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निगम की नई पहल: नैनो एरेटर तकनीक से तालाबों में पानी की गुणवत्ता में सुधार, 10 दिन में असर दिखा

उज्जैन  शहर के तालाबों की बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिए नगर निगम ने नैनो डिफ्यूजर सॉफ्ट एरेटर तकनीक का प्रयोग शुरू किया है। इसकी शुरुआत क्षीरसागर तालाब से की गई है, जहां 10 दिनों से यह तकनीक काम कर रही है। अधिकारियों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और शुरुआती निरीक्षण में पानी की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है। नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने हाल ही में स्थल निरीक्षण किया, जिसमें पानी पहले की तुलना में साफ नजर आया। शहर में शिप्रा नदी के साथ-साथ सप्त सागर का धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व है, लेकिन जल प्रवाह नहीं होने से तालाबों का पानी अक्सर दूषित हो जाता है। इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु होती है। गर्मी में बदबू के कारण आसपास रहना भी मुश्किल हो जाता है। क्षीरसागर में बड़ी संख्या में मछलियां हैं, लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए निगम ने यह तकनीक शुरू की है। सफल होने पर इसे शहर के अन्य तालाबों में भी लागू किया जा सकेगा। यह कार्य पर्यावरणविद एसपीएस रंधावा और उनकी टीम की देखरेख में किया जा रहा है। कैसे काम करती है तकनीक नैनो डिफ्यूजर सॉफ्ट एरेटर तकनीक के तहत तालाब में ऐसे उपकरण लगाए जाते हैं जो पानी के भीतर बेहद छोटे-छोटे हवा के बुलबुले छोड़ते हैं। ये नैनो बुलबुले पानी में घुलकर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे गंदगी फैलाने वाले बैक्टीरिया खत्म होते हैं और पानी धीरे-धीरे साफ व पारदर्शी बनने लगता है। फाउंटेन से अलग क्यों है तालाबों में पहले से लगे फव्वारे मुख्य रूप से सतह पर ही असर करते हैं और सजावटी होते हैं। नैनो एरेटर तकनीक पानी की गहराई तक पहुंचकर वास्तविक सफाई करती है और लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखती है। इसके मुख्य फायदे पानी की गुणवत्ता में सुधार बदबू और गंदगी में कमी मछलियों और जलीय जीवों को बेहतर वातावरण मिलने से उनकी मौत नहीं होगी। किनारे पर जमने वाली काई (ग्रीन लेयर) पर नियंत्रण।

भोपाल में छोटे तालाब और शाहपुरा तालाब के सुंदरीकरण के लिए नगर निगम ने 11.5 करोड़ रुपये की व्यापक योजना बनाई

भोपाल  छोटे तालाब और शाहपुरा तालाब को सुरक्षित करने और सुंदरीकरण के लिए नगर निगम ने व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के बाद काम भी शुरू करा दिया है। दोनों ही तालाबों के सुंदरीकरण पर नगर निगम का झील प्रकोष्ठ द्वारा करीब साढ़े 11 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। तालाबों में दशकों से जमा कचरे और मिट्टी के कारण तालाबों की गहराई कम हो गई थी, जिसे निकाला जाएगा। निगम प्रशासन ने वैज्ञानिक तरीके से गाद हटाने का निर्णय लिया है। तालाबों को संरक्षित करने के लिए पिचिंग का काम भी किया जाना है, लेकिन छोटे तालाब को वेटलैंड का हिस्सा होने की वजह से यहां पक्का निर्माण न करते हुए निगम पत्थरों को बिछाकर पिचिंग करा रहा है। तालाबों में मिलने वाले सीवेज के गंदे पानी को उपचारित करने के बाद ही तालाबों में छोड़ा जाएगा। छोटा तालाब के 1.4 किमी में होगी पिचिंग छोटे तालाब पर करीब 4.97 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है। करीब 1.4 किलोमीटर एरिया में कई जगह पर पुरानी पिचिंग उखड़ गई है, उसकी जगह पर नई पिचिंग बनाई जा रही है। डीसिल्टिंग कर तालाब के तल में जमी गाद को बाहर निकाला जाएगा। पांच नए फव्वारे भी लगाए जाएंगे। प्रोफेसर कॉलोनी वाले एरिया में नया पाथवे बनाया जाएगा और उसके किनारे पर पौधे लगेंगे। वर्तमान में बाणगंगा नाले से सीवेज सीधे मिलकर पानी को गंदा कर रहे पानी को उपचारित करने के लिए सीवेज प्रकोष्ठ 10 एमएलडी का एसटीपी लगाएगा। शाहपुरा तालाब के पास नया पार्क होगा विकसित शाहपुरा तालाब में भी इसी तरह डीसिल्टिंग कर गाद निकाली जाएगी और किनारों पर पिचिंग की जाएगी। यहां एक फव्वारा पहले से लगा हुआ है, जबकि सात नए फव्वारे लगाने का प्रस्ताव है। पंचशील नाला और चूनाभट्टी नाला के पानी के उपचार की व्यवस्था की जाएगी। तालाब के आसपास पाथवे का निर्माण, पौधरोपण और विद्युत व्यवस्था की जाएगा। बंसल अस्पताल के पास एक नया पार्क भी विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब साढ़े छह करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनका कहना है     शहर के तालाबों के सुंदरीकरण के लिए कार्य किए जा रहे हैं। तालाबों को सुरक्षित करने के लिए पिचिंग और उनकी गाद भी निकालने का काम किया जा रहा है।तालाबों में नए फव्वारे लगाए जाएंगे- तन्मय वशिष्ठ शर्मा, अपर आयुक्त।