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माघ मेला 2026: प्रयागराज स्टेशन पर इन 12 ट्रेनों को मिलेगा स्टॉपेज, जानें कौन सी हैं ये ट्रेनें

भोपाल  माघ मेला 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शासन ने भोपाल मंडल होकर संचालित 12 ट्रेनों को प्रयागराज रामबाग और झूसी स्टेशन पर 2 मिनट का अतिरिक्त ठहराव देने का निर्णय लिया है। यह अतिरिक्त ठहराव जनवरी और फरवरी में अलग-अलग तिथियों तक दिया जाएगा। रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले ट्रेन संख्या, तिथि और समय-सारिणी की पुष्टि आधिकारिक रेलवे वेबसाइट, एनटीईएस ऐप या नजदीकी रेलवे स्टेशन से अवश्य कर लें। इन ट्रेनों को मिलेगा अतिरिक्त ठहराव 11062 जयनगर–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस 15 फरवरी 2026 तक 11061 लोकमान्य तिलक टर्मिनस–जयनगर एक्सप्रेस 15 फरवरी 2026 तक 20934 दानापुर–उधना एक्सप्रेस से 15 फरवरी 2026 तक 20933 उधना–दानापुर एक्सप्रेस से 14 फरवरी 2026 तक 11034 दरभंगा–पुणे एक्सप्रेस 13 फरवरी 2026 तक 11033 पुणे–दरभंगा एक्सप्रेस 21 फरवरी 2026 तक 15559 दरभंगा–अहमदाबाद एक्सप्रेस 21 फरवरी 2026 तक 15560 अहमदाबाद–दरभंगा एक्सप्रेस 13 फरवरी 2026 तक 20962 बनारस–उधना एक्सप्रेस 21 फरवरी 2026 तक 20961 उधना–बनारस एक्सप्रेस 20 फरवरी 2026 तक 11037 पुणे–गोरखपुर एक्सप्रेस 12 फरवरी 2026 तक 11038 गोरखपुर–पुणे एक्सप्रेस 14 फरवरी 2026 तक इस बारे में सौरभ कटारिया, सीनियर डीसीएम का कहना है कि यह निर्णय यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और आरामदायक यात्रा सुविधा देना है। अतिरिक्त ठहराव से यात्रियों को उतरने-चढ़ने में आसानी होगी और भीड़भाड़ के कारण होने वाली परेशानियों में कमी आएगी। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन संख्या, तिथि और समय-सारिणी की जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, NTES ऐप या नजदीकी रेलवे स्टेशन से अवश्य जांच लें।

सर्द हवाओं के बीच भी आस्था अडिग, माघ मेला में संगम स्नान को उमड़े लाखों श्रद्धालु

प्रयागराज मकर संक्रांति और माघ मेला 2026 के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। दूर-दराज के राज्यों से लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए संगम पहुंच रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही है। सुबह से ही संगम तट पर 'हर-हर गंगे' और 'जय श्रीराम' के जयघोष गूंज रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। सुबह 10 बजे तक करीब 36 लाख श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम, रोशनी, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी श्रद्धालु को स्नान या दर्शन में कोई परेशानी न हो। मकर संक्रांति के अवसर पर अटल पीठाधीश्वर राजगुरु आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विश्वतमानंद सरस्वती जी महाराज ने श्रद्धालुओं को पवित्र संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माघ मास का विशेष महत्व है और इस माह में किए गए व्रत, पूजा और अनुष्ठान पूरे वर्ष शुभ फल देते हैं। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर से अटल एरिना के आचार्य इस पावन अवसर पर प्रयागराज पहुंचे हैं। उन्होंने सभी देशवासियों को माघ मास की पवित्रता का आनंद लेने और शुभकामनाएं दीं। वहीं, काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने भी मकर संक्रांति के अवसर पर संगम में पवित्र डुबकी लगाई। उन्होंने कहा कि सूर्य भगवान का मकर राशि में प्रवेश एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक क्षण है, जिसका इंतजार भीष्म पितामह ने हजारों वर्षों तक किया था। उन्होंने भागीरथ के 60 हजार पूर्वजों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दिन आस्था और मोक्ष से जुड़ा हुआ है। शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि संगम आस्था और भक्ति का सर्वोच्च केंद्र है। जो भी यहां जिस भावना से आता है, उसे उसी अनुरूप फल मिलता है। उन्होंने कहा कि यह समय सनातन धर्म के पुनरुत्थान का है और यह दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि सनातन संस्कृति आज भी जीवंत और सशक्त है। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में कहीं स्थायी शांति संभव है, तो वह सनातन मूल्यों, आदर्शों और मान्यताओं से ही आ सकती है। सनातन ही नफरत, हिंसा और युद्ध के माहौल को समाप्त कर सकता है। इस दौरान छह वर्षीय बाल संत श्री बाहुबली महाराज ने कहा कि यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि अगर धर्म की रक्षा होगी तो देश की रक्षा अपने आप होगी। प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। माघ मेले के दौरान जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या को लेकर सुरक्षा, यातायात और अन्य तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति का स्नान सुचारू रूप से चल रहा है और अगले कुछ घंटों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। सभी घाटों पर व्यवस्थाएं योजना के अनुसार काम कर रही हैं और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने भी कहा कि मेला क्षेत्र में सभी व्यवस्थाएं ठीक से चल रही हैं। रोशनी, सुरक्षा और स्नान से जुड़ी सुविधाएं पर्याप्त हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है। श्रद्धालुओं ने भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जमकर सराहना की। एक श्रद्धालु ने बताया कि कड़ाके की ठंड के बावजूद स्नान करने में कोई परेशानी नहीं हुई। कानपुर से आए श्रद्धालुओं ने पार्किंग और यातायात व्यवस्था को बेहतर बताया। झारखंड से आए श्रद्धालुओं ने टिकट, ठहरने और अन्य सुविधाओं के लिए सरकार का धन्यवाद किया। उत्तर मध्य रेलवे ने भी रेल मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए वन-वे सिस्टम, अस्थायी टिकट काउंटर, अलाव, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि रेलवे की व्यवस्थाएं कुंभ मेले जैसी हैं और यात्रा पूरी तरह सुरक्षित व सुविधाजनक है।

