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मोबाइल से करें महाकाल के दर्शन, भक्तों के लिए लॉन्च हुई सुविधा

उज्जैन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महादेव के भक्तों के लिए अब नई प्रोटोकॉल दर्शन की प्रक्रिया बदली जा रही है। पहले यहां प्रवेश के लिए टोकन जारी किए जाते थे, लेकिन अब नई व्यवस्था के अनुसार भक्तों को मोबाइल लिंक के जरिए बुकिंग करनी होगी। इस बदलाव के तहत अब कोई भी व्यक्ति या अधिकारी सीधे टोकन लेकर दर्शन नहीं कर पाएंगे। मंदिर समिति की ओर से मोबाइल पर लिंक भेजा जाएगा, जिसके माध्यम से बुकिंग पूरी होगी और तभी प्रोटोकॉल दर्शन का अवसर मिलेगा। यह व्यवस्था इसलिए लागू की जा रही है ताकि महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की भीड़ नियंत्रण रही और वह दर्शन का पूरा लाभ उठा सके। इस कदम से न केवल प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी, बल्कि इससे अनियमितताओं पर रोक लगेगी और भक्तों का समय बचेगी। 

उज्जैन में सामने आए आई लव महाकाल’ पोस्टर, आई लव मोहम्मद मुहिम के बीच चर्चा

उज्जैन उत्तर प्रदेश के कानपुर में 'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर को लेकर शुरू हुआ विवाद देश के कई हिस्सों में एक मुहिम का रूप से चुका है। यूपी के अलावा उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मुस्लिम समुदाय के लोग 'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर लेकर जुलूस निकाल रहे हैं। इस बीच मध्य प्रदेश के उज्जैन में 'आई लव महाकाल' के पोस्टर नजर आए। एक गरबा पंडाल में पोस्टर लहराए गए और लोगों ने 'आई लव महाकाल' के नारे भी लगाए। मध्य प्रदेश के उज्जैन में  दोपहर चमनगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत ईदगाह पर 'आई लव मोहम्मद' के बैनर पोस्टर लगाए गए थे। वहीं, दूसरी और देर शाम उज्जैन के नवरंग डांडिया गरबा में 'आई लव महाकाल' के बैनर पोस्टर लगाए गए और जय महाकाल जय महाकाल का जय घोष किया गया। आयोजकों ने बताया कि यह महाकाल के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट करने का एक तरीका है। कार्यक्रम में जैसे ही डांडिया की धुन शुरू हुई, पूरा पंडाल 'जय महाकाल' के नारों से गूंज उठा। आयोजक योगेश ठाकुर ने बताया कि यह महाकाल के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट करने का एक तरीका है। जब नगर निगम शहरों के नाम से बैनर लगा सकता है, तो हम अपने आराध्य देव के लिए 'आई लव महाकाल' का बैनर क्यों नहीं लगा सकते।कार्यक्रम में जैसे ही डांडिया की धुन शुरू हुई, पूरा पंडाल 'जय महाकाल' के नारों से गूंज उठा। आई लव महाकाल के पोस्टर पर लोगों का कहना था कि यह आयोजन महाकाल के प्रति उनके गहरे प्रेम को व्यक्त करने का एक तरीका है। इससे गरबे में भक्ति और आस्था के साथ-साथ धार्मिक गौरव की झलक भी साफ दिखाई दी। इस गरबा आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। मंगलवार रात करीब 5 हजार लोगों ने यहां गरबा किया। आयोजकों की ओर से लगाए गए 'आई लव महाकाल' के पोस्टर आकर्षण का केंद्र बन गए। लोगों ने पोस्टर हाथ में लेकर तस्वीरें खिंचवाईं। गरबा में सिर्फ हिंदुओं को प्रवेश दिया जा रहा है। इसके लिए एंट्री गेट पर तिलक, कलावा और आधार कार्ड की जांच की जा रही है। इसके अलावा माइक से यह घोषणा भी की जा रही है कि गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। जीएसटी के बैनर पोस्टर से मोदी को धन्यवाद सांसद अनिल फिरोजिया की ओर से निरात डांडिया का आयोजन किया जा रहा है। पंडाल में मां वैष्णोदेवी की तर्ज पर करीब 300 फीट लंबी गुफा बनाई गई है। जिसमें 8 माताओं की विशेष झांकियां सजाई गई हैं। यहां मंगलवार रात जीएसटी गरबा आयोजित किया गया। जिसमे केंद्र सरकार द्वारा कई वस्तुओं और खाद्य सामग्री पर जीएसटी कम किए जाने को लेकर युवतियों ने हाथों में तख्तियां लेकर विशेष गरबा किया। इन तख्तियों पर लिखा था 'घटी GST, मिला उपहार, धन्यवाद मोदी सरकार।'

उज्जैन :उच्च सुरक्षा के बीच बेगम बाग में बुलडोजर कार्रवाई, 11 अवैध निर्माण ध्वस्त

