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जंगलों पर माफिया का वार नाकाम: बुरहानपुर में सलाई गोंद की बड़ी खेप पकड़ी गई

बुरहानपुर वन विभाग की टीम ने रविवार को वन परिक्षेत्र खकनार के बोरखेड़ा से करीब साढ़े आठ क्विंटल सलाई गोंद जब्त की है। यह गोंद पिकअप वाहन क्रमांक एमपी 09 जीएच 3170 के माध्यम से ले जाई जा रही थी। वन विभाग की टीम ने जब वाहन रोककर इसकी जांच की तो उसमें गोंद भरी पाई गई, जिसके बाद गोंद और वाहन को जब्त कर लिया गया। चालक के खिलाफ वन अपराध का प्रकरण दर्ज किया जा रहा है। पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है ज्ञात हो कि जिले के जंगलों से सलाई व धावड़ा सहित अन्य पेड़ों से गोंद की निकासी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद गोंद माफिया लगातार सक्रिय हैं और जंगलों से अवैध रूप से गोंद निकाल रहे हैं। बीते माह प्रतिबंध के बावजूद गोंद माफिया द्वारा पेड़ों को खोखला करने संबंधी खबर प्रमुखता से सामने आई थी। इसके बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ाई और लगातार कार्रवाई करते हुए गोंद की बड़ी खेपें पकड़ना शुरू किया है। सीसीएफ और वन विभाग की टीम की संयुक्त कार्रवाई दो दिन पहले खंडवा सीसीएफ और बुरहानपुर वन विभाग की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए धूलकोट रेंज से 780 किलो गोंद जब्त किया था। इसके अलावा शाहपुर क्षेत्र से एक बाइक भी जब्त की गई थी। उल्लेखनीय है कि एक जनहित याचिका पर निर्णय सुनाते हुए हाईकोर्ट ने गोंद निकासी पर प्रतिबंध लगाया है। इसके चलते वन विभाग ने पूर्व में जारी किए गए गोंद निकासी के सभी लाइसेंस रद्द कर दिए हैं

लापरवाही पड़ी भारी! जल जीवन मिशन में गड़बड़ी पर 26 इंजीनियरों पर गिरी गाज

लखनऊ प्रदेश के हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रहे ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने काम में लापरवाही बरतने वाले इंजीनियरों-कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जल जीवन मिशन परियोजना के कार्यों में लेटलतीफी, लापरवाही करने वाले 26 इंजीनियरों पर निलंबन, विभागीय कार्रवाई, कारण बताओ नोटिस जैसी कार्रवाइयों की गाज गिरी है। नमामि गंगे विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, और जूनियर इंजीनियर रैंक के 12 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है।  वहीं, चार अधिशासी अभियंताओं के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा परियोजना के कार्यों में धीमी प्रगति को लेकर तीन अधिशासी अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही विभिन्न योजनाओं से शिकायत मिलने के बाद सात इंजीनियरों का तबादला कर दिया गया है। हाल के दिनों में लेटलतीफी के मामले में जल निगम कर्मियों के खिलाफ यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर कर्मचारी अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं करते हैं, तो बर्खास्तगी का भी एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जनहित से जुड़े कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता एवं उत्तरवायित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी स्तर पर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। जल निगम ग्रामीण विभाग ने जिन कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है, उसमें लखीमपुर खीरी के अधिशासी अभियंता अविनाश गुप्ता, जौनपुर के अधिशासी अभियंता सौमित्र श्रीवास्तव, गाजीपुर के अधिशासी अभियंता मो. कासिम हाशमी, चंदौली के कार्यवाहक अधिशासी अभियंता अमित राजपूत, चंदौली के सहायक अभियंता सीताराम यादव, बिजनौर के सहायक अभियंता अकबर हसन, औरैया के जूनियर इंजीनियर अनुराग गोयल, हाथरस के कुलदीप कुमार सिंह, आजमगढ़ के राजेन्द्र कुमार यादव, बरेली के रूप चन्द्र, बाराबंकी के जूनियर इंजीनियर अवनीश प्रताप सिंह और कुशीनगर के कार्यवाहक खंडीय लेखाकार धर्मप्रकाश महेश्वरी शामिल हैं। जल निगम ग्रामीण विभाग ने चार इंजिनियरों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक जांच के आदेश दिए हैं। इसमें औरैया के अधिशासी अभियंता अमन यादव, मैनपुरी के अधिशासी अभियंता अंकित यादव, प्रयागराज के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुट्टी, और शामली के कार्यवाहक अधिशासी अभियंता फूल सिंह यादव शामिल हैं। इसके अलावा, तीन गाजियाबाद के अधिशासी अभियंता भारत भूषण, आगरा में तैनात अमित कुमार और मीरजापुर में तैनात राजेश कुमार गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सहायक अभियंता विपिन कुमार वर्मा को प्रतापगढ़ से चंदौली स्थानांतरित कर दिया गया है। रामपुर में तैनात मो. असजद को रामपुर से चंदौली, प्रदीप कुमार मिश्रा को बाराबंकी से बिजनौर, उदयराज गुप्ता को चंदौली से रामपुर, अमित कुमार को शामली से बाराबंकी, चन्द्र बोध त्यागी को मैनपुरी से आजमगढ, और जूनियर इंजीनियर अजय कुमार को कौशांबी से आजमगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया है।

