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“राज्य स्थापना दिवस छत्तीसगढ़ महतारी की अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान का पर्व” — मंत्री राजवाड़े

राज्योत्सव में दिखी छत्तीसगढ़ की संस्कृति, विकास और उपलब्धियों की झलक मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के मुख्य आतिथ्य में सूरजपुर में जिला स्तरीय समारोह का शुभारंभ “राज्य स्थापना दिवस छत्तीसगढ़ महतारी की अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान का पर्व” — मंत्री राजवाड़े सशक्त नारी, युवा उड़ान की थीम पर आयोजित समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारी और प्रतियोगिताओं के विजेता सम्मानित रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य के 26वें स्थापना दिवस के अवसर पर सूरजपुर के अग्रसेन स्टेडियम ग्राउंड में जिला स्तरीय राज्योत्सव का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मुख्य आतिथ्य में आयोजित समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती और छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्यगीत का गायन भी किया गया। इस वर्ष राज्योत्सव “सशक्त नारी, युवा उड़ान” की थीम पर मनाया गया। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने जिलेवासियों को राज्य स्थापना दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस छत्तीसगढ़ महतारी की अस्मिता, समृद्ध संस्कृति और स्वाभिमान का पर्व है। प्रदेश अपनी स्थापना के 26 वर्ष पूरे कर 27वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों से छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य का गौरव मिला। मंत्री ने राज्य निर्माण में योगदान देने वाले पुरखों को नमन करते हुए कहा कि गठन के समय अनेक चुनौतियां थीं, लेकिन आज प्रदेश विकास के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोककला, लोकसंस्कृति और जनजातीय परंपराओं से विशिष्ट पहचान रखने वाला छत्तीसगढ़ विकास और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना के अनुरूप जनकल्याण और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ दूरस्थ अंचलों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। आदिवासी एवं अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरणों के माध्यम से जनजातीय और वंचित वर्गों के उत्थान के प्रयास भी किए जा रहे हैं। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सूरजपुर जिले में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ विकास कार्यों को गति दी जा रही है। उन्होंने सभी से जिले को समृद्ध और विकसित बनाने के संकल्प के साथ सामूहिक सहभागिता से आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सूरजपुर के विकास से विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प और मजबूत होगा। प्रेमनगर विधायक श्री भूलन सिंह मरावी ने भी राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्योत्सव की “सशक्त नारी, युवा उड़ान” थीम महिला सशक्तिकरण और युवाओं की प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित सूरजपुर के निर्माण में सभी से सक्रिय सहभागिता की अपील की। कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने राज्य और जिले के गठन के बाद हुए विकास, उपलब्धियों तथा नवाचारों की जानकारी साझा की। उत्कृष्ट कार्य करने वालों और प्रतियोगिता विजेताओं का सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों और पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। पाक कला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बबली को 3,100 रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली श्रीमती रानी गुप्ता को 2,100 रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली श्रीमती कमला गुप्ता को 1,100 रुपये की नकद पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। विभागीय प्रदर्शनी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जिला पंचायत को प्रथम, स्वास्थ्य विभाग को द्वितीय तथा शिक्षा एवं राजस्व विभाग को संयुक्त रूप से तृतीय स्थान मिला। अतिथियों ने विजेता विभागों को सम्मानित किया। विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को लाभ भी प्रदान किया गया। कुर्सी दौड़, रस्साकशी सहित खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। छात्राओं और अन्य प्रतिभागियों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन पर दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया। पारंपरिक व्यंजनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन पाक कला प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की महक छाई रही। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े और अन्य जनप्रतिनिधियों ने पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा और प्रतिभागियों के पाक कौशल की सराहना की। मंत्री ने समारोह स्थल पर लगी विभागीय प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभिन्न योजनाओं, उपलब्धियों और नवाचारों की जानकारी ली। सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। कर्मा नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विकास, संस्कृति और एकता का संदेश प्रस्तुत किया गया। आमंत्रित कलाकारों ने लोकगीतों और छत्तीसगढ़ी परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणि पैकरा, उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा लाल राजवाड़े, अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर श्रीमती रेना जमील, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विजेंद्र पाटले, अपर कलेक्टर श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन की ओर से मंत्री श्रीमती राजवाड़े और अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।

लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयास रंग लाए, ओड़गी में 1.50 किमी सड़क निर्माण को मंजूरी

 लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से ओड़गी में सड़क-पुल निर्माण को मिली स्वीकृति खालबहारा मेन रोड से पंचायत भवन तक 1.50 किलोमीटर मार्ग का होगा निर्माण 1 करोड़ 65 लाख 85 हजार रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति रायपुर, सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के ग्राम पंचायत खालबहारा में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से खालबहारा मेन रोड से पंचायत भवन तक 1.50 किलोमीटर लंबे मार्ग का पुल-पुलियों सहित निर्माण स्वीकृत हुआ है। लोक निर्माण विभाग ने इस कार्य के लिए 1 करोड़ 65 लाख 85 हजार रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इस मार्ग के निर्माण से ग्रामवासियों को पंचायत भवन तक पहुंचने में सुविधा होगी। पंचायत भवन ग्रामीणों के लिए स्थानीय स्तर पर विभिन्न कामों और बैठकों का प्रमुख केंद्र होता है। सड़क बनने से वहां तक आवागमन सुगम होगा और क्षेत्र के लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए आने-जाने में सहूलियत मिलेगी। मार्ग में पुल-पुलियों का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे सड़क संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। राज्य शासन ने यह स्वीकृति वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल कार्य के अंतर्गत प्रदान की है। स्वीकृति आदेश के अनुसार निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पहले तकनीकी स्वीकृति और निविदा सहित निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। साथ ही, कार्य शासकीय भूमि पर और उपलब्ध बजट की सीमा के भीतर कराया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विस्तार स्थानीय आवागमन और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है। खालबहारा में स्वीकृत यह निर्माण कार्य इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। निर्माण पूरा होने पर ग्रामवासियों को पंचायत भवन तक पहुंचने के लिए बेहतर मार्ग उपलब्ध होगा।

लक्ष्मी राजवाड़े की पहल से छत्तीसगढ़ में 6 नए केंद्र भवनों को मंजूरी

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से छह परियोजना-सह-संसाधन केंद्रों के भवनों को मंजूरी तीन जिलों में 2.70 करोड़ रुपये से बनेंगे भवन, विभागीय सेवाओं और योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन को मिलेगी मजबूती रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को मजबूत आधारभूत सुविधाओं के साथ जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से प्रदेश के छह परियोजना-सह-संसाधन केंद्रों के भवन निर्माण को स्वीकृति मिली है। राज्य शासन ने इन भवनों के लिए कुल 2 करोड़ 70 लाख 90 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रथम किस्त के रूप में 67 लाख 72 हजार 500 रुपये जारी करने की सहमति भी दी गई है। नए भवन सूरजपुर जिले के भैयाथान और ओड़गी, रायगढ़ जिले के तमनार तथा बीजापुर जिले के बीजापुर, उसूर और भोपालपटनम में बनाए जाएंगे। प्रत्येक भवन के निर्माण के लिए 45 लाख 15 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बच्चों के विकास, स्वास्थ्य, पोषण तथा उनके अधिकारों और हितों के संरक्षण से जुड़ी अनेक योजनाओं और सेवाओं का संचालन करता है। परियोजना-सह-संसाधन केंद्र इन योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन, विभागीय अमले के समन्वय और सेवाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप भवनों का निर्माण विभागीय कार्यों के संचालन के लिए बेहतर और व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध कराएगा। यह स्वीकृति केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला एवं बाल विकास सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर आधारभूत सुविधा से विभागीय अमले को योजनाओं के क्रियान्वयन और हितग्राहियों से जुड़े कार्यों में सहूलियत मिलेगी। साथ ही, महिलाओं और बच्चों तक शासन की कल्याणकारी योजनाओं तथा सेवाओं की पहुंच आसान बनाने में मदद मिलेगी। दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में विभागीय गतिविधियों को मजबूत करने से शासन की जनकल्याणकारी पहलें अधिक व्यवस्थित रूप से लोगों तक पहुंच सकेंगी। शासन के आदेश के अनुसार, अगली किस्त के प्रस्ताव के साथ प्रथम किस्त के उपयोग का प्रमाण-पत्र तथा निर्माण कार्य की भौतिक और वित्तीय प्रगति का विवरण प्रस्तुत करना होगा। स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित व्यय सीमा और शासन के नियमों के अनुरूप किया जाएगा।

सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित बचपन से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़: लक्ष्मी राजवाड़े

सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित बचपन से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ -लक्ष्मी राजवाड़े  मंत्री, महिला एवं बाल विकास, छत्तीसगढ़ शासन     रायपुर  विकास का अर्थ केवल नई सुविधाओं और अधोसंरचना का विस्तार नहीं है। विकास तब सार्थक होता है, जब एक महिला अपने भविष्य के निर्णय आत्मविश्वास से ले सके, एक मां को अपने बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता में सहयोग मिले और हर बच्चे को पोषण, शिक्षा तथा सुरक्षा के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो। ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी मानवीय सोच को जनभागीदारी के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाने का अवसर है।     प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनसेवा की भावना से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं और बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है। हमारा उद्देश्य है कि योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ उन परिवारों तक भी पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। महिलाओं का आत्मविश्वास ही समाज की शक्ति     छत्तीसगढ़ की महिलाएं परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती रही हैं। आज वे अपनी मेहनत और प्रतिभा से उद्यमिता तथा सामाजिक नेतृत्व में भी नई पहचान बना रही हैं। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता ने अनेक महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं और परिवार के खर्च से जुड़े निर्णय लेने में संबल दिया है। किसी ने इस राशि से बचत शुरू की है, तो किसी ने इसे छोटे आजीविका प्रयासों का आधार बनाया है।     स्व-सहायता समूहों के माध्यम से भी महिलाएं बचत, कौशल और उद्यम से जुड़ रही हैं। हमारा प्रयास है कि उन्हें आर्थिक सहायता के साथ आगे बढ़ने के अवसर भी मिलें। जब महिला आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेती है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार के जीवन पर पड़ता है। आँगनवाड़ी से जुड़ें परिवार और समुदाय     एक स्वस्थ और सक्षम समाज की नींव बचपन में पड़ती है। आँगनवाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के साथ माताओं को आवश्यक जानकारी देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन केंद्रों की सफलता में आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों के साथ परिवार और समुदाय का सहयोग भी जरूरी है। ‘हमारी आँगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ इसी साझा दायित्व की भावना को व्यक्त करता है।     25 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘आँगन मिलन’’ इस भागीदारी को और मजबूत करेगा। इस दौरान अभिभावकों और समुदाय के लोगों को आँगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों से जुड़ने, बच्चों के भोजन और स्वच्छता की व्यवस्था को समझने तथा पोषण पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। घर में बच्चों को क्या खिलाया जाए, भोजन में विविधता कैसे लाई जाए और स्वच्छता की अच्छी आदतें कैसे विकसित हों-इन विषयों पर संवाद पोषण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाएगा।          पोषण केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। बच्चे को उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार मिले, उसकी वृद्धि पर ध्यान दिया जाए और परिवार उसकी देखभाल में सक्रिय रहे-यह हम सबकी जिम्मेदारी है। ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ का संदेश इसी सोच को हर घर तक ले जाने का आह्वान है। सुरक्षित बचपन के लिए साझा संकल्प     हर बच्चे को भय और शोषण से मुक्त वातावरण मिलना चाहिए। बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा और उपेक्षा जैसी चुनौतियों का सामना केवल कानून के भरोसे नहीं किया जा सकता। परिवार, विद्यालय, पंचायत, आँगनवाड़ी और समुदाय को मिलकर सजग रहना होगा। बच्चों की बात सुनना, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और आवश्यकता पड़ने पर समय से सहायता पहुंचाना सुरक्षित बचपन की दिशा में आवश्यक कदम हैं।     सेवा संकल्प अभियान हमें याद दिलाता है कि सेवा का वास्तविक अर्थ लोगों तक पहुंचना और उनकी जरूरतों को समझना है। किसी मां को पोषण संबंधी सही जानकारी मिलना, किसी महिला को आजीविका का अवसर मिलना और किसी बच्चे को सुरक्षित वातावरण मिलना-यही इस अभियान की सार्थक उपलब्धियां होंगी।     आइए, ‘आँगन मिलन’ से शुरू होने वाले संवाद और सहभागिता को निरंतर बनाए रखें। जब परिवार, समुदाय और शासन साथ मिलकर जिम्मेदारी निभाएंगे, तभी सशक्त मातृशक्ति और सुपोषित, सुरक्षित बचपन के संकल्प से विकसित छत्तीसगढ़ का आधार मजबूत होगा।