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के पास बेगम बाग क्षेत्र में 11 अवैध बिल्डिंगों पर बुलडोजर चला है। यह मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है जो कि महाकाल मंदिर की पहुंच मार्ग पर है। कार्रवाई महाकाल मंदिर के नीलकंठ द्वार के पास हो रही है। यह प्रॉपर्टी उज्जैन विकास प्राधिकरण की है, जिसे 30 वर्ष की लीज पर आवासीय उपयोग के लिए दिया गया था। बावजूद इसके यहां धर्म विशेष के लोगों ने नियम विरुद्ध इसका व्यावसायिक उपयोग किया। लीज का नवीनीकरण नहीं हुआ वहीं, लीज समाप्ति के बाद भी इसका नवीनीकरण नहीं हो सका है। जब उज्जैन विकास प्राधिकरण ने नोटिस दिए तो संबंधित लोग न्यायालय पहुंच गए। लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद अवैध अतिक्रमण पर अब यह कार्रवाई की जा रही है। सुबह नौ बजे से कार्रवाई शुरू सुबह 9 बजे शुरू हुई कार्रवाई में किसी प्रकार का कोई विरोध प्रदर्शन देखने को नहीं मिला। दरअसल यहां पिछले 3 माह के भीतर इसी प्रकार 13 बिल्डिंग को जमीदोंज किया गया था, तब जरूर विरोध हुआ था। आज कार्रवाई शांतिपूर्ण चल रही है। यहां 100 से अधिक पुलिस अधिकारी और जवान तैनात किए गए है। जिनमें सीएसपी, टीआई व जवान मौजूद है। वहीं, करीब 100 की संख्या में प्रशासन का भी अमला भी मौजूद है। जिसमे विकास प्राधिकरण सीईओ, नगर निगम उपायुक्त, तहसीलदार, पटवारी और निगमकर्मी शामिल है। महाकाल मंदिर के पास है एरिया जिस जगह कार्रवाई चल रही है, यह महाकाल मंदिर के पास है। मुस्लिम बाहुल्य होने के कारण अति संवेदनशील क्षेत्र माना गया है। इसलिए एक ओर से रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उज्जैन विकास प्राधिकरण का है इलाका दरअसल, पूरा मामला इस प्रकार है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1985 में बेगम बाग क्षेत्र में करीब 30 भूखंड आवासीय तौर पर 30 साल की लीज पर दिए थे। भूखंड धारकों ने इन भूखंडों का उपयोग आवासीय तौर पर करने की बजाए पूरी तरह व्यावसायिक तौर पर कर लिया। जो कि नियम विरुद्ध था। इसके साथ ही वर्ष 2014-15 में लीज भी समाप्त हो गई । जिसे नवीनीकरण भी नहीं कराया गया। भूखंडों को लेकर उज्जैन विकास प्राधिकरण ने लगातार नोटिस दिए। वर्ष 2023-24 में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने भूखंड धारकों की लीज समाप्त कर दी । जिसको लेकर भूखंड धारक न्यायालय पहुंचे जहां उन्हें स्टे मिल गया। इन भूखंडों का अलग-अलग न्यायालय में मामला विचाराधीन रहा। न्यायालय का स्टे हटते ही तोड़ने की कार्यवाही शुरू कर दी गई । यहां पूर्व में भी तीन चरणों मे करीब तीन माह के भीतर 13 बिल्डिंगों को हटाया गया था। बड़े-बड़े हैं प्लॉट खास बात तो यह है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण ने यहां 30 भूखंड आवंटित किए थे। जिनमें प्रत्येक की साइज करीब 2400 स्क्वायर फीट थी। भूखंड धारकों ने इनके अलग-अलग टुकड़े कर करीब 65 बिल्डिंग बना ली। आज दिनांक तक 65 में से 24 बिल्डिंग को जमीदोंज किया गया है। शेष 41 बिल्डिंगों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत तोड़ा जाएगा। आज जिन 11 बिल्डिंगों पर कार्रवाई की जा रही है न्यायालय ने इनका स्टे खारिज कर दिया था । इसके बाद विकास प्राधिकरण की ओर से नोटिस दिया गया था, जिनकी समय सीमा समाप्त हो गई। भवन मालिकों से बातचीत की गई और उन्हें न्यायालय प्रक्रिया के बारे में समझाया गया। इसके बाद उन्होंने स्वतः अपनी बिल्डिंग खाली करना शुरू कर दी। इसलिए यह कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है। इनलोगों के हैं मकान आज जिन 11 बिल्डिंग को जमीदोंज किया जा रहा है उनकी विस्तृत जानकारी यह है कि इसका भूखंड क्रमांक 15, 18, 29, 59 और 65 है। इन 5 भूखंडों पर 11 बिल्डिंग बना ली गई थी। जो कि वर्तमान में शेर बानो नागौरी, मोहम्मद अकरम, शहीदुर रहमान, सरफराज, मुबारिक, मोहम्मद तौसीब, अब्दुल लतीफ, सैय्यद कमर अली, मोहम्मद सिद्दीकी कुरेशी, नासिर अली, मोहम्मद सलीम के नाम पर है। उज्जैन विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप कुमार सोनी ने बताया कि माननीय न्यायालय से स्टे खारिज होने के बाद यह कार्रवाई की जा रही है । भूखंड धारक को भूखंड आवासीय तौर पर दिए गए थे जिसे उन्होंने व्यावसायिक उपयोग किया। इसके अलावा लीज समाप्त होने के बाद लीज नवीनीकरण भी नहीं हो सका है। इसलिए यह कार्रवाई की गई।

उज्जैन : राजसी सवारी मार्ग पर पालकी पर की गई हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा

उज्जैन नगर भ्रमण पर निकले राजाधिराज बाबा महाकाल राजसी सवारी मार्ग पर पालकी पर की गई हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा राजसी सवारी मार्ग पर उमड़ा देश के कोने-कोने से आये भक्तों का जनसैलाब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभामंडपम् में भगवान चंद्रमोलेश्वर का किया पूजन-अर्चन राजसी सवारी में त्रिनेत्रधारी भगवान श्रीमहाकाल के दर्शन कर भाव-विभोर हुए भक्तजन मुख्यमंत्री ने सवारी मार्ग पर डमरु और झांझ बजाकर रजत पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर का किया स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को उज्जैन में निकली राजाधिराज बाबा महाकाल की राजसी सवारी के अवसर पर देश एवं प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से प्रदेशवासियों के कल्याण और मंगलमय जीवन की कामना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देशभर में श्रावण मास में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक महादेव की सवारियां निकलती हैं। लेकिन उत्तर और दक्षिण परम्पराओं के अनुसार भादवा (भाद्रपद) के दो सोमवार तक भी बाबा महाकाल की सवारी निकलती है। आज उज्जैन में बाबा महाकाल ने आखिरी (राजसी) सवारी कर नगर भ्रमण किया और अपनी प्रजा (जनता) के हाल-चाल जाने। बाबा ने अपने राजाधिराज स्वरुप में भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से बाबा की भव्य राजसी सवारी के लिए सभी व्यवस्थाएं की गईं और धूमधाम से सवारी की अगवानी की गई। बाबा की सवारी सहित सवारी पथ पर पुष्पवर्षा भी की गई। इस वर्ष विजयादशमी पर्व पर बाबा महाकाल एक बार फिर सवारी के साथ जनदर्शन के लिए पधारेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से कामना करते हुए कहा कि बाबा का शुभाशीष प्रदेशवासियों पर हमेशा बना रहे। कृपावंत भगवान महाकाल सबका कल्याण करें, सबके दुःख हर लें। भगवान महाकालेश्वर की इस वर्ष की श्रावण-भाद्रपद माह में निकलने वाली सवारियों के क्रम में सोमवार,18 अगस्त को सायं 4 बजे राजसी सवारी धूमधाम से निकाली गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभामंडपम में भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन किया। रजत पालकी में विराजित चंद्रमौलेश्वर भगवान अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले तो सम्पूर्ण उज्जयिनी भगवान महाकालेश्वर की जय-जयकार से गुंजायमान हो गई। चारों दिशाओं में भगवान श्रीमहाकाल की भक्ति में लीन भक्तों के नेत्र त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की एक झलक पाकर भाव-विभोर हो उठे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने सवारी निकलने के पूर्व महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप में भगवान चन्द्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन विधिवत रूप से किया। सभा मंडप में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय, विधायक महेश परमार, महापौर मुकेश टटवाल, सभापति श्रीमती कलावती यादव ने भी भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन किया और आरती में सम्मिलित हुए। पूजन के बाद निर्धारित समय पर भगवान महाकाल की पालकी को नगर भ्रमण के लिये रवाना किया गया। पूजन-अर्चन पुजारी पं. घनश्याम शर्मा व अन्य पुजारियों द्वारा सम्पन्न करवाया गया। इस अवसर पर सभा मंडप में पूजन-अर्चन के दौरान संजय अग्रवाल, रवि सोलंकी आदि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंशानुरुप सवारी के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर रजत पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई। रजत पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर जैसे ही मुख्य द्वार पर पहुंचे असंख्य श्रद्धालुओं ने भगवान महाकालेश्वर का स्वागत-वन्दन किया। सशस्त्र पुलिस बल के जवानों तथा प्रदेश के विभिन्न बटालियनों के जवानों द्वारा सवारी को सलामी दी गई। पालकी के आगे घुड़सवार दल, सशस्त्र पुलिस बल के जवान आदि की टुकडियां मार्च पास्ट करते हुए चल रही थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सवारी में शामिल हुए और सवारी मार्ग पर उन्होंने ड़मरु और झांझ बजाया। राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर की सवारी में असंख्य श्रध्दालुओं ने सवारी मार्ग पर ड़मरु, झांझ-मंजीरे बजाकर अवंतिकानाथ भगवान महाकालेश्वर की जय जयकार की। भगवान श्रीमहाकाल ने भक्तों को छह रूपों में दिये दर्शन राजसी सवारी में भगवान महाकालेश्वर ने छह विभिन्न स्वरूपों में अपनें भक्तों को दर्शन दिये। भगवान श्रीमहाकाल की राजसी सवारी में रजत पालकी में चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद एवं षष्ठम् सवारी में सप्तधान मुखारविंद के रूपों में भक्तों को दर्शन दिए। भगवान श्रीमहाकालेश्वर की सवारी परम्परागत मार्गों से होती हुई रामघाट पहुंची। रामघाट पर भगवान महाकाल का क्षिप्रा के जल से जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई। पूजन-अर्चन पं. घनश्याम शर्मा और अन्य पुजारियों के द्वारा सम्पन्न कराया गया। पूजन के दौरान प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, महापौर मुकेश टटवाल,वैभव यादव सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। 70 भजन मण्डलियां सवारी में हुई शामिल श्रीमहाकालेश्वर भगवान की प्रमुख राजसी सवारी के चल समारोह में सबसे आगे श्रीमहाकालेश्वर मंदिर का प्रचार वाहन चला। उसके बाद यातायात पुलिस, तोपची, भगवान महाकालेश्वर का रजत ध्वज, घुडसवार, विशेष सशस्त्र बल सलामी गार्ड, स्काउट / गाइड सदस्य, सेवा समिति बैंड के बाद उज्जैन के अतिरिक्त मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से परंपरागत रूप से सवारी सम्मिलित होने वाली 70 भजन मंडलियां चल समारोह में प्रभु का गुणगान करते हुए शामिल हुई। साथ ही नगर के साधु-संत व गणमान्य नागरिक, पुलिस बैंड, नगर सेना के सलामी गार्ड की टुकड़ी, महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी व पुरोहितगण सवारी के साथ रहे। उनके बाद महाकालेश्वर भगवान (चंद्रमौलेश्वर) की प्रमुख पालकी, भारत बैंड, रथ पर गरुड़ पर विराजित शिव-तांडव, रमेश बैंड, नंदी रथ पर उमा महेश स्वरुप, गणेश बैंड, रथ पर होल्कर स्टेट मुखारविंद, आर.के. बैंड, रथ पर सप्तधान मुखारविंद के पश्चात राजकमल म्युजिकल ग्रुप बैंड व मनमहेश स्वरुप हाथी पर विराजित रहे। चलित रथ के माध्यम से श्रद्धालुओं ने करे दर्शन भगवान श्रीमहाकालेश्वर की सवारी के सुगमतापूर्वक दर्शन के लिये चलित रथ की व्यवस्था की गई। जिसके दोनों ओर एलईडी के माध्यम से सवारी का लाईव प्रसारण किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को भगवान के सहज दर्शन का लाभ मिला। साथ ही उज्जैन के अन्य स्थानों फ्रीगंज, नानाखेड़ा, दत्तअखाड़ा आदि क्षेत्रों में भी सवारी का लाइव प्रसारण किया गया। सवारी में जनजातीय एवं लोक नृत्य कलाकारों ने दीं आकर्षक प्रस्तुतियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप बाबा श्रीमहाकालेश्वर की सवारी को भव्य स्वरुप देने के लिए जनजातीय कलाकारों के दल ने महाकालेश्वर भगवान की राजसी सवारी में सहभागिता की। इसमें लामूलाल धुर्वे अनूपपुर के नेतृत्व में ढुलिया जनजातीय गुदुमबाजा नृत्‍य, भुवनेश्वर से अभिजीत दास नेतृत्व में श्रृंगारी लोक नृत्‍य, सुमित … Read more

