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किसानों के लिए राहत, नए भूमि अधिग्रहण कानून से मुआवजे में होगा ये बदलाव”

इंदौर  नए वित्त वर्ष से उन लोगों के लिए एक अच्छा नियम लागू होने जा रहा है जिनकी भूमि विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही है। इस नए नियम से किसानो के साथ ही बहुत बड़े स्तर पर लोगों को एक नई राहत मिलने वाली है। दरअसल इस नए नियम लागू होने के बाद जमीन देने वाले किसानों और अन्य भू-स्वामियों को पूरी राशि बिना किसी कर कटौती के मिल सकेगी। इससे उन्हें फायदा होगा। सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि नए वित्त वर्ष से  Tax Free दरअसल अब सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि नए वित्त वर्ष (New FinancialYear) से कर-मुक्त (Tax Free ) होगी। केंद्र सरकार के इस नए प्रावधान को एक बड़े राहत भरे फैसले को तौर पर देखा जा रहा है।  खासकल उन लोगों के लिए ये फायदा देने वाले है जिनकी जमीन विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही है। भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि टैक्स फ्री होने से उनको काफी लाभ होगा। पश्चिमी बाइपास, अयोध्या बाइपास, मेट्रो परियोजना से जुड़े भूमि मालिको को लाभ इस नए नियम से शहर में चल रहे तीन मेन प्रोजेक्टों पश्चिमी बाइपास, अयोध्या बाइपास और मेट्रो परियोजना से जुड़े भूमि स्वामियों को डायरेक्ट लाभ मिलेगा। इन परियोजनाओं के लिए करीब 400 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। प्रभावित लोगों जो मुआवज़ा राशि मिलेगी वो अब टैक्स के दायरे से बाहर रहेगी। नए नियम लागू होने के बाद जमीन देने वाले किसानों और अन्य भू-स्वामियों को पूरी राशि बिना किसी कर कटौती के मिल सकेगी। लिहाजा नए साल पर लागू होने वाले इस नियम से किसानों को फायदा होगा। 

इंदौर में एआई-सैटेलाइट मॉडल से भूमि मूल्य तय करने का प्रस्ताव, तैयार हो रहा है

 इंदौर आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में संपत्तियों की गाइडलाइन दरों में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। शासन से प्राप्त ऑनलाइन डाटा और स्थानीय स्तर पर एकत्र जानकारी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से विश्लेषण कर नई गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव अप्रैल से लागू होने वाली नई दरों का आधार बनेगा। पंजीयन विभाग ने पहली बार एआई और सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर नई गाइडलाइन तैयार करना शुरू किया है। इससे नए विकास का सही आकलन हो सकेगा और जमीन का मूल्य वास्तविक बाजार के अनुरूप हो सकेगा। संपत्ति सौदों का अध्ययन किया गया उप पंजीयन कार्यालयों में वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान हुए संपत्ति सौदों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। जिन स्थानों पर जमीन या संपत्ति की खरीद-फरोख्त तय गाइडलाइन दर से अधिक मूल्य पर हुई है, वहां दर बढ़ाने की सिफारिश की जा रही है। विशेष रूप से ऐसी लोकेशन को बढ़ोतरी में शामिल किया जा रहा है, जहां 10 प्रतिशत से अधिक दस्तावेज गाइडलाइन दर से ऊंचे मूल्य पर पंजीकृत हुए हैं। एआई तकनीक से बढ़ोतरी वाली लोकेशन का आकलन किया जा रहा है। अनुमान है कि जिले में तीन हजार से अधिक लोकेशन पर दरों में बढ़ोतरी होगी। मार्च में शासन को भेजेंगे प्रस्ताव वर्तमान में उप पंजीयन कार्यालयों में गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। एसडीएम की अध्यक्षता वाली समितियों की बैठक में स्वीकृति के बाद प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। यहां पर स्वीकृति के बाद दावे-आपत्ति बुलाकर निराकरण कर प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा। केंद्रीय मूल्यांकन समिति पूरे प्रदेश के प्रस्तावों का निराकरण कर प्रस्ताव स्वीकृति के लिए शासन को भेजेगी और इसके बाद नई दरें लागू होंगी। 270% तक बढ़ी थीं दरें मौजूदा वित्त वर्ष में भी कई क्षेत्रों में गाइडलाइन दरों में 20 से लेकर 270 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी। सबसे ज्यादा वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि में देखी गई थी। अधिक कीमत पर रजिस्ट्रियां होने और भूमि अधिग्रहण से जुड़े विरोध को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किए गए थे।

लालू परिवार को कोर्ट से बड़ा झटका, लैंड फॉर जॉब मामले में फ्रॉड और साजिश के आरोप फ्रेम

पटना लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार को बहुत बड़ा झटका लगा है। दरअसल, दिल्ली की कोर्ट ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए हैं। अब इस आदेश के बाद लालू परिवार पर मुकदमा चलेगा। दिल्ली राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती, हेमा यादव सहित कई अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय कर दिए हैं। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह एक आपराधिक गतिविधि को अंजाम दे सकें, जिसमें सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की। रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोग बरी अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किये और रेलवे अधिकारियों समेत 52 लोगों को बरी कर दिया। इससे पहले, सीबीआई ने मामले में आरोपी व्यक्तियों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि उसके आरोप-पत्र में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो गई है। अदालत ने मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की है। जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू यादव, उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था। क्या हैं पूरा मामला? आरोप है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-डी श्रेणी में भर्तियां लालू यादव के रेल मंत्री रहते 2004 से 2009 के बीच की गईं। इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने राजद प्रमुख के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफ़े में दिए या हस्तांतरित किए। सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के समकक्ष है। आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ 10 एकड़ जमीन मुक्त

रायपुर राजधानी रायपुर में अवैध प्लॉटिंग पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर ग्राम सेजबहार में करीब 10 एकड़ भूमि पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया. कार्रवाई के दौरान मौके पर बनी बाउंड्री वॉल, प्लिंथ और सड़क मार्ग को तोड़ा गया. साथ ही अवैध रूप से किए गए निर्माण को पूरी तरह हटाया गया है. यह संयुक्त कार्रवाई एसडीएम रायपुर नंदकुमार चौबे के नेतृत्व में राजस्व विभाग और नगर निगम की टीम प्रहरी द्वारा की गई. प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध भूमि विक्रय, बेजा कब्जे पर नियंत्रण रखने और भू-उपयोग को नियमानुसार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग या निर्माण कार्य करने वालों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.