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स्मार्ट मीटरों की शिकायतों पर सख्त आयोग, 5% चेक मीटरों की टेस्ट रिपोर्ट तलब

लखनऊ  नियामक आयोग ने सभी बिजली कंपनियों से स्मार्ट मीटरों की चेक मीटर से जांच व गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट तलब कर ली है। स्मार्ट मीटरों के तेज चलने की लगातार शिकायतें आती रही हैं। प्रीपेड मीटर के दौरान यह शिकायतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। उन्हीं मीटरों को अब पोस्ट पेड कर दिया गया है। ऐसे में शिकायतें भी बरकरार हैं। इसके अलावा वर्टिकल सिस्टम और घरों में छोटी दुकान चलाने वाले उपभोक्ताओं के संबंध में भी रिपोर्ट पावर कॉरपोरेशन से मांगी गई है। ऐसे में उम्मीद है कि बिजली ग्राहकों को राहत देने वाला कोई फैसला हो सकता है। प्रदेश में करीब 90 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इनमें से तकरीबन पांच प्रतिशत पुराने मीटरों को चेक मीटर के तौर पर छोड़ने के आदेश थे। बिजली दरों पर सुनवाई के दौरान स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद व कई सामान्य उपभोक्ताओं ने सवाल उठाए थे। आयोग ने स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नियमानुसार इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी बिजली कंपनियों से 5 प्रतिशत चेक मीटरों की जांच व गुणवत्ता परीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि स्मार्ट मीटरों के एक्यूरेसी टेस्ट के संबंध में हर जिले के आधार पर अलग-अलग गुणवत्ता व परीक्षण रिपोर्ट भी आयोग को उपलब्ध करवाई जाए ताकि मीटरों की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इन आदेशों से उपभोक्ता हितों का संरक्षण होगा। घरों में छोटी दुकान करवाने वालों के लिए तीन महीने में मांगी रिपोर्ट बिजली दरों की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में छोटी दुकान करने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू बिजली ही इस्तेमाल करने की सहूलियत का मामला उठाया था। इससे राज्य के 35-40 लाख उपभोक्ता प्रभावित होंगे। अब तक इन्हें दुकान के लिए घरेलू बिजली इस्तेमाल करने की छूट नहीं है। लिहाजा कई बार ऐसे उपभोक्ताओं पर बिजली चोरी आदि धाराओं में कार्रवाई कर दी जाती है। टैरिफ आदेश में नियामक आयोग ने इस मामले में पावर कॉरपारेशन से तीन महीने में विस्तृत प्रस्ताव उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने पहले भी पावर कॉरपोरेशन को इस संबंध में प्रस्ताव देने के निर्देश दिए थे, लेकिन कॉरपोरेशन ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया था। कॉरपोरेशन के प्रस्ताव के बाद ऐसे उपभोक्ताओं की दिक्कतों का स्थाई समाधान होने की उम्मीद है। वर्टिकल व्यवस्था मूल्यांकन करवाएं, फीडर पर रहें पर्याप्त कर्मचारी उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों की वर्टिकल व्यवस्था के विफल होने और संविदा कर्मचारियों की छंटनी का भी मुद्दा उठाया था। आयोग ने टैरिफ आदेश में गुरुवार को पावर कॉरपोरेशन को आदेश दिए हैं कि पूरी वर्टिकल व्यवस्था का स्वतंत्र व पेशेवर एजेंसी से मूल्यांकन करवाने के आदेश दिए हैं। साथ ही उपकेंद्रों व फीडर स्तर तक रखरखाव के लिए पर्याप्त नियमित व संविदा कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 में निर्धारित मानव संसाधन मानकों का पूरा पालन किया जाए और प्रत्येक फीडर स्तर पर आवश्यक संख्या में कर्मचारी उपलब्ध कराए जाएं ताकि विद्युत व्यवस्था अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और उपभोक्ता हितैषी बन सके। 1912 पर आने वाली शिकायतों के निपटारे में लापरवाही पर नाराजगी नियामक आयोग ने 1912 पर आने वाली शिकायतों के निपटारे में बरती जा रही कोताही पर नाराजगी जताई है। आयोग ने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के पारदर्शी व प्रभावी निस्तारण की व्यवस्था पर तीन माह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन पावर कॉरपारेशन ने कोई रिपोर्ट नहीं दी। 1912 पर शिकायतों के फर्जी या कागजी निपटारे की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न होने पर विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 142 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।  