उज्जैन मंदिर में पोस्टर विवाद: अश्लील पहनावे को लेकर मां-बाप पर सवाल उठे

उज्जैन  धार्मिक नगरी उज्जैन में अधिकांश मंदिरों में सनातनी ड्रेस पहनने को लेकर जोर दिया जा रहा है. कई मंदिरों में ड्रेस कोड का पालन करने के लिए पोस्टर व बैनर लगाए जा चुके हैं. इन पोस्टर में सनातनी ड्रेस व मंदिर में दर्शन करने की गाइडलाइन लिखी है. इसके साथ ही मंदिर के पुजारी भी यहां आने वालों भक्तों के लिए सनातनी ड्रेस पहनकर ही आने का आग्रह कर रहे हैं. इन दिनों ऐसा ही एक पोस्टर उज्जैन मे चर्चा का विषय बना हुआ है. दरसल पूरा मामला उज्जैन जिले के नागदा के बिड़ला गांव में स्थित बड़े गणेश मंदिर का है यहा मंदिर मे एक पोस्टर लगाया गया है, जिसमें लड़कियों के पहनावे को लेकर पांच सवाल पूछे गए हैं. इस पोस्टर को लेकर तरह-तरह के लोगों के मन मे विचार आ रहेगा है. इतना ही नही अब पोस्टर पढ़ने के बाद अखिल भारतीय पुजारी महासंघ व मंदिर मे आने वाले हर श्रद्धांलु इस पोस्टर का समर्थन कर रहे है. भगवान भरोसे लगा पोस्टर जैसे ही इस पोस्टर को लोगों नें मंदिर मे देखा तो उन्होंने पुजारी से और पुजारी नें श्रद्धांलुओ से पूछा, लेकिन यह पोस्टर किसने और कब लगाया, इस बारे में मंदिर समिति या स्थानीय प्रशासन को कोई जानकारी नहीं है, लेकिन इसने क्षेत्र में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. पोस्टर में माता-पिता को लक्षित करते हुए कहा गया है कि लड़कियों के अमर्यादित पहनावे के लिए मां जिम्मेदार है, जबकि पिता की मौन स्वीकृति को भी कटघरे में खड़ा किया गया है. इसके साथ ही अर्धनग्न कपड़े पहनने वाली लड़कियों को ”मॉडर्न, स्मार्ट, स्टैंडर्ड और आधुनिक” मानने वाली सोच पर तंज कसा गया है. साथ ही पोस्टर में अंत में जनजागरण समिति का उल्लेख किया गया है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह किसी सामाजिक संगठन की पहल हो सकती है. हालांकि, अब तक किसी संस्था ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है. पुजारी महासंघ व श्रद्धांलु कर रहे समर्थन पोस्टर का अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने समर्थन किया है. पुजारी महासंघ के अध्यक्ष और महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा का कहना है कि मंदिर एक आस्था और मर्यादा का स्थान है. यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं, विशेषकर युवतियों को शालीनता का ध्यान रखना चाहिए खासकर मंदिर में प्रवेश करते समय. दक्षिण के मंदिरों में यह व्यवस्था पहले से लागू है और महाकाल मंदिर के गर्भगृह में भी ड्रेस कोड लागू है. इतना ही नही मंदिर मे आने वाले श्रद्धांलु भी इस बाट का समर्थन कर रहे है. बोर्ड पर 5 प्वाइंट्स में यह सवाल 1. क्या टीवी शो, फिल्मों को देख अपनी नासमझ से छोटी बेटियों (4, 6, 8 वर्ष से अधिक) की अमर्यादित ड्रेस पसंद कर फूहड़ एवं अश्लील पहनावे का बीज बोने वाली माता हैं? 2. क्या अपनी 10 वर्ष से अधिक उम्र की बेटियों को फूहड़, अमर्यादित, एकदम टाइट एवं छोटे-छोटे कपड़े पहनने पर मौन रहने वाला पिता है? 3. क्या छोटे, कम एवं अर्ध नग्न ड्रेस पहनने वाली लड़की को मॉडर्न, स्मार्ट, स्टैंडर्ड एवं आधुनिक समझने वाली सोच है? 4. अपनी बेटियों को विचारों की आजादी दीजिए अमर्यादित, अश्लील पहनावे की नहीं। 5. शालीन एवं मर्यादित कपड़े आपकी बेटी का सुरक्षा कवच हैं।

