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MP सरकार फिर लेगी 5800 करोड़ का कर्ज

भोपाल. वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लिया जाएगा। होली के पहले सरकार ने 6,300 करोड़़ रुपये का कर्ज लिया था। इस प्रकार देखा जाए तो प्रदेश के ऊपर 5,66,000 करोड़ रुपए के करीब कर्ज हो जाएगा। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 मार्च यानी मंगलवार को तीन किस्तों में 1,900, 1,700 और 2,200 करोड़ रुपए का कर्ज लिया जाएगा। यह राशि विकास परियोजना और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ली जा रही है। इसका उपयोग पूंजीगत कार्यों यानी अधोसंरचना विकास के कामों में ही किया जाएगा। इसके पहले 6300 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। नए कर्ज को मिला लिया जाए तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल मिलाकर कर्ज की राशि 85,000 करोड़ रुपये हो जाएगी। जीतू पटवारी ने लगाया प्रदेश को कर्ज में डुबोने का आरोप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर प्रदेश को कर्ज में डुबोने के आरोप लगाए हैं। वहीं, सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि जो कर्ज लिया जा रहा है वह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रविधान के अनुसार है।

लोन क्लियर? RC से बैंक का नाम हटाने का पूरा तरीका, आसान स्टेप्स में समझें

भोपाल अब तक वाहन का लोन पूरा चुकाने के बाद वाहन मालिक को संबंधित बैंक से फॉर्म-35  के तहत एनओसी (No Objection Certificate) लेनी होती थी. इसके बाद परिवहन विभाग की वेबसाइट पर आवेदन कर 75 रुपए शुल्क जमा करना पड़ता था और आरसी को कार्यालय में जमा करमा होता था. बैंक से जारी NOC  की जांच में काफी समय लगता था. वहीं आवेदनों की संख्या अधिक होने के कारण हर मामले की सही तरीके से जांच भी नहीं हो पाती थी. इससे फर्जी NOC के आधार पर हायपोथीकेशन हटाए जाने की संभावना बनी रहती थी, जिससे बैंक और वाहन मालिक दोनों को नुकसान हो सकता था. मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने वाहन लोन (हाइपोथेक्शन) पूरा कर चुके लाखों वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है।अब लोन चुकाने के बाद गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) से बैंक का नाम हटवाने के लिए न तो बैंक के चक्कर लगाने होंगे और न ही आरटीओ कार्यालय जाना पड़ेगा। विभाग ने यह पूरी प्रक्रिया फेसलेस, डिजिटल और पूरी तरह निःशुल्क कर दी है। पहले क्या था झंझट? अब तक वाहन लोन समाप्त होने के बाद बैंक से फॉर्म-35 और एनओसी लेना जरूरी होता था। इसके बाद परिवहन विभाग की वेबसाइट पर ₹75 की फीस जमा कर आरटीओ में फाइल लगानी पड़ती थी। बैंक की एनओसी के सत्यापन में कई बार हफ्तों या महीनों लग जाते थे, साथ ही फर्जी एनओसी का खतरा भी बना रहता था। नई स्मार्ट व्यवस्था कैसे करेगी काम? परिवहन विभाग की नई व्यवस्था में प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। शून्य शुल्क – अब इस सेवा के लिए कोई सरकारी फीस नहीं लगेगी। ऑटो वेरिफिकेशन – parivahan.gov.in पर आवेदन करते ही पोर्टल सीधे बैंक के सेंट्रल सर्वर से लोन की जानकारी का मिलान करेगा। किसी भी फिजिकल दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। 7 दिन की समय-सीमा आवेदन के बाद आरटीओ अधिकारी को अधिकतम 7 दिन में निर्णय लेना होगा। यदि इस अवधि में कोई आपत्ति नहीं आती और वाहन पर कोई न्यायालयीन मामला नहीं है, तो सिस्टम आवेदन को ऑटो अप्रूव कर देगा। डिजिटल आरसी प्रक्रिया पूरी होते ही वाहन मालिक घर बैठे अपडेटेड डिजिटल आरसी डाउनलोड कर सकेंगे। कुछ मामलों में लग सकता है समय परिवहन विभाग के अनुसार, केवल 1–2 प्रतिशत मामलों में देरी हो सकती है। यह समस्या उन बैंकों के ग्राहकों को आ सकती है, जिनका सर्वर अभी परिवहन पोर्टल से लिंक नहीं है। ऐसे मामलों में प्रक्रिया फिलहाल पुराने मैनुअल तरीके से ही पूरी की जाएगी। प्रमुख बदलाव एक नजर में पहले जहां यह प्रक्रिया समय लेने वाली और झंझट भरी थी, वहीं अब यह पूरी तरह ऑनलाइन, तेज और पारदर्शी हो गई है। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ लोगों का समय बचेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की संभावना भी कम होगी।