samacharsecretary.com

रिकॉर्ड समय में मरम्मत के बाद तान नदी ब्रिज फिर शुरू, आवागमन बहाल

रायपुर बड़ी राहत : आवाजाही के लिए खुला तान नदी ब्रिज कटघोरा से अंबिकापुर के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के कटघोरा-शिवनगर खंड पर गुरसियाँ स्थित तान नदी ब्रिज को मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद आम यातायात के लिए पुनः खोल दिया है। परियोजना कार्यान्वयन इकाई, बिलासपुर के परियोजना निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए ब्रिज की आवश्यक संरचनात्मक मरम्मत रिकॉर्ड समय में पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही इस मार्ग पर यातायात पुनः पूर्ण क्षमता के साथ सुरक्षित एवं सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है। पुल की रेलिंग के बचे कार्य को कुछ दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्य मरम्मत कार्य पूरा होने से कटघोरा-अंबिकापुर मार्ग पर आवागमन सामान्य हो गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों तथा भारी वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि एनएचएआई सुरक्षित, निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली सड़क अवसंरचना उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड डिसेबल जैसी प्रक्रियाओं के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे राजधानी के चक्कर

लखनऊ योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों के लिए एक बड़ी राहत भरी व्यवस्था लागू की गई है। अब आयुष्मान कार्ड से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए लाभार्थियों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) के लखनऊ स्थित कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उनकी समस्याओं का निस्तारण अब जिला स्तर पर ही किया जा सकेगा। सभी सीएमओ को उपलब्ध कराई गई तकनीकी आईडी साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि आयुष्मान भारत योजना का वास्तविक लाभ तभी पात्र लोगों तक पहुंचे। उन्हें बिना किसी अनावश्यक परेशानी के समय पर सेवाएं उपलब्ध हों। यही वजह है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ), नोडल आयुष्मान अधिकारियों तथा जिला कार्यान्वयन इकाई की टीमों को विशेष तकनीकी आईडी उपलब्ध करा दी गई है। इसके माध्यम से अब जिला स्तरीय अधिकारी आयुष्मान कार्ड के अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड को डिसेबल करने जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं का स्थानीय स्तर पर ही त्वरित समाधान कर सकेंगे। इस व्यवस्था से लाभार्थियों का समय और धन दोनों बचेगा तथा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेजी से उपलब्ध होंगी। राष्ट्रीय औसत से कम है यूपी का दावा निस्तारण एवं भुगतान का टाइम वहीं साचीज ने गुणवत्तापूर्ण उपचार और अस्पतालों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। एजेंसी का उद्देश्य एक ओर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है तो दूसरी ओर ईमानदारी से कार्य करने वाले अस्पतालों को समय पर भुगतान देकर उन्हें प्रोत्साहित करना भी है। दावों (क्लेम) के निस्तारण और भुगतान प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में भुगतान लंबित होने को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है और लगभग 500 करोड़ रुपये की देयता ही लंबित है। उत्तर प्रदेश में दावा निस्तारण एवं भुगतान का औसत टर्न-अराउंड टाइम लगभग 57 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 73 दिन है। यह उपलब्धि प्रदेश में लागू की गई प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीकी सुधारों को दर्शाती है। अनियमितताओं के चलते 200 अस्पतालों पर कार्रवाई साचीज की सीईओ ने बताया कि कई बार अस्पतालों द्वारा आवश्यक दस्तावेज समय पर या पूर्ण रूप से प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण दावे अस्वीकृत हो जाते हैं। इससे अस्पतालों को भुगतान प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए एजेंसी विभिन्न चरणों में ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इन प्रशिक्षणों में अस्पतालों को दावा प्रस्तुत करने की सही प्रक्रिया, आवश्यक अभिलेखों की जानकारी और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन्स के अनुरूप उपचार एवं दावा प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अस्पताल पहली बार में ही सही और पूर्ण दावा प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे दावों की अस्वीकृति कम होगी और भुगतान प्रक्रिया और अधिक तेज एवं पारदर्शी बनेगी। इससे मरीजों और अस्पतालों दोनों को लाभ मिलेगा। दूसरी ओर केवल गुणवत्तापूर्ण और लाभार्थी हितैषी अस्पतालों को बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी भी की जा रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में गुणवत्ता मानकों का पालन न करने तथा विभिन्न अनियमितताओं के कारण लगभग 200 अस्पतालों को योजना से डी-एम्पैनल किया गया है। यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है। 300 अस्पतालों का कराया जा रहा फील्ड ऑडिट करीब 300 अस्पताल ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनके विरुद्ध अपकोडिंग अथवा संदिग्ध दावों के माध्यम से अनुचित भुगतान प्राप्त करने की आशंका सामने आई है। ऐसे अस्पतालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उनके विरुद्ध विस्तृत फील्ड ऑडिट कराया जा रहा है। जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इससे योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूती मिलेगी। साचीज का स्पष्ट लक्ष्य है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत केवल वही अस्पताल सक्रिय रहें, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान कर रहे हैं। ऐसे अस्पतालों को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा उनके दावों और भुगतान के निस्तारण को और अधिक व्यवस्थित एवं समयबद्ध बनाया जाएगा।