14 जनवरी के स्नान पर्व में 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान – ऋषिराज, माघ मेला अधिकारी

षटतिला एकादशी, मकर संक्रांति स्नान के लिए संगम में उमड़ा आस्था का ज्वार 14 जनवरी के स्नान पर्व में 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया पुण्य स्नान – ऋषिराज, माघ मेला अधिकारी श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते प्रशासन ने बढ़ाई चौकसी, निगरानी के लिए पहली बार तीन कंट्रोल सेंटर रोडवेज की तरफ से 1800 बसों का संचालन, एक्शन में क्यूआरटी टीमें मेला प्रशासन के साथ रेलवे का समन्वय, आवागमन के लिए रेलवे की 8 रिंग रेल सेवा व 16 ट्रेनों के ठहराव का विस्तार, 1.20 लाख क्षमता के 18 यात्री आश्रय स्थल तैयार प्रयागराज  प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले का दूसरा बड़ा स्नान पर्व 'मकर संक्रांति' माघ मेला प्रशासन की दृष्टि में भले ही 15  जनवरी को है, लेकिन 14 जनवरी को संगम के विभिन्न घाटों में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। बुधवार को षटतिला एकादशी और अपराह्न बाद मकर संक्रांति स्नान का मुहूर्त शुरू हो जाने की वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए भोर से ही घाटों पर पहुंचने लगे। मेला अधिकारी ऋषिराज के मुताबिक, दोपहर 12 बजे तक ही श्रद्धालुओं की संख्या 50 लाख पहुंच गई। परंपरागत रूप में 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मानकर पुण्य की डुबकी लगाने वालों का आंकड़ा बुधवार शाम तक ही 85 लाख को पार कर चुका था। व्यवस्था और जनसुविधाओं का किया गया विस्तार माघ मेला क्षेत्र में आ रही श्रद्धालुओं की विशाल संख्या को देखते पहले से सजग मेला प्रशासन ने भी अपनी जन सुविधाओं का विस्तार कर दिया है। मेला अधिकारी प्रयागराज के मुताबिक, श्रद्धालुओं के लिए 24 स्नान घाटों का निर्माण किया गया है। घाटों की लंबाई  बढ़ाकर 3.69 किमी कर दी गई है। महाकुंभ में घाटों के किनारे ड्रेजिंग से भी एरिया में बढ़ोतरी हुई है। घाटों के किनारे महिलाओं के लिए 1200 से अधिक चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। पहली बार पक्के घाटों के पास कैनोपी आकार के अस्थायी फोल्ड करने वाले चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं की नियमित रूप से निगरानी के लिए तीन कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं। इनमें एक आई ट्रिपल सी में, दूसरा पुलिस लाइन में और तीसरा जिला कलेक्ट्रेट में है।  सुगम आवागमन और भीड़ प्रबंधन के लिए एक्शन मोड में रोडवेज और रेलवे श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए रोडवेज और रेलवे दोनों मेला प्रशासन के साथ रणनीति बनाकर कार्य कर रहे हैं। डीएम प्रयागराज मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि रोडवेज की 1800 बसें इसके लिए तैयार हैं। रोडवेज की क्यूआरटी टीमें भी हर आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।  रेलवे की तरफ से रिंग रेल सेवा के अंतर्गत 8 ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, जो पूरी मेला अवधि तक होगा। श्रद्धालु यात्रियों की अतिरिक्त सुविधा के लिए 16 ट्रेनों का 02 मिनट का अतिरिक्त अस्थायी ठहराव प्रयागराज रामबाग एवं झूसी स्टेशनों पर दिया गया है। भीड़ प्रबंधन के लिए स्टेशन में एंट्री पॉइंट्स में एकल व्यवस्था रखी गई है। जंक्शन रेलवे स्टेशन में 18 यात्री आश्रय बनाए गए हैं, जिनकी क्षमता 1.20 लाख यात्रियों की है। रेलवे स्टेशन परिसर में 1186 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