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: घूस लेते महिला सुपरवाइजर ट्रैप

खंडवा, खालवा विकासखंड मुख्यालय खालवा में महिला एवं बाल विकास विभाग की एक संविदा पर्यवेक्षक को लोकायुक्त की टीम ने पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि पर्यवेक्षक ने पहले सहायिका पद पर नियुक्ति के लिए पांच हजार रुपये और बाद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर पदस्थापना के लिए दो लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता 27 वर्षीय सलिता पालवी निवासी ग्राम मोजवाड़ी वर्तमान में आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक-एक मोजवाड़ी में सहायिका के पद पर पदस्थ हैं। उनकी नियुक्ति अक्टूबर 2025 में हुई थी। मोजवाड़ी स्थित आंगनवाड़ी केंद्र-3 में कार्यकर्ता का पद रिक्त होने पर उन्होंने नियमानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग, खालवा में आवेदन प्रस्तुत किया था। नियुक्ति दिलाने पांच, पदास्थापना के लिए दो लाख मांगे आरोप है कि महिला एवं बाल विकास परियोजना खालवा के सेक्टर सांवलीखेड़ा की संविदा पर्यवेक्षक 55 वर्षीय अंजिला मोहे निवासी ग्राम मलगांव ने आवेदिका से पहले सहायिका पद पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर पांच हजार रुपये तथा कार्यकर्ता पद पर पदस्थापना के लिए दो लाख रुपए की मांग की। इस प्रकार कुल दो लाख पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत के बाद बिछाया जाल पीड़िता ने मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त) इंदौर विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त) इंदौर राजेश सहाय से की। शिकायत का सत्यापन सही पाए जाने पर ट्रैप दल का गठन किया गया। योजनाबद्ध कार्रवाई के तहत लोकायुक्त टीम ने गुरुवार को आरोपित अंजिला मोहे को आवेदिका से पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। मामले की जांच जारी आरोपित के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त इंस्पेक्टर प्रतिभा तोमर, आशुतोष मिठास सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप की स्थिति है। मामले की आगे की जांच जारी है। रुपये लेते हुए ऐसे हुई ट्रैप फरियादिया सलिता पालवी ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं पर्यवेक्षकों का जनपद पंचायत खालवा सभाकक्ष में प्रशिक्षण चल रहा था। इसी दौरान मैडम ने परियोजना कार्यालय में बुलाया। पूर्व से नियत योजना के तहत लोकायुक्त अधिकारियों ने तैयारी करके रखी थी, जैसे ही परियोजना आफिस में रिश्वत की राशि मैडम को दी, अधिकारियों में पकड़ लिया।