ग्रामीण संपत्ति मालिकों के लिए खुशखबरी, फ्री रजिस्ट्री के लिए अध्यादेश जारी

भोपाल मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि पर आवास, दुकान या भूखंडधारकों को अचल संपत्ति का मालिकाना हक देने के लिए निःशुल्क रजिस्ट्री कराई जाएगी। इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी किया गया है। इसके तहत सरकार अतिरिक्त शुल्क लेने से छूट दे सकती है। अधिकार पत्र के बाद भी नहीं मिल रहा था लोन, इसलिए बनी नई योजना प्रदेश में स्वामित्व योजना के अंतर्गत अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया, जिसमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं। इन्हें अधिकार पत्र तो दे दिए गए लेकिन उन्हें इसका कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि बैंकों ने इसके आधार पर ऋण नहीं दिया। उन्हें रजिस्ट्री चाहिए, इसलिए सरकार ने 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' बनाई। अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी, मानसून सत्र में आएगा विधेयक चूंकि, नियम में शुल्क से छूट का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में अध्यादेश के माध्यम से संशोधन किया गया है। इससे सरकार को अतिरिक्त शुल्क लेने से छूट देने का अधिकार मिल गया। अभी ग्रामीण क्षेत्र में रजिस्ट्री पर एक प्रतिशत पंचायत उपकर और आधा प्रतिशत सेस लगता है। इसी तरह मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम में स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क से छूट देने का प्रावधान भी अध्यादेश के माध्यम से किया जाएगा। दोनों संशोधनों के लिए विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक प्रस्तुत होंगे।  

सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेश के उपभोक्ताओं के हित में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय

लखनऊ उत्तर प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब सभी प्रीपेड मीटर पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के रूप में कार्य करेंगे। पहले की तरह ही बिजली बिल में बिल जमा करने की तिथि उल्लिखित रहेगी। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को अपना बकाया भुगतान 10 किस्तों में करने की बड़ी राहत भी दी गई है। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ए.के. शर्मा ने इस संबंध में बैठक के बाद विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिलिंग साइकिल वैसे ही रहेगा जैसे पहले पोस्टपेड मीटर में होता था। पूर्व की तरह 1 तारीख से माह के अन्त तक बिल की खपत का एक महीने का बिल एसएमएस और व्हाट्सएप पर दिया जायेगा। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नम्बर बदला है, वे अपना नम्बर अपडेट करवा सकते हैं। इस फैसले से प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। बिलिंग प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी, भुगतान के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित होगा।  10 तारीख तक मिलेंगे बिल ऊर्जा मंत्री ने बताया कि सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को प्रत्येक माह की 10 तारीख तक बिल मिल जायेंगे। बिल मिलने की तिथि से भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया जायेगा। जिस उपभोक्ता को समय से बिल न प्राप्त हो वो व्हाट्सएप चैटबॉट्स पर संयोजन संख्या सूचित कर अपना बिल व बकाया बिल प्राप्त कर सकेंगे। यह बिल 1912 पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर भी प्राप्त किये जा सकेंगे।  10 किस्तों में जमा कर सकते हैं बकाया उपभोक्ताओं को सुविधा देने के लिए यह बड़ा निर्णय लिया गया है कि 30 अप्रैल तक (मई के बिल से पूर्व) उपभोक्ता का जो भी बिल बकाया रहेगा, वह 10 किस्तों में जमा कर सकता है। यदि किसी उपभोक्ता को बिल सम्बन्धी कोई समस्या है तो खण्ड एवं उपखण्ड स्तर पर मई एवं जून माह में वृहद् कैम्प का आयोजन कर स्मार्ट मीटर बिल सम्बन्धित शिकायत निस्तारण की सुविधा दी जायेगी। उपभोक्ता अपनी शिकायत 1912 पोर्टल पर भी दर्ज कर सकता है।  सिक्योरिटी राशि जमा करने में भी राहत जिन उपभोक्ताओं के परिसर में पोस्टपेड से प्रीपेड मीटर लगाए गए थे और उनकी सिक्योरिटी वापस कर दी गई थी, अब पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने पर उनसे सिक्योरिटी एकमुश्त न लेकर 4 किस्तों में ली जाएगी। बिजली आपूर्ति पर भी सख्त निर्देश ऊर्जा मंत्री ने विद्युत आपूर्ति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी क्षेत्रों में निर्धारित शेड्यूल के अनुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब न हों और यदि कहीं खराब हों तो उन्हें तत्काल बदला जाए, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। बिल न मिलने पर यहां करें संपर्क पूर्वांचल: +91 8010968292 मध्यांचल: +91 7669003409 पश्चिमांचल: +91 7859804803 दक्षिणांचल: +91 8010957826 केस्को (कानपुर): +91 8287835233

