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मकान मालिक से 20 लाख की फिरौती मांगने वाला गिरोह गिरफ्तार, पीजी के नाम पर चलता था खेल

 जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक ऐसा शातिर गिरोह सक्रिय है जो किराए पर बिल्डिंग लेकर उस पर अवैध कब्जा कर लेता है और फिर मकान मालिक से ही लाखों की फिरौती मांगता है. जयपुर की मानसरोवर थाना पुलिस ने इस 'कब्जा गैंग' का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. मोटा किराया और फिर घर पर कब्जा पुलिस गिरफ्त में आया आरोपी कृष्ण कुमार कोटपूतली का रहने वाला है. जांच में सामने आया कि यह गिरोह पीजी चलाने के नाम पर ऐसी बिल्डिंग्स को निशाना बनाता है जिनका किराया ज्यादा हो. शुरुआत में ये लोग मकान मालिक को मोटा किराया देने का भरोसा दिलाते हैं और अनुबंध कर लेते हैं. कुछ महीनों तक तो किराया समय पर दिया जाता है लेकिन इसके बाद असली खेल शुरू होता है. ये लोग किराया देना बंद कर देते हैं और मकान खाली करने के बजाय कानूनी दांव-पेंच में मालिक को ही उलझा देते हैं. सबलेट का खेल और फर्जी विवाद इस गिरोह का मास्टरमाइंड रोहित गुर्जर बताया जा रहा है जो अपने साथियों के नाम पर एग्रीमेंट करवाता है. मकान लेने के बाद ये लोग किसी तीसरे पक्ष (सबलेट होल्डर) को मकान किराए पर दे देते हैं और खुद को संपत्ति का मालिक बताते हैं. जब मूल मकान मालिक अपना हक मांगने पहुँचता है तो ये तीसरे पक्ष के साथ बनावटी विवाद खड़ा कर देते हैं और कोर्ट से स्टे ले आते हैं. इसके बाद न तो किराया दिया जाता है और न ही बिल्डिंग खाली की जाती है. मकान वापस मांगने पर 20 लाख की डिमांड एक पीड़िता ने आपबीती बताते हुए कहा कि गोपालपुरा बाईपास स्थित उनका मकान मनोज स्वामी नामक व्यक्ति ने किराए पर लिया था. जब वह मकान संभालने पहुँची तो उन्हें भीतर तक नहीं जाने दिया गया. आरोपियों ने उनका मकान आगे किसी और को दे दिया और खुद को मालिक घोषित कर दिया. हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने मकान खाली करने के बदले 20 लाख रुपये की मोटी डिमांड कर डाली. जयपुर के कई इलाकों में दर्ज हैं मुकदमे पुलिस जांच में पता चला है कि इस गिरोह के खिलाफ शिप्रापथ और महेश नगर समेत विभिन्न थानों में करीब आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं. पुलिस अब इस गिरोह के अन्य साथियों की तलाश कर रही है. जयपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अगर किसी अन्य के साथ भी इस तरह की धोखाधड़ी हुई है तो वे तुरंत थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज करवाएं.

भू-माफिया का खेल उजागर: फर्जी दस्तावेजों से बेचे गए प्लॉट, लोग परेशान

जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन दिनों एक बड़ा सवाल हर आम आदमी के सामने खड़ा है- क्या सपनों का घर भी कभी अचानक “अवैध” घोषित हो सकता है? शहर के बाहरी इलाकों में लगातार चल रही कार्रवाई और जयपुर विकास प्राधिकरण के बुलडोजर ने हजारों परिवारों की नींद उड़ा दी है. दरअसल, इसी महीने 17 अप्रैल को हाउसिंग बोर्ड की टीम ने बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी. इस जमीन का अधिग्रहण साल 1989 में हाउसिंग बोर्ड ने कर लिया था, लेकिन बावजूद इसके यहां भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां कॉलोनी विकसित कर दी और प्लॉट बेच दिए. खरीददारों का कहना है कि जमीन के कागज देखकर भुगतान किया और जमीन का सौदा किया, हमारी क्या गलती. वहीं, प्रशासन की सलाह है कि खरीददारों को जमीन सौदे के वक्त लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. इस मामले में NDTV ने खरीददार, एक्सपर्ट्स और प्रशासन से बात की और हकीकत जानी. साथ ही जाना कि घर खरीदते वक्त क्या सावधानियां रखी जाएं. लोगों का दर्द- अब हम कहां जाएं? असल कहानी सिर्फ अवैध कॉलोनियों की नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की है, जहां कई स्तरों पर चूक दिखाई देती है. जयपुर के आसपास तेजी से बस रही कॉलोनियां किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि भू-माफिया, प्रॉपर्टी डीलर्स और प्रशासनिक ढील का नतीजा है. नियमों के मुताबिक, जमीन का उपयोग बदलने के लिए 90-A के तहत भू-रूपांतरण जरूरी होता है. ऐसे में भू-माफिया बिना किसी दस्तावेज के प्लॉटिंग कर देते हैं तो प्रशासन पर भी सवाल खड़े होते हैं.     प्रेम और पार्वती जैसे कई लोगों की परेशानी यह है, "वो अपनी आंखों के सामने आशियान उजड़ता देख रही है. उन्होंने कहा कि कई पीढ़ियों से हम रह रहे हैं और जेडीए नोटिस चस्पा कर घरों को तोड़ने की तैयारी कर रहा है. अब हम कहां जाएं?"   प्रशासन की सलाह भी जान लीजिए वहीं, इस पूरे मामले की जानकारी हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर अरविंद पोसवाल ने भी दी. उन्होंने कहा कि वहीं रजिस्ट्री को वैध मान लेता है, इसके लिए पहले जो लैंड कन्वर्जन हो रखा है या नहीं, ये संबंधित विभाग में जाकर चेक करे. जेडीए या हाउसिंग बोर्ड से उस भूमि की जानकारी लेने के बाद जमीन का सौदा करे. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? जमीन से संबंधित मामलों के जानकार और अधिकक्ता कुलदीप शर्मा ने बताया कि कोई भी प्रॉपर्टी या घर लेने से पहले जेडीए या RERA की वेबसाइट पर चेक करें. वेबसाइट पर जानकारी चेक करने के साथ ही उसके वैध डॉक्यूमेंट संबंधित ऑथोरिटी के मास्टरप्लान से वैरिफाई करवाएं.