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मिडिल ईस्ट संकट: एयरस्पेस बंद, सैकड़ों फ्लाइट्स कैंसिल और डायवर्ट

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कई देशों के एयरस्पेस बंद होने के कारण पश्चिमी देशों की ओर जाने वाली उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं. कई एयरलाइंस को अपने रूट बदलने पड़े हैं, जिससे फ्लाइट का समय बढ़ गया है और यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में हालात बिगड़ने के बाद कई देशों ने एहतियातन अपना हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) बंद कर दिया है. इसके कारण यूरोप और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है. कुछ फ्लाइट को दक्षिणी मार्ग से ओमान, सऊदी अरब और मिस्र के ऊपर से होकर भेजा जा रहा है, जिससे ट्रैवल टाइम एक से दो घंटे तक बढ़ गया है. उड़ान की स्थिति चेक करने की सलाह नागरिक उड्डयन अधिकारियों के अनुसार, सैकड़ों उड़ानें रद्द या डायवर्ट की गई हैं. कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने यात्रियों को एडवाइजरी जारी कर पहले से उड़ान की स्थिति चेक करने को कहा है. ट्रांजिट यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कनेक्टिंग फ्लाइट्स के समय में बदलाव हुआ है. भारतीय एयरलाइंस पर भी इसका असर पड़ा है. दिल्ली-लंदन और अन्य यूरोपीय मार्गों पर उड़ानों को वैकल्पिक रास्तों से संचालित किया जा रहा है. कुछ फ्लाइट में ईंधन भरने के लिए अतिरिक्त टेक्निकल हॉल्ट भी करना पड़ रहा है. एयरलाइंस का कहना है कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हालात सामान्य होते ही नियमित रूट बहाल कर दिए जाएंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि तनाव जारी रहा तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के समय और लागत पर और असर पड़ सकता है. फिलहाल यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा से संपर्क कर अपनी फ्लाइट की ताजा स्थिति की जानकारी लेते रहें. कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कई प्रमुख एयरपोर्ट और देशों ने अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. इससे यूरोप, एशिया और नॉर्थ अमेरिका के बीच उड़ान संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. नीचे प्रमुख हवाई अड्डों और उनके हालात की जानकारी दी गई है: 1. Dubai International Airport (DXB) दुनिया के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हब में शामिल इस एयरपोर्ट पर रात में हमला होने की खबर है. कई उड़ानें प्रभावित हुईं और संचालन बाधित रहा. 2. Abu Dhabi International Airport (AUH) ड्रोन हमले की सूचना के बाद सभी प्रस्थान (Departures) अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए गए. 3. Hamad International Airport (DOH) कतर का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हब 28 फरवरी की शाम से एयरस्पेस बंद है. 4. Kuwait International Airport (KWI) ड्रोन हमले के खतरे के बाद एयरस्पेस 28 फरवरी से बंद.  5. Baghdad International Airport (ORBI) 28 फरवरी दोपहर से एयरस्पेस बंद. यह रूट भारत-यूरोप के उत्तरी ओवरफ्लाइट कॉरिडोर को सीधे प्रभावित करता है. 6. Tehran Imam Khomeini International Airport (IKA) लगातार एयरस्पेस बंद. फारस की खाड़ी और ओमान सागर के ऊपर संघर्ष क्षेत्र घोषित. 7. Bahrain International Airport (BAH) एयरस्पेस बंद. रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के मुख्यालय पर मिसाइल हमला हुआ. 8. King Abdulaziz International Airport (JED) एयरस्पेस आंशिक रूप से बंद. केवल निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से ही विमान संचालन की अनुमति. 9. Israel देश का एयरस्पेस 6 मार्च तक बंद घोषित. 10. Muscat International Airport (MCT) 18 नॉटिकल माइल का नो-फ्लाई जोन घोषित. यूएई से आने-जाने वाली उड़ानों के लिए अस्थायी नया मार्ग तय. 11. Sharjah International Airport / Ras Al Khaimah International Airport 2 मार्च तक एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) सेवाएं बंद या सीमित. असर क्या पड़ा? लंबी दूरी और अतिरिक्त ईंधन की जरूरत के कारण एयरलाइंस की ऑपरेटिंग लागत बढ़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो टिकट कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. साथ ही कार्गो और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ने की संभावना है. कुल मिलाकर, क्षेत्रीय तनाव का असर अब वैश्विक हवाई नेटवर्क और यात्रियों की जेब दोनों पर पड़ता दिख रहा है. ट्रांजिट यात्रियों को भारी असुविधा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि क्षेत्रीय तनाव जारी रहा तो अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात पर और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे उड़ान से पहले एयरलाइन से स्थिति की पुष्टि ज़रूर करें.