महाकाल की पांचवीं सवारी में आज ओरछा, मां बगलामुखी और मां शारदा शक्तिपीठ की झलक

उज्जैन  आज सोमवार 11 अगस्त को श्री महाकालेश्वर भगवान की पांचवीं सवारी निकलेगी। सवारी शाम 4:00 बजे मंदिर प्रांगण से निकलेगी। भगवान महाकाल सवारी में भक्तों को पांच स्वरूप में दर्शन देंगे। कल निकलने वाली इस भव्य सवारी की तैयारी कर ली गई है। महाकाल की सवारी में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है, जैसे कि कल सोमवार को भी भक्त बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ सकते हैं। सवारी निकलने से पहले मंदिर के सभा मंडप में भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर का पूजन-अर्चन किया जाएगा। पालकी में श्री चंद्रमोलेश्वर भगवान भक्तों को दर्शन देंगे, जबकि हाथी पर श्री मनमहेश को भक्त निहार सकेंगे। इसके साथ ही, करोड़ रथ पर श्री शिव तांडव, नंदी रथ पर श्री उमा महेश और ढोल रथ पर श्री होलकर स्टेट के मुखारविंद शामिल रहेंगे। जानिए सवारी का मार्ग वहीं, महाकाल मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवान पालकी में विराजित भगवान को सलामी देंगे। हर बार की तरह महाकाल की सवारी परंपरागत मार्ग से ही निकलेगी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्शी बाजार और कहारवाड़ी से होकर सवारी रामघाट तक पहुंचेगी। जैसे ही रामघाट पर सवारी पहुंचेगी, घाट पर नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन किया जाएगा। अभिषेक-पूजन के बाद सवारी रामानुज कोट मोड़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, हाथी का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए महाकालेश्वर मंदिर लौटेगी। यह रहेगा सवारी का मार्ग महाकाल मंदिर से शुरू होकर सवारी कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए शिप्रा तट पहुंचेगी। यहां पूजा अर्चना के बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबारोड, टंकी चौरहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होते हुए शाम 7 बजे पुन: मंदिर पहुंचेगी। जनजातीय एवं लोक नृत्य कलाकारों के दल देंगे प्रस्तुति सवारी को भव्य स्वरूप देने के लिए चार जनजातीय कलाकारों के दल सवारी में सहभागिता करेंगे। बैतूल से मिलाप इवने के नेतृत्व में गौंड जनजातीय ठाट्या नृत्य, खजुराहो से गणेश रजक के नेतृत्व कछियाई लोक नृत्य, दमोह से पंकज नामदेव नेतृत्व में बधाई लोक नृत्य एवं डिण्डोरी के सुखीराम मरावी के नेतृत्व में गेडी जनजातीय नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी। जनजातीय नृत्य भी होगा इस बार सवारी में पालकी भजन मंडली के अलावा चार जनजातीय कलाकारों के दल भी प्रस्तुति देंगे। बैतूल से गौंड जनजातीय ठाट्या नृत्य, खजुराहो से कछियाई लोक नृत्य, दमोह से बधाई लोक नृत्य और डिंडौरी के गेड़ी जनजातीय नृत्य की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र होंगी। सवारी के साथ मध्यप्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थलों की झांकियां भी शामिल होंगी। इनमें श्री राजाराम लोक ओरछा, मां बगलामुखी माता मंदिर, मां शारदा शक्तिपीठ मैहर और देवीलोक मां श्री बिजासन माता धाम सलकनपुर की प्रतिकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। लाइव प्रसारण की भी व्यवस्था भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी के सुगमतापूर्वक दर्शन के लिए श्री महाकालेश्वर मन्दिर प्रबंध समिति द्वारा चलित रथ की व्यवस्था की गई है। जिसके दोनों ओर एलईडी के माध्यम से सवारी का लाइव प्रसारण किया जाएगा। जिससे श्रद्धालु भगवान के दर्शनों का लाभ सकेंगे। साथ ही उज्जैन के अन्य स्थानों जैसे फ्रीगंज, नानाखेड़ा, दत्त अखाड़ा क्षेत्रों पर भी सवारी के लाइव प्रसारण को देख सकेंगे। भगवान के दर्शनों का लाभ ले सकेंगे। क्या कुछ रहेगा ख़ास? भगवान महाकाल की पांचवीं सवारी बेहद खास होने वाली है। दरअसल, सवारी के साथ मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थलों की झांकियां भी देखने को मिलेंगी। इन झांकियों में मां शारदा शक्तिपीठ मैहर, राजारामलोक ओरछा, मां बगलामुखी माता मंदिर और देवी लोक मां श्री बिजासन माता धाम सलकनपुर की झांकियां शामिल रहेंगी। इसके साथ ही, सवारी में चार जनजातीय कलाकारों के दल भी प्रस्तुति देंगे। इनमें बैतूल से गोंद जनजातीय तात्या नृत्य, खजुराहो से कछिया लोक नृत्य, दमोह से बधाई लोक नृत्य और डिंडोरी से गेड़ी जनजाति नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी।

