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स्ट्रीट वेंडर्स के लिए बड़ी राहत, मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम तेज, 30 जून तक विशेष अभियान

भोपाल  सड़कों और फुटपाथों पर दुकान चलाकर अपनी आजीविका चलाने वाले छोटे कारोबारियों (पथ विक्रेताओं) को डिजीटल, वित्तीय और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 'प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि' (पीएम स्वनिधि) योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरे प्रदेश में 1 जून से 30 जून तक एक विशेष महा-अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जहां एक ओर जिला मुख्यालयों पर उत्सव का माहौल रहेगा, वहीं दूसरी ओर नगरीय निकायों में 'सेवाएं आपके द्वार' की तर्ज पर काम होगा। बताई जाएंगी प्रेरक कहानियां ना के सफल लाभार्थियों और उनके परिवारों की प्रेरक सफलता की कहानियों को साझा किया जाएगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले पथ विक्रेताओं को सम्मानित कर अन्य हितग्राहियों को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य योजना के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक पात्र लोगों को लाभ पहुंचाना है। प्रदेश में राज्य शासन, नगरीय निकायों और ऋणदाता संस्थाओं के सहयोग से अब तक 10 लाख से अधिक पथ विक्रेताओं को योजना का लाभ मिल चुका है। लोक कल्याण मेलों में मिलेगी वित्तीय और डिजिटल सहायता नगरीय निकाय स्तर पर आयोजित लोक कल्याण मेलों के माध्यम से पथ विक्रेताओं को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें- – बिना गारंटी के 15 हजार रुपये तक का ऋण – न्यूनतम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता – क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी – डिजिटल लेन-देन के लिए मार्गदर्शन – बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच जैसी सुविधाएं शामिल हैं। बैंकर्स-वेंडर्स बैठकें और शिकायतों का समाधान अभियान के दौरान बैंकर्स और पथ विक्रेताओं की विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे बैंकिंग सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो सके। वहीं नगरीय निकाय सहायता केंद्रों के माध्यम से वेंडर्स की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित निराकरण भी किया जाएगा। दूरस्थ क्षेत्रों में लगेंगे स्वनिधि कैंप सेंसस टाउन स्तर पर “स्वनिधि कैंप” आयोजित कर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पथ विक्रेताओं को योजना से जोड़ा जाएगा। विशेष शिविरों में नए और छूटे हुए पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उनका पंजीयन कराया जाएगा तथा ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र वेंडर योजना के लाभ से वंचित न रहे।  

8वीं पास को मिलेगा बिना ब्‍याज 10 लाख तक का लोन, सरकार की योजना से कैसे उठाएं लाभ

भोपाल  केंद्र सरकार और राज्‍य सरकारों की तरफ से युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जाती हैं. इसी में से एक राज्‍य सरकार की ओर से भी एक योजना चलाई जा रही है, जिसका नाम मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना 2026 है. इस योजना को राजस्‍थान सरकार की ओर से शुरू किया गया है।  मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत राज्‍य के 30,000 युवाओं लोन देने का लक्ष्‍य रखा गया है. यह योजना राज्य के उद्योग और वाणिज्य विभाग द्वारा लागू की जा रही है. इस योजना के तहत युवा अपने खुद का बिजनेस शुरू करने का सपना साकार कर सकते हैं।  क्‍या है ये स्‍कीम?  इस स्‍कीम की खास बात है कि इसके तहत बिना ब्‍याज के कर्ज दिया जाता है. इस योजना को जनवरी 2026 में शुरू किया गया, जो 3 मार्च 2029 तक लागू रहेगा. इस योजना के तहत सरकार का मकसद है कि रोजगार की दर का बढ़ाया जाए और कुल सालों में 1 लाख युवाओं को रोजगार दिया जाए।  कितनी मिलेगी मदद?  इस योजना के तहत ज्‍यादा से ज्‍यादा 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है. इसपर कोई भी ब्‍याज देना नहीं होता है, क्‍योंकि सरकार 100 फीसदी ब्‍याज सब्सिडी देती है. यह लोन अमाउंट बीमा कवर भी होता है और बैंक की ओर से गारंटी भी दी जाती है।    कौन ले सकता है ये लोन?  अधिकार‍िक गाइडलाइन के अनुसार, राजस्‍थान का कोई भी स्‍थायी निवासी इस लोन को उठा सकता है. इसके लिए उम्र 18 से 45 वर्ष होनी चाहिए. कम से कम एजुकेशन 8वीं पास तो होनी ही चाहिए. साथ ही बैंक द्वारा आप डिफॉल्‍टर घोषित नहीं होने चाहिए. व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों आवेदन कर सकते हैं।  किन कामों के लिए मिलेगा ये लोन?  अगर आप खुद का बिजनेस मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में शुरू कर रहे हैं, सर्विस सेक्‍टर में या फिर अन्‍य ट्रेड सेक्‍टर में कर रहे हैं तो ही आपको लोन द‍िया जाएगा. इसका मतलब है कि आप दुकान, स्‍टार्टअप, सर्विस बिजनेस, छोटा उद्योग आदि के तहत अप्‍लाई करके लोन ले सकते हैं।  किसे कितना मिलेगा लोन अमाउंट? अगर आप 8वीं-12वीं पास हैं तो आपको ₹3.5 लाख – ₹7.5 लाख रुपये दिया जाएगा. लेकिन अगर आप ग्रेजुएट, डिप्लोमा की डिग्री ले चुके हैं तो आपको ₹5 लाख -₹10 लाख  रुपये का अमाउंट मिल सकता है।  कैसे करें अप्‍लाई?  इस योजना के तहत अप्‍लाई करने के लिए आपको पहले राजस्थान SSO पोर्टल पर लॉगिन करना होगा. फिर मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का ऑप्‍शन सेलेक्‍ट करना होगा. अब फॉर्म भरें और दस्‍तावेजों को अपलोड कर दें, फिर सबमिट बटन क्लिक करें।   किन दस्‍तावेजों की जरूरत?  आवेदन करने के लिए आपके पास कुछ डॉक्‍यूमेंट होने आवश्‍यक हैं. आपके पास आधार कार्ड, जन आधार, बैंक पासबुक, निवास प्रमाण पत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और एजुकेशन सर्टिफिकेट होनर जरूरी है. 

