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बिहार में आम महोत्सव का भव्य आगाज, स्वर्णरेखा और मल्लिका किस्म के आम बने आकर्षण

पटना  बिहार के आम उत्पादकों को सीधे बाजार से जोड़ने और उपभोक्ताओं तक रसायन-मुक्त आम पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित नाबार्ड आम महोत्सव-2026 का गुरुवार को भव्य आगाज हुआ। पटना के बिहार राज्य सहकारी संघ परिसर में शुरू हुए दो दिवसीय महोत्सव में जहां किसानों को बड़े खरीदारों और निर्यातकों से जुड़ने का अवसर मिला, वहीं आम प्रेमियों ने विभिन्न प्रजातियों के स्वादिष्ट आमों की खरीदारी कर मेले को जीवंत बना दिया। महोत्सव में स्वर्णरेखा और मल्लिका प्रजाति के   बड़े आकार के आम आकर्षण का केंद्र बने रहे। बिहार के आमों को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की ओर से आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि आम केवल फलों का राजा नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जर्दालु, लंगड़ा, चौसा, दशहरी और फजली जैसी किस्में देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी विशेष गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने किसानों से आधुनिक खेती तकनीक अपनाने, गुणवत्ता सुधारने और विपणन के नए अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। मंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसानों और खरीदारों के बीच सीधा संपर्क नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि आम महोत्सव का उद्देश्य किसानों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना है जहां वे अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं, थोक व्यापारियों और बड़े खरीदारों तक पहुंचा सकें। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा। उन्होंने बताया कि बिहार में नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत बागवानी और जनजातीय विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में 33 वाडी (बगीचा) परियोजनाएं संचालित हैं, इनसे करीब 19 हजार परिवारों को स्थायी आजीविका मिली है। इसके अलावा 302 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित किए गए हैं, जिनसे लगभग 1.40 लाख किसान जुड़े हैं। कार्बाइड-मुक्त आमों की रही मांग महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता किसानों द्वारा सीधे लाए गए कार्बाइड-मुक्त आम हैं। उपभोक्ताओं ने इन प्राकृतिक तरीके से पकाए गए आमों को हाथोंहाथ लिया। लोगों ने इसे सुरक्षित और स्वादिष्ट विकल्प बताते हुए खरीदारी में विशेष रुचि दिखाई। आयोजकों के अनुसार आम प्रेमियों को बागवानों से सीधे आम खरीदने का अवसर मिल रहा है, जिससे उन्हें ताजा और गुणवत्तापूर्ण फल उचित कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं। स्वर्णरेखा और मल्लिका बने आकर्षण का केंद्र महोत्सव में प्रदर्शित आमों की विविधता ने आगंतुकों को खूब लुभाया। दूधिया मालदा, सफेद मालदा, बम्बईया, आम्रपाली, हेमसागर, जर्दालु, गुलाबखास, बीजू, बेलखास, लाल मोहन और लोकनायक जैसी किस्मों के बीच स्वर्णरेखा और मल्लिका ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। कई स्टालों पर एक किलोग्राम तक वजन वाले बड़े-बड़े आम लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने रहे। आगंतुक पहले इन आमों को देखने पहुंचे, लेकिन स्वाद और गुणवत्ता की जानकारी मिलने के बाद खरीदार भी बन गए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इन दुर्लभ किस्मों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। आम के साथ अचार की भी खूब बिक्री महोत्सव में केवल ताजे आम ही नहीं, बल्कि विभिन्न किस्मों के आम के अचार भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। महिलाओं और गृहिणियों ने स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए पारंपरिक अचारों में विशेष रुचि दिखाई। इससे किसानों और स्वयं सहायता समूहों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। बड़ी संख्या में पहुंचे किसान और अधिकारी कार्यक्रम में बिहार स्टेट को-ऑपरेशन फेडरेशन के अध्यक्ष विनय कुमार शाही, बिहार स्टेट को-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रमेश चंद्र चौबे, एनसीसीएफ एवं बिस्कोमान के अध्यक्ष विशाल सिंह, मुजफ्फरपुर को-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष अमरनाथ पांडेय, गोपालगंज को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष महेश राय, हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष दिनेश सिंह तथा बिहार ग्रामीण बैंक के महाप्रबंधक दीपक कुमार सहित बैंकिंग एवं सहकारिता क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नाबार्ड के एजीएम डॉ. अनुपम लाल कुसमाकर ने किया जबकि सहायक महाप्रबंधक नवीन चंद्र झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आज भी जारी रहेगा महोत्सव आम महोत्सव 26 जून तक जारी रहेगा। समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। आयोजकों ने आम जनता से बड़ी संख्या में पहुंचकर बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध आमों का स्वाद लेने और किसानों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है