नंदी हाल में 66 पंडितों ने किया पर्जन्य अनुष्ठान, CM मोहन यादव ने किया शुभारंभ

उज्जैन  मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अच्छी बारिश की कामना के लिए शनिवार को पर्जन्य अनुष्ठान हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव अपनी पत्नी के साथ शामिल हुए. इस दौरान सीएम ने बाबा महाकाल से आनंद बरसाने की कामना की. मानसून आने के डेढ़ माह बाद भी मालवा क्षेत्र में बारिश नहीं हुई, जिससे यहां के लोग चिंतित है.  66 पंडितों ने किया पर्जन्य अनुष्ठान शनिवार को रक्षाबंधन पर्व पर अच्छी बारिश की कामना के लिए 66 पंडितों ने महाकाल मंदिर के नंदी हॉल में पर्जन्य अनुष्ठान किया. करीब तीन घंटे तक महारुद्र अनुष्ठान का पाठ किया गया. इस दौरान पुजारी-पंडितों द्वारा नंदी हॉल में शिवलिंग का महा पूजन कर गर्भ गृह में बाबा महाकाल को सतत जल धारा अर्पित किया गया. वहीं नंदी हॉल में पुजारियों ने मंत्रों का जाप किया. बता दें कि इस अनुष्ठान में सीएम मोहन यादव पत्नी सीमा यादव के साथ शामिल हुए. मालवा क्षेत्र विशेषकर उज्जैन, इंदौर, देवास और आसपास के इलाकों में बारिश नहीं होने से किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। इस संकट को दूर करने और उत्तम वर्षा एवं अमृत वृष्टि की कामना के लिए महाकाल मंदिर के नंदी हाल में यह विशेष अनुष्ठान आयोजित किया गया। अनुष्ठान के दौरान महारुद्र पाठ किया जा रहा है, जो लगभग तीन घंटे तक चलेगा। नंदी हॉल में मौजूद पुजारियों ने शिवलिंग का महापूजन किया। इस दौरान गर्भगृह में सतत जलधारा भगवान महाकाल को अर्पित की गई और नंदी हाल में मंत्रोच्चार के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया गया। बारिश नहीं होने से चिंतित मालवा के किसान बता दें कि सावन के महीने में मामलवा में अच्छी बारिश होती थी. प्रदेश में कई जगह अच्छी बारिश हुई भी, लेकिन उज्जैन, इंदौर, देवास सहित मालवा के कई क्षेत्रों में बारिश नहीं हुई, जिससे सूखे की स्थित उत्पन्न हो गई है.. जिससे किसान फसलों को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं. वहीं शहरों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है. इसी को देखते हुए पुजारियों ने महाकाल बाबा से अच्छी बारिश की कामना करते हुए पर्जन्य अनुष्ठान किया. बाबा प्रदेश में आनंद बरसाए  महाकाल मंदिर में हुए पर्जन्य अनुष्ठान के बाद सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में कहीं ज्यादा तो कहीं कम बारिश हुई है. इसलिए अनुष्ठान में कामना की है कि बाबा पूरे प्रदेश में आनंद बरसाए. इस दौरान सीएम ने रक्षाबंधन की बधाई भी दी. उन्होंने कहा कि आज भाई बहनों का अमिट महा रक्षाबंधन है. बहनें रक्षा सूत्र बांधकर भाइयों के दीर्घायु की कामना करती है. वहीं भाइयों ने रक्षा का वचन देते हैं. उज्जैन में 9 दिन का पानी शेष  उज्जैन में प्रतिदिन पेयजल संकट बढ़ता जा रहा है. शहर की प्यास बुझाने वाला गंभीर डैम में 9 दिन का पानी शेष बचा है. पहले से ही शहरवासियों को एक दिन छोड़कर पेयजल मिल रहा है. ऐसे में अगर इस साल बारिश नहीं होती है और नर्मदा लिंक योजना 8 दिन में पूरी नहीं हुई तो वर्ष 2009 जैसा जलसंकट उज्जैन को झेलना पड़ सकता है. सीएम बोले- बाबा महाकाल आनंद बरसाएं सीएम मोहन यादव ने रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना के अनुष्ठान में शामिल हुआ। प्रदेश में कहीं अधिक तो कहीं कम बारिश हो रही है। मैं बाबा महाकाल से प्रार्थना करता हूं कि हर जगह आनंद बरसाएं। यज्ञ शुरू हो गया है, बाबा महाकाल उसे सफल बनाएं। मंदिर पुजारी आशीष ने कहा कि रक्षाबंधन पूर्णिमा महापर्व के अवसर पर, प्रदेश में उत्तम वर्षा की कामना के लिए भगवान महादेव के दरबार में महा रुद्राभिषेक प्रारंभ किया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा पूजन किया गया है। ब्राह्मणों के द्वारा सतत जलधारा और दूधधारा से अभिषेक किया जा रहा है। गंभीर डेम में केवल 10 दिन का जल भंडार श्रावण माह का आज अंतिम दिन है। इस साल प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई है, लेकिन मालवा क्षेत्र के कई हिस्सों में अब तक माकूल वर्षा नहीं हुई। उज्जैन में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। शहर को जलापूर्ति करने वाला एकमात्र गंभीर डेम अब केवल 10 दिन का जल भंडारण शेष रखे हुए है। पहले से ही उज्जैन में एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति की जा रही है। सावन जैसे पवित्र माह में भी जब वर्षा नहीं हो रही, तब जल संकट और अधिक गहराता जा रहा है। इन्हीं कारणों से बारिश की कामना के लिए यह पर्जन्य अनुष्ठान किया जा रहा है, ताकि क्षेत्र में शीघ्र अच्छी बारिश हो और लोगों को राहत मिले।