रायपुर: विकसित भारत-जी रामजी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर : विकसित भारत-जी रामजी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति: मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े 125 दिनों का रोजगार, समयबद्ध भुगतान और ग्रामसभा आधारित कार्ययोजना से सशक्त होंगे गांव  जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं जनभागीदारी को मिलेगा बढ़ावा रायपुर, विकसित भारत-जी रामजी योजना प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी एवं सतत विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। यह योजना ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार, समयबद्ध भुगतान तथा ग्रामसभा आधारित कार्ययोजनाओं के माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। यह बात महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने विकसित भारत-जी रामजी योजना के शुभारंभ अवसर पर कही। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि विकसित भारत-जी रामजी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आजीविका संवर्धन, आधारभूत संरचना विकास तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को नई गति देगी। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी विकसित भारत के निर्माण के प्रमुख आधार हैं तथा इन क्षेत्रों में सामूहिक प्रयासों से ही स्थायी विकास के लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को पूर्व में उपलब्ध 100 दिनों के रोजगार के स्थान पर अब 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। ग्रामसभाओं के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन एवं अनुमोदन किए जाने से विकास कार्यों की प्रभावशीलता और पारदर्शिता में वृद्धि होगी। योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, ग्रामीण अधोसंरचना विकास, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि आधारित गतिविधियों तथा टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण को प्राथमिकता दी गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का विस्तार होने के साथ-साथ दीर्घकालिक विकास को भी मजबूती मिलेगी। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि विकसित भारत-जी रामजी योजना प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों एवं सभी संबंधित विभागों से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया। इस अवसर पर विकसित भारत-जी रामजी योजना तथा ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान पर आधारित प्रेरणादायी लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। साथ ही जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नागरिकों ने नशा मुक्त भारत और बाल विवाह उन्मूलन के लिए सामूहिक शपथ भी ली। मनरेगा के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकास की राह पर, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े बोलीं- बदल रही है बस्तर की तस्वीर

रायपुर : नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकसित बीजापुर की ओर बढ़ रहा-मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े कैबिनेट मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रेस-वार्ता में कहा— सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं से बदलेगी जिले की तस्वीर, सरकार समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध रायपुर दो दिवसीय प्रवास पर बीजापुर पहुंचीं  महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने शनिवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सल मुक्त बीजापुर अब विकसित बीजापुर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों से अब जिले में विकास का नया दौर शुरू हो चुका है और शासन की सभी महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बीजापुर वासियों को दी बधाई मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने जिलेवासियों को सशस्त्र माओवाद से मुक्ति के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे बस्तर अंचल और देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में माओवाद के विरुद्ध चलाए गए अभियान को बड़ी सफलता मिली है। अब बीजापुर सहित बस्तर संभाग शांति, सुरक्षा और विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है। अब विकास की रफ्तार होगी और तेज प्रेस-वार्ता में मंत्री ने कहा कि वर्षों तक माओवादी गतिविधियों के कारण जिले के कई अंदरूनी क्षेत्रों तक विकास कार्य पूरी गति से नहीं पहुंच पाए थे। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और शासन-प्रशासन पूरी क्षमता एवं प्रतिबद्धता के साथ उन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करेगा। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी, संचार और अन्य आवश्यक सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाएगा, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचेगी शासन की योजनाएं मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना भी है। महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का व्यापक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन की व्यक्ति-मूलक योजनाओं से जिले के अंतिम व्यक्ति को जोड़कर समावेशी विकास का मॉडल तैयार किया जाएगा, जिससे हर परिवार विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन सके। शांति और विकास साथ-साथ चलेंगे मंत्री ने कहा कि शांति और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। अब जब बीजापुर में शांति का वातावरण स्थापित हुआ है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को और गति मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का दायरा लगातार बढ़ेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शासन, प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयासों से बीजापुर आने वाले समय में विकास, सुशासन और जनकल्याण का एक नया उदाहरण बनेगा। सरकार जिले के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता और गंभीरता के साथ कार्य कर रही है।

