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मेट्रो का बढ़ता क्रेज: हरियाणा में यात्री संख्या में 13.5% इजाफा, कमाई भी बढ़ी

चंडीगढ़. हरियाणा के शहरी ट्रांसपोर्ट सिस्टम में लगातार अच्छी ग्रोथ हो रही है। 2025-26 में मेट्रो में सफर करने वालों की संख्या में 13.5% की अच्छी बढ़ोतरी देखी जा रहा है, जो यात्रियों के बढ़ते भरोसे और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरफ साफ झुकाव को दर्शाता है। मुख्य सचिव एवं हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एचएमआरटीसी) बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई बैठक में बताया गया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में मेट्रो नेटवर्क का उपयोग करने वाले यात्रियों की संख्या करीब पौने दो करोड़ (1.74 करोड़) रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में करीब डेढ़ करोड़ (1.53 करोड़) लोगों ने मेट्रो में यात्रा की थी। इस साल जनवरी तक किराया राजस्व में 12.64 प्रतिशत और गैर किराया राजस्व में 108 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। स्टेशनों के नामकरण अधिकारों की नीलामी और अतिरिक्त विज्ञापन स्थलों के विकास जैसी पहलों से वित्तीय स्थिति को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।एचएमआरटीसी के प्रबंध निदेशक चंद्र शेखर खरे ने बताया कि गुरुग्राम के सेक्टर-56 से पंचगांव तक मेट्रो कनेक्टिविटी पर विचार किया जा रहा है।

इंदौर में मेट्रो ट्रेन के स्पीड ट्रायल की टेस्टिंग, टीम ने सवार होकर किया सर्वे

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट के 17 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो के संचालन की राह आसान होती नजर आ रही है। सोमवार को कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (CMRS)की टीम ने मेट्रो ट्रेन में सवार होकर कोच की सुरक्षा, स्टेशनों की स्थिति देखी।  ट्रेन को अलग-अलग स्पीड पर चलाकर भी देखा गया। इस दौरान ट्रेक के जिस हिस्से में मोड़ है या ढलान है, वहां पर बारिकी से जांच की गई, ताकि 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन के संचालन के दौरान कोई परेशानी न हो। टीम ने रविवार से फाइनल निरीक्षण शुरू किया है और ट्रैक, स्टेशनों और मेट्रो सिस्टम की बारीकी से जांच की गई। रविवार को टीम ट्राली पर दौरा कर रही थी। सोमवार को मेट्रो ट्रेन में सवार होकर सर्वे किया। निरीक्षण के पहले दिन ट्रॉली रन किया गया। निरीक्षण 18 मार्च तक चलेगा। मंगलवार और बुधवार को मेट्रो ट्रेन को 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाकर ट्रैक की क्षमता और सुरक्षा का परीक्षण किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि तेज रफ्तार में ट्रेन और ट्रैक का प्रदर्शन कैसा रहता है। इसके बाद ही मेट्रो ट्रेन के संचालन की अनुमति मिलेगी। टीम के सर्वे के कारण गांधी नगर से बागड़दा तक छह किलोमीटर के हिस्से में मेट्रो का संचालन बंद कर दिया गया है। 80 रुपये तक होगा किराया मेट्रो के संचालन की मंजूरी मिलने के बाद मेट्रो रेल कार्पोरेशन किराए का निर्धारण करेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक अधिकतम किराया 80 रुपये तक तक हो सकता है। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक की दूरी 17 किलोमीटर है। अगले माह से मेट्रो का कमर्शियल संचालन हो सकता है। सरकार इसके लिए बड़ा लोकार्पण कार्यक्रम भी रख सकती है। फिलहाल मेट्रो साढ़े छह किलोमीटर हिस्से में संचालित हो रही है, लेकिन उस हिस्से में मेट्रो के लिए यात्री नहीं मिल रहे है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट को मिली मेट्रो सुविधा, सेक्टर-61 से गौर चौक तक कनेक्टिविटी होगी आसान

