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71 हजार करोड़ का घाटा: मध्य प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों की देश में क्या रैंकिंग?

भोपाल  मध्य प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य की तीनों बिजली वितरण कंपनियों पर मार्च 2025 तक 49 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज हैं। वहीं, तीनों को कुल 71,395 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। इस भारी नुकसान के साथ मध्य प्रदेश देश में बिजली वितरण के मामले में चौथे सबसे अधिक घाटे वाले राज्यों में शामिल हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था पर और अधिक वित्तीय दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। यह जानकारी बिजली राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।   एक कंपनी पर सबसे ज्यादा बोझ राज्य की सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमपीएमकेवीवीसीएल) पर अकेले 30,900 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज है। यह नुकसान कई छोटे राज्यों के कुल घाटे से भी अधिक बताया जा रहा है। वहीं, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर लगभग 27,992 करोड़ रुपये का घाटा है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को करीब 12,503 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। तीनों कंपनियों का संयुक्त घाटा प्रदेश की बिजली व्यवस्था की कमजोर आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। देश में कहां है मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर डिस्कॉम ने वर्ष 2025 में 2,701 करोड़ रुपए का कर पश्चात मुनाफा दर्ज किया है, लेकिन एमपी समेत कई राज्यों के लिए पुराने कर्ज और घाटे की भरपाई करना चुनौती बना हुआ है। बिजली वितरण कंपनियों के कुल घाटे के मामले में पहले स्थान पर तमिलनाडु है। वहीं, दूसरे नंबर पर उत्तरप्रदेश, तीसरे नंबर पर राजस्थान और चौथे नंबर पर मध्य प्रदेश है।    घाटे के पीछे ये कारण विशेषज्ञों के अनुसार बिजली कंपनियों के घाटे के मुख्य कारणों में तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान, बिजली दरों में समय पर संशोधन न होना, सरकारी विभागों का बकाया भुगतान और सब्सिडी की देर से भरपाई शामिल हैं। 

मध्य प्रदेश में विधायकों को मिलेगा वेतन और भत्तों में इज़ाफा, विधानसभा की कार्यवाही डिजिटल होगी

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार अब प्रशासनिक कामकाज के बाद विधायी कामकाज को भी पूरी तरह हाई-टेक बनाने जा रही है।  विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश विधानसभा को 'डिजिटल' करने और विधायकों की सुख-सुविधाओं को लेकर बड़े फैसले लिए गए हैं। बजट सत्र से लागू होगा 'ई-विधान' सरकार ने निर्णय लिया है कि आगामी बजट सत्र से विधानसभा में 'ई-विधान' प्रणाली लागू कर दी जाएगी। जिस तरह कैबिनेट बैठकों में अब कागज की जगह टैबलेट का उपयोग हो रहा है, उसी तरह अब विधानसभा की कार्यवाही भी पेपरलेस होगी। हालांकि, इसे पिछले सत्रों में ही लागू किया जाना था, लेकिन तकनीकी तैयारियों के चलते अब इसे फरवरी में होने वाले बजट सत्र से अनिवार्य रूप से शुरू करने की योजना है। विधायकों के वेतन-भत्ते और आवास पर चर्चा बैठक में विधायकों के वेतन और भत्तों में वृद्धि को लेकर भी गंभीर मंथन हुआ। वेतन वृद्धि के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। लंबे समय से विधायक अपना भत्ता बढ़ाने का दबाव बना रहे थे, जिस पर अब सरकार बजट सत्र के दौरान अंतिम मुहर लगा सकती है। इसके साथ ही, विधायक विश्राम गृह (रेस्ट हाउस) परिसर में विधायकों के लिए बन रहे नए लग्जरी आवासों के निर्माण और वहां आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने पर भी सहमति बनी है। बैठक में मुख्यमंत्री के साथ संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल भी मौजूद रहे। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लंबे समय ई-विधानसभा की मांग चल रही है। इसके लिए विधायकों को टैब भी दिए जाने की योजना है।

मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट: 11-12 जनवरी को आयोजित होगा, स्टार्ट-अप्स को मिलेगा समर्थन

मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को समिट से सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘विकसित एम.पी. @2047’विज़न को सकारात्मक गति देने और अधिक सुदृढ़ करने के साथ ही स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को अगले स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से 11 एवं 12 जनवरी 2026 को रवींद्र भवन, भोपाल में मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 2026 का आयोजन होने जा रहा है। सोमवार 12 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसमें सहभागिता करेंगे। समिट में राज्य एवं देश भर से स्टार्ट-अप्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, उद्योग प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थान एवं अन्य हितधारक सहभागिता करेंगे। यह समिट स्टार्ट-अप्स को निवेश, नेटवर्किंग, नीति संवाद एवं नवाचार प्रदर्शन का एक सशक्त मंच प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति–2025 का फ़रवरी 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में विमोचन के साथ राज्य में नवाचार एवं उद्यमिता को एक नई दिशा प्राप्त हुई। नीति के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप प्रदेश के स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान एवं तीव्र गति प्राप्त हुई है। नवीन नीति से स्टार्ट-अप्स के प्रत्येक चरण के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, निवेश, पेटेंट सहयोग एवं बाजार से जुड़ाव जैसे अनेक सशक्त प्रावधान सुनिश्चित किए गए, जिससे प्रदेश में नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को गति मिली है। आयुक्त एमएसएमई दिलीप कुमार ने स्टार्ट-अप्स, नव प्रवर्तकों, उद्यमियों, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स एवं स्टार्ट-अप इको-सिस्टम से जुड़े हितधारकों का आह्वान किया है कि वे इस स्टार्ट-अप समिट में सक्रिय रूप से सहभागिता करें। आयुक्त एमएसएमई ने कहा कि स्टार्ट-अप्स नवाचार-आधारित विकास एवं रोजगार सृजन की आधारशिला है। यह समिट स्टार्ट-अप्स के लिए अपने विचारों, उत्पादों एवं समाधानों को प्रदर्शित करने, निवेशकों एवं नीति-निर्माताओं से संवाद स्थापित करने तथा मध्यप्रदेश के सशक्त स्टार्ट-अप इको-सिस्टम का हिस्सा बनने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।  

2026 में मध्य प्रदेश को मिलेगा बड़ा तोहफा, युवाओं और किसानों के लिए विशेष योजनाएं, परिवहन का विस्तार

भोपाल  नव वर्ष का उत्साह हर तरफ चरम पर है। इस बार साल 2026 विशेष महत्व रखने वाला है। किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए सरकार नई पहल शुरू करेगी। किसान कल्याण को देखते हुए ये वर्ष कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत किसान कल्याण के कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। खेत और गांव को आगे बढ़ने के नए मौके सृजित किए जाएंगे।  वहीं, युवाओं की बात करें तो 40 हजार पदों पर पुलिस की नई भर्तियां होने की संभावना है। इससे प्रदेश की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली मजबूत होगी। तो चलिए यहां आपको क्रमश: बता रहे हैं क्या-क्या नई सौगातें मिलेंगी।  कृषि वर्ष 2026 को ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ टैगलाइन के साथ मनाया जाएगा कृषि वर्ष को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में एक बैठक में महत्वपूर्ण घोषणा की है। इस बैठक में सीएम ने कहा था कि वर्ष 2026 को मध्य प्रदेश में कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। किसानों को लाभ पहुंचाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता होगी। कृषि से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। प्रदेश में कृषि में नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। धान की खेती को प्राथमिकता देते हुए, गेहूं, चना, दलहन, तिलहन और हॉर्टीकल्चर के क्षेत्रों में नवाचारों से किसानों को अवगत कराने के लिए उन्हें विभिन्न देशों का भ्रमण भी कराया जाएगा। कृषि वर्ष 2026 को ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ टैगलाइन के साथ मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों की आय को दोगुने से अधिक बढ़ाना और कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक-आधारित रोजगार मॉडल में बदलना है। आत्मनिर्भर किसान, उन्नत खेती, बाजार से बेहतर जुड़ाव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य और वानिकी जैसे क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला-आधारित क्लस्टर विकास मॉडल लागू किया जाएगा। इसके तहत प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाएं, प्रसंस्करण और निर्यात उन्मुख कृषि के माध्यम से किसानों की शुद्ध आय बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण युवाओं के लिए ड्रोन सेवा, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण और हाइड्रोपोनिक्स जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। मध्य प्रदेश विधानसभा पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी नए साल 2026 की शुरुआत में कई खुशखबरी सामने आ रही हैं। पहली, विधानसभा पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी। बजट सत्र में विधायकों को सभी जरूरी दस्तावेज़, प्रश्न-उत्तर और नोट्स टैबलेट पर उपलब्ध कराए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा भी बजट प्रस्तुति टैबलेट के माध्यम से पेश करेंगे। सदन में हर विधायक की टेबल पर स्थायी टैबलेट लगाए जाएंगे, जिससे पूरी कार्यवाही बिना कागज के संचालित होगी। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश की कैबिनेट भी ई-कैबिनेट होगी और बैठक का एजेंडा टैब पर भेजा जाएगा। नए साल में युवाओं को इन भर्तियां मिलेंगे नए अवसर एमपी में पुलिस में चालीस हजार भर्तियां की जाएंगी। एमपी पुलिस बोर्ड के द्वारा ये भर्तियां आयोजित होंगी। लेकिन इसका अभी तक कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किया गया है। जबकि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सहायक प्रोफेसर भर्ती 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के अंतर्गत आयोग द्वारा विभिन्न विषयों में कुल 949 पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाएंगी। इस भर्ती के लिए इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी, जिसे उम्मीदवार एमपीपीएससी के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से पूरा कर पाएंगे। वहीं, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने पूरे साल का भर्ती परीक्षा कैलेंडर जारी किया है. साल की शुरुआत में ग्रुप-1, ग्रुप-2 और ग्रुप-5 के तहत स्टाफ नर्स की संयुक्त भर्ती परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जारी होने की संभावना है.युवाओं के लिए यह बेहतर मौका हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट esb.mp.gov.in पर विजिट करें। पुलिस के करीब 22 हजार 500 पदों पर भर्ती होनी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस को जल्द से जल्द मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए घोषणा करते हुए कहा कि अब प्रदेश में मप्र पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन किया जाएगा। इससे पुलिस भर्तियों में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के लिए स्वीकृत पदों की भर्ती मप्र पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा की जायेगी। आगामी वर्षों की भर्तियां 'पुलिस भर्ती बोर्ड' द्वारा की जायेंगी। पूर्व में  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा था कि पुलिस, जेल और नगर सेना एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी कोर्सेस में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियों में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिया जाएगा। पुलिस भर्ती पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष हमने 7,500 रिक्त पदों पर भर्ती की अनुमति दी है। पुलिस के करीब 22 हजार 500 पदों पर भर्ती होनी है। इसलिए अब हर साल 7,500-7,500 पदों पर भर्ती कर तीन साल में पुलिस विभाग के सभी रिक्त पद भर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी अब छठवें वेतनमान का पद पात्रतानुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिया जाएगा। गृह विभाग से जुड़ी सभी सेवाओं के आधुनिकीकरण एवं भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बहुत जल्द गृह एवं वित्त विभाग की संयुक्त बैठक कर सभी लंबित मसलों का समुचित समाधान निकाला जाएगा। MP: सरकार के 15 लाख कर्मचारियों की बल्लेबले दूसरी बड़ी खुशखबरी कर्मचारियों के लिए है। मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राज्य सरकार अपने 15 लाख से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को कैशलेस हेल्थ कवरेज प्रदान करेगी। इस योजना में सामान्य बीमारी पर 5 लाख रुपये और गंभीर बीमारी या बड़े ऑपरेशन पर 10 लाख रुपये तक इलाज की सुविधा शामिल होगी। योजना स्थायी, अस्थायी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक वर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता समेत कुल लगभग 15 लाख लोगों के लिए लागू होगी। कर्मचारी अपनी मासिक सैलरी या पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक का अंशदान देंगे, जो सरकार के हिस्से के साथ मिलकर बीमा प्रीमियम में तब्दील होगा। वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों को इलाज का पूरा खर्च अपने जेब से करना पड़ता है … Read more

