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नशामुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को बड़ी कामयाबी, योगी सरकार ने ड्रग नेटवर्क पर कसा शिकंजा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को नशे के कारोबार से मुक्त कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेश में ड्रग माफिया और नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई चेन के खिलाफ कार्रवाई तेज है। सरकार के इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए एएनटीएफ लखनऊ यूनिट और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की संयुक्त टीम ने राजधानी लखनऊ में नशीली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। ट्रांसपोर्ट नगर में की गई कार्रवाई में करीब 228 किलोग्राम नशीली दवाएं बरामद हुई हैं। इनमें 9.60 लाख एल्जोमैक-0.5 (एल्प्राजोलाम) टैबलेट, 1.20 लाख स्पैसमोनाम प्लस (ट्रामाडोल एचसीएल) कैप्सूल और कोडीनयुक्त ओनेरेक्स 100 एमएल कफ सिरप की 720 बोतलें शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपये नकद भी मिले। मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक खेप से खुलने लगी पूरे नेटवर्क की कड़ी एएनटीएफ को ट्रांसपोर्ट नगर में नशीली दवाओं की बड़ी खेप पहुंचने की सूचना मिली थी। 3 सितंबर को टीम ने मकान संख्या एस-363/364 के आसपास निगरानी शुरू की। इसी दौरान तीन लोग कार्टूनों को बोरियों में छिपाते दिखाई दिए। संदेह के आधार पर तलाशी लेने पर किशन वासवानी, समीर अहमद और शाद इरशाद के कब्जे से बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद हुईं। कार्रवाई में एफएसडीए की टीम भी शामिल रही। औषधि निरीक्षकों ने बरामद दवाओं के नमूने जांच के लिए सुरक्षित किए। पूछताछ आगे बढ़ी तो सप्लाई नेटवर्क की अगली कड़ी सामने आई। किशन वासवानी और समीर अहमद ने दवाओं की आपूर्ति कन्हैया फार्मा के संचालक उमेश कुमार से होने की जानकारी दी। इसके आधार पर उमेश कुमार और सतेन्द्र सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। फर्म के दस्तावेजों की आड़ में हो रही थी बिलिंग जांच में सामने आया कि उमेश कुमार कथित तौर पर सतेन्द्र सिंह की फर्म के दस्तावेजों का इस्तेमाल नशीली दवाओं की बिलिंग के लिए करता था। इसके एवज में सतेन्द्र सिंह को कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है। एफएसडीए की जांच के दौरान कन्हैया फार्मा में प्रॉक्सीमेक-एसपीएएस कैप्सूल के 1,116 डिब्बों सहित सात प्रकार की दवाएं मिलीं। फर्म संचालक दवाओं के खरीद और बिक्री से संबंधित पूर्ण अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सका। इसके बाद एफएसडीए ने कन्हैया फार्मा को सील कर दिया। पूछताछ में सामने आया एक और सप्लायर जांच का दायरा बढ़ाते हुए टीम ने शाद इरशाद से पूछताछ की। इसमें विशाल चौरसिया का नाम सामने आया। इसके बाद उसे भी गिरफ्तार किया गया।पूछताछ में विशाल ने शाद को नशीली दवाओं की आपूर्ति करने की बात बताई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कोडीन से जुड़े एक मामले में अमीनाबाद थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद उसका दवा लाइसेंस निरस्त हो चुका था। इसके बाद वह कथित तौर पर दूसरी फर्मों के माध्यम से नशीली दवाओं का कारोबार कर रहा था। बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप के संबंध में विशाल ने इसे बृजेश वर्मा से खरीदने की बात भी बताई है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब नेटवर्क की अन्य कड़ियों की भी जांच कर रही हैं। नशे के कारोबार पर सरकार का सख्त संदेश एएनटीएफ के मुताबिक किशन वासवानी, समीर अहमद, शाद इरशाद, उमेश कुमार, सतेन्द्र सिंह और विशाल चौरसिया इस अवैध नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। सभी छह आरोपियों को धारा 8/21/22/29 एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। बरामद दवाओं का नियमानुसार न्यायालय के समक्ष नमूनाकरण कराया जाएगा। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य एप के माध्यम से की गई। योगी सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रदेश में नशीली दवाओं के कारोबार को केवल सड़क स्तर पर नहीं, बल्कि सप्लाई, बिलिंग और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क के स्तर पर निशाना बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाते हुए उत्तर प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्रवाई करना है।