माघ मेला अग्निकांड: पूजा के समय आश्रम में आग, आधा दर्जन टेंट राख, दमकलकर्मी घायल

प्रयागराज प्रयागराज में चल रहे आस्था के महापर्व माघ मेला क्षेत्र में बुधवार शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सेक्टर-4 स्थित तुलसी मार्ग पर 'बड़े ब्रह्म छोटे ब्रह्म आश्रम' में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया और आश्रम के करीब आधा दर्जन टेंट जलकर राख हो गए। पूजा के दौरान हुआ हादसा आश्रम के संचालक कमलेश्वर नाथ पांडेय ने बताया कि घटना के समय आश्रम में दर्जन भर से अधिक श्रद्धालु और कल्पवासी मौजूद थे, जो सांध्यकालीन पूजा में मग्न थे। इसी बीच टेंट के पिछले हिस्से से चिंगारी भड़की और आग तेजी से फैल गई। श्रद्धालुओं ने अपनी ओर से बालू और पानी फेंककर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन लपटें बेकाबू थीं। इस अग्निकांड में टेंट में रखी गृहस्थी के सामान के साथ ₹20,000 की नकदी भी जल गई।   दमकल कर्मियों की बहादुरी आश्रम के पास ही स्थित कल्पवासी फायर स्टेशन के कर्मियों ने जैसे ही धुआं देखा, वे तुरंत हरकत में आ गए। आकाश कुमार और उनके सहयोगी फायरमैनों ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। करीब दर्जन भर फायर टेंडर और एंबुलेंस को भी तैनात किया गया। आग बुझाने के दौरान तीन फायर कर्मी – मिलन सिंह, अमरजीत और अमृत यादव के हाथ झुलस गए, जिन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। दमकल विभाग की तत्परता से आग को अन्य शिविरों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए 12100 फीट लम्बाई में घाटों का निर्माण, कम से कम पैदल चलने के लिए घाटों के नजदीक बनाई गई पार्किंग