यूपी में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, स्मार्ट मीटर हटे, हर महीने आएगा सामान्य बिजली बिल

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने काफी हंगामा मचने के बाद अब प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर को वापस लेना शुरू कर दिया है। सरकार ने सभी वितरण कंपनियों को प्रदेश भर में लाखों उपभोक्ताओं के लिए पोस्टपेड बिल मॉडल बहाल करने की निर्देश दिया है। सरकार ने यह फैसला अनिवार्य प्रीपेड रिचार्ज, अचानक कनेक्शन काटने और प्रीपेड स्मार्ट मीटर से जुड़ी कथित बिलिंग अनियमितताओं को लेकर उपभोक्ताओं, व्यापारियों और किसान समूहों के महीनों के विरोध प्रदर्शन और शिकायतों के बाद लिया है। सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख वितरण निगमों- पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों, साथ ही आरडीएसएस के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटरों पर लागू होता है। उपभोक्ताओं के लिए अब क्या? रिचार्ज करने की जरूरत नहीं सरकार के इस कदम से अब उपभोक्ताओं को अपने बैलेंस को पहले से रिचार्ज करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय उन्होंने जितनी बिजली खर्च की, उसका हर माह बिल आएगा, बिल्कुल पहले की तरह। यानी आपने मई में बिजली खर्च की है तो आपको बिल जून में देना होगा। बिलिंग कैसे होगी? नई व्यवस्था के तहत स्मार्ट मीटर के बिल हर माह 10 तारीख तक तैयार किए जाएंगे और यह एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजे जाएंगे। उपभोक्ता आधिकारिक व्हाट्सऐप चैटबोट और 1912 बिजली हेल्पलाइन के माध्यम से भी बिल देख सकेंगे। जिन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी के दिक्कत है और जहां महीने की पांच तारीख तक ऑटोमैटिक रीडिंग नहीं मिलती, वहीं मीटर रीडिंग एजेंसियां बिलिंग प्रक्रिया पूरी करने के लिए मैन्युअल रीडिंग करेंगी। कैसे काम करेगी नई भुगतान प्रणाली? सरकार ने बताया कि उपभोक्ताओं को बिल जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। अगर बिल जमा नहीं किया तो सात दिन के भीतर बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद बकाया बिल पर विलंब शुल्क यानी लेट फीस भी लगेगी। बकाया राशि का निपटान ब्याज दरों में छूट के साथ-साथ बकाया राशि में राहत की घोषणा की है। घरेलु उपभोक्ताओं को चार किस्तों में राशि चुकाने की अनुमति दी जाएगी। उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा, “जब पोस्टपेड उपभोक्ताओं को प्रीपेड में बदला गया, तो उनकी पिछली सुरक्षा राशि बिल में जोड़ दी गई। 6 मई के आदेश के अनुसार, उपभोक्ताओं से मौजूदा लागत मानदंडों के अनुसार नई सुरक्षा जमा राशि जमा करने की अपेक्षा की गई थी। हालांकि, हमने इसका कड़ा विरोध किया क्योंकि इससे उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा, “अब यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि ली गई सुरक्षा राशि पहले की गणनाओं पर आधारित होगी और किश्तों में वसूल की जाएगी।” 15 मई से लगेगा विशेष शिविर शिकायतों के निवारण के लिए यूपीपीसीएल ने सभी डिस्कॉम को 15 मई से 30 जून के बीच कार्यकारी अभियंता और उपखंड कार्यालयों में विशेष स्मार्ट मीटर शिकायत शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इन शिविरों में बिल संबंधी विवाद, मोबाइल नंबर में सुधार, मीटर रीडिंग संबंधी शिकायतें, स्मार्ट मीटर में परिवर्तन से संबंधित मुद्दे और खाता मिलान जैसे मामलों को निपटाया जाएगा।