ग्रेटर नोएडा  ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है.  लंबे समय से मेट्रो कनेक्टिविटी की मांग कर रहे इस इलाके को अब मेट्रो का तोहफा मिलने जा रहा है. नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) की एक्वा लाइन मेट्रो का विस्तार करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है. इस नए रूट के बनने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के करीब 5 लाख लोगों और करीब 113 हाउसिंग सोसाइटी को सीधा फायदा मिलेगा. योजना के मुताबिक मेट्रो की यह नई लाइन नोएडा सेक्टर-61 से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर चौक तक जाएगी. इस पूरे रूट पर कुल 4 नए मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे. फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो की कमी के कारण लोगों को रोजाना भारी जाम, बसों और निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है. मेट्रो के आने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी. जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में होगी आसानी अधिकारियों के अनुसार यह रूट यूपी कैबिनेट से पहले ही मंजूर नॉलेज पार्क-5 तक मेट्रो विस्तार योजना का ही हिस्सा है, लेकिन इसे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 स्टेशन पर आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) से भी जोड़ा जाएगा. इससे लोगों को सिर्फ मेट्रो ही नहीं, बल्कि तेज रफ्तार आरआरटीएस की सुविधा भी मिलेगी.  इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट से जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी. बताया जा रहा है कि आरआरटीएस सराय काले खां से चलकर गाजियाबाद होते हुए नॉलेज पार्क-5 तक जाएगी और वहीं से यह मेट्रो लाइन ग्रेटर नोएडा वेस्ट को जोड़ेगी. सेक्टर-61 में पहले से दिल्ली मेट्रो और आगे जाने वाली एनएमआरसी मेट्रो की कनेक्टिविटी मौजूद है.  ऐसे में लोग दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के बीच बिना ज्यादा परेशानी के आ-जा सकेंगे. रूट की फाइनल डीपीआर बनकर तैयार इस रूट की फाइनल डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर ली गई है. कुछ जरूरी संशोधन के बाद इसे दोबारा यूपी कैबिनेट के पास भेजा जाएगा.  वहां से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है. माना जा रहा है कि इस मेट्रो लाइन के शुरू होने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ट्रैफिक जाम कम होगा, प्रॉपर्टी के दाम बढ़ेंगे और लोगों को सुरक्षित, सस्ता और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन मिलेगा. कुल मिलाकर, मेट्रो विस्तार की यह योजना ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विकास को नई रफ्तार देने वाली साबित होगी और यहां रहने वाले आम लोगों के रोजमर्रा के सफ़र को आसान बनाएगा. 

भोपाल में 20 दिसम्बर को शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक, सीएम डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल रहेंगे मौजूद

शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक (उत्तरी एवं मध्य राज्य) भोपाल में 20 दिसम्बर को बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल भी रहेंगे मौजूद भोपाल  केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक (उत्तरी एवं मध्य राज्यों) 20 दिसंबर शनिवार प्रात: 11 बजे कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र, भोपाल में आयोजित हो रही है। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रमुख शहरी विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच सहयोग और समन्वय को सुदृढ़ करना है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि यह बैठक राज्यों को योजना-वार प्रगति प्रस्तुत करने, क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं को साझा करने, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान तथा मंत्रालय से नीतिगत एवं रणनीतिक मार्गदर्शन प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी। क्षेत्रीय बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल और प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश के शहरी विकास मंत्री एवं राज्यमंत्री, भारत सरकार एवं राज्यो के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण स्वच्छ सर्वेक्षण वर्ष 2025-26 के लिए कार्य-दिशा पुस्तिका का विमोचन होगा। इस संबंध में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि यह कार्य-दिशा पुस्तिका स्वच्छता, स्थायित्व तथा नागरिक-केंद्रित शहरी प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक में पाँच सत्रों में महत्वपूर्ण विषयों पर होगी चर्चा बैठक के दौरान पाँच सत्रों में शहरी विकास से जुड़े प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इन सत्रों के माध्यम से केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही व्यवहारिक चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकेगा। अमृत योजना के अंतर्गत संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता तथा समयबद्ध पूर्णता से संबंधित विषयों पर विचार किया जाएगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये आवश्यक सुधारात्मक कदमों पर भी मंथन होगा। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत डंप स्थलों के वैज्ञानिक प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट निपटान तथा स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियों पर मंथन होगा। स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत निर्माणाधीन एवं स्वीकृत आवासों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी तथा लाभार्थियों को समय पर आवास उपलब्ध कराने में आ रही समस्याओं के समाधान पर विचार किया जाएगा। अंगीकार अभियान की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों एवं चुनौतियों की समीक्षा करते हुए अभियान को अधिक प्रभावी एवं जनसहभागिता आधारित बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। सत्र में शहरी परिवहन व्यवस्था के अंतर्गत नगर बस सेवाओं, भूमिगत रेल प्रणाली तथा पैदल मार्गों से संबंधित आवागमन व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। यातायात को सुगम, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिये आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। क्षेत्रीय बैठक से राज्य-वार एवं योजना-वार क्रियान्वयन चुनौतियों की पहचान, कार्यक्रमों को सशक्त बनाने के लिये व्यावहारिक अनुशंसाएँ, केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा शहरी प्रशासन एवं सेवा प्रदायगी में सुधार के लिए ठोस रणनीतिक सुझाव प्राप्त होगे।  