60 डिब्बे घी और 40 क्विंटल बेसन से बने सवा लाख लड्डू, महाकाल को बंधी पहली राखी

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को राखी बंधने के साथ ही रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत हो गई। अमर पुजारी के परिवार की महिलाओं द्वारा तैयार की गई खास राखी उन्हें अर्पित की गई है। महाकाल को जो राखी बांधी गई है उसमें मखमल का कपड़ा, रेशमी धागा और मोती का उपयोग हुआ है। राखी पर भगवान गणेश जी विराजित हैं। शनिवार को सबसे पहले तड़के 3 बजे भस्म आरती के लिए पट खोले गए। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया। भस्म आरती के दौरान ही उन्हें विशेष श्रृंगार के साथ राखी अर्पित की गई। दरअसल, रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आज कालों के काल बाबा महाकाल के दरबार में सबसे पहले बाबा महाकाल को राखी बांधकर उन्हें सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। प्रतिवर्ष बाबा महाकाल को पुजारी परिवार द्वारा सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया जाता है जिसे एक सप्ताह में मंदिर परिसर में ही तैयार किया जाता है। भक्तों ने समाप्त किया उपवास महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि पुजारी परिवार द्वारा आज बाबा महाकाल को लगाई गई सवा लाख लड्डूओ की भोग प्रसादी का वितरण भक्तों को प्रसाद स्वरूप मे किया गया। बाबा महाकाल की इस प्रसादी को पाकर भक्त तो खुश हो ही गए, लेकिन यह वही प्रसादी है जिसे खाने के बाद ही महाकाल के भक्त श्रावण मास में रखे गए उपवास को खोलते हैं। सुबह महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस प्रसादी को ग्रहण करने के साथ ही एक माह के अपने उपवास को समाप्त किया। 4 दिन में तैयार किए सवा लाख लड्‌डू भगवान महाकाल को राखी बांधने बाद भस्मारती के दौरान ही सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इस महाभोग की तैयारी पिछले चार दिनों से चल रही है। मंगलवार से ही मंदिर में पुजारी कक्ष के पीछे भट्टी पूजन के साथ लड्डू बनाना शुरू हो गया था। लड्डू निर्माण करने वाले हलवाई ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि वे पिछले 12 वर्षों से रक्षाबंधन पर्व पर महाकाल के लिए लड्डू बना रहे हैं। महाकाल के दरबार से होती है त्योहार की शुरुआत पंडित अमर पुजारी ने बताया कि हर त्योहार की शुरुआत भगवान महाकाल के दरबार से होती है। इसी क्रम में सबसे पहले राजाधिराज भगवान श्री महाकालेश्वर को राखी बांधी गई। वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को राखी बांधकर किया जाता है। नंदी हॉल और गर्भगृह में फूलों से आकर्षक सजावट की जाती है। इसके बाद सवा लाख लड्डुओं का महाभोग बाबा को अर्पित किया जाता है। रक्षाबंधन पर्व पर महाकाल मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्तों को लड्डू प्रसाद वितरित किया जाता है। ऐसे अद्भुत योग शताब्दियों में एक बार इस साल 9 अगस्त को देशभर में रक्षाबंधन खास संयोग के साथ मनेगा। भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक का ये पर्व इस बार श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, करण, मकर राशि में चंद्रमा और पूर्णिमा तिथि में मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, ऐसा योग 297 साल बाद बना है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला ने कहा- ग्रहों की वर्तमान स्थिति 1728 में बने दुर्लभ संयोग को दोहरा रही है। रक्षाबंधन पर 8 ग्रह उन्हीं राशियों में रहेंगे, जिनमें 1728 में थे। इनमें सूर्य कर्क, चंद्र मकर, मंगल कन्या, बुध कर्क, गुरु और शुक्र मिथुन, राहु कुंभ और केतु सिंह राशि में रहेंगे। ऐसे अद्भुत योग शताब्दियों में एक बार ही बनते हैं, जिससे इस बार का रक्षाबंधन और भी पुण्य फलदायी माना जा रहा है। चार दिन में तैयार किए लड्डू भगवान महाकाल को राखी बांधने बाद भस्मआरती के दौरान ही सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इस महाभोग की तैयारी पिछले चार दिनों से चल रही है। मंगलवार से ही मंदिर में पुजारी कक्ष के पीछे भट्टी पूजन के साथ लड्डू बनाना शुरू हो गया था।  लड्डू निर्माण करने वाले हलवाई ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि वे पिछले 12 वर्षों से रक्षाबंधन पर्व पर महाकाल के लिए लड्डू बना रहे हैं। इस लड्डू के निर्माण में 60 डिब्बे देसी घी, 40 क्विंटल बेसन, 40 क्विंटल शकर बुरा और 25 किलो ड्राई फ्रूट शामिल किए गए। श्री खजराना गणेश को बांधी 196 वर्गफीट की राखी -इंदौर-कोलकाता के कारीगरों ने रातभर में बनाई इधर, जनता के सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और देश के वीर सैनिकों की रक्षा की मनोकामना के साथ रक्षाबंधन के पर्व पर शनिवार को इंदौर में विश्व प्रसिद्ध भगवान खजराना गणेश को 196 वर्गफीट की विशाल राखी बांधी गई। राखी बांधते समय पंडितों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया। खास बात यह कि यह राखी अलग-अलग शहरों से लाए गए फूलों से इंदौर और कोलकाता के कारीगरों ने रातभर में तैयार की गई है, जिसमें पांच दिन तक ताजगी रहेगी। राखी श्री विघ्नहर्ता गणेश भक्त समिति ने बनाई है। समिति के संस्थापक राजेश बिड़कर और राहुल शर्मा ने बताया कि यह लगातार नौवां वर्ष है जब विशाल राखी श्री गणेश को अर्पित की गई। राखी अर्पित करने की शुरूआत आठ साल पहले की गई थी, तब 66 (36 वर्ग फीट) की राखी बनाई गई थी। उनका कहना है कि जब खजराना गणेश की स्थापना हुई तो उनका स्वरूप काफी छोटा था। फिर धीरे-धीरे बढ़ते गया। इसी तरह हर साल राखी का साइज भी बढ़ाया गया। इस बार 1414 (196) वर्ग फीट की राखी बनाई गई। इसकी डोर मंदिर के चारों ओर घुमाकर बांधी गई। उनका दावा है कि यह राखी दुनिया की सबसे बड़ी राखी है। 