ईरान में बढ़ता तनाव, सरकार की चेतावनी—अपने लोगों को तुरंत लौटने को कहा

तेहरान मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से तनाव चरम पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि इस हफ्ते के आखिर में अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है, जिससे दुनियाभर में टेंशन बढ़ गई है। इस बीच, विभिन्न देश ईरान में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वहां से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में लग गए हैं। पोलैंड के प्रधानमंत्री ने गुरुवार को ईरान में रह रहे अपने नागरिकों से तुरंत वहां से निकलने के लिए कह दिया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने गुरुवार को कहा कि ईरान में मौजूद पोलिश नागरिकों को तुरंत निकल जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि हथियारों से लैस लड़ाई की संभावना के कारण कुछ ही घंटों में निकलना मुमकिन नहीं होगा। टस्क ने कहा, "प्लीज तुरंत ईरान छोड़ दें… और किसी भी हालत में इस देश में न जाएं।" इस बीच, ईरान ने अमेरिका पर पलटवार किया है। ईरान के एटॉमिक एनर्जी चीफ मोहम्मद इस्लामी ने कहा कि कोई भी देश इस्लामिक रिपब्लिक को न्यूक्लियर एनरिचमेंट के उसके अधिकार से वंचित नहीं कर सकता। गुरुवार को एतेमाद डेली में पब्लिश हुए एक वीडियो के मुताबिक, इस्लामी ने कहा, "न्यूक्लियर इंडस्ट्री का आधार एनरिचमेंट है। न्यूक्लियर प्रोसेस में आप जो कुछ भी करना चाहते हैं, उसके लिए आपको न्यूक्लियर फ्यूल की जरूरत होती है।" उन्होंने आगे कहा, "ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के नियमों के मुताबिक चल रहा है, और कोई भी देश ईरान को इस टेक्नोलॉजी से शांति से फायदा उठाने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता।" यह कमेंट्स मंगलवार को जिनेवा में तेहरान और वाशिंगटन के बीच ओमान की मध्यस्थता वाली बातचीत के दूसरे राउंड के बाद आए हैं। बुधवार को, ट्रंप ने अपनी ट्रुथ सोशल साइट पर एक पोस्ट में फिर से इशारा किया कि अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। एक और एयरक्राफ्ट बहुत जल्द होगा रवाना वॉशिंगटन ने बार-बार ज़ीरो एनरिचमेंट की मांग की है, लेकिन ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और इलाके में मिलिटेंट ग्रुप्स को उसके सपोर्ट पर भी बात करने की कोशिश की है। पश्चिमी देश इस्लामिक रिपब्लिक पर न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हैं। तेहरान ऐसी मिलिट्री महत्वाकांक्षाओं से इनकार करता है, लेकिन सिविलियन मकसदों के लिए इस टेक्नोलॉजी पर अपने अधिकार पर जोर देता है। ट्रंप, जिन्होंने ईरान पर समझौते के लिए दबाव बढ़ाया है, ने इलाके में एक बड़ी नेवी फोर्स तैनात की है, जिसे उन्होंने आर्मडा बताया है। जनवरी में एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन और एस्कॉर्ट बैटलशिप को गल्फ में भेजने के बाद, उन्होंने हाल ही में इशारा किया कि एक दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर, गेराल्ड फोर्ड, बहुत जल्द मिडिल ईस्ट के लिए रवाना होगा।

Middle East तनाव: ईरान पर खतरा बढ़ा, F-35 और US बेड़े की मौजूदगी, सऊदी झटका और ट्रंप की उकसावे वाली नीति