रायसेन को मिला नया जिला बनाने का प्रस्ताव पारित, स्थानीय लोगों की 20 साल की उम्मीद हुई पूरी

भोपाल  मध्य प्रदेश के रायसेन जिले का बरेली नगर परिषद की साधारण सभा की बैठक में बरेली को जिला बनाने, टीम पहल को भूमि उपलब्ध कराने तथा धूमधाम से नगर गौरव दिवस एवं गणतंत्र दिवस मनाने सहित उन्नीस प्रस्ताव पारित किए गए। 6 जनवरी को मनाया जाएगा गौरव दिवस साधारण सभा की बैठक में प्रतिवर्ष के अनुसार धूमधाम से नगर गौरव दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। बता दें कि, 6 जनवरी 1949 को विलीनीकरण आंदोलन के तहत बड़ा बाजार में भोपाल रियासत को भारत संघ में मिलाने की मांग को लेकर हो रही शांतिपूर्ण सभा में नवाब पुलिस की लाठी चार्ज से बरेली के दो युवा जुगराज सोनी और राम प्रसाद अहिरवार ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इनकी शहादत के सम्मान में पत्रिका की मुहिम पर बरेली नगर परिषद तीन वर्ष पूर्व 6 जनवरी को नगर गौरव दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। विगत दो वर्षों की तरह 6 जनवरी को धूमधाम के साथ नगर गौरव दिवस मनाया जाएगा। स्कूली बच्चो को बताया जाएगा क्षेत्र का इतिहास इस मौके पर शहीद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और जेल गए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का पुण्य स्मरण करते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। वहीँ, दुसरी तरफ स्कूली बच्चों को नगर के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराया जाएगा। नगर परिषद अध्यक्ष हेमंत राजा भैया चौधरी ने कहा कि यह नगर परिषद का सौभाग्य की पत्रिका की मुहिम पर हमें 6 जनवरी को नगर गौरव दिवस मनाने का निर्णय करने अवसर प्राप्त हुआ। परिषद के निर्णय के अनुसार गत वर्ष से भी बढकर पूरे उत्साह के साथ नगर गौरव दिवस मनाया जाएगा। इसी उत्साह के साथ 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। टीम पहल को भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय टीम पहल को के अनुसार नगर परिषद द्वारा भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। नगर के विभिन्न वार्डों में रट्रीट लाईट पोल लगाने, विभिन्न स्थानो पर स्वागत द्वार लगाने, सफाई व्यवस्था के लिए सेवा कार्यों के विस्तार की कार्ययोजना वाहन खरीदने, बस अड्डा शुल्क, वाहन किराया वसूली, पशु पंजीयन शुल्क वसूली वर्ष 2026-27 के संबंध मे विचार विमर्श कर निर्णय लिया गया। साथ ही नगरीय क्षेत्र बरेली में विज्ञापन शुल्क की वसूली ठेके पर देने का निर्णय लिया गया। संवरेगा शहीद स्मारक पार्क नगर परिषद के निर्णय के अनुसार शहीद स्मारक स्थल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क के सौंदयीकरण के लिए भव्य द्वार का निर्माण कराया जाएगा। श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क के पास यात्री प्रतीक्षालय निर्माण पर विचार विमर्श किया गया। इसी के साथ वार्ड क्रमांक 2 में पुलिया और वार्ड क्रमांक 4 में दो सड़क निर्माण का निर्णय भी लिया गया। बरेली को जिला बनाने का प्रस्ताव पारित परिषद सहित बरेली नगर एवं क्षेत्र की लोगों की मंशा और दो दसक से की जा रही मांग के अनुसार नगर परिषद द्वारा सर्व समिति से बरेली को जिला बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया। 

‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल

ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था से सायबर अपराध पर कसेगा शिकंजा ‘सुशासन दिवस’ पर मध्यप्रदेश पुलिस की अभिनव पहल डिजिटल युग में न्याय प्रक्रिया को मिली गति भोपाल पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस ने सुशासन को सशक्त करने की दिशा में नवाचार के रूप में ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रारंभ की है। यह व्यवस्था 01 लाख रुपये से अधिक की सायबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लागू की गई है। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सायबर सुरक्षित भारत’ विज़न के अनुरूप है, जिसका उल्लेख उन्होंने अक्टूबर 2024 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देशभर में सायबर अपराध से निपटने के लिये ऐतिहासिक एवं तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होता है कि तकनीक के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को तेज और आम नागरिकों के लिए अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में लागू यह प्रणाली पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। प्रदेश में बढ़ते सायबर अपराधों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक के दुरुपयोग से जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री का मानना है कि जिस प्रकार स्वच्छता को हमने अपनी संस्कृति बनाया है, उसी प्रकार सायबर स्वच्छता को भी जन-आंदोलन बनाना होगा। प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साई मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस को अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है। सायबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी प्रहार सायबर वित्तीय धोखाधड़ी आज पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कई बार पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही क्षणों में अपराधियों के हाथों में चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए गृह मंत्रालय द्वारा ‘ई-जीरो एफआईआर’ की अवधारणा लागू की गई है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके। कानूनी आधार : BNSS और डिजिटल परिवर्तन जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (बीएनएसएस) नागरिक-केंद्रित हैं। इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ पर फोकस रहना है। बीएनएसएस की धारा 173 के अंतर्गत ‘जीरो एफआईआर’ को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी, किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित अपराध के लिए, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ई-जीरो एफआईआर: एक क्रांतिकारी व्यवस्था ‘ई-जीरो एफआईआर’ सायबर वित्तीय धोखाधड़ी—विशेषकर ₹1 लाख से अधिक की हानि के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को अत्यंत तेज बनाती है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं को समाप्त कर जांच प्रक्रिया को तत्काल प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों का एकीकरण करती है। नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी), I4सी (भारतीय सायबर अपराध समन्वय केंद्र) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस)। ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण की 5-चरणीय प्रक्रिया शिकायत दर्ज करना – पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत करता है। ₹1 लाख से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केंद्रीय सायबर पुलिस हब को भेजा जाता है। ऑटोमैटिक जनरेशन – सीसीटीएनएस सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ‘ई-जीरो एफआईआर’ में परिवर्तित हो जाती है। पीड़ित को तुरंत ‘ई-जीरो एफआईआर’ नंबर उपलब्ध कराया दिया जाता है। समीक्षा एवं हस्तांतरण – राज्य स्तरीय सायबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन को भेजा जाता है। नियमित एफआईआर में परिवर्तन – शिकायतकर्ता को 3 दिन के अंदर नजदीकी सायबर पुलिस स्टेशन में ‘ई-जीरो एफआईआर’ को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराना होता है। सायबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व सायबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ माना जाता है। यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C एवं बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में राशि पहुंचने से पहले ही उसे फ्रीज किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य तत्काल और कानूनी रूप से सुरक्षित किए जाते हैं। ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था के प्रमुख लाभ ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था देश में कहीं से भी कहीं भी हुई सायबर या वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराती है। इससे क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है, केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा मिलती है, शीघ्र एफआईआर से बैंकिंग चैनल सक्रिय, हो जाते हैं, राशि वापसी की संभावना अधिक हो जाती है साथ ही पोर्टल पर सीधे स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड करने की सुविधा मिलने से आवश्यक दस्तावेज हमेशा उपलब्ध बने रहते हैं।  