एमडी ड्रग निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़

भोपाल  मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरूद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में मंदसौर पुलिस ने सिंथेटिक ड्रग्स के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से संचालित एमडी (MD) ड्रग निर्माण फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है।कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 13 किलो 850 ग्राम एमडी (MD) ड्रग, 09 किलो 109 ग्राम रासायनिक पदार्थ (केमिकल)एवंड्रग निर्माण में प्रयुक्त उपकरण जब्‍त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक मंदसौर  विनोद कुमार मीना के निर्देशनथाना नई आबादी पुलिस की विशेष टीम ने ग्राम बाजखेड़ी स्थित एक खेत पर बने पक्के मकान पर दबिश देकर अवैध ड्रग निर्माण फैक्‍ट्री का खुलासा किया। प्रारंभिक पूछताछ में प्राप्त तथ्यों के आधार पर सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण, परिवहन एवं तस्करी से जुड़े अन्य व्यक्तियों और नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस द्वारा इस अवैध कारोबार से जुड़े संपूर्ण नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में संलिप्त तत्वों के विरुद्ध कठोर एवं निरंतर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

22 लाख 60 हजार रुपए नगद, लूट की रकम से खरीदी गई कार एवं अन्य सामग्री जप्त

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में संगठित अपराधों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कार्रवाई के अंतर्गत इंदौर पुलिस ने स्क्रैप व्यापारी के कर्मचारी से हुई 29 लाख 65 हजार रुपए की लूट की वारदात का त्वरित खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई राशि में से 22 लाख 60 हजार रुपए नगद, लूट की रकम से खरीदी गई एक आई-20 कार तथा घटना में प्रयुक्त अन्य सामग्री जब्त की है। फरियादी मुकुल अग्रवाल, निवासी रामचंद्र नगर एक्सटेंशन, इंदौर द्वारा थाना पंढरीनाथ में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि 11 जून को वह अपने स्क्रैप व्यवसाय से संबंधित विभिन्न प्रतिष्ठानों से भुगतान राशि एकत्रित कर लगभग 29 लाख 65 हजार रुपए नगद लेकर दोपहिया वाहन से जा रहा था। इसी दौरान रात्रि में जायसवाल धर्मशाला के समीप दो अज्ञात व्यक्तियों ने उसे रोककर मारपीट की तथा नकदी से भरा बैग छीनकर फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त इंदौर  संतोष कुमार सिंह के निर्देशन में आठ विशेष पुलिस टीमों का गठन कर आरोपियों की तलाश प्रारंभ की गई। जांच के दौरान पुलिस टीमों ने घटना स्थल एवं संभावित मार्गों के 800 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का सूक्ष्म विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र एवं सतत पुलिसिंग के आधार पर एक संदिग्ध एक्टिवा वाहन की पहचान की गई, जिस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। इसके बाद इंदौर सहित आसपास के जिलों एवं अन्य राज्यों में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी गई। अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने वारदात को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया था। आरोपियों द्वारा फरियादी की पूर्व से रेकी की जा रही थी तथा भुगतान संग्रहण के प्रथम स्थान से ही उसका पीछा किया जा रहा था। उपयुक्त अवसर मिलते ही उन्होंने लूट की घटना को अंजाम दिया। पूछताछ में मुख्य आरोपी ने बताया कि क्रिप्टोकरेंसी में हुए आर्थिक नुकसान एवं बढ़ते कर्ज के कारण उसने लूट की योजना बनाई थी। उसने अपने दो साथियों को फरियादी की गतिविधियों पर नजर रखने तथा रेकी करने का जिम्मा सौंपा था। पुलिस टीमों द्वारा लगातार दबिश एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर सह-आरोपी को भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस द्वारा शेष लूटी गई राशि की बरामदगी तथा प्रकरण से जुड़े अन्य तथ्यों के संबंध में आरोपियों का पुलिस रिमांड प्राप्त किया गया है। मामले में विस्तृत विवेचना जारी है। मध्यप्रदेशपुलिस संगठित अपराधों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है तथा अपराधियों के विरुद्ध इस प्रकार की प्रभावी कार्यवाही निरंतर जारी रहेगा।  