मकर संक्रांति स्नान पर्व के लिए तैयारी पूरी, 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन का प्रशासन का अनुमान  श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए 12100 फीट लम्बाई में घाटों का निर्माण, कम से कम पैदल चलने के लिए घाटों के नजदीक बनाई गई पार्किंग 42 पार्किंग स्थल का निर्माण, आवागमन सुगम बनाने के लिए गोल्फ कार्ट और रैपिडो बाइक सेवा होगी मददगार स्वच्छता के लिए 3300 स्वच्छता कर्मी तैनात, मेला क्षेत्र में 25,880 टॉयलेट का निर्माण यातायात एवं भीड़ प्रबन्धन हेतु एआई सर्विलांस बेस्ड अन्तर्जनपदीय एवं अन्तर्राज्यीय कार्ययोजना का विकास प्रयागराज  प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले का दूसरा स्नान पर्व मकर संक्राति 15 जनवरी को है। पौष पूर्णिमा स्नान पर्व में 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को सकुशल स्नान संपन्न कराने के बाद अब मेला प्रशासन ने मकर संक्रांति स्नान पर्व के लिए कमर कस ली है। इसके लिए स्नान घाटों पर विशेष व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं को कम से कम पैदल चलना पड़े, इसके लिए घाटों के समीप ही पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इस दौरान एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान का प्रशासन का अनुमान है।  प्रशासन ने तैयार किया भीड़ प्रबंधन का मेगा प्लान  माघ मेला-2024 में इस पर्व पर 28.95 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया था। इस बार लगभग तीन गुना अधिक श्रद्धालुओं के आगमन के अनुमान को देखते हुए मेला प्रशासन ने भी भीड़ प्रबंधन का मेगा प्लान तैयार किया है। माघ मेला अधिकारी ऋषिराज का कहना है भीड़ प्रबन्धन एवं सुगम यातायात के दृष्टिगत इस बार 42 अस्थायी पार्किंग विकसित की गयी है, जिसमें लगभग एक लाख से अधिक वाहन पार्क हो सकेंगे। माघ मेला 2025-26 में कुल 12100 फीट लम्बाई में घाटों का निर्माण किया गया है जिनमें सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं चेंजिंग रूम, पुऑल, कॉसा, शौचालय आदि उपलब्ध हैं। मेला अधिकारी के अनुसार माघ मेले में गंगा में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कानपुर के गंगा बैराज से प्रतिदिन 8000 क्यूसेक जल छोड़ा जा रहा है। प्रयागराज में दोनों नदियों में गिरने वाले सभी 81 नालों की टैपिंग की जा चुकी है। निरंतर गंगा जल की मॉनिटरिंग हो रही है। स्वच्छता , सुरक्षा और सुगम परिवहन को प्राथमिकता शासन के निर्देश पर माघ मेले में स्वच्छता , सुरक्षा और सुगम परिवहन पर विशेष जोर दिया गया है। मेला अधिकारी ऋषिराज बताते हैं कि माघ मेले को खुले में शौच मुक्त (O.D.F.), दुर्गन्ध मुक्त और गंगा में जीरो डिस्चार्ज हेतु लगभग 25,880 शौचालय, 11 हजार डस्टबिन, 10 लाख से अधिक लाइनर बैग, 25 सक्शन गाड़ियां एवं 3,300 सफाई कर्मी तैनात किये गये हैं। श्रद्धालुओं के सुगम एवं सुलभ आवागमन हेतु बाइक टैक्सी और गोल्फ कार्ट की व्यवस्था की गयी है। माघ मेला पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय बताते हैं कि सम्पूर्ण मेला क्षेत्र में 17 थाने व 42 पुलिस चौकी, 20 अग्निशमन स्टेशन, 07 अग्निशमन चौकी, 20 अग्निशमन वॉच टावर, 01 जल पुलिस थाना, 01 जल पुलिस कन्ट्रोल रूम तथा 04 जल पुलिस सब कन्ट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।  8 किलोमीटर से अधिक डीप वाटर बैरीकेडिंग एवं 02 किलोमीटर रिवर लाइन (एकल दिशा मार्ग हेतु) लगायी गयी है। मेला क्षेत्र में सुरक्षा के दृष्टिगत पैरा मिलिट्री फोर्स की तैनाती की गयी है। नगर एवं मेला क्षेत्र में पूर्व से स्थापित सीसीटीवी  कैमरों के अतिरिक्त एआई  युक्त कैमरों सहित 400 से अधिक कैमरों के माध्यम से क्राउड मानिटरिंग, क्राउड डेन्सिटी एनालिसिस, इन्सीडेन्ट रिपोर्टिंग, स्वच्छता एवं सुरक्षा निगरानी की व्यवस्था की गयी है।

पारो की कहानी: माघ मेला में दातुन बेचने वाली लड़की हुई वायरल, सुंदरता से ज्यादा दिल छूने वाली है उसकी कहानी

प्रयागराज  आपको पिछले साल का महाकुंभ (Maha Kumbh Mela 2025) याद होगा किस तरह लोगों ने काफी पैसे कमाए थे. अब उसी तर्ज पर माघ मेला (Magh Mela 2026) में भी लोग अलग-अलग तरह के बिजनेस करके अपनी जेबों को भरने के लिए तैयार हो गए हैं. कुंभ में काफी पॉपुलर हुए एक लड़के की तरह ही इस बार एक लड़की दातुन बेचकर कमाई कर रही है. (Woman sell neem sticks in Magh Mela 2026) उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल (Viral News) हो रहा है. मगर, वह दातुन बेचने की वजह से वायरल नहीं हुई है, बल्कि अपनी मुस्कान और सुंदरता के कारण सुर्खियों में छा गई है. एक लड़की इधर से उधर माघ मेला में घूमती दिखी. उसके हाथ में दातुन थे. वह लोगों से कह रही थी दातुन ले लीजिए, दातुन. तभी उसके चेहरे पर नजर पड़ी… काली आंखे, चेहरे पर मुस्कान, माथे पर तिलक और पीठ पर बैग लटकाए… सुंदर इतनी मानों कोई हिरोइन हो. मगर, इस लड़की की कहानी कोई सामान्य नहीं है. उसके दातुन बेचने के पीछे का दुख तब सामने आया. लड़की का नाम पारो कुमारी है. वह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली है. वह गाजीपुर से प्रयागराज सिर्फ अपने परिवार के लिए आई है. उसके पिता बीमार हैं और घर में कोई कमाने वाला नहीं है. जब उसे पता लगा कि माघ मेला लगने वाला है तो कमर कस ली की अब घर वालों का बेड़ा वहीं उठाएगी. पारो ने कहा कि पापा बहुत बीमार हैं. इसलिए मैं दातुन बेचने आई हूं. इसे बेचकर उनका इलाज कराऊंगी. बता दें, नए साल के साथ ही साल 2026 को लेकर लोगों में धार्मिक और ज्योतिषीय उत्साह देखने को मिल रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह वर्ष सूर्य का वर्ष माना जा रहा है, इसलिए इसका असर धर्म, आस्था, तप और अच्छे कर्मों पर खास रूप से पड़ने वाला है. इसी शुभ अवसर पर साल की शुरुआत के साथ ही सनातन परंपरा का बड़ा धार्मिक आयोजन माघ मेला  शुरू हो गया है. माघ मेला करीब 40 दिनों से अधिक समय तक चलेगा और इसका समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन अंतिम पवित्र स्नान के साथ होगा. इस पूरे समय के दौरान देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु, संत और कल्पवासी प्रयागराज पहुंचकर संगम तट पर निवास करेंगे और पवित्र स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेंगे.

