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उद्यानिकी मंत्री कुशवाह ने कहा- पुष्प उत्पादन को दिया जायेगा व्यवसायिक स्वरूप

प्रदेश में 45 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में होती है फूलों की खेती   भोपाल उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि प्रदेश में पुष्प उत्पादन को व्यावसायिक स्वरूप दिया जाएगा। पुष्पों के उत्पादन के प्रति किसानों को आकर्षित करने के लिये 30 जनवरी को राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा गुलाब उद्यान में किया जायेगा। प्रदर्शनी में पुष्प उत्पादक कृषक, पुष्प विशेषज्ञ, नर्सरी व्यवसाय से जुड़े उद्यमी, पुष्प उत्पादक संस्थाओं के प्रतिनिधि, कृषि विश्वविद्यलयों के छात्र तथा पुष्प प्रेमी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुष्प उत्पादन में देश में द्वितीय स्थान पर है। प्रदेश के लगभग 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है जिसमें 5 लाख मी.टन फूलों का उत्पादन प्रतिवर्ष हो रहा है। प्रदेश में लगभग 40 हजार किसान फूलों की खेती से जुडे हुए है। मंत्री श्री कुशवाह ने बताया कि राज्य शासन का लक्ष्य फूलों के उत्पादन के व्यावसायिक स्वरूप प्रदान करते हुए किसानों की आय को दोगुना करना है। मध्यप्रदेश को पुष्प उत्पादन में अग्रणी राज्य बनाना है। प्रदेश के ऐसे धार्मिक स्थान और शहर जिनमें फूलों की अधिक मांग रहती है उनके आस-पास पुष्प उत्पादन क्लस्टर विकसित करने कार्य योजना बनायी गई है। इसी कडी में उद्यानिकी विभाग द्वारा 2028 में होने वाले सिंहस्थ मेले को बडे अवसर के रूप में देख रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन के यादव पहल पर उज्जैन के आस पास लगभग 100 एकड में फूल उत्पादन का विशेष क्लस्टर विकसित करने पर कार्य किया जा रहा है। मंत्री श्री कुशवाह ने बताया कि प्रदेश के गुना जैसे छोटे जिले के किसानों द्वारा गुलाब उत्पादन में देश और विदेश में नई पहचान बनाई है। गुना का गुलाब दिल्ली, मुम्बई, बैंगलौर सहित विदेशों में भी अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा फूलों के उत्पादन को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) से भी जोडा गया है। अनेक हितग्राही योजना का लाभ उठा कर फूलों से बनने वाले उत्पादों से जुडे़ हुए है। मंत्री श्री कुशवाह ने बताया कि राज्य स्तरीय प्रदर्शनी बहु-उद्देशीय है         • फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देकर कृषकों की आय में वृद्धि करना।         • विभिन्न प्रजातियों में फूलों के व्यावसायिक उत्पादन को प्रोत्साहित करना।         • कृषकों को नवीन तकनीकों, उन्नत किस्मों एवं आधुनिक उत्पादन विधियों से जोड़कर उन्हें प्रोत्साहित करना।         • पुष्प उत्पादन एवं शोभायमान पौधों का उत्पादन करने वाली नर्सरियों को बढ़ावा देना।         • शहरी क्षेत्रों में शोभायमान वाटिकाओं, उद्यानों एवं हरित परिवेश के प्रति नागरिकों की रुचि विकसित करना।         • आमजन में पर्यावरण संरक्षण, हरित जीवनशैली एवं उद्यानिकी के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना।         पुष्प प्रदर्शनी के प्रमुख आकर्षण पुष्पों एवं प्रसंस्कृत उत्पादों का भव्य प्रदर्शनमें प्रदेश के विभिन्न जिलों में उत्पादित दुर्लभ, आकर्षक एवं रंग-बिरंगी पुष्प प्रजातियों तथा पुष्पों से निर्मित प्रसंस्कृत उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। इनमें प्रमुख रूप से-         • बहुवर्षीय पुष्प: गुलाब, ज़रबेरा, गेंदा, सेवंती, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, ऑर्किड, लिलियम, एंथुरियम, कारनेशन, गुड़हल, बोगनवेलिया आदि।         • मौसमी (एन्युअल) पुष्प: जीनिया, पैंजी, फ्लॉक्स, एस्टर, मेरीगोल्ड, जिरेनियम आदि।         • गमलों में शोभायमान पौधे: क्रोटन, ड्रैसीना, कोलियस, पाम, पर्पल हार्ट/जीजस हार्ट आदि।         · विशेष श्रेणियाँ: कैक्टस समूह, बोन्साई समूह एवं पुष्पों के प्रसंस्कृत उत्पाद।         उद्यानिकी कृषकों एवं उद्यमियों का सम्मान पुष्प एवं शोभायमान पौधों के उत्पादन तथा पुष्प प्रसंस्करण से जुड़े उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों, उद्यमियों एवं समूहों को प्रदर्शनी के दौरान सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा।         थीम आधारित कलात्मक प्रस्तुतियाँ आयोजन स्थल पर पुष्पों से निर्मित कलात्मक आकृतियाँ, थीम आधारित संरचनाएँ एवं रचनात्मक डिज़ाइन प्रदर्शित की जाएँगी, जो प्रकृति, उद्यानिकी, कृषि एवं नवाचार का जीवंत संगम प्रस्तुत करेंगी। राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी प्रदेश में कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र की असीम संभावनाओं को उजागर करने के साथ-साथ हरित एवं सतत विकास का सशक्त संदेश देगा।  