बस्तर से मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का संदेश, मुनगा अपनाएं, सुपोषण बढ़ाएं और पर्यावरण बचाएं

हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण : बस्तर से मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दिया पोषण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बस्तर संभाग के सुकमा जिले के प्रवास के दौरान सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र, लस्केपारा (छिंदगढ़) की पोषण वाटिका में नन्हें बच्चों के साथ मुनगा एवं पपीता के पौधों का पौधरोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘‘हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण’’ का संदेश देते हुए पौष्टिक आहार, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का आह्वान किया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों को मुनगा और पपीता के पोषण संबंधी महत्व, इनके स्वास्थ्य लाभ तथा संतुलित आहार में उनकी उपयोगिता के बारे में सरल एवं रोचक तरीके से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के हाथों से भी पौधे लगवाए और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मुनगा को "सुपोषण वृक्ष" के रूप में पहचान मिल चुकी है, क्योंकि इसकी पत्तियां, फलियां और फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं तथा कुपोषण की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पपीता भी विटामिन एवं खनिज तत्वों का उत्कृष्ट स्रोत है, जो बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों के अभिभावकों से अपने घरों एवं आंगनों में मुनगा के पौधे लगाने की अपील करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने आसपास पौष्टिक वृक्ष लगाए, तो घर के समीप ही पोषक आहार उपलब्ध होगा और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बचपन, सुपोषित परिवार और हरित भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पौधरोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य देने का संकल्प भी है। राज्य सरकार द्वारा संचालित सुपोषण अभियान के अंतर्गत पोषण वाटिकाओं के माध्यम से बच्चों, किशोरियों और माताओं को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। बस्तर अंचल से शुरू हुआ यह संदेश प्रदेश में पोषण, स्वास्थ्य और हरियाली के प्रति जनजागरूकता का प्रभावी अभियान बनकर उभर रहा है।

शहीद ASI रामू राम नाग को मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दी श्रद्धांजलि, परिजनों से मिलकर बंधाया ढांढस

शहादत को नमन : मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने शहीद एएसआई रामू राम नाग के निवास पहुंचकर दी श्रद्धांजलि शहीद की माताजी से की आत्मीय भेंट, अंत्योदय कार्ड जारी करने के दिए निर्देश रायपुर   महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सुकमा जिले के जगरगुंडा स्थित शहीद एएसआई रामू राम नाग के निवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्र की रक्षा एवं जनसेवा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने शहीद की माताजी से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान प्रदेश और देश की अमूल्य धरोहर है तथा उनके परिवारों का सम्मान और संरक्षण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने संबंधित अधिकारियों को शहीद परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए शहीद की माताजी के लिए अंत्योदय राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तत्काल पूर्ण करने को कहा, ताकि उन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सहजता से प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास, विश्वास और शांति के नए युग की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में प्रदेश के वीर सपूतों के त्याग और बलिदान को सदैव स्मरण रखना हम सभी का दायित्व है। शहीद परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।

शिक्षा, संस्कार और सपनों की उड़ान ही बच्चों का अधिकार: अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर मंत्री राजवाड़े

रायपुर. अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बचपन प्रदान करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का हनन है, जो उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास के अवसरों को छीन लेता है। मंत्री राजवाड़े ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। उनके हाथों में किताबें, खेल और रचनात्मक अवसर होने चाहिए, न कि श्रम का बोझ। किसी भी बच्चे से मजदूरी कराना उसके सपनों और संभावनाओं को सीमित करने के समान है। बाल श्रम केवल सामाजिक बुराई ही नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इस अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। राजवाड़े ने नागरिकों से आह्वान किया कि यदि किसी बच्चे से अवैध रूप से कार्य कराया जा रहा हो, उसे शिक्षा से वंचित रखा जा रहा हो अथवा उसके साथ किसी प्रकार का शोषण या दुर्व्यवहार हो रहा हो, तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला एवं बाल विकास विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें। उन्होंने कहा कि एक संवेदनशील और जागरूक समाज ही बच्चों को सुरक्षित बचपन और उज्ज्वल भविष्य दे सकता है। आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि किसी भी बच्चे का बचपन श्रम में नहीं, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा और अवसरों के साथ विकसित हो, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता- मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े