भोपाल में प्रदूषण मुक्त सफर की शुरुआत, 21 दिसंबर से दौड़ेगी मेट्रो ट्रेन, मोहन सरकार की बड़ी योजना

 भोपाल मध्य प्रदेश अब देश के उन 12 चुनिंदा राज्यों में शामिल हो रहा है, जहां एक से अधिक शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। इंदौर की तरह अब राजधानी भोपाल भी मेट्रो के नये दौर में प्रवेश करने को तैयार है। प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि भोपाल में मेट्रो का संचालन 21 दिसंबर से शुरू कर दिया जाएगा। इससे राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। राजधानी के यात्रियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से प्रतीक्षित सुविधा है, जिसका उद्देश्य शहर की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के दबाव को कम कर यातायात निर्बाध बनाना है। इंदौर मेट्रो सबसे पहले चली प्रदेश में सबसे पहले इंदौर मेट्रो ट्रेन की शुरुआत 31 मई, 2025 को हुई। अभी इसका छह किलोमीटर (गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन 3 तक) के 'सुपर प्रॉयोरिटी कॉरिडोर' पर कमर्शियल रन किया जा रहा है, जो कि कुल 31.32 किमी के पहले चरण का हिस्सा है, जिसका धीरे-धीरे विस्तार हो रहा है। वहीं, भोपाल में 21 दिसंबर को कमर्शियल रन शुरू होगा। इसमें भोपाल एम्स से सुभाष नगर तक साढ़े सात किमी प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो दौड़ेगी। यह भोपाल के पहले चरण के 30 किमी का हिस्सा है। प्रदेश में इंदौर और भोपाल में कुल 60 किमी के काम को पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2028 तय किया गया है। प्रदूषण मुक्त सफर मेट्रो के शुरू होने से रोजाना हजारों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त यात्रा का विकल्प मिलेगा। हालांकि अभी यात्रियों की संख्या कम है, लेकिन आने वाले समय में मेट्रो की दूरी बढ़ने के साथ उपयोग बढ़ने की बात विशेषज्ञ बता रहे हैं। साथ ही शहर के प्रमुख इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे समय और ईंधन की बचत भी होगी। राज्य सरकार का कहना है कि मेट्रो परियोजना न केवल परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भोपाल को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लक्ष्य को और सुदृढ़ करेगी। मेट्रो कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। इसी तरह इंदौर में मेट्रो संचालन शुरू होने के बाद से शहरवासियों में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर उत्साह देखने को मिला है और अब भोपाल में भी इसी तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो ट्रेन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी। सुरक्षा के लिए ऑटोमैटिक डोर सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, यात्री सूचना प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीक इसमें शामिल हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा-कुशल प्रणाली अपनाई गई है। आने वाले महीनों में मेट्रो के अन्य चरणों पर भी तेजी से काम किया जाएगा, ताकि पूरे शहर को बेहतर नेटवर्क से जोड़ा जा सके। अभी इन 11 राज्यों में दौड़ती है मेट्रो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, गुजरात, केरल, राजस्थान, हरियाणा शामिल है। अब भोपाल मेट्रो के व्यावसायिक संचालन की शुरुआत के साथ मध्य प्रदेश 12वां राज्य बन गया। देश के इन शहरों में चल रही मेट्रो     दिल्ली-एनसीआर: देश का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क     कोलकाता: भारत की पहली मेट्रो (1984 में शुरू)।     मुंबई: देश के बड़े मेट्रो नेटवर्क में से एक।     बेंगलुरु (नम्मा मेट्रो): दक्षिण भारत का प्रमुख नेटवर्क।     हैदराबाद: आधुनिक मेट्रो प्रणाली के लिए जाना जाता है।     चेन्नई: एक और बड़ा महानगर मेट्रो।     जयपुर: राजस्थान की राजधानी में मेट्रो।     कोच्चि (केरल): दक्षिण भारत का महत्वपूर्ण मेट्रो नेटवर्क।     लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी में मेट्रो।     नोएडा-ग्रेटर नोएडा: दिल्ली से सटा हुआ मेट्रो नेटवर्क।     अहमदाबाद: गुजरात का मेट्रो नेटवर्क।     नागपुर: अपनी डबल-डेकर मेट्रो के लिए प्रसिद्ध।     कानपुर: उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण मेट्रो।     पुणे: महाराष्ट्र का एक और मेट्रो शहर।     गुरुग्राम (रैपिड मेट्रो): दिल्ली मेट्रो से जुड़ा हुआ। यहां चल रहा काम  पटना, आगरा में भी मेट्रो या तो चल रही है या निर्माण के विभिन्न चरणों में है, जिससे भारत का मेट्रो नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है।  