प्रयागराज में माघ मेले की पौष पूर्णिमा पर 21 लाख श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान

प्रयागराज प्रयागराज महाकुंभ के बाद पहला माघ मेला आज से शुरू हो गया है। पहले दिन पौष पूर्णिमा पर अब तक 21 लाख से ज्यादा श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। श्रद्धालु स्नान-दान के बाद लेटे हनुमानजी के दर्शन कर रहे हैं। मेला प्राधिकरण का अनुमान है।  इधर, पुलिस ने दो फर्जी बाबा पकड़े हैं। उनके पास से फर्जी आधार कार्ड और नकली नोट मिले हैं। महाकुंभ में ‘दातून बॉय’ के नाम से मशहूर हुए आकाश थार से प्रयागराज पहुंचे हैं। उन्होंने मेले में दातून का कैंप लगाने का ऐलान किया है। इस बीच सपा कार्यकर्ता ने दिवंगत मुलायम सिंह यादव की तस्वीर के साथ गंगा में डुबकी लगाई। माघ मेला 2026 का शुभारंभ आस्था, श्रद्धा और भक्ति के सैलाब के साथ हुआ। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम की ओर उमड़ पड़े। पुण्य की कामना के साथ पवित्र स्नान किया। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर हर-हर गंगे के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए शहर से संगम तक फोर्स तैनात दिखी। व्यापक पुलिस बल, एनडीआरएफ, जल पुलिस, ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी के जरिए पल-पल की निगरानी की गई। माघ मेले की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया है, जहां आस्था और व्यवस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।  सीएम योगी ने अफसरों को फील्ड में उतरने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा नहीं होनी चाहिए और लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा के लिए 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मेले की निगरानी AI तकनीक से लैस CCTV कैमरों से की जा रही है। ATS-NIA के कमांडो भी तैनात हैं। योगी सरकार माघ मेले को मिनी कुंभ के रूप में आयोजित कर रही है। मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और 15 फरवरी तक चलेगा। मेले को 7 सेक्टरों में बांटा गया है। 8 किलोमीटर लंबे स्नान घाट बनाए गए हैं। महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं। 2 जनवरी की रात 8 बजे से मेले में वाहनों की एंट्री बंद कर दी गई है। संगम नोज पर सिर्फ प्रशासकीय और चिकित्सीय वाहनों को ही जाने की अनुमति है। यह व्यवस्था 4 जनवरी की सुबह तक लागू रहेगी। आज से कल्पवास भी शुरू हो गया है। कल्पवासी 45 दिनों तक गंगा तट पर रहकर पूजा-अर्चना करेंगे। माघ मेला होने के कारण इसमें अखाड़े शामिल नहीं होते और न ही पेशवाई निकाली जाती है। पौष पूर्णिमा के साथ माघ मेला 2026 का औपचारिक शुभारंभ हो गया। पहले स्नान पर्व पर देश के कोने-कोने आए लाखों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। आधी रात के बाद से ही संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड और ठिठुरन के बावजूद आस्था का उत्साह कम नहीं हुआ। साधु-संतों, कल्पवासियों और आम श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार और हरिनाम संकीर्तन के बीच स्नान किया। प्रशासन ने इस बड़े आयोजन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए थे। संगम क्षेत्र को कई जोन और सेक्टर में बांटा गया। प्रमुख स्नान घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। भीड़ प्रबंधन के लिए वन-वे ट्रैफिक प्लान लागू किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें नावों के जरिए लगातार गश्त करती रहीं। ड्रोन से की जाती रही निगरानी पौष पूर्णिमा पर सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक बंदोबस्त रहा। पुलिस और फोर्स की निगरानी चप्पे-चप्पे  पर दिखी। मेले में दोपहिया वाहनों का संचालन पूरी तरह से बंद कर दिया गया। ड्रोन कैमरे से पूरे माघ मेला और घाटों की निगरानी की जाती रही। संगम पर बने वॉच टॉवर के माध्यम से पुलिस संगम नोज और सभी घाटों पर नजर बनाए रखी।  स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रशासन सतर्क रहा। संगम क्षेत्र और मेला परिसर में अस्थायी अस्पताल, एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीमें तैनात की गईं। ठंड को देखते हुए अलाव, गर्म पानी और विश्राम स्थलों की व्यवस्था की गई। नगर निगम और स्वच्छता कर्मियों ने सुबह से ही सफाई अभियान चलाया ताकि घाटों पर स्वच्छता बनी रहे। 

