UP 112, मिशन शक्ति और गैंगस्टर एक्शन से बदली पुलिसिंग, सुरक्षा और विकास को मिला बल
लखनऊ यूपी जैसे बड़े स्टेट में लॉ एंड ऑर्डर का इम्पैक्ट हर घर, मार्केट, सड़क और रोज के कामकाज पर पड़ता है। अगर क्राइम बढ़ता है, तो लोगों का भरोसा कमजोर होता है। बिजनेसमैन देर तक दुकान खोलने में डर महसूस करता है। महिलाएं बाहर निकलने में अनसेफ महसूस करती हैं। किसान और छोटे कारोबारी भी अपनी रोज की मूवमेंट में डर महसूस करते हैं। इसलिए क्राइम पर कंट्रोल केवल पुलिस का मुद्दा नहीं, बल्कि सोसायटी और विकास दोनों से जुड़ा मुद्दा है। साल 2012 से 2017 के बीच UP में क्राइम और सिक्योरिटी को लेकर कई चिंताएं सामने आईं। हत्या, लूट, डकैती, दंगा, महिला सुरक्षा और ऑर्गनाइज्ड क्राइम जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे। UP पुलिस के Crime in UP 2016 डॉक्यूमेंट में भी 2012 से 2016 के बीच रिकॉर्ड हुए क्राइम में बढ़ोतरी दिखाई गई थी। इस दौर ने यह साफ कर दिया कि इतने बड़े प्रदेश को ऐसा पुलिस सिस्टम चाहिए, जो तेज भी हो और लोगों के करीब भी हो। बाद के सालों में इसी जरूरत को ध्यान में रखकर पुलिसिंग को ज्यादा टेक्नोलॉजी बेस्ड, आसान और रिस्पॉन्सिबल बनाने पर काम हुआ। UP 112 से तेज हेल्प, मिशन शक्ति से महिला सुरक्षा, ऑर्गनाइज्ड क्राइम पर सख्त एक्शन और टेक्नोलॉजी से मॉनिटरिंग जैसे स्टेप्स ने पुलिस सिस्टम को नई दिशा दी। अब गोल केवल इंसिडेंट के बाद एक्शन लेना नहीं रहा। गोल यह भी बना कि हेल्प समय पर पहुंचे, कंप्लेंट आसानी से हो और आम लोगों को भरोसेमंद माहौल मिले। क्राइम की चिंता, आम जीवन पर चोट जब क्राइम बढ़ता है, तो इम्पैक्ट केवल एक परिवार तक नहीं रहता। पूरा एरिया उसका असर महसूस करता है। मार्केट जल्दी बंद होने लगते हैं। रात में मूवमेंट कम हो जाती है। स्कूल, कॉलेज और काम पर जाने वाली महिलाओं और युवाओं के मन में डर बढ़ता है। कई बार डर इतना बढ़ता है कि लोग कंप्लेंट दर्ज कराने से भी बचते हैं। उन्हें लगता है कि कहीं परेशानी और न बढ़ जाए। इसलिए लॉ एंड ऑर्डर की असली ताकत केवल क्राइम के नंबर कम करने में नहीं है। असली ताकत लोगों के मन में भरोसा पैदा करने में है। जब परिवार सेफ महसूस करता है, तो बच्चे पढ़ाई के लिए बाहर निकलते हैं। जब बिजनेसमैन सेफ महसूस करता है, तो मार्केट देर तक चलता है। जब किसान सेफ महसूस करता है, तो वह अपनी फसल मंडी तक भरोसे के साथ ले जाता है। नई पुलिसिंग, जनता से मजबूत कनेक्टिंग उत्तर प्रदेश में बाद के सालों में पुलिसिंग को ज्यादा तेज, टेक्नोलॉजी बेस्ड और जनता के करीब बनाने पर जोर दिया गया। क्राइम पर सख्ती, माफिया पर एक्शन, गैंगस्टर एक्ट के तहत प्रॉपर्टी जब्ती, UP 112 और महिला सुरक्षा जैसे स्टेप्स इसी बदलाव का हिस्सा बने। इस बदलाव का गोल केवल क्रिमिनल्स पर एक्शन लेना नहीं था। गोल यह भी था कि कंप्लेंट जल्दी सुनी जाए, हेल्प समय पर पहुंचे और आम लोगों को लगे कि पुलिस उनके साथ खड़ी है। जब पुलिस सिस्टम लोगों तक आसानी से पहुंचता है, तो भरोसा बढ़ता है। जब भरोसा बढ़ता है, तो लोग कंप्लेंट करने से डरते