तेहरान  ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है. फिलहाल दोनों देशों में सीधी जंग तो नहीं, लेकिन हालात उससे कम भी नहीं हैं. सैन्य, राजनीतिक और रणनीतिक टकराव चल रहा है. अमेरिका, ईरान पर परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय मिलिशिया को समर्थन और मानवाधिकारों के आरोप लगा रहा है, वहीं ईरान अमेरिका को मध्य-पूर्व में दखल देने वाला और प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला देश कहता है. पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में विमानवाहक पोत, युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. जिसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले को पूरी जंग मानकर उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा. दोनों देशों के बीच बयानबाजी सैन्य तैयारियां, प्रतिबंध, साइबर और खुफिया कार्रवाइयां इस टकराव को और तेज कर रही हैं. ईरान की ओर बढ़ रही विनाश की खेप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका का एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें उम्मीद है कि इसका इस्तेमाल करने की नौबत नहीं आएगी. ट्रंप ने एक बार फिर तेहरान को चेतावनी दी कि वह प्रदर्शनकारियों की हत्या या अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने जैसी किसी भी कार्रवाई से बचे. उन्होंने ईरान को व्यापार समझौता करने या परिणाम भुगतने की चेतावनी दी. सऊदी अरब ने दिया अमेरिका को झटका ईरान भी अमेरिका के इस कदम को लेकर अपनी तैयारी पूरी रख रहा है. ईरान की ओर से UAE से बातचीत की गई थी, जिसके बाद इस देश ने स्पष्ट कहा कि यह अपनी हवा, जमीन या पानी किसी भी हमला-सक्रियता के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा. ऐसी ही बातचीत ईरान की सऊदी अरब से भी हुई है. इस देश ने भी अमेरिका को झटका देते हुए कहा है कि तेहरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए वो अपने हवाई क्षेत्र या जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा. सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेश्चकियान से बातचीत के बाद ये बात कही है. दोनों देश साफ कर चुके हैं कि वे किसी भी सैन्य हमले के लिए अपने देश को लॉन्चपैड नहीं बनने देगा. सैन्य अभ्यास की तैयारी में है अमेरिका समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अमेरिकी एयर फोर्स के सेंट्रल कमांड ने बयान में कहा कि यह अभ्यास मिडिल ईस्ट में लड़ाकू हवाई ताकत को तैनात करने, फैलाने और बनाए रखने की क्षमता दिखाएगा. यहां बताना जरूरी है कि सेंट्रल कमांड ही इस इलाके में अमेरिकी सेनाओं की जिम्मेदारी संभालती है. लेकिन अभ्यास की तारीख या सटीक जगह का खुलासा नहीं किया गया है. इससे रहस्य और बढ़ गया है. क्या यह ईरान की सीमा के करीब होगा? या सिर्फ दिखावा है? अमेरिकी जंगी बेड़े में क्या-क्या मौजूद?     अमेरिका के जंगी बेड़े में USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर और उसके साथ चलने वाले युद्धपोत मौजूद हैं.     अमेरिका के मशहूर फाइटर जेट F-35 को यहां तैनात किया गया है, जो अपनी सटीक मारक क्षमता और छिपकर वार करने में सिद्धहस्त है.     इसके अलावा Growler इलेक्ट्रॉनिक विमान और विध्वंसक युद्धपोत क्षेत्र में मौजूद हैं. जो ईरान पर कभी भी हमले के लिए पूरी तरह तैयार हैं.     अमेरिका ने डेमो ऑफ फोर्स यानी ताकत दिखाने के लिए तैयारी पूरी कर ली है, वहीं ईरान ने जवाबी चेतावनियों, युद्ध-तैयारी, समुद्री और तट सुरक्षा बढ़ाई है. अमेरिका के जमावड़े पर क्या है ईरान का रिएक्शन? ईरान ने अमेरिका की चेतावनियों का कड़ा जवाब दिया है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी तरह का हमला क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाएगा. ईरान ने चेताया कि किसी भी सैन्य प्रयास का जवाब पहले से भी ज्यादा दर्दनाक और निर्णायक होगा. तेहरान के एक केंद्रीय चौक में एक विशाल पोस्टर भी दिखाई दिया, जिसमें दिखाई गया- ‘आप हवा बोओगे, तूफान काटोगे’, जिसका सीधा संकेत अमेरिकी कैरियर ग्रुप को है. ईरान-अमेरिका के बीच क्यों बढ़ा तनाव? वैसे तो परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर ईरान-अमेरिका में पहले से ही असहमति है, लेकिन ट्रंप ने इस कार्यकाल में ईरान पर परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए दबाव डाला है. पिछले दिनों ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जिसमें प्रदर्शनकारियों की मौत पर दुनिया भर में ईरान की आलोचना हो रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को मारता रहा, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करेगा. बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में हजारों लोगों की मौत हुई है. प्रदर्शन तो फिलहाल शांत है लेकिन अमेरिका का सैन्य जमावड़ा क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है.