गंगा की रेती पर बस गया तंबुओं का अस्थायी शहर, पौष पूर्णिमा से शुरू होगा माघमेला

संगम में प्रवाहित हो रही संयम, साधना और भक्ति की त्रिवेणी गंगा की रेती पर बस गया तंबुओं का अस्थायी शहर, पौष पूर्णिमा से शुरू होगा माघमेला 4 लाख से अधिक कल्पवासियों के जप-तप और संकल्प की साक्षी बनेगी संगम नगरी प्रयागराज प्रयागराज के संगम तट में लगे आस्था के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक समागम माघ मेले में पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही माघ मेला क्षेत्र में तप, साधना और संयम की त्रिवेणी प्रवाहित होने लगेगी । भक्ति साधना  और संयम की यह त्रिधारा है कल्पवास जिसकी शुरुआत पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ शनिवार को होगी। इस बार कल्पवासियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की वजह से  योगी सरकार ने कल्पवासियों के लिए भी विशेष इंतजाम किए हैं। माघमेला 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा से प्रारंभ होकर 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा। 4 लाख से अधिक कल्पवासियों की भक्ति और साधना से प्रकाशमान होंगे गंगा के तट प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित होने वाला माघ मेला धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का देश का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही ज्ञान , भक्ति और साधना की विविध धाराएं यहां प्रवाहित होने लगेंगीं। माघ मेला क्षेत्र में एक तरफ दंड धारण करने वाले दंडी संतों और  रामानंदी आचार्य संतो और मुकाम धारी खालसा के संतों की दुनिया होगी तो वहीं होगा चतुष्पीठ  के शंकराचार्यों का वैभव। अध्यात्म के इस सागर में यहां कल्पवासियों के जप, तप और संयम की त्रिवेणी अभी से प्रवाहित होने लगी है। पौष पूर्णिमा से पूरे एक महीने तक गंगा और यमुना की रेत पर तंबुओं के शिविर बनाकर ठिठुरती ठंड में साधना करने वाले इन कल्पवासियों की संख्या में इस साल अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। मेला प्रशासन का अनुमान है कि इस बार 4 लाख कल्पवासी माघ मेले में कल्पवास करेंगे। पहली बार कल्पवासियों के लिए बनाया गया प्रयाग वाल नगर कल्पवासियों को माघ मेले का प्रथम साधक माना जाता है जिनके बिना माघ मेले के आयोजन की कल्पना भी नहीं संभव है। माघ मेला क्षेत्र में इन्हें बसाना मेला प्रशासन की प्राथमिकता होती है। एडीएम माघ मेला दयानन्द प्रसाद बताते हैं कि इस बार महाकुंभ 2025 के भव्य और दिव्य आयोजन की स्मृति और 12 साल बाद कल्पवास के संकल्प लेने की परम्परा के चलते कल्पवासियों की संख्या बढ़ गई है। इसे देखते हुए पहली बार माघ मेला क्षेत्र में कल्पवासियों के लिए एक अलग से भी 950 बीघे में एक नगर बसाया गया है जिसे प्रयागवाल नाम दिया गया है। नागवासुकी मंदिर के सामने गंगा नदी के पार इसे बसाया गया है। तीर्थ पुरोहितों और मेला प्रशासन के साथ आपसी विचार विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है। वैसे तीर्थ पुरोहितों की मांग और सहूलियत को देखते हुए विभिन्न सेक्टरों में भी कल्पवासियों के लिए तंबू लगाए गए हैं। कल्पवासी की उम्र और अवस्था को देखते हुए इन्हें बसाया जा रहा है।  मेला क्षेत्र में मूल रूप से कल्पवास करने वाले इन श्रद्धालुओं को गंगा के तटों के पास ही तंबुओं की व्यवस्था की गई थी ताकि सुबह प्रतिदिन इन्हें गंगा स्नान के लिए दूर तक न चलना पड़े। कल्पवासियों के शिविर में स्वच्छता पर प्राथमिकता योगी सरकार माघ मेला क्षेत्र  को दिव्य ,भव्य और स्वच्छ  स्वरूप दे रही है। इसके लिए संपूर्ण मेला क्षेत्र में स्वच्छता के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। मेला प्रशासन के मुताबिक विभिन्न सेक्टर में बस रहे कल्पवासियों के शिविर में भी स्वच्छता को प्राथमिकता दी जा रही है। कल्पवासियों से भी अपील की जाएगी कि वह सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल शिविर में न करें।  बुजुर्ग कल्पवासियों के लिए शीत लहरी से बचाव हो इसके लिए भी प्रशासन कई कदम उठा रहा है।  प्रशासन ने कल्पवासियों के शिविर के बाहर अलाव जलाने की व्यवस्था की थी ताकि शीत लहरी से कल्पवासियों का बचाव हो सके। माघ मेला 2026 के मुख्य स्नान पर्व पौष पूर्णिमा : 3 जनवरी मकर संक्रांति :14 जनवरी मौनी अमावस्या : 18 जनवरी बसंत पंचमी : 23 जनवरी माघी पूर्णिमा : 01 फरवरी महाशिवरात्रि : 15 फरवरी