अभ्युदय मध्यप्रदेश: आईटीआई में रिकॉर्ड प्रवेश और युवाओं का हुआ वैश्विक प्लेसमेंट

अभ्युदय मध्यप्रदेश कौशल और रोजगार से गढ़ी जा रही आत्मनिर्भरता की नई इबारत : मंत्री गौतम टेटवाल आईटीआई में रिकॉर्ड प्रवेश और युवाओं का हुआ वैश्विक प्लेसमेंट भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में पत्रकार वार्ता में विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियां को साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने कौशल और रोजगार के क्षेत्र में ठोस, परिणाममुखी और राष्ट्र स्तर पर प्रशंसित उपलब्धियाँ हासिल की हैं।मंत्री टेटवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ और आगामी तीन वर्षों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के जीवन में वास्तविक परिवर्तन का प्रमाण हैं। सत्र 2025 में प्रदेश के आईटीआई में एक लाख से अधिक प्रशिक्षणार्थी परीक्षाओं में सम्मिलित हुए और विभिन्न ट्रेडों में दस प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है। विगत दो वर्षों में शासकीय संभागीय आईटीआई, भोपाल के तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाना तथा शासकीय एकलव्य महिला आईटीआई, बैतूल की प्रशिक्षणार्थी कु. त्रिशा तावड़े को 4 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नई दिल्ली में सम्मानित किया जाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। विश्व कौशल प्रतियोगिता 2024 में प्रदेश के प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर 1 गोल्ड, 2 सिल्वर, 4 कांस्य और 11 मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किए तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस (लियॉन) में एक मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस अर्जित किया गया, जो प्रशिक्षण की गुणवत्ता का प्रमाण है। वर्ष 2025 में शासकीय आईटीआई के प्रवेश में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई; कुल सीटें बढ़ाकर 52,248 की गईं और 94.55% सीटें भरी गईं, जो वर्ष 2024 के 86.33% की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्शाती है। महिला आरक्षण बढ़ाकर 35% करने तथा समावेशी प्रवेश नीतियों के कारण महिला प्रशिक्षणार्थियों की संख्या बढ़कर 12,191 हुई, जबकि वर्ष 2024 में यह 9,655 थी। समावेशिता और नवप्रवर्तन विभाग की प्राथमिकता है । इस वर्ष 490 दिव्यांग प्रशिक्षणार्थियों और बाल देखरेख संस्थाओं के 16 बच्चों ने आईटीआई में प्रवेश लिया। आठवीं कक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए ट्रेडों की संख्या 5 से बढ़ाकर 10 की गई तथा इन ट्रेडों में 8,041 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। प्रदेश के आईटीआई की गुणवत्ता और आकर्षण का प्रमाण यह है कि इस वर्ष बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और उत्तराखंड सहित आठ राज्यों के विद्यार्थियों ने मध्यप्रदेश के आईटीआई में प्रवेश लिया। आईटीआई ग्रेडिंग में प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई ने 10 में से 9 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए और शासकीय संभागीय आईटीआई, उज्जैन ने नौ दशमलव तीन अंक के साथ प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से उज्जैन, भोपाल और जबलपुर में एआई, आईओटी, ब्लॉकचेन तथा एआर-वीआर पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं तथा टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल द्वारा फाइव-जी टेक्नोलॉजी में 400 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत नौ आईटीआई में एआई डेटा लैब्स स्थापित करने के अनुबंध सुनिश्चित किए गए हैं। उद्योग-सीएसआर साझेदारी से प्रशिक्षण अवसंरचना सुदृढ़ हुई है; मारुति सुजुकी द्वारा आईटीआई भोपाल व जबलपुर में आधुनिक लैब का निर्माण पाँच करोड़ रु. की लागत से किया गया, सिमेंस ने आईटीआई उज्जैन में साठ लाख रुपए. की मेन्यूफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी लैब स्थापित की, जैगुआर फाउंडेशन ने आईटीआई भोपाल में पंद्रह लाख रु. की प्लम्बिंग स्किल लैब विकसित की तथा श्री-ट्रस्ट ने 20 आईटीआई में इलेक्ट्रिकल, सोलर और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन लैब स्थापित कीं। वाधवानी फाउण्डेशन, क्वेस्ट अलाईंस और इग्नाइट परियोजना के माध्यम से हजारों प्रशिक्षणार्थियों को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इंडस्ट्री-अकादेमिया कंसल्टेशन वर्कशॉप 14 स्थानों पर आयोजित कर प्रशिक्षण एवं उद्योग आवश्यकताओं का बेहतर समन्वय स्थापित किया गया। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में वर्ष 2025 में 1,100 प्रशिक्षणार्थियों का प्रवेश सुनिश्चित किया गया, जिनमें 80% आईटीआई प्रशिक्षणार्थी और 20% पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग प्रशिक्षणार्थी हैं; ग्लोबल स्किल पार्क से अब तक 600 प्रशिक्षणार्थियों का सफल प्लेसमेंट हुआ है जिनमें 29 को विदेशी नियोजन प्राप्त हुआ और यह पार्क उच्च प्लेसमेंट प्रतिशत के साथ प्रदेश की पहचान बन चुका है। विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण, हब-एंड-स्पोक मॉडल और उद्योगों के साथ समन्वय के तहत अधिकारियों तथा अभ्यर्थियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विगत दो वर्षों में विभागीय संस्थागत क्षमता मजबूत करने हेतु अनेक नियुक्तियाँ की गईं तथा अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट को प्रोत्साहन देते हुए आईटीआई उत्तीर्ण 113 प्रशिक्षणार्थियों को अबूधाबी, जापान, स्लोवाकिया, कुवैत सहित विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराया गया। प्रदेश में युवाओं को स्वरोजगार, रोजगार और अप्रेंटिसशिप से जोड़ने के लिए प्रतिमाह युवा संगम आयोजित किए जा रहे हैं; विगत दो वर्षों में 656 युवा संगमों के माध्यम से कुल 1,56,767 आवेदकों को रोजगार से जोड़ा गया। राज्यमंत्री टेटवाल ने जानकारी दी किआगामी तीन वर्षों की समग्र रूपरेखा में प्रदेश के आईटीआई विहीन 51 विकासखंडों में नये शासकीय आईटीआई की स्थापना, रिक्त पदों की पूर्ति, पीएम सेतु योजना के तहत क्लस्टर विकास, सीएसआर सहयोग से आधुनिक स्किल लैब का विस्तार, अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट का बढ़ावा, विश्व कौशल प्रतियोगिताओं में प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन और प्रशिक्षकों के लिए पुरस्कार प्रोत्साहन प्रमुख उद्देश्य होंगे। साथ ही, ग्रीन एनर्जी और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अनुरूप नए कोर्स और प्रशिक्षण शुरू कर प्रदेश के युवाओं को आने वाले हरित व स्वचालित रोजगार बाजार के लिये तैयार किया जा रहा है। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि ये उपलब्धियाँ हमारे सामूहिक परिश्रम, समर्पण और साझेदारी का नतीजा हैं और कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का उद्देश्य मध्यप्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए प्रदेश को रोजगार का नया मानक बनाना है।  