जैन मंदिरों से चोरी हुई 250 वर्ष पुरानी दुर्लभ मूर्तियां सुरक्षित बरामद

भोपाल धार्मिक आस्था एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े संवेदनशील प्रकरणों के प्रति मध्यप्रदेश पुलिस की प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नरसिंहपुर पुलिस ने जैन मंदिरों में हुई चोरी की घटनाओं का सफल खुलासा कर पांच सदस्यीय शातिर चोर गिरोह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से जैन मंदिरों से चोरी की गई लगभग 250 वर्ष पुरानी अष्टधातु की दो दुर्लभ प्रतिमाएं, चांदी के 17 छत्र, दो चांदी के आसन, एक चांदी का मुकुट, चार बैटरियां, तीन इनवर्टर, दो रेफ्रिजरेटर, चार एलईडी टीवी, दो डीवीआर, दो पंखे, घटना में प्रयुक्त दो मोटरसाइकिल तथा नगदी सहित चोरी गई संपत्ति जब्त की है। धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इन धरोहरों की सुरक्षित बरामदगी पुलिस की संवेदनशील, पेशेवर एवं प्रभावी कार्यशैली को दर्शाती है। नरसिंहपुर में विगत दो से तीन माह के दौरान ग्राम रामनिवारी, तेन्दूखेड़ा तथा करकबेल स्थित जैन मंदिरों सहित अन्य स्थानों पर चोरी की घटनाएं सामने आई थीं। धार्मिक स्थलों से जुड़ी इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना द्वारा तीन विशेष टीमों का गठन किया गया था। टीमों को अज्ञात आरोपियों की शीघ्र पहचान एवं गिरफ्तारी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयास, तकनीकी दक्षता, सतत निगरानी तथा वैज्ञानिक विवेचना के परिणामस्वरूप इस संवेदनशील प्रकरण का सफल खुलासा संभव हो सका। पुलिस द्वारा प्रारंभ से ही सभी पहलुओं पर सूक्ष्मता एवं गंभीरता के साथ जांच की गई। घटनास्थलों का बारीकी से निरीक्षण कर वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित किए गए तथा तकनीकी जानकारी, मुखबिर तंत्र एवं अन्य उपलब्ध सूचनाओं का गहन विश्लेषण किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने पूर्व में हुई चोरी की घटनाओं के पैटर्न का भी विस्तृत अध्ययन किया। घटनाओं के समय, स्थान, वारदात के तरीके एवं संदिग्ध गतिविधियों के तुलनात्मक विश्लेषण से महत्वपूर्ण सुराग प्राप्त हुए। इसी क्रम में निगरानी बदमाश टिक्कू उर्फ टेकसिंह लडिया की संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर उसकी गहन पतारसी की गई। तकनीकी साक्ष्यों एवं अन्य तथ्यों के आधार पर पूछताछ किए जाने पर उसने अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया। पुलिस ने प्रकरण में टिक्कू उर्फ टेकसिंह लडिया के साथ ज्ञानी प्रजापति, आशीष शर्मा, नितिन शर्मा तथा चोरी का सामान खरीदने वाले चिन्टू उर्फ मुकेश सोनी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने करकबेल जैन मंदिर, रामनिवारी स्थित जैन मंदिर, तेन्दूखेड़ा स्थित जैन मंदिर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हुई कुल पांच चोरी की घटना कारित करना स्वीकार की है। मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशवासियों की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक धरोहरों एवं जनसुरक्षा की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस प्रकार अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।  

लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति नागरिकों को लौटाई साइबर तकनीक एवं CEIR पोर्टल की मदद से मिली सफलता