रसायन-मुक्त आमों की प्रदर्शनी, रांची में किसानों को मिला सीधा बाजार

रांची राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के तत्‍वावधान में 19 से 21 जून तक आम महोत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है. राजधानी के शहीद चौक स्थित झारखंड राज्य सहकारी बैंक परिसर में लगे इस प्रदर्शनी में राज्य के आदिवासी किसानों द्वारा उत्पादित विभिन्न प्रकार के आमों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है. नाबार्ड झारखंड क्षेत्रीय कार्यालय वर्ष, 2021 से हर साल रांची में आम महोत्सव का आयोजन कर रहा है. शुक्रवार को इस महोत्सव का शुभारंभ नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक, झारखंड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड की अध्यक्ष बिभा सिंह, एसएलबीसी के महाप्रबंधक गुरु प्रसाद गोंड, सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्त्ता जमुना टुडू, दिव्यायन कृषि विकास केंद्र, रांची के सचिव स्वामी भावेशानंद ने संयुक्त रूप से किया. किसानों को मिल रहा सीधा बाजार यह उत्सव नाबार्ड वाडी परियोजनाओं के तहत समर्थित आदिवासी किसानों के लिए आयोजित किया जा रहा है, जो आम सहित अन्य फलों, अनाज और सब्जियां उगा रहे हैं. यह शहरवासियों को अच्छी गुणवत्ता और रसायन-मुक्त यानी कार्बाइड मुक्त आम उपलब्ध करा रहा है. आम महोत्सव आदिवासी किसानों को बिचौलियों और कमीशन एजेंटों से मुक्त होकर सीधे बाजार भी प्रदान करेगा. एक्सपोर्ट क्वालिटी रसायन मुक्त आम, अनाज और सब्जियां आम महोत्सव में राज्य के विभिन्न नाबार्ड समर्थित बाड़ी परियोजनाओं द्वारा उगाये गये दूधिया मालदा, हिमसागर, लंगड़ा, तोतापरी, हिमसागर, आम्रपाली, मल्लिका आदि सहित आमों की विभिन्न किस्मों की प्रदर्शन और बिक्री की जा रही है. यह एक्सपोर्ट क्वालिटी आम सीधे किसानों के खेतों से आप तक पहुंच रही है. उपज को पकाने के लिए किसी भी रसायन का उपयोग नहीं किया गया है. महोत्सव में लगाये गये स्टॉल्स पर काजू, मखाना, शहद, मोटे आर्गेनिक अनाज, सब्जियों और अन्य वनोत्पादों को लोग खास खुशबू और स्वाद के लिए खूब पसंद कर रहे हैं.

आम महोत्सव बना सफलता की मिसाल, किसानों और महिला एफपीओ को मिला बेहतर बाजार

रांची पूर्वी सिंहभूम अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 से बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत आम बागवानी एवं मिश्रित आम बागवानी का कार्य विभाग द्वारा दिए गए मार्गदर्शन के आलोक में किया जा रहा है। राज्य में लगभग 6000 एकड़ में बिरसा हरित ग्राम योजना के माध्यम से लाभुकों को न सिर्फ मजदूरी बल्कि स्थायी आजीविका के स्रोत भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2026-27 इसकी सफलता की कहानी स्वयं बयान कर रहा है। 96 हजार किलो से अधिक आम उत्पादन ने रचा नया कीर्तिमान वर्ष 2026-27 में कुल 96,175 किलो आम फलों का उत्पादन विभिन्न प्रखंडों में बिरसा हरित ग्राम योजना के लाभुकों द्वारा किया गया। इसके विक्रय हेतु जिला स्तर पर आम महोत्सव मेले का आयोजन किया गया, जो अपने आप में बेहद सफल रहा। एफपीओ और महिला किसानों ने बढ़ाया मेले का आकर्षण विभिन्न प्रखंडों से आए बिरसा हरित ग्राम योजना के किसान, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के सहयोग से एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों) जैसे बोड़ाम, तेजस्वी महिला किसान उत्पादक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, बहरागोड़ा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, कन्हाईसर चाकुलिया महिला किसान उत्पादक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड तथा धालभूमगढ़ नारी शक्ति आजीविका प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की दीदियों एवं किसानों द्वारा उत्साहपूर्वक मेले में भाग लिया गया। आम महोत्सव में किसानों को मिली अच्छी आय किसानों और एफपीओ से कुल 1,249 किलो आम की खरीद कर आम महोत्सव में स्टॉल लगाया गया। यह न सिर्फ दीदियों के लिए उत्साह का कारण बना, बल्कि जमशेदपुरवासियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा। बिरसा हरित ग्राम योजना के आम किसानों की मुस्कान बने। जिला स्तरीय आम महोत्सव में कुल 64,150 रुपये की आय हुई। साथ ही किसानों ने स्थानीय बाजार में भी आमों का विक्रय कर अच्छी आमदनी अर्जित की। 1400 किसान एफपीओ से जुड़े, बाजार तक मिली सीधी पहुंच बाजार विपणन समिति, पूर्वी सिंहभूम के सहयोग तथा जेएसएलपीएस के माध्यम से बिरसा हरित ग्राम योजना के 1400 किसानों को एफपीओ से टैग किया गया, जो उनके उत्पादों को स्थानीय और बाहरी विक्रेताओं तक पहुंचा रहे हैं। जेएसएलपीएस के तीन एफपीओ में कुल 4,103 महिला किसान शेयरधारक हैं, जबकि धालभूमगढ़ नारी शक्ति प्रोड्यूसर कंपनी में 2,085 शेयरधारक जुड़ी हुई हैं। इनके माध्यम से ट्रेडिंग का कार्य किया जा रहा है। APEDA और KISAN SAY से जुड़कर बढ़े निर्यात के अवसर इस वर्ष मनरेगा आधारित बिरसा हरित ग्राम योजना के लाभुकों के साथ समन्वय स्थापित कर Renown Agency के साथ टाई-अप किया गया है। इसके तहत A Category के आमों को APEDA और KISAN SAY जैसे संस्थानों के साथ ऑनबोर्ड किया जा रहा है, जिससे किसानों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिल सके। पूर्वी सिंहभूम से लंदन तक पहुंचा बिरसा हरित ग्राम योजना का आम बोड़ाम और बहरागोड़ा से 1.5 टन बिरसा हरित ग्राम योजना के आम को जिला प्रशासन के सहयोग से एफपीओ के माध्यम से लंदन भेजे जाने के लिए फ्लैग ऑफ किया गया। यह योजना की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रही है बिरसा हरित ग्राम योजना बिरसा हरित ग्राम योजना झारखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो ग्रामीणों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना की सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।