रोलिंग बजट बनाने में मध्यप्रदेश बनेगा देश का पहला राज्य

जनअपेक्षाओं के अनुरूप होगा मध्यप्रदेश का बजट उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने की बजट विशेषज्ञों से चर्चा भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि लोकतंत्र की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए जनअपेक्षाओं के अनुरूप मध्यप्रदेश का बजट तैयार किया जाएगा। नवाचार के रूप में वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों के साथ वर्ष 2027-28 एवं वर्ष 2028-29 के सांकेतिक बजट अनुमान भी तैयार किए जा रहे हैं। इस प्रकार आगामी तीन वर्षों के लिए रोलिंग बजट तैयार करने की पहल करने में मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बनेगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने सोमवार को बजट संवाद कार्यक्रम में यह जानकारी दी। वर्ष 2026-27 के बजट को अधिक लोक कल्याणकारी, व्यवहारिक और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित बजट संवाद कार्यक्रम में अर्थशास्त्रियों, बजट विशेषज्ञों, प्रबुद्ध विचारकों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज न होकर आम जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होना चाहिए। सरकार का निरंतर प्रयास है कि बजट निर्माण की प्रक्रिया में जनभागीदारी को और अधिक विस्तार दिया जाए और प्राप्त सुझावों को नीति निर्धारण की प्रक्रिया में शामिल किया जाए। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बजट संवाद को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिवर्ष प्रदेश के बजट को सरल, सहज और व्यावहारिक स्वरूप देने का प्रयास किया जाता है, जिससे आम नागरिक भी बजट निर्माण प्रक्रिया को आसानी से समझ सके। बजट को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आम जनता, विषय विशेषज्ञों और प्रबुद्ध वर्ग से ई-मेल, वेबसाइट, दूरभाष एवं अन्य संचार माध्यमों के जरिए सुझाव आमंत्रित किए गए, जिनके माध्यम से लगभग 945 सुझाव प्राप्त हुए हैं। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के संकल्प में प्रदेश का उल्लेखनीय योगदान सुनिश्चित करने हेतु पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में ₹82 हजार 513 करोड़ का पूंजीगत व्यय प्रावधान अब तक का सर्वाधिक है। उन्होंने आगामी लक्ष्यों की चर्चा करते हुए कहा कि वर्ष 2029 तक राज्य का सकल घरेलू उत्पाद ₹27.2 लाख करोड़ तथा वर्ष 2047 तक ₹250 लाख करोड़ से अधिक करने का लक्ष्य है। साथ ही प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि का रोडमैप तैयार किया गया है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि आगामी बजट में कृषि और किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे किसानों की आय बढ़े और सब्सिडी पर निर्भरता कम हो। साथ ही उद्योग, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुशासन के क्षेत्र में सुधार हेतु भी विशेषज्ञों से ठोस सुझाव आमंत्रित किए गए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास और नागरिकों के जीवन को खुशहाल बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और बजट विशेषज्ञों के सुझावों से प्रदेश अपने लक्ष्यों को शीघ्र प्राप्त करेगा।              सचिव वित्त लोकेश कुमार जाटव ने स्वागत भाषण में कहा कि बजट सुझाव को यथोचित बजट में शामिल करेंगे। उन्होंने बजट की पूरी प्रक्रिया संक्षेप में जानकारी दी।              उप महाप्रबंधक नाबार्ड सुशील कुमार ने सुझाव दिया कि विकसित भारत 2047 के लिये कारपोरेट सेक्टर की भूमिका, इनवेस्टमेंट बढ़ना, सिंचाई और मंडी इंफ्रास्ट्रेक्चर को बढ़ाना होगा। कुछ विशेष एरिया को शामिल किया जाना चाहिए।              सदस्य मध्यप्रदेश युवा आयोग आशुतोष सिंह ठाकुर ने नेशनल युथ पॉलिसी के कुछ विशेष एरिया को शामिल किया जाना चाहिए, युवाओं को स्किल ट्रेनिंग, लैग्वेंज सिस्टम को लागू करने के लिये उच्च शिक्षा में बजट प्रावधान अलग से होना चाहिए।              पूर्व अध्यक्ष सी.सी.आई. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने युज आफ डूईंग बिजनेस एवं स्टॉट-अप एवं डीफेंस कॉरिडोर पर अपने सुझाव दिया।              उप महाप्रबंधक आरबीआई अल्का गर्दे ने कहा महिलाओं को जो भी प्रशिक्षण दिया जाये जिसमें इनकम जनरेटिंग पॉइंट को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने एमएसएमई क्लस्टर्स को बढ़ावा देने की भी बात की है।              अध्यक्ष उद्योग भारती मितेश लोकवानी ने आईटी सेक्टर, सेमीकंडक्टर में मध्यप्रदेश के निर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश इलेक्ट्रॉनिक मेन्युफैक्चर एवं लॉजिस्टिक हब बनाने पर जोर दिया।              सोशल पॉलिसीस्पेशलिस्ट सोमेन बागची ने चाइल्ड बजट में चिल्ड्रन पर इनवेस्टमेंट एवं केयर इडस्ट्रीपर अपने विचार व्यक्त किये।              सलाहकार नीति आयोग राजीव ठाकुर ने कृषि उद्योग एवं टेक्सटाइल एवं ऑटोमोबाइलस पर अपने सुझाव दिये।              चार्टर्ड एकाउंटेंट नवनीत गर्ग ने जीएसटी एवं डाटा सेंटर पर अपने सुझाव दिया।              फिल्म अभिनेता राजीव वर्मा ने कहा कि कला व्यक्तिव निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने मांग की कि सभागृहों में किराया कम करने, मनोरंजन कर न लगाने एवं नाटय आकादमी में सीटों की सीमा बढा़ने और नाट्य गृहों का निर्माण मध्यप्रदेश में किया जाना चाहिए।              नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी मेनेजमेंट प्रो. प्रताप जैना ने कहा कि मध्यप्रदेश ने जीएसडीपी में बहुत अच्छा कार्य किया है। उन्होंने रेवन्यू सरप्लस होने पर खुशी जताई है। पूंजीगत व्यय पर मध्यप्रदेश की सराहना की।              संयोजक एसएलबीसी एवं महाप्रबंधक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया धीरज गोयल ने कहा प्रदेश सरकार आगामी बजट में वित्तीय अनुशासन बनाये रखते हुए समावेशी और सतत विकास को प्राथमिकता दी है।              भारतीय वन प्रबंधन संस्थान प्रो. योगेश दुबे ने वन, वन्यजीव, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन को प्राथमिकता देने की बात कही।              नेशनल इंस्टिट्यूट आफ फाईनेंशियल मेनेजमेंट बृजेश कुमार ने विकसित भारत 2047 के लिये प्रति व्यक्ति आय समाजिक समरसता, तकनीकी विकास, पर्यावरण स्थिरता एवं ग्लोबल प्रजेंश पर अपने सुझाव दिये।              निकोर फाउंडेशन मिताली निकोर ने जेंडर बजट में महिलाओं को क्रियेटर के रूप में बनाना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार ऐसे स्कीम डिजाइन करें जिसमें महिलाएँ अपने विचार एवं लाभ ले सकें। उन्होंने केयर इकनॉमी पर भी सुझाव दिया।              कृषि में नवाचार नरसिंहपुर ड्रोन आचार्य भक्तराज ने सुझाव दिया कि कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा बाउचर से किसानों को प्रमोट किया जाए एवं स्थानीय विशेषज्ञों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने दलहन खेती में ड्रोन की भूमिका पर  भक्तराज की सराहना भी की थी।              संचालक बजट राजीव रंजन मीना ने उप मुख्यमंत्री देवड़ा सहित आमंत्रित विषय विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनके बहुमूल्य सुझावों को बजट में शामिल करने का परीक्षण करेगी। इस अवसर पर वित्त विभाग एवं वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