भोपाल "देशभक्ति जनसेवा" के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशभर में नागरिकों की गुम एवं चोरी हुई संपत्ति को वापस दिलाने के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास कर रही है। आधुनिक तकनीक, साइबर विशेषज्ञता, सीईआईआर (Central Equipment Identity Register) पोर्टल, साइबर हेल्प डेस्क तथा जिला पुलिस बलों के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप विगत एक माह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में 1 हजार 136 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाए गए हैं। बरामद मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपये है। मोबाइल फोन वापस प्राप्त होने पर नागरिकों ने मध्यप्रदेश पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया तथा पुलिस के प्रति उनका विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है। विभिन्न जिलों की प्रमुख उपलब्धियां इंदौर क्राइम ब्रांच इंदौर ने सिटीजन कॉप एप्लीकेशन एवं सीईआईआर पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निराकरण के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से 230 गुम मोबाइल फोन खोजकर नागरिकों को लौटाए। जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रूपये है। इसके अतिरिक्त भंवरकुआं थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण एवं सतत प्रयासों से 13 मोबाइल फोन कीमत 3 लाख 60 हजार तथा विजय नगर थाना पुलिस ने मोबाइल दुकान में हुई लाखों रुपये की चोरी का 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए 17 मोबाइल फोन, नगदी, मोबाइल एसेसरीज एवं अन्य सामग्री सहित लगभग 13 लाख रूपये का की संपत्ति जब्‍त करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस प्रकार तीनों कार्यवाहियों में पुलिस ने 260 मोबाइल फोन सहित लगभग 66 लाख 60 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की। दमोह पुलिस द्वारा चलाए गए “गुम मोबाइल खोज अभियान” के अंतर्गत 208 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया गया। बरामद मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत लगभग 41 लाख 60 हजार रुपये है। शिवपुरी तकनीकी विश्लेषण एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से पुलिस ने 120 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया। बरामद मोबाइल फोन की कुल कीमत लगभग 30 लाख रुपये है। खण्डवा पुलिस ने “ऑपरेशन सहयोग” के तहत दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र एवं राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से 151 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर बरामद किए। इन मोबाइल फोन की कीमत लगभग 22 लाख 84 हजार रूपये से अधिक है। भोपाल जीआरपी भोपाल ने ट्रेनों में मोबाइल चोरी करने वाले बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 10 मोबाइल फोन सहित 4 लाख 82 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है। वहीं थाना हनुमानगंज पुलिस ने सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से 50 गुम मोबाइल फोन बरामद कर नागरिकों को लौटाए, जिनकी कीमत लगभग 12 लाख रूपये है। दोनों कार्रवाइयों में कुल 60 मोबाइल फोन सहित लगभग 16 लाख 82 हजार मूल्य की संपत्ति बरामद की गई। अशोकनगर साइबर सेल के विशेष प्रयासों से 120 गुम मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 13 लाख 20 हजार रुपये है। धार जिला साइबर शाखा एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए लगभग 12 लाख रुपये से अधिक के 124 गुम मोबाइल फोन बरामद किए है। छतरपुर पुलिस ने “ऑपरेशन विश्वास” के अंतर्गत लवकुशनगर एवं बड़ामलहरा अनुभागों में कार्रवाई करते हुए 48 गुम मोबाइल फोन बरामद किए गए। इन मोबाइल फोन की कीमत लगभग 7 लाख 20 हजार रूपए है। मोबाइल प्राप्त करने वालों में छात्र-छात्राएं, किसान, मजदूर एवं गृहणियां शामिल रहीं। अनूपपुर पुलिस ने थाना कोतमा एवं बिजुरी क्षेत्र से गुम हुए 22 मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया। इन मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 3 लाख 30 हजार रूपये है। इसके अतिरिक्त जीआरपी अनूपपुर ने चोरी के मोबाइल बेचने की फिराक में घूम रहे एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 3 मोबाइल फोन कीमत 51 हजार रूपये जब्त किए। इस प्रकार दोनों कार्यवाहियों में पुलिस ने 25 मोबाइल सहित लगभग 3 लाख 81 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।  सिवनी पुलिस ने सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से 20 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर आवेदकों को लौटाए गए। इन मोबाइल फोन की कुल कीमत लगभग 4 लाख रूपये है। आधुनिक तकनीक और साइबर विशेषज्ञता का प्रभावी उपयोग मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर तकनीक, सीईआईआर पोर्टल, डिजिटल विश्लेषण एवं अंतरराज्यीय समन्वय का प्रभावी उपयोग करते हुए गुम एवं चोरी हुई संपत्ति को नागरिकों तक वापस पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। भविष्य में भी आमजन की संपत्ति की सुरक्षा तथा अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए ऐसे प्रयास सतत जारी रहेंगे।  