एम्स से सुभाष नगर तक भोपाल मेट्रो का CMRs निरीक्षण खत्म, जल्द दौड़ेगी मेट्रो

भोपाल  अक्टूबर में भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर संचालन का जो लक्ष्य रखा गया था, अब वह पूरा होने के करीब है। मेट्रो प्रबंधन ने संचालन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली से आई कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम द्वारा दूसरे चरण का निरीक्षण पूरा करा लिया है। सीएमआरएस की तीन सदस्यीय टीम ने 15 और 16 अक्टूबर को एम्स से सुभाष नगर स्टेशन तक प्रायोरिटी कॉरिडोर का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्य लाइन, ट्रैक, विद्युत और यांत्रिक (ई एंड एम) सिस्टम, स्टेशन भवन और परिचालन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की गई। यह भोपाल मेट्रो की अंतिम परीक्षा मानी जा रही है। अब सिर्फ ‘ओके टू रन’ रिपोर्ट का इंतजार है। इससे पहले 25 सितंबर को मुख्य रेलवे संरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) और उनकी टीम ने डिपो और रोलिंग स्टॉक का परीक्षण किया था। वहीं इस बार सीएमआरएस टीम ने सभी स्टेशनों पर सुरक्षा और तकनीकी मानकों की समीक्षा की ताकि संचालन शुरू होने से पहले सभी सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मानक अनुरूप हों। CMRS की दूसरी जांच में डिपो से AIIMS Bhopal तक के आठ मेट्रो स्टेशन शामिल होंगे। इस जांच में यात्रियों के लिए सुविधाओं पर खास ध्यान दिया गया। इसमें स्टेशन के आने-जाने के रास्ते, लिफ्ट, एस्केलेटर, शौचालय, कंट्रोल रूम, आग से सुरक्षा के इंतजाम, ट्रैक और बिजली की व्यवस्था, टेलीकॉम नेटवर्क और सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं। स्टेशनों की सुंदरता बढ़ाने के कामों को भी देखा गया। CMRS की दूसरी जांच का यह हिस्सा प्राथमिकता वाले कॉरिडोर के एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्से को कवर करेगा। यह हिस्सा सुभाश नगर डिपो को AIIMS Bhopal से जोड़ता है। इस खंड में आठ मेट्रो स्टेशन हैं और यह शुरुआती यात्री सेवा का मुख्य आधार बनेगा। MPMRCL के अधिकारियों ने बताया कि CMRS की यह जांच मेट्रो के संचालन की सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए बहुत ज़रूरी है। उन्होंने बताया कि जांच में हर छोटी-बड़ी चीज़ का बारीकी से मुआयना किया जा रहा है। स्टेशन के अंदर और बाहर की सुरक्षा व्यवस्थाएं, यात्रियों के लिए आरामदायक माहौल और आपातकालीन स्थिति से निपटने के इंतजामों को परखा जा रहा है। यह भी बताया गया कि मेट्रो के ट्रैक और बिजली की सप्लाई की जांच भी की जा रही है ताकि संचालन के दौरान कोई दिक्कत न आए। टेलीकॉम नेटवर्क की जांच यह सुनिश्चित करेगी कि यात्रियों को संचार की कोई समस्या न हो। इस पूरे प्रोजेक्ट में MPMRCL के अधिकारी पूरी मेहनत से लगे हुए हैं ताकि भोपालवासी जल्द से जल्द इस आधुनिक सुविधा का लाभ उठा सकें। दिवाली के बाद होगा अंतिम निरीक्षण मेट्रो प्रबंधन के अनुसार अब अगला कदम सीसीआरएस द्वारा अंतिम निरीक्षण है। उनकी स्वीकृति मिलने पर ही भोपाल मेट्रो को ‘ओके टू रन’ रिपोर्ट जारी होगी। रिपोर्ट मिलते ही राजधानी के लोगों का लंबे समय से चल रहा इंतजार खत्म हो जाएगा और भोपाल मेट्रो अपने पहले चरण में एम्स से सुभाष नगर तक दौड़ने लगेगी।  