दतिया में टीकाकरण के बाद बड़ा हादसा: एक बच्चे की मौत, तीन अस्पताल में भर्ती

दतिया दुरसड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ककरऊआ में शुक्रवार को हुए टीकाकरण के दौरान वैक्सीन लगाए जाने के बाद डेढ़ माह के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद गांव में हड़कंप और आक्रोश का माहौल है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में वैक्सीन लगाई गई जानकारी के अनुसार शुक्रवार को गांव में आशा कार्यकर्ता द्वारा नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों को वैक्सीन लगाई गई थी। टीकाकरण के कुछ समय बाद एक डेढ़ माह के बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। वहीं तीन अन्य बच्चों में भी अस्वस्थता के लक्षण सामने आए, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल दतिया रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। शिकायत लेकर कलेक्टर के बंगले पर पहुंचे लोग घटना से आक्रोशित ग्रामीण बड़ी संख्या में शिकायत लेकर दतिया कलेक्टर के बंगले पहुंचे। ग्रामीणों ने टीकाकरण में लापरवाही और स्वास्थ्य अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। जांच के आदेश ग्रामीणों की शिकायत पर कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि मामले में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंचकर जानकारी जुटा रही है और टीकाकरण से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं की जांच कर रही है। वहीं जिला अस्पताल में भर्ती बच्चों की हालत पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।

मध्य प्रदेश में शीत लहर का असर: 20 जिलों में घना कोहरा, ट्रेन और फ्लाइट सेवाएं बाधित

भोपाल मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से में घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। ग्वालियर-चंबल, रीवा, सागर संभाग सहित करीब 20 जिलों में कोहरा छाया हुआ है, जहां कई जगहों पर विजिबिलिटी मात्र 50 मीटर तक रह गई है। ठंड भी बढ़ गई है और कई जिलों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने ग्वालियर, भिंड, मुरैना सहित कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि जबलपुर, कटनी, शहडोल में येलो अलर्ट है। सुबह 10 बजे तक कोहरे के छाए रहने की संभावना जताई गई है। कोहरे का असर सुबह और देर रात सबसे ज्यादा रहता है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो रहा है। प्रभावित जिले और अलर्ट     ऑरेंज अलर्ट: ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर आदि।     येलो अलर्ट: जबलपुर, कटनी, शहडोल, सिंगरौली आदि। कुल 20 जिलों में कोहरा और ठंड का असर ज्यादा है। ट्रेन सेवाओं पर असर घने कोहरे के कारण उत्तर भारत से आने वाली कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं। शताब्दी एक्सप्रेस, मालवा एक्सप्रेस, पंजाब मेल समेत कई महत्वपूर्ण ट्रेनें प्रभावित हैं। देरी 30 मिनट से लेकर 8 घंटे तक दर्ज की गई है। दिल्ली से भोपाल, ग्वालियर और इंदौर आने वाली ट्रेनें सबसे ज्यादा लेट हैं। फ्लाइट्स प्रभावित इंदौर से दिल्ली और मुंबई की उड़ानें कोहरे के कारण प्रभावित हो रही हैं। कई फ्लाइट्स देरी से उड़ान भर रही हैं या रद्द हो रही हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरलाइंस से संपर्क कर लेटेस्ट अपडेट लें।