगा। संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि तीन अलग-अलग देशों के चीतों का संगम परियोजना की सफलता के लिए निर्णायक साबित होगा। गामिनी ने दिए 4 शावक परियोजना के लिए एक और खुशखबरी यह रही कि मादा चीता गामिनी ने 18 फरवरी को तीन नहीं बल्कि चार शावकों को जन्म दिया। घनी झाड़ियों के कारण चौथा शावक पहले नजर नहीं आया था लेकिन मॉनिटरिंग टीम और पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसकी पुष्टि हो गई। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था। गौरतलब है कि 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए थे, जबकि 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो पहुंचे थे। अब बोत्सवाना से आए 9 नए चीतों के साथ परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है। 

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में फॉरेस्ट ऑउलेट का दिखाई देना, शुभ संकेत

भोपाल पक्षी विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, स्थानिक और लुप्त प्राय फॉरेस्ट ऑउलेट(एथिन ब्लेविटी) को पहली बार कूनो राष्ट्रीय उद्यान में देखा गया है, जो इस प्रजाति के ज्ञात वितरण क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार का संकेत है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में फॉरेस्ट ऑउलेट की खोज भारत में जैव विविधता संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। यह खोज इस तथ्य को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि यह पक्षी विश्व के सबसे दुर्लभ शिकारी पक्षियों में से एक है और चीता परियोजना से जुड़े पर्यावास प्रबंधन के साथ इसके संभावित पारिस्थितिक संबंध हैं। फॉरेस्ट आउलेट मध्य भारत का एक स्थानिक (endemic) पक्षी है, जिसे 1872 में पहली बार खोजा गया था, लेकिन 1884 के बाद इसे विलुप्त मान लिया गया था। लगभग 113 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, 1997 में इसे महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में फिर से खोजा गया, जिसने पक्षी विज्ञान की दुनिया में सनसनी फैला दी थी। वर्तमान में यह मध्य भारत के खंडित वन क्षेत्रों में पाया जाता है, जिसमें मध्यप्रदेश (खकनार, पीपलोद), महाराष्ट्र (तोरणमाल, मेलघाट) और गुजरात (डांग, पूर्णा वन्य जीव अभयारण्य) के हिस्से शामिल हैं। मध्यप्रदेश में फॉरेस्ट ऑउलेट पहले केवल पूर्वी खंडवा, बुरहानपुर और बैतूल जिलों में ही पाया जाता था। इस दुर्लभ पक्षी को सबसे पहले कूनो में स्थानीय पर्यटन क्षेत्र से जुड़े श्री लाभ यादव ने पारोंद बीट में क्षेत्र भ्रमण के दौरान देखा था, जिससे प्रजाति के अत्यधिक सीमित वितरण और संरक्षण स्थिति के कारण वन विभाग का ध्यान तुरंत आकर्षित हुआ। प्रमुख पहचान लक्षणों के आधार पर,वाइल्ड लाइफ रिसर्च एण्ड कंजर्वेशन सोसायटी, पुणे के श्री विवेक पटेल ने मौके पर ही इसकी पुष्टि की, जिससे यह कूनो राष्ट्रीय उद्यान से प्रजाति का पहला प्रामाणिक रिकॉर्ड बन गया। अधिकांश उल्लुओं के व्यवहार के विपरीत, फॉरेस्ट ऑउलेट मुख्य रूप से दिन में सक्रिय रहने वाला पक्षी है। यह सुबह 6:00 से 10:00 बजे के बीच सबसे अधिक सक्रिय रहता है और कड़ी धूप में भी ऊंचे पेड़ों की टहनियों पर बैठा देखा जा सकता है। फॉरेस्ट ऑउलेट को वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा 'लुप्त प्राय' श्रेणी में रखा गया है।इसकी कुल वैश्विक वयस्क संख्या 250 से 999 के बीच होने का अनुमान है। मध्यप्रदेश में इसके वितरण को समझने के लिए और सर्वेक्षण किए जाने की आवश्यकता है। फॉरेस्ट ऑउलेट, जिसे कभी विलुप्त माना जाता था और 1997 में पुनः खोजा गया था, वर्तमान में मध्य भारत के सीमित क्षेत्रों में पाया जाता है और पर्यावास के क्षरण और विखंडन से लगातार खतरे का सामना कर रहा है। यह नया रिकॉर्ड कूनो राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों के पारिस्थितिक महत्व को उजागर करता है। फॉरेस्ट आउलेट का दिखाई देना संकेत दे रहा है कि चीता के लिये किये जा रहे संरक्षण प्रयासों से पारिस्थितिकीय तंत्र में सुधार होने से अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों की भी वापसी हो रही है। मध्यप्रदेश के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में इस प्रजाति के मिलने से पक्षी संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों में उत्साह की लहर है।  

कूनो पार्क में मादा चीता वीरा के शावक की मौत, 24 घंटे पहले जंगल में छोड़े गए थे

 श्योपुर मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से चिंताजनक खबर सामने आई है. यहां मादा चीता वीरा के एक शावक की खुले जंगल में मौत हो गई. शावक का शव शुक्रवार को दोपहर बाद जंगल के इलाके में मिला, जिसके बाद पूरे वन विभाग व चीता प्रोजेक्ट टीम में हलचल मच गई. ठीक एक दिन पहले 4 दिसंबर की दोपहर को मादा चीता वीरा और उसके दो शावकों को खुले जंगल में रिलीज किया गया था. रिलीज के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि यह दुखद घटना सामने आ गई. कूनो नेशनल पार्क के चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने कहा है कि मृत पाया गया शावक करीब 10 महीने का था. उसे 4 दिसंबर को अपनी मां वीरा और दूसरे शावक के साथ जंगल में छोड़ा गया था. लेकिन रिलीज के बाद रात के दौरान यह शावक अपनी मां और भाई से अलग हो गया. शुक्रवार दोपहर बाद वह मृत अवस्था में मिला. उन्होंने कहा कि शावक की मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा. फिलहाल, मादा चीता वीरा और उसका दूसरा शावक साथ हैं और स्वस्थ हैं. उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि टीम लगातार मौके पर निगरानी रख रही है. बाहर छोड़े जाने के बाद शावकों के लिए यह शुरुआती अवधि बेहद संवेदनशील होती है. वन्यजीव विशेषज्ञों और मेडिकेशन टीम को सतर्क किया गया है. इस मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में अब कुल 28 चीते बचे हैं. इनमें 8 वयस्क (5 मादा और 3 नर) और 20 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं. पार्क प्रबंधन का दावा है कि बाकी सभी चीते स्वस्थ हैं और उनकी मॉनिटरिंग की जा रही है. फिलहाल प्रबंधन पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि शावक की मौत किस वजह से हुई.