MP सरकार फिर लेगी 5800 करोड़ का कर्ज

भोपाल. वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लिया जाएगा। होली के पहले सरकार ने 6,300 करोड़़ रुपये का कर्ज लिया था। इस प्रकार देखा जाए तो प्रदेश के ऊपर 5,66,000 करोड़ रुपए के करीब कर्ज हो जाएगा। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 मार्च यानी मंगलवार को तीन किस्तों में 1,900, 1,700 और 2,200 करोड़ रुपए का कर्ज लिया जाएगा। यह राशि विकास परियोजना और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ली जा रही है। इसका उपयोग पूंजीगत कार्यों यानी अधोसंरचना विकास के कामों में ही किया जाएगा। इसके पहले 6300 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। नए कर्ज को मिला लिया जाए तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल मिलाकर कर्ज की राशि 85,000 करोड़ रुपये हो जाएगी। जीतू पटवारी ने लगाया प्रदेश को कर्ज में डुबोने का आरोप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर प्रदेश को कर्ज में डुबोने के आरोप लगाए हैं। वहीं, सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि जो कर्ज लिया जा रहा है वह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रविधान के अनुसार है।

लोन क्लियर? RC से बैंक का नाम हटाने का पूरा तरीका, आसान स्टेप्स में समझें

भोपाल अब तक वाहन का लोन पूरा चुकाने के बाद वाहन मालिक को संबंधित बैंक से फॉर्म-35  के तहत एनओसी (No Objection Certificate) लेनी होती थी. इसके बाद परिवहन विभाग की वेबसाइट पर आवेदन कर 75 रुपए शुल्क जमा करना पड़ता था और आरसी को कार्यालय में जमा करमा होता था. बैंक से जारी NOC  की जांच में काफी समय लगता था. वहीं आवेदनों की संख्या अधिक होने के कारण हर मामले की सही तरीके से जांच भी नहीं हो पाती थी. इससे फर्जी NOC के आधार पर हायपोथीकेशन हटाए जाने की संभावना बनी रहती थी, जिससे बैंक और वाहन मालिक दोनों को नुकसान हो सकता था. मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने वाहन लोन (हाइपोथेक्शन) पूरा कर चुके लाखों वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है।अब लोन चुकाने के बाद गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) से बैंक का नाम हटवाने के लिए न तो बैंक के चक्कर लगाने होंगे और न ही आरटीओ कार्यालय जाना पड़ेगा। विभाग ने यह पूरी प्रक्रिया फेसलेस, डिजिटल और पूरी तरह निःशुल्क कर दी है। पहले क्या था झंझट? अब तक वाहन लोन समाप्त होने के बाद बैंक से फॉर्म-35 और एनओसी लेना जरूरी होता था। इसके बाद परिवहन विभाग की वेबसाइट पर ₹75 की फीस जमा कर आरटीओ में फाइल लगानी पड़ती थी। बैंक की एनओसी के सत्यापन में कई बार हफ्तों या महीनों लग जाते थे, साथ ही फर्जी एनओसी का खतरा भी बना रहता था। नई स्मार्ट व्यवस्था कैसे करेगी काम? परिवहन विभाग की नई व्यवस्था में प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। शून्य शुल्क – अब इस सेवा के लिए कोई सरकारी फीस नहीं लगेगी। ऑटो वेरिफिकेशन – parivahan.gov.in पर आवेदन करते ही पोर्टल सीधे बैंक के सेंट्रल सर्वर से लोन की जानकारी का मिलान करेगा। किसी भी फिजिकल दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। 7 दिन की समय-सीमा आवेदन के बाद आरटीओ अधिकारी को अधिकतम 7 दिन में निर्णय लेना होगा। यदि इस अवधि में कोई आपत्ति नहीं आती और वाहन पर कोई न्यायालयीन मामला नहीं है, तो सिस्टम आवेदन को ऑटो अप्रूव कर देगा। डिजिटल आरसी प्रक्रिया पूरी होते ही वाहन मालिक घर बैठे अपडेटेड डिजिटल आरसी डाउनलोड कर सकेंगे। कुछ मामलों में लग सकता है समय परिवहन विभाग के अनुसार, केवल 1–2 प्रतिशत मामलों में देरी हो सकती है। यह समस्या उन बैंकों के ग्राहकों को आ सकती है, जिनका सर्वर अभी परिवहन पोर्टल से लिंक नहीं है। ऐसे मामलों में प्रक्रिया फिलहाल पुराने मैनुअल तरीके से ही पूरी की जाएगी। प्रमुख बदलाव एक नजर में पहले जहां यह प्रक्रिया समय लेने वाली और झंझट भरी थी, वहीं अब यह पूरी तरह ऑनलाइन, तेज और पारदर्शी हो गई है। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ लोगों का समय बचेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की संभावना भी कम होगी।