प्रयागराज माघ मेला: रोडवेज ने शुरू की स्पेशल बस सेवा, 15 बसें नियमित चलेंगी

  प्रयागराज प्रयागराज में 1 जनवरी से शुरू हुए  माघ मेले को लेकर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां । संगम स्नान के लिए आने-जाने वाले यात्रियों को सुगम परिवहन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गाजीपुर डिपो से प्रयागराज के लिए विशेष बस सेवाएं शुरू की जा रही हैं। 15 बसों का नियमित संचालन किया जाएगा परिवहन निगम के अनुसार गाजीपुर डिपो से प्रयागराज के लिए कुल 15 बसों का नियमित संचालन किया जाएगा। इसके अलावा झूसी से संगम घाट तक श्रद्धालुओं को पहुंचाने के लिए चार अतिरिक्त बसें शटल सेवा के रूप में लगाई जाएंगी। यह विशेष परिवहन व्यवस्था 1 जनवरी से 17 फरवरी तक जारी रहेगी, ताकि माघ मेला अवधि में श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं माघ मेले के दौरान संगम स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए परिवहन निगम ने बसों की संख्या में इजाफा किया है। 1 जनवरी से 13 जनवरी तक गाजीपुर डिपो की 10 बसें सीधे प्रयागराज के लिए चलाई जाएंगी, जबकि जनपद की पांच बसें वाराणसी के रास्ते झूसी तक संचालित होंगी। चार बसें लगातार शटल सेवा में चक्कर लगाती रहेंगी झूसी पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को संगम घाट तक पहुंचाने के लिए चार बसें लगातार शटल सेवा में चक्कर लगाती रहेंगी, जिससे पैदल दूरी और भीड़-भाड़ की समस्या से राहत मिलेगी। परिवहन विभाग ने बताया कि वर्तमान में गाजीपुर डिपो से 94 बसों का संचालन किया जा रहा है, जबकि माघ मेला के दौरान ग्रामीण रूटों पर भी बस सेवाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि दूर-दराज के गांवों से आने वाले श्रद्धालु आसानी से बस सुविधा का लाभ उठा सकें। बस अड्डों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती इसके साथ ही बस अड्डों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती, समय-सारिणी में लचीलापन और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त फेरे लगाने की व्यवस्था की गई है। विशेष स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि को देखते हुए परिवहन निगम ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने और बसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना बनाई है। माघ मेले की प्रमुख स्नान तिथियां इस प्रकार हैं:     पौष पूर्णिमा – 13 जनवरी     मकर संक्रांति – 14 जनवरी     मौनी अमावस्या – 29 जनवरी     बसंत पंचमी – 3 फरवरी     माघी पूर्णिमा – 12 फरवरी  