नहीं। यही बदली पुलिसिंग का बड़ा इम्पैक्ट है। UP 112 से तेज हेल्प, संकट में मिला साथ किसी भी मुश्किल समय में सबसे जरूरी चीज होती है जल्दी हेल्प। सड़क हादसा हो, झगड़ा हो, महिला सुरक्षा से जुड़ी कंप्लेंट हो या कोई और इमरजेंसी हो, तेज पुलिस हेल्प लोगों को बड़ा सपोर्ट देती है। UP 112 इसी जरूरत को पूरा करने वाला सिस्टम है। इसका गोल पुलिस असिस्टेंस को जल्दी से लोगों तक पहुंचाना है। इससे हेल्प केवल बड़े शहरों तक लिमिटेड नहीं रही। गांवों, कस्बों और दूर के इलाकों तक भी इमरजेंसी पुलिस सर्विस पहुंचाने की कोशिश हुई। UP 112 के ऑफिशियल इंट्रोडक्शन डॉक्यूमेंट के अनुसार, इस सिस्टम ने लॉन्च के बाद 4.3 करोड़ से अधिक इंसिडेंट्स पर रिस्पॉन्स दिया। रोज औसतन 90,000 कॉल का जवाब दिया जाता है और करीब 19,500 इंसिडेंट्स पर एक्शन होता है। कॉल पर जवाब, हेल्प का साथ, UP 112 ने आसान की सुरक्षा की राह। यह बताता है कि पुलिस हेल्प अब केवल थाने पर निर्भर नहीं है। कंट्रोल रूम, व्हीकल नेटवर्क और टेक्नोलॉजी की मदद से पुलिसिंग अब प्रदेश स्तर पर जुड़कर काम कर रही है ऑर्गनाइज्ड क्राइम पर वार, भरोसे को आधार ऑर्गनाइज्ड क्राइम किसी भी स्टेट के लिए बड़ी चुनौती होता है। यह केवल एक क्रिमिनल या एक इंसिडेंट तक लिमिटेड नहीं रहता। इसमें जमीन कब्जा, रंगदारी, धमकी, अवैध कमाई और लोकल प्रेशर जैसे कई रूप शामिल होते हैं। ऐसे क्राइम से आम लोगों में डर बढ़ता है। बिजनेसमैन अपने काम को लेकर अनसेफ महसूस करता है। जमीन, बिजनेस और रोजमर्रा के फैसलों पर भी इसका इम्पैक्ट पड़ता है उत्तर प्रदेश में ऐसे क्राइम पर एक्शन के लिए गैंगस्टर एक्ट और प्रॉपर्टी जब्ती जैसे स्टेप्स अपनाए गए। India Code पर उपलब्ध कानून की धारा 14 में ऐसी प्रॉपर्टी जब्त करने का प्रावधान है, जो क्राइम से जुड़ी एक्टिविटीज से कमाई गई मानी जाए। इस तरह के एक्शन का मैसेज साफ है। क्राइम से कमाई गई प्रॉपर्टी सुरक्षित नहीं रहती। इससे क्रिमिनल्स पर फाइनेंशियल प्रेशर बनता है और लोकल लेवल पर डर का माहौल कम करने में मदद मिलती है। क्राइम पर वार, भरोसे को आधार, जनता को मिला सुरक्षित संसार। वीमेन सेफ्टी को सपोर्ट, सोसायटी का भरोसा मजबूत लॉ एंड ऑर्डर की मजबूती तब सबसे ज्यादा दिखती है, जब महिलाएं सेफ महसूस करें। बेटी स्कूल जाए, छात्रा कॉलेज जाए, महिला काम पर जाए या परिवार के साथ मार्केट जाए, हर जगह सुरक्षा का भरोसा जरूरी है। उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन 18 अगस्त 2020 को स्थापित किया गया। यह संगठन महिलाओं और बच्चों से जुड़े क्राइम की रोकथाम और सेफ माहौल बनाने के लिए काम करता है। इसके तहत महिला पावर लाइन 1090, महिला सम्मान प्रकोष्ठ, मिशन शक्ति, सेफ सिटी प्रोजेक्ट और ITSSO जैसे कई प्रोग्राम शामिल हैं। मिशन शक्ति ने महिला सुरक्षा को केवल हेल्पलाइन तक लिमिटेड नहीं रखा। इसके जरिए गांवों, वार्डों, स्कूलों, कॉलेजों और पब्लिक प्लेसेज तक अवेयरनेस पहुंचाई गई। मिशन शक्ति 5.0 से जुड़े डिटेल्स के अनुसार, महिला बीट सिस्टम, गांव-गांव कनेक्ट और कंप्लेंट्स के जल्दी … Read more