पटना मेट्रो का दौड़ना शुरू, चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने खास नजर डालते हुए बाहर का नजारा देखा

पटना  पटना मेट्रो का इंतजार अब खत्म हो गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज (सोमवार) पटना मेट्रो को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस दिन भूतनाथ से न्यू आईएसबीटी तक पहले फेज की मेट्रो के परिचालन का उद्घाटन किया गया.बिहार विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले पटना मेट्रो की शुरुआत हो गई है। सोमवार को CM नीतीश कुमार ने हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया। पहले फेज में ISBT से भूतनाथ रोड के बीच 3 स्टेशन के बीच इसे चलाया जाएगा। ये ट्रैक 4.5 KM लंबा है। तीन स्टेशनों तक मिलेगी सेवा वर्तमान में यह मेट्रो सेवा 4.3 किलोमीटर रूट पर चलेगी, जो तीन स्टेशनों आईएसबीटी, जीरो माइल और भूतनाथ रोड के बीच संचालित होगी. पटना मेट्रो रेल कार्पोरेशन (पीएमआरएल) की तरफ से परिचालन की पूरी तैयारी कर ली गई थी. छह भूमिगत मेट्रो स्टेशनों की आधारशिला भी रखी इस दिन उद्घाटन के साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कॉरिडोर वन के तहत पटना जंक्शन सहित छह भूमिगत मेट्रो स्टेशनों और 9.35 किलोमीटर लंबी सुरंग की आधारशिला भी रखी. सेफ्टी कमिश्नर दे चुके हैं हरी झंडी 3 दिन पहले मेट्रो रेल सेफ्टी कमिश्नर (CMRS) ने पटना मेट्रो के प्राथमिक कॉरिडोर के लिए सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी किया था। CMRS ने सिग्नलिंग सिस्टम, पटरियों की मजबूती, ट्रेन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम और अन्य बिंदुओं की गहन जांच की थी। सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के बाद मेट्रो सेवा शुरू करने की मंजूरी दी गई। मधुबनी पेंटिंग से सजी मेट्रो मेट्रो के कोच को मधुबनी पेंटिंग से खास तौर पर सजाया गया है, जो बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है. कोचों में गेट, खिड़कियों और अंदरुनी हिस्सों पर गोलघर, महावीर मंदिर, महाबोधि वृक्ष, बुद्ध स्तूप और नालंदा के खंडहर जैसे बिहार के विश्वप्रसिद्ध पर्यटक स्थलों के आकर्षक स्टिकर लगे हैं. 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी गति शुरुआत में मेट्रो की अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी. 15 से 30 रुपये होगा किराया आइएसबीटी से जीरो माइल का किराया 15 रुपये, वहीं न्यू आइएसबीटी से भूतनाथ मेट्रो स्टेशन का किराया 30 रूपये तय किया गया है. यानी पटना मेट्रो का फिलहाल न्यूनतम किराया 15 रुपये और अधिकतम किराया 30 रुपये रहेगा. दो इमरजेंसी बटन की सुविधा यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए हर मेट्रो कोच में 360-डिग्री सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. आपात स्थिति के लिए दो इमरजेंसी बटन और माइक्रोफोन की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है. प्रत्येक कोच में कुल 138 सीटें इमरजेंसी में बटन दबाने पर यात्री सीधे मेट्रो रेल के ड्राइवर से बात कर सकेंगे और सीसीटीवी फुटेज भी कंट्रोल रूम में भेजी जाएगी. प्रत्येक कोच में कुल 138 सीटें हैं और उसमें 945 यात्रियों के खड़े होकर यात्रा करने की व्यवस्था है. सुबह 8 बजे से शुरू होगा परिचालन पहले चरण में तो यह मेट्रो आईएसबीटी मेट्रो स्टेशन से भूतनाथ रोड तक चलेगी. अभी इसका परिचालन सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक किया जाएगा. हर 20 मिनट के अंतराल पर प्रत्येक स्टेशन पर मेट्रो मिलेगी. रोजाना मेट्रो 40 से 42 फेरे लगाएगी. 7 सितंबर को एलिवेटेड ट्रैक पर दौड़ी थी मेट्रो पटना मेट्रो का पहला ट्रायल रन 3 सितंबर को हुआ था। डिपो के अंदर 800 मीटर के ट्रैक पर ट्रेन को दौड़ाया गया था। इसके बाद 7 सितंबर को तीन कोच वाली मेट्रो डिपो से निकलकर ISBT स्टेशन से भूतनाथ स्टेशन तक 3.6KM का सफर एलिवेटेड ट्रैक पर तय किया था। इस दौरान मेट्रो की स्पीड, सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रैक की सुरक्षा से जुड़ी सभी चीजों की जांच की गई है। ट्रायल के दौरान आने वाली तकनीकी गड़बड़ियों को भी देखा गया था। मधुबनी पेंटिंग से डिजाइन की गई मेट्रो की बोगियां पटना मेट्रो की बोगियों को मधुबनी पेंटिंग से डिजाइन किया गया है। पूरी बोगियां नारंगी कलर में दिखेंगी। मेट्रो की तीनों बोगियों की गेट, बॉडी, खिड़की सहित हर जगह पर स्टिकर लगाया गया है। बोगियों के बाहर और अंदर का लुक बदला गया है। मेट्रो की छत पर मधुबनी पेंटिंग की स्टिकर चिपकाई गई है। बोगियों पर गोलघर, महावीर मंदिर, महाबोधि वृक्ष, बुद्ध स्तूप, नालंदा खंडहर सहित बिहार के सभी टूरिस्ट प्लेस की तस्वीरों से सजाया गया है। मेट्रो कॉरिडोर वन और टनल की रखी आधारशिला मुख्यमंत्री मेट्रो कॉरिडोर वन के पटना जंक्शन समेत छह भूमिगत स्टेशन और 9.35 किलोमीटर लंबे टनल का शिलान्यास किया। कॉरिडोर वन में पटना जंक्शन से रुकनपुरा और मीठापुर तक 9.35 किमी में टनल बनेगा। कॉरिडोर वन में 2565.80 करोड़ से छह भूमिगत स्टेशन सहित टनल का निर्माण होना है। एजेंसी से एग्रीमेंट कर लिया गया है। निर्माण 42 महीने में पूरा करना है। कॉरिडोर वन के लिए दो हिस्सों में टेंडर जारी हुआ था। इसके पहले भाग में रुकनपुरा, राजा बाजार और चिड़ियाघर स्टेशन बनेगा। पाटलिपुत्र एलिवेटेड स्टेशन के बाद रुकनपुरा रैप से इसपर 1147.50 करोड़ खर्च होंगे। दूसरे भाग में विकास भवन, विद्युत भवन और पटना जंक्शन स्टेशन का निर्माण होगा। साथ ही विकास भवन से पटना जंक्शन होते हुए मीठापुर रैंप तक टनल बनेगा। निर्माण पर 1418.30 करोड़ खर्च होंगे।