ग्रामीण महिलाओं को मिले रोजगार के अवसर तो नाविक के चेहरे खिले

गंगा नदी के तटीय गांवों में सज रही है उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मंडी माघ मेले में साधु संतों और कल्पवासियों के अस्थाई शिविरों में रहती है उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग मेला प्रशासन द्वारा मेला में हीटर और छोटे एलपीजी सिलेंडर पर लगी पाबंदी से बढ़ी उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग   प्रयागराज प्रयागराज में त्रिवेणी के तट पर  03 जनवरी 2026 से आयोजित होने जा रहे  माघ मेला 2026 की शुरूआत के लिए अब दो हफ्ते का समय है । आस्था और अध्यात्म के यह महा समागम लाखों लोगों की जीविका का जरिया भी बन रहा है। महाकुंभ नगर के अंतर्गत आने वाले गांवों में की ग्रामीण महिलाओं की जीविका के महाकुंभ ने नए अवसर दे दिए हैं।   15 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों के लिए जीविका का जरिया संगम किनारे 3 जनवरी 2026 से आयोजित होने जा रहा माघ मेला होटल, ट्रैवल और टेंटेज , फूड जैसे औद्योगिक सेक्टर के साथ छोटे मोटे काम करने वाले लोगों के लिए भी जीविका के अवसर प्रदान कर रहा है। गंगा किनारे आकार ले रही तंबुओं के इस नगर के अंतर्गत आने वाले 27 गांवों में पशुपालन से जुड़े कार्य में लगे परिवारों की 15 हजार से अधिक आबादी के लिए इस आयोजन ने जीविका का जरिया दे दिया है। नदी किनारे बसे कई गाँवों में इन दिनों ईंधन के परम्परागत रूप उपलों का नया बाजार विकसित होने लगा है। इन गाँवों में नदी किनारे बड़ी तादाद में उपलों की मंडी बन गई है । गाँवों में इन दिनों गोबर से बने उपलों को बनाने में स्थानीय महिलाएं पूरे दिन लगी रहती हैं । मेला क्षेत्र के गंगा किनारे बसे बदरा सोनौटी गांव की विमला यादव का कहना है कि घर में चार भैंस और गाय हैं जिनसे साल भर हम उपले बनाते हैं और इन्हें इकट्ठा करते रहते हैं। माघ के महीने में कल्पवास करने आने वाले कल्पवासियों के यहां इनको भेजते हैं। मलावा खुर्द गांव की आरती सुबह से ही अपने घर की आम तौर पर खाली रहने वाली महिलाओं के साथ मिट्टी के चूल्हे तैयार करने में जुट जाती हैं। आरती बताती हैं कि माघ मेले में कल्पवास करने आने वाले श्रद्धालुओं का खाना इन्ही चूल्हों पर तैयार होता है । इसके लिए अभी तक उनके पास सात हजार मिट्टी के चूल्हे तैयार करने के ऑर्डर मिल चुके हैं। साधु संतो के शिविरों में भी इनके उपले और चूल्हों की मांग अच्छी मांग है ।  नाविकों की संख्या में इजाफा, महाकुंभ की आमदनी का असर  प्रयागराज सर्वाधिक कमाई करने वाले नाविक समाज में इस बार माघ मेले को लेकर सबसे अधिक उम्मीदें हैं। लगभग कर निषाद परिवार इस समय नई नाव संगम में उतारने की तैयारी में लगा है जिसके पीछे महाकुम्भ 2025 का उसका सुखद अनुभव है। दारागंज के दशाश्वमेध घाट की निषाद बस्ती में रहने वाले बबलू निषाद बताते हैं कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों तक को माघ मेले के एक महीने के लिए बुला लिया है। माघ मेले में सरकार की तरफ से जिस तरह 12 से 15 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है उसमें अगर 5 करोड़ भी नावों से त्रिवेणी आए तो एक बार नाविक समाज की तकदीर बन जाएगी।  शिविरों में बिजली के हीटर और छोटे एलपीजी सिलेंडर के इस्तेमाल में लगी रोक बनी सहायक महाकुंभ के आयोजन के बाद कल्पवास करने की शुरुआत करने वालों की संख्या में हर बार इजाफा होता है। एडीएम मेला दयानंद प्रसाद के मुताबिक इस बार माघ मेले में 6 हजार से अधिक संस्थाएं बसाई जा रही हैं । इसमें 4 लाख से अधिक कल्पवासियों को भी जगह मिलेगी । मेला क्षेत्र में बड़ी संस्थाएं वैसे तो कुकिंग के गैस के बड़े सिलेंडर का इस्तेमाल करती हैं क्योंकि इन्हें प्रतिदिन लाखों लोगों को भोजन कराना होता है। लेकिन धर्माचार्यों, साधु संतों और कल्पवासी अभी भी अपनी पुरानी व्यवस्था के अंदर ही खाना बनाते हैं। कुछ स्थानों पर आग लगने की घटनाओं में हीटर और छोटे गैस सिलेंडर का इस्तेमाल बड़ी वजह पाई जाने के मेला प्रशासन ने शिविरों में हीटर और छोटे गैस सिलेंडर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी । इस नई व्यवस्था की वजह से भी अब गांव की इन महिलाओं के हाथ से बने उपलों और मिट्टी के चूल्हों की मांग बढ़ गई है। तीर्थ पुरोहित प्रदीप तिवारी बताते हैं कि तीर्थ पुरोहितों के यहां ही सबसे अधिक कल्पवासी रुकते हैं। उनकी पहली प्राथमिकता पवित्रता और परम्परा होती है इसके लिए वह मिट्टी के चूल्हों पर उपलों से बना भोजन ही बनाना पसंद करते हैं।