महाकाल की सवारी में जनसैलाब, लोक नृत्य से गूंजा उज्जैन, रामघाट पर पूजन की तैयारी

उज्जैन आज श्रावण माह का चौथा और अंतिम सोमवार है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में अब तक (अंतिम सोमवार) करीब 2 लाख श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। सोमवार तड़के ढाई बजे भस्म आरती के दौरान कपाट खोले गए। भगवान महाकाल को जल अर्पित कर भस्म रमाई गई।  भस्म आरती के दौरान चलायमान दर्शन व्यवस्था में बिना परमिशन वाले भक्तों ने भी भस्म आरती में चलित दर्शन दर्शन किए। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। पंडित महेश पुजारी ने बताया कि श्रावण माह तपस्या का माह रहता है। महाकाल मंदिर में भगवान की दिनचर्या रोजाना की तरह रही। सुबह भगवान को भांग चंदन अर्पित किया गया। श्रावण माह में महाकाल मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्त जल अर्पित कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर उन्हें प्रसन्न करते हैं। शाम 4 बजे महाकाल भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। पालकी में श्री महाकालेश्वर श्री चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में, गजराज पर श्री मनमहेश रूप, गरुड रथ पर श्री शिव तांडव प्रतिमा, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश जी स्वरूप में दर्शन दे रहे हैं। मंदिर के सभा मंडप में भगवान की पालकी का पूजन हुआ। मंदिर के सभा मंडप में भगवान की पालकी का पूजन हुआ। मंदिर के सभा मंडप में भगवान की पालकी का पूजन हुआ। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी गई। सवारी के साथ घुड़सवार पुलिस दल, सशस्त्र पुलिस बल, होमगार्ड के जवान, भजन मंडली, झांझ मंडली के सदस्य व पुलिस बैंड भी शामिल हो रहे हैं। इससे पहले श्रावण माह के पहले सोमवार पर 2.5 लाख, दूसरे पर 3 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। तीसरे सोमवार को 4 लाख लोग पहुंचे थे।

महाकाल की सवारी में उमड़ेगा आस्था और कला का संगम, उमा-महेश की झलक और जनजातीय नृत्य का समावेश

उज्जैन  श्री महाकालेश्वर मंदिर से सावन महीने की चौथी सवारी सोमवार, 4 अगस्त को निकलेगी। इस बार भगवान महाकाल की पालकी के साथ नंदी रथ पर भगवान श्री उमा-महेश की प्रतिमा भी शामिल की जाएगी। चौथी सवारी की थीम मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आधारित होगी। सवारी शाम 4 बजे निकलेगी भगवान महाकाल की यह सवारी शाम 4 बजे मंदिर से निकलेगी। भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर पालकी में विराजेंगे, श्री मनमहेश हाथी पर और श्री शिव-तांडव गरुड़ रथ पर होंगे। भगवान का पूजन-अर्चन मंदिर में किया जाएगा, फिर पालकी नगर भ्रमण पर रवाना होगी। मंदिर के बाहर पुलिस जवान भगवान को सलामी देंगे। सवारी के साथ घुड़सवार पुलिस, होमगार्ड, भजन मंडली, झांझ मंडली और पुलिस बैंड भी चलेगा। इन मार्गो से निकलेगी सवारी सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी से होती हुई रामघाट पहुंचेगी। वहाँ भगवान का शिप्रा नदी के जल से अभिषेक होगा। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए वापस महाकाल मंदिर पहुंचेगी। पर्यटन पर आधारित झांकियां रहेगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार, इस बार की सवारी में मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों की झांकियां भी शामिल रहेंगी।     वन्यजीव पर्यटन: कान्हा, पेंच, रातापानी और पन्ना टाइगर रिजर्व की झांकियां     धार्मिक पर्यटन: उज्जैन के सांदीपनि आश्रम और ओंकारेश्वर का एकात्मधाम     ऐतिहासिक स्थल: ग्वालियर और चंदेरी के किले, खजुराहो के मंदिर     ग्रामीण पर्यटन: ओरछा में होम स्टे और मंदिर की झांकी चार जनजातीय और लोक नृत्य दल सवारी में प्रस्तुति देंगे।     धार से भगोरिया नृत्य– मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में     छिंदवाड़ा से भड़म नृत्य– मोजीलाल डाडोलिया     उज्जैन से मटकी नृत्य- कृष्णा वर्मा के नेतृत्व में     सिवनी से सैला नृत्य- राहुल धुर्वे के नेतृत्व में