मंदसौर पुलिस ने अंतर्राज्यीय ड्रग्स तस्कर गिरोह का किया पर्दाफाश

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के निर्देशन में मध्यप्रदेश को नशा मुक्त करने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा नशे के कारोबार के विरुद्ध लगातार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई की जा रही हैं। इसी क्रम में मंदसौर पुलिस ने सुनियोजित कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय मादक पदार्थ तस्कर गिरोह का पर्दाफाश कर 20 किलोग्राम अवैध ब्राउन शुगर (स्मैक) अनुमानित कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये, 02 चार पहिया वाहन, 7 मोबाइल फोन एवं 7 हजार 700 रुपए नगद सहित लगभग 20 करोड़ 35 लाख रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की है। पुलिस ने इस मामले में 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी की तलाश जारी है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक मंदसौर  विनोद कुमार मीना के निर्देशन में गठित विशेष पुलिस टीम द्वारा की गई। 31 मई को थाना नई आबादी पुलिस को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि कुछ तस्कर बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ की खेप लेकर गुजरने वाले हैं। सूचना प्राप्त होते ही विशेष टीम का गठन कर रणनीतिक रूप से घेराबंदी की गई। संदिग्ध वाहनों को रोककर तलाशी लेने पर आरोपियों के कब्जे से 20 किलोग्राम अवैध ब्राउन शुगर जब्त की गई। कार्रवाई के दौरान तस्करी एवं पायलटिंग में प्रयुक्त एक सुजुकी एस-क्रॉस तथा एक हुंडई क्रेटा कार, 07 मोबाइल फोन एवं 7 हजार 700 रूपये नगद भी जब्त किये गए। मोबाइल फोनों का तकनीकी एवं साइबर विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे गिरोह के नेटवर्क, सप्लायरों तथा वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी मध्यप्रदेश एवं राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों में सक्रिय रहकर मादक पदार्थों की तस्करी करते थे। पुलिस द्वारा गिरोह के अन्य सदस्यों, सप्लाई चेन तथा अवैध आर्थिक नेटवर्क के संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है। फरार आरोपी की तलाश के लिए भी पुलिस टीमें सक्रिय हैं। इस उल्लेखनीय कार्रवाई ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि मध्यप्रदेश पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध पूरी प्रतिबद्धता एवं दृढ़ता के साथ कार्य कर रही है। नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त अपराधियों के नेटवर्क को चिन्हित कर उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में सुरक्षित एवं नशामुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस प्रकार की कार्यवाहियां निरंतर जारी रहेंगी तथा युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले तस्करों के विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।  

09 चोरी की वारदातों का खुलासा

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने, अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा आमजन में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना मजबूत करने हेतु लगातार प्रभावी कार्रवाइयां की जा रही हैं। प्रदेश में सक्रिय अपराधियों की निगरानी, रात्रि गश्त, संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन चेकिंग के साथ-साथ चोरी की घटनाओं के त्वरित खुलासे हेतु विशेष पुलिस टीमें गठित की जा रही हैं। इसी क्रम में  नरसिंहपुर जिले के थाना गाडरवारा एवं थाना सुआतला पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से कुल 09 चोरी की घटनाओं का सफल खुलासा करते हुए लगभग 28 लाख रुपये से अधिक की चोरी गई संपत्ति एवं वाहन जब्त कर तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। थाना गाडरवारा क्षेत्रांतर्गत 05 मई को आनंद विहार कॉलोनी स्थित एक सूने मकान से सोने के जेवर चोरी होने की रिपोर्ट पर अपराध पंजीबद्ध कर विशेष टीम गठित की गई। पुलिस टीम द्वारा तकनीकी एवं भौतिक साक्ष्यों का संकलन कर रेलवे स्टेशन गाडरवारा के पास से एक संदेही को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी द्वारा आनंद विहार कॉलोनी स्थित सूने मकान में चोरी करना स्वीकार किया गया।  साथ ही करेली, सिहोरा एवं गाडरवारा क्षेत्र में अन्य चोरी की वारदातें  एवं दो मोटरसाइकिल चोरी की घटनाएं करना भी स्वीकार किया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से सोने के 04 कंगन, 01 हार, 03 मंगलसूत्र, 02 जोड़ी झुमकी, 01 जोड़ी टॉप्स, 01 चेन, 01 मांग टीका, 02 अंगूठी, 01 पांचाली, चांदी की 01 जोड़ी पायल एवं 200 चांदी की अंगूठियां सहित लगभग 17 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है।  आरोपी के विरुद्ध थाना महाराजपुर, थाना केसली जिला सागर, थाना गाडरवारा, थाना सुआतला एवं थाना करेली जिला नरसिंहपुर में गृहभेदन, मोटरसाइकिल चोरी, मारपीट, आर्म्स एक्ट एवं आबकारी एक्ट के तहत विभिन्न अपराध पंजीबद्ध पाए गए हैं। इसी प्रकार थाना सुआतला क्षेत्र में  06 मार्च को बरमान कला स्थित हनुमान मंदिर एवं दिनांक 17 अप्रैल को ग्राम लोलरी स्थित सूने मकान में चोरी की घटनाएं हुई थीं, जिनमें अज्ञात चोरों द्वारा ताला तोड़कर सोने-चांदी के जेवरात एवं नगदी चोरी की गई थी। विवेचना के दौरान तकनीकी साक्ष्यों एवं मुखबिर सूचना के आधार पर दो आरोपियों की पहचान की गई। आरोपियों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ करने पर उनके द्वारा मंदिर एवं सूने मकान में चोरी करना स्वीकार किया गया। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने  चांदी का छत्र एवं मुकुट, सोने-चांदी के जेवरात तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित लगभग 11 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है।  मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशभर में अपराध नियंत्रण, संपत्ति संबंधी अपराधों की रोकथाम एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। यह कार्यवाही न केवल अपराधियों के विरुद्ध सख्त संदेश है, बल्कि यह आमजन में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना को भी और अधिक सुदृढ़ करती है।