विभागों ने नियमों में संशोधन शुरू, संविदा कर्मियों के लिए बढ़े अवसर

भोपाल मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक संविदा कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर नियुक्ति में 50 प्रतिशत कोटा देने की मांग धीरे-धीरे ही सही मगर पूरी होने जा रही है। इसके लिए सभी विभागों के सेवा भर्ती नियम में संशोधन करके उक्त प्रविधान किया जा रहा है। यानी अब इनमें सीधी भर्ती के रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत संविदा कर्मियों से भरे जाएंगे। वर्ष 2023 की संविदा नीति और कार्यान्वयन में देरी यह प्रविधान संविदा नीति में तो पहले ही कर दिया गया था लेकिन विभागों ने भर्ती नियमों में संशोधन नहीं किया। अब नियम संशोधित कर लागू किए जा रहे हैं। संविदा नीति में संशोधन वर्ष 2023 में किया गया। इसमें ही यह प्रविधान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर किया गया था। विधानसभा चुनाव के बाद इस नियम को लागू करने में अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई। इसके कारण मामला टलता गया और कर्मचारियों में रोष बढ़ता गया।  

विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने सुलझाए लंबित प्रकरण

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी नीतियों एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेशभर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम की सक्रियता के चलते राज्य के विभिन्न जिलों में वर्षों से लंबित विद्युत प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल रही है। योजना के तहत हजारों उपभोक्ताओं को राहत ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत लंबित विद्युत देयकों की समीक्षा कर उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत से अधिक तक की छूट दी जा रही है।  इसी क्रम में सूरजपुर जिले के एक उपभोक्ता को 90 हजार रुपये से अधिक के बकाया बिल पर 55 हजार रुपये से अधिक की छूट प्रदान की गई, जिससे उन्होंने शेष राशि का भुगतान कर अपना खाता पूर्णतः शून्य कर लिया। लंबित अमानत राशि का त्वरित भुगतान फोरम की सक्रिय पहल के तहत लंबे समय से लंबित अमानत राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) के मामलों का भी निराकरण किया जा रहा है। एक प्रकरण में एक वर्ष से लंबित राशि को उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित किया गया। साथ ही, इस प्रकार की देरी पर फोरम द्वारा संबंधित अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। समयबद्ध समाधान पर जोर विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ताओं से जुड़े सभी प्रकरणों का समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से निराकरण किया जाए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक मानसिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। योजना का लाभ लेने की अपील विभागीय अधिकारियों ने प्रदेश के सभी बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ का अधिकतम लाभ उठाएं। शासन का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक परिवारों को पुराने बकाया से मुक्ति दिलाकर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया जा सके।

वैवाहिक सीजन में गन्ना किसानों को मिली बड़ी राहत

रायपुर वैवाहिक सीजन में गन्ना किसानों को मिली बड़ी राहत वैवाहिक सीजन एवं आगामी फसल की तैयारियों के बीच गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना, राम्हेपुर (कवर्धा) द्वारा किसानों को 13.80 करोड़ की राशि जारी की गई है। इसके साथ ही चालू पेराई सत्र में अब तक कुल 71.29 करोड़ का भुगतान किसानों को किया जा चुका है।              कलेक्टर एवं कारखाने के प्राधिकृत अधिकारी  गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में भुगतान प्रक्रिया लगातार जारी है। समयबद्ध भुगतान से सहकारी व्यवस्था में किसानों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। चालू पेराई सत्र में कारखाने ने उपलब्धि हासिल की है, जिसमें 2,55,818 मीट्रिक टन गन्ना पेराई एवं 3,09,120 क्विंटल शक्कर उत्पादन किया गया है। यह सफलता किसानों के सहयोग, प्रशासनिक मार्गदर्शन और कारखाने की कुशल कार्यप्रणाली का परिणाम है।           भोरमदेव शक्कर कारखाना किसानों और श्रमिकों के हित में निरंतर कार्य कर रहा है। इसमें एफआरपी के अतिरिक्त रिकवरी आधारित भुगतान, शासन द्वारा प्रदत्त बोनस वितरण, रियायती दर पर शक्कर उपलब्धता, उन्नत बीज एवं कृषि मार्गदर्शन, नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत किसानों के लिए सर्वसुविधायुक्त “बलराम सदन” तथा मात्र 5 रूपए में गरम भोजन की कैंटीन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।                    भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना जिले की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनकर उभरा है। यह किसानों को न्यूनतम मूल्य की गारंटी, फसल विविधता को बढ़ावा, हजारों लोगों को रोजगार तथा पीडीएस के लिए सस्ती दर पर शक्कर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। समय पर भुगतान, बेहतर प्रबंधन और किसान-केंद्रित योजनाओं के चलते यह कारखाना सहकारी मॉडल की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ जिले के समग्र विकास को भी गति मिल रही है।