samacharsecretary.com

भूमि सुधार विभाग का बड़ा फैसला, ई-मापी होगी अब ऑनलाइन

पटना बिहार सरकार के राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने जमीन की मापी को लेकर नई व्यवस्था शुरू कर दी है. इस बदलाव का मकसद पूरी प्रक्रिया को साफ-सुथरा, तय समय में पूरा होने वाला और टेक्नोलॉजी के जरिए आसान बनाना है. विभाग ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी. क्या बदल जायेगा नई व्यवस्था के तहत जिन जमीनों पर कोई विवाद नहीं है, उनकी मापी अब सिर्फ 7 दिनों के अंदर पूरी कर दी जाएगी. इससे लोगों को पहले की तरह लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और काम तेजी से होगा. जिन जमीनों को लेकर विवाद चल रहा है, उनकी मापी के लिए भी सरकार ने समय तय कर दिया है. ऐसे मामलों में मापी का काम 11 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि पुराने और लंबित केस जल्दी निपट सकें. मापी के बाद रिपोर्ट ऑनलाइन डालना जरूरी जमीन की मापी पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट को 14 दिनों के अंदर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी कर दिया गया है. इससे रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा और जरूरत पड़ने पर लोग इसे आसानी से देख सकेंगे. अब ई-मापी के लिए आवेदन भी ऑनलाइन किया जा सकता है. इसके लिए लोगों को बिहार भूमि पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होगा. इससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरी प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी. सरकार के इस कदम से कम होंगे विवाद सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से जमीन से जुड़े कामों में पारदर्शिता बढ़ेगी. विवाद कम होंगे और लोगों को समय पर सेवाएं मिलेंगी. इसे डिजिटल बिहार और बेहतर प्रशासन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने भूमि सर्वे पर ‘लास्ट चांस’ का प्लान किया लॉक

पटना. बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और उलझनों को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ शब्दों में एलान किया है कि राज्य में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण किसी भी हाल में वर्ष 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा. इस लक्ष्य में अब कोई ढिलाई, बहाना या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. 2011 में रखी गई नींव, अब दिखेगा जमीन पर असर विजय कुमार सिन्हा ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण की नींव रखी थी. उद्देश्य स्पष्ट था—भूमि अभिलेखों को दुरुस्त करना, मालिकाना हक को साफ करना और दशकों से चले आ रहे जमीन विवादों का समाधान निकालना. अब सरकार चाहती है कि यह लंबित काम तय समय सीमा में अपने अंजाम तक पहुंचे. उपमुख्यमंत्री ने आम नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी. यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी, त्रुटि या मनमानी सामने आती है तो लोग विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं. ऐसी शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लिया जाएगा और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. उनका कहना साफ था—सर्वे सुधार का माध्यम बने, विवाद का नहीं. पहले चरण में लगभग पूरा, दूसरे चरण में रिकॉर्ड स्वघोषणाएं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों में किस्तवार का काम 99.92 प्रतिशत और खानापुरी 94.4 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है. करीब 31 प्रतिशत गांवों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं. वहीं दूसरे चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों में हवाई सर्वेक्षण और ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं. जमीन से जुड़ी अनिश्चितता खत्म करने की कोशिश भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के अनुसार शुरुआती दौर में तकनीकी मार्गदर्शिका में देरी से काम प्रभावित हुआ, लेकिन अब प्रक्रिया रफ्तार पकड़ चुकी है. सरकार का दावा है कि सर्वे पूरा होते ही जमीन से जुड़े मुकदमे, धोखाधड़ी और भ्रम की बड़ी समस्या का समाधान संभव हो सकेगा.