06 घंटे में नाबालिग आदिवासी बालिका के अपहरण का खुलासा कर बालिका को सकुशल दस्तोयाब किया

भोपाल  अशोकनगर पुलिस ने तत्परता, संवेदनशीलता एवं पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए मात्र 06 घंटे के भीतर नाबालिग आदिवासी बालिका के अपहरण का सफलतापूर्वक पर्दाफाश कर बालिका को सकुशल दस्तयाब किया। साथ ही घटना में प्रयुक्त वाहन, एक महिला आरोपी सहित चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। उल्लेखनीय है कि 23 मई को प्रातः लगभग 05:00 बजे 17 वर्षीय नाबालिग बालिका घर से बाहर शौच हेतु निकली थी, तभी पूर्व से घात लगाए बैठे आरोपियों द्वारा उसे जबरन वाहन में बैठाकर अपहरण कर लिया गया। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस अधीक्षक अशोकनगर राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में तीन विशेष संयुक्त टीमों का गठन कर तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन प्रारंभ किया गया। एक टीम द्वारा तकनीकी संसाधनों के माध्यम से लगातार विश्लेषण किया गया, जबकि अन्य टीमों द्वारा स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर क्षेत्र के विभिन्न मार्गों, होटल, ढाबों, बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन आदि पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। तकनीकी एवं मैदानी इनपुट के आधार पर आरोपियों के राजगढ़ जिले की ओर जाने की जानकारी प्राप्त होने पर पुलिस की संयुक्त टीमें तत्काल रवाना हुईं। पुलिस टीम द्वारा ब्यावरा के समीप घटना में प्रयुक्त वाहन सहित महिला आरोपी गुड्डी बाई गुर्जर, नीरज जोगी एवं प्रेम गुर्जर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा नाबालिग बालिका एवं एक अन्य आरोपी को नजीराबाद क्षेत्र में छोड़ने की जानकारी दी गई। इसके बाद पुलिस की संयुक्त टीमों द्वारा नजीराबाद क्षेत्र में घेराबंदी कर आरोपी लखन गुर्जर को गिरफ्तार करते हुए नाबालिग बालिका को सकुशल मुक्त कराया गया। प्रकरण में जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता की सगी बुआ द्वारा ही 1 लाख रुपये में बालिका का सौदा आरोपी गुड्डी बाई गुर्जर से किया गया था। उक्त सौदे के तहत आरोपी गुड्डी बाई गुर्जर ने अपने भाई लखन गुर्जर, प्रेम सिंह गुर्जर एवं नीरज जोगी के साथ मिलकर पूरी वारदात की साजिश रचकर घटना को अंजाम दिया। पुलिस द्वारा पीड़िता की सगी बुआ को भी प्रकरण में आरोपी बनाया गया है। ईसागढ़ पुलिस द्वारा अपहृत नाबालिग आदिवासी बालिका को सकुशल मुक्त कराकर वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित रखवाया गया है।  