जहां गूंजता था लालातंक वहां लगी बाच चौपाल सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता- मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े रचनात्मक गतिविधियों से बाल आयोग अध्यक्षा डॉ वर्णिका ने जानी बच्चों की समस्याएं बच्चों की समस्याओं का हुआ त्वरित निराकरण बाल चौपाल में दिखा नया बस्तर, जागरूक और आत्मविश्वासी बच्चे रायपुर  छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की पहचान अब तेजी से बदलती नजर आ रही है। एक समय था जब यहां नक्सल आतंक का साया मंडराता था और लोगों के जीवन में भय और असुरक्षा का माहौल था, लेकिन आज उसी धरती पर बच्चों की खिलखिलाहट गूंज रही है। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दुर्गकोंडल क्षेत्र में आयोजित “बाल चौपाल” इस सकारात्मक बदलाव का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस बदलती सोच और प्रयासों का प्रतीक है, जिसके जरिए सुदूर और संवेदनशील क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। बस्तर में जहां कभी डर और सन्नाटा था, आज वहां बच्चों की मुस्कान और उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में  इस विशेष बाल चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत भी शामिल हुईं। इस दौरान बच्चों और स्थानीय ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, जरूरतों और आकांक्षाओं को समझने का प्रयास किया गया। यह पहल इस बात को दर्शाती है कि अब शासन केवल कागजी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर पहुंचकर वास्तविक स्थितियों का आकलन कर समाधान निकालने की दिशा में सक्रिय है। बाल चौपाल के जरिए सरकार ने सुदूर बस्तर में पहुंचकर बच्चों और समाज की आवाज को सीधे सुना कार्यक्रम के दौरान बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और आत्मरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। खासतौर पर “गुड टच और बैड टच” जैसे संवेदनशील विषय को बेहद सरल और सहज तरीके से समझाया गया। बच्चों ने इस विषय को गंभीरता से समझा और अपनी जागरूकता का परिचय भी दिया। यह इस बात का संकेत है कि अब बस्तर के बच्चे भी अपनी सुरक्षा और अधिकारों के प्रति पहले से अधिक सजग हो रहे हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। खेल-खेल में नैतिक शिक्षा से बच्चों को जोड़ा बाल चौपाल में बच्चों को खेल-खेल के माध्यम से नैतिक शिक्षा भी दी गई। इस अनोखे तरीके से बच्चों ने अनुशासन, ईमानदारी, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को आसानी से समझा। शिक्षा को रोचक और आनंददायक बनाकर बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करना इस कार्यक्रम की खासियत रही। इसके साथ ही बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन के बारे में भी जानकारी दी गई और उन्हें बताया गया कि किसी भी समस्या की स्थिति में वे किस तरह मदद प्राप्त कर सकते हैं। कई बच्चों ने यह भी साझा किया कि उन्होंने पहले हेल्पलाइन का उपयोग किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि जागरूकता अभियान अब प्रभावी हो रहे हैं। हालांकि इस दौरान एक अहम समस्या भी सामने आई, जो डिजिटल सुविधाओं की कमी से जुड़ी थी। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को अभी भी डिजिटल शिक्षा और संसाधनों की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से समन्वय कर आगामी सत्र से बच्चों को डिजिटल रूप से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि वे भी आधुनिक शिक्षा से जुड़ सकें। डॉ वर्णिका ने कहा कि दुर्गकोंडल में आयोजित यह बाल चौपाल केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की नई कहानी है। यह दर्शाता है कि जब सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर काम करते हैं, तो सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव संभव है। आज बस्तर में बच्चों की हंसी और उनके सपनों की चमक इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र अब भय से निकलकर विकास, शिक्षा और खुशहाली की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों के पुनर्वास केंद्र पहुंचीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने की मुलाकात बाल चौपाल के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाडे, बाल आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और हस्तशिल्प बोर्ड अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने पुनर्वास केंद्र में रह रहे लोगों से संवाद कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि वे समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें। इस पहल का उद्देश्य न केवल उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है, बल्कि उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। यहां उन्होंने मुख्यधारा में वापस लौटे नक्सलियों और उनके परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को जाना।