मेट्रो कॉर्पोरेशन ने जारी किए 1200 नोटिस, ब्लू लाइन निर्माण से प्रभावित होंगे मकान-दुकान

भोपाल   भोपाल में मेट्रो की ब्लू लाइन के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर का जमीनी काम शुरू हो गया है। जेके रोड क्षेत्र में पीयर्स के लिए लोहे के जाल बिछने लगे है। पीयर्स पर ही स्लैब बिछेगी और यहां पटरियों का काम होगा। ब्लू लाइन में करीब 13 किमी लंबाई की एलिवेटेड लाइन बनना है। 14 किमी लंबाई की लाइन एम्स से करोद तक की है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से ब्लू लाइन से जुड़े निर्माणों के लिए 1200 नोटिस तैयार किए गए है। एक सप्ताह में ये नोटिस दे दिए जाएंगे। यदि कोई नहीं हटेगा(Demolishe) तो पुलिस और प्रशासनिक क्षरा कार्रवाई की जाएगी। 700 मामलों में चल रही सुनवाई मेट्रो रेल की लाइन में आ रहे निर्माणों में से 700 की प्रशासन ने नियमित सुनवाई शुरू की है। तहसीलदार-एसडीएम कोर्ट में इन्हें सुना जा रहा है। मुआवजे के राशि व विस्थापन की नीति से ये सहमत नहीं है। ब्लू लाइन में तो जहांगीराबाद का बाजार ही पूरा आ रहा है और लगभग सभी दुकानदार इसके विरोध में है। गौरतलब है कि ब्लू लाइन भदभदा से शुरू होकर रत्नागिरी तिराहा तक है। जबकि ओरेंज लाइन एम्स से करोद तक है। ओरेंज लाइन में सुभाष ब्रिज तक 6.22 किमी का काम पूरा हो चुका है और यहां अक्टूबर में कमर्शियल रन शुरू करने की तैयारी है।