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उप्र. मदरसा बोर्ड रिजल्ट में बेटियों का दबदबा, 29 हजार से ज्यादा छात्राएं पास

उप्र. मदरसा बोर्ड रिजल्ट में बेटियों का दबदबा, 29 हजार से ज्यादा छात्राएं पास 94.30% सफलता दर के साथ छात्राओं ने दिखाई शानदार प्रतिभा आलिम परीक्षा के टॉप-3 पर छात्राओं का कब्जा, वाराणसी की जुमी फरीन टॉपर गोरखपुर, कुशीनगर, लखनऊ समेत कई जिलों की बेटियों ने प्रदेश में बढ़ाया मान लखनऊ   उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित मदरसा शिक्षा परिषद के वर्ष 2026 की परीक्षा में बेटियों ने बाजी मारी है। इस वर्ष 29 हजार से अधिक छात्राएं पास हुई है। जिनका सफलता प्रतिशत 94.30 प्रतिशत रहा है। छात्राओं ने टॉप रैंकिंग में भी अपना दबदबा कायम किया है। यह उपलब्धि केवल छात्राओं की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों और पारदर्शी व्यवस्था का भी सकारात्मक असर है। 29 हजार से अधिक छात्राएं हुई पास उप्र. मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ द्वारा वर्ष 2026 की मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) परीक्षा में कुल 55,788 छात्र-छात्राएं सफल हुए हैं, जिनमें 29,229 छात्राएं शामिल हैं। छात्राओं का कुल सफलता प्रतिशत 94.30 रहा है, जो इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में बेटियों को बेहतर शैक्षिक माहौल और अवसर मिल रहे हैं। सेकेंडरी (मुंशी/मौलवी) परीक्षा में 21,407 छात्राएं पास हुईं है। जिनका सफलता प्रतिशत 91.46 रहा है। वहीं सीनियर सेकेंडरी (आलिम) परीक्षा में 7,822 छात्राओं ने सफलता हासिल की, जिसका सफलता प्रतिशत 90.88 दर्ज किया गया है। सीनियर सेकेंडरी के टॉप-3 में छात्राओं का दबदबा सबसे खास बात यह रही कि सीनियर सेकेंडरी (आलिम) परीक्षा की टॉप तीन रैंक पर छात्राओं ने कब्जा जमाया है। वाराणसी जिले के मदरसा दैरातुल इस्लाह चिराग-ए-उलूम की छात्रा जुमी फरीन ने 82.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। इसी मदरसे की छात्रा शाइस्ता परवीन ने 82.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं अमरोहा जिले के मदरसा अलिया जफरिया की छात्रा उम्मुल खैर ने भी 82.40 प्रतिशत अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा वाराणसी की जैनबी हनिया ने 82 प्रतिशत अंक पाकर पांचवां स्थान हासिल किया। जबकि फर्रुखाबाद जिले के मदरसा इस्लामिया फैज-ए-आम लालबाघ हमीरपुर खास की छात्रा रेशमा ने 81.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर टॉप-10 में आठवां स्थान बनाया है। गोरखपुर, कुशीनगर और लखनऊ की छात्राओं ने नाम किया रोशन मदरसा बोर्ड की सेकेंडरी (मुंशी/मौलवी) परीक्षा में भी छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया है। गोरखपुर जिले के जामिया रिज्विया अहले सुन्नत की छात्रा शाइमा परवीन ने 89.33 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है। कुशीनगर जिले के मदरसा मुस्तफा दारुल उलूम की छात्रा सिद्दीका खातून ने 88.50 प्रतिशत अंक पाकर पांचवां स्थान प्राप्त किया है। वहीं गोरखपुर जिले के मदरसा अरबिया शम्सुल उलूम की छात्रा रुखसार बानो ने 88.17% अंक प्राप्त कर छठा, कुशीनगर जिले के जामिया उस्मानिया गर्ल्स हाई स्कूल उस्मान नगर दुदही कुशीनगर की शकिला खातून ने 87.83% अंक पाकर नौवां स्थान और लखनऊ जिले के जामिया इस्लाहुल बनत में पढ़ने वाली छात्रा सानिया ने 87.83% अंक के साथ दसवां स्थान प्राप्त कर प्रदेश में नाम रोशन किया है। योगी सरकार मदरसा शिक्षा की बेहतरी के लिए पूरी तरह से संजीदाः दानिश आजाद अंसारी अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि योगी सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से मुस्लिम बहनों को शिक्षित कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि मदरसा शिक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यहां गरीब मुस्लिम परिवारों के बच्चे पढ़ने आते हैं। ऐसे बच्चों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा मिलना उनका अधिकार है। योगी सरकार मदरसा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए पूरी तरह संजीदा है।

उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम: 250 मदरसों को स्कूल में बदला जाएगा

देहरादून  उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग किए जाने पर विवाद बढ़ गया है। आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि मदरसों पर बेवजह आरोप लगाना गलत है। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड को खत्म करना एक ऐतिहासिक गलती है।  मौलाना ने दावा किया कि मदरसों से जुड़े करीब 55 हजार उलमा और छात्र अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुए। 1857 से लेकर 1947 तक और उसके बाद भी मदरसों के उलमा देश की एकता के लिए खड़े रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी बिना इतिहास पढ़े ‘जिहाद की शिक्षा’ की बात कर रहे हैं, जो असंवैधानिक और अनैतिक है। उनके मुताबिक संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को शिक्षण संस्थाओं में सुधार की बात करनी चाहिए, न कि उन्हें बदनाम करना चाहिए। मौलाना ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार ने 250 मदरसों पर ताले लगा दिए और 125 सूफी मजारों पर बुलडोजर चलाया। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम उत्तर प्रदेश में भी नहीं उठाया गया और राज्य सरकार इस्लामी धार्मिक शिक्षा खत्म करने पर उतारू है। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य में विभाजनकारी सोच को रोकने के लिए मदरसा बोर्ड समाप्त किया गया है। उनका कहना था कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जो शिक्षा बोर्ड तय करता है, ताकि वे देश और समाज की प्रगति में योगदान दे सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 1 जुलाई 2026 से इन संस्थानों में समान पाठ्यक्रम लागू होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर ‘जिहादी’ सोच पनप रही थी, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी। सरकार ने 250 से ज्यादा अवैध मदरसों पर भी कार्रवाई की, क्योंकि उनके रिकॉर्ड और पढ़ाई का विवरण स्पष्ट नहीं था।