कांकेर ऑपरेशन में बड़ी सफलता, 3 नक्सलियों ने डाली हथियार, 14 की तलाश तेज

बड़गांव कांकेर जिले में माओवादियों के लगातार आत्मसमर्पण से संगठन को बड़ा झटका लगा है। शनिवार को पखांजूर क्षेत्र के परतापुर थाने में एरिया कमेटी सदस्य राधिका कुंजाम, संदीप कड़ियाम और रैनू पद्दा ने समर्पण कर दिया है। इनके पास से दो एसएलआर और एक 303 राइफल मिली है। बीते चार दिनों में नौ माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। पुलिस के सामने शेष बचे 14 माओवादियों का समर्पण करवाना सबसे बड़ी चुनौती है। बड़े चेहरों का समर्पण पुलिस के लिए बड़ी चुनौती सूत्रों के अनुसार मिलिट्री कंपनी की सदस्य व आठ लाख की इनामी स्वरूपा व अन्य समर्पण ने संगठन को अंदर तक प्रभावित किया है। हालांकि स्टेट कमेटी सदस्य रूपी और डिविजनल कमेटी सदस्य चंदर के आत्मसमर्पण की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन अब तक दोनों ने हथियार नहीं डाले हैं। जानकारी के मुताबिक रूपी राजनांदगांव-कांकेर-बैलाडीला डिवीजन के माओवादी विजय रेड्डी की पत्नी है और वह अब भी जंगलों में सक्रिय रहकर संगठन को संभाल रही है। प्रशासन की अपील और आत्मसमर्पण नीति का असर पखांजूर एडिशनल एसपी राकेश कुर्रे का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली जानकारियों के आधार पर शेष माओवादियों से संपर्क साधने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही शेष बचे माओवादी भी समर्पण कर देंगे। बस्तर रेंज के आइजी सुंदरराज पी. ने शेष माओवादियों से भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है। पूर्व माओवादी स्वरूपा के आत्मसमर्पण के बाद अब उनके हाथ से लिखा हुआ मार्मिक पत्र इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। यह पत्र गोंडी भाषा में लिखा गया है, जिसमें स्वरूपा ने अपने पूर्व साथियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। आंकड़ों में आत्मसमर्पण और माओवाद का इतिहास सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में सुरक्षा बल के लगातार अभियान और सरकार की आत्मसमर्पण नीति के दबाव के चलते माओवादी संगठन के सदस्य मुख्यधारा में लौट रहे हैं। कांकेर सहित बस्तर के सात जिलों में जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक कुल 2,756 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। कांकेर जिले में माओवाद का प्रभाव 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में पड़ोस के आंध्र प्रदेश और गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) से आए माओवादियों के माध्यम से शुरू हुआ। जिले की पहाड़ियां और घने जंगल माओवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह और प्रशिक्षण शिविर के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं। जिले में अब तक की प्रमुख मुठभेड़ें मार्च 2025 – बीजापुर-कांकेर सीमा पर हुई मुठभेड़ में 30 माओवादी ढेर। अप्रैल 2025 – कांकेर के छोटे बेठिया थाना क्षेत्र में 29 माओवादी मारे गए। अगस्त 2025 – कांकेर-बस्तर सीमा पर मंडा पहाड़ के पास मुठभेड़ में तीन माओवादी ढेर। सितंबर 2024 – कांकेर के छिंदखड़क जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में तीन माओवादी मारे गए। फरवरी 2026 – कांकेर के जंगलों में हुई मुठभेड़ में दो सक्रिय माओवादी मारे गए।

नक्सलियों का बड़ा सरेंडर: संगठन को झटका, 8 उग्रवादी हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटे

मुलुगु नक्सल संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है. जहां तेलंगाना स्टेट कमेटी में सक्रीय दो शीर्ष माओवादी नेताओं सहित कुल 8 नक्सलियों के वारंगल पुलिस के सामने सरेंडर किया है. मिली जानकारी के अनुसार, ये सभी नक्सली दो दिन पहले ही गुपचुप तरीके से सरेंडर हो चुके हैं और सोमवार को इसकी आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है. आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे बड़ा नाम कोय्यादी संबय्या उर्फ आज़ाद, बीकेएसआर डिवीजन कमेटी सचिव का है. आजाद कई दशकों से माओवादी संगठन में प्रमुख रणनीतिक भूमिका निभा रहे थे. इसके अलावा अब्बास नारायण उर्फ़ रमेश, जो तकनिकी टीम के प्रभारी ने भी सरेंडर किया है. रमेश रामागुंडम इलाके में लंबे समय से सक्रीय था। इसके अलावा भी जय लाल (SZCM) 25 लाख और माडवी भीमे( DVCM) 08 लाख ने ये दंपती ने विजयवाडा में आत्मसमर्पण किया.