मंत्री कुशवाहा का बयान: समावेशी विकास के लिए सामाजिक न्याय से लेकर कृषि-उद्यानिकी तक मजबूत नींव रखी

विकास एवं सेवा के दो वर्ष सामाजिक न्याय से लेकर कृषि–उद्यानिकी तक, समावेशी विकास की रखी मजबूत नींव : मंत्री कुशवाहा म.प्र. उद्यानिकी के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य 2 वर्षों में उद्यानिकी रकबे में हुई सवा 3 लाख हैक्टेयर की वृद्धि भोपाल  सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण एवं उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन–2047 और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। सामाजिक न्याय से लेकर कृषि–उद्यानिकी तक, समावेशी विकास की मजबूत नींव है। उन्होंने प्रदेश में गत 2 वर्षों में उद्यानिकी और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में हुए उपलब्धियों, नवाचारों और आगामी 3 वर्षों में विभाग की कार्य योजनाओं के संबंध में अवगत कराया। उद्यानिकी में रिकॉर्ड वृद्धि गत दो वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 25.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28.29 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में उत्पादन 389.10 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 425.68 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है। प्रदेश की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 15.08 मीट्रिक टन, राष्ट्रीय औसत से अधिक है। मध्यप्रदेश मसाला उत्पादन में प्रथम, पुष्प उत्पादन में द्वितीय, सब्जी उत्पादन में तृतीय और फल उत्पादन में चतुर्थ स्थान पर है। जीआई टैग और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रीवा का सुंदरजा आम और रतलाम का रियावन लहसुन जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं। प्रदेश की 15 फसलों का जीआई पंजीयन कराया गया है। इजराइल के तकनीकी सहयोग से मुरैना में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है, जबकि छिंदवाड़ा और हरदा में नए सीओई विकसित किए जा रहे हैं। खाद्य प्रसंस्करण और नवाचार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के अंतर्गत 8,198 ऋण प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं और 3,113 उद्यमियों को 108.64 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। सेंसर आधारित स्वचलित फर्टिगेशन, मखाना क्षेत्र विस्तार, एग्जोटिक सब्जी क्लस्टर, हाईटेक नर्सरी और इंक्यूबेशन सेंटर जैसे नवाचार लागू किए जा रहे हैं। आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना आगामी तीन वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 33.39 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने, 15 हजार सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और 25 फसलों को जीआई टैग दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2026: कृषि वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया गया है। इसके अंतर्गत उद्यानिकी को बढ़ावा, खाद्य प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। सामाजिक न्याय और दिव्यांग कल्याण के क्षेत्र में अभिनव प्रयास मंत्री कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने गत दो वर्षों में सामाजिक और शारीरिक रूप से कमजोर वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई अभिनव और प्रभावी पहल की हैं। दिव्यांगजनों की क्षमताओं को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 6 लाख 97 हजार दिव्यांगजनों को प्रतिमाह 41.87 करोड़ रुपये की पेंशन वितरित की जा रही है। साथ ही 9 लाख 89 हजार से अधिक दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे उन्हें विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण और कृषि–उद्यानिकी के क्षेत्र में किए गए ये प्रयास प्रदेश को समावेशी, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। शिक्षा, तकनीक और रोजगार पर विशेष फोकस दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रदेश के 17 जिलों में शासकीय एवं अशासकीय विशेष विद्यालयों के तीन-तीन कक्षों को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित किया गया है। श्रवणबाधित दिव्यांगजनों की संवाद संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए क्यूआर कोड आधारित लाइव इंटरप्रेटर सुविधा प्रारंभ की गई है। अब तक 34 हजार 649 दिव्यांगजनों को 59 हजार से अधिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। रोजगार सृजन के क्रम में 2,589 दिव्यांगजनों को शासकीय सेवाओं में नियुक्ति दी गई है। निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर केन्द्र सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था एटिपिकल एडवांटेज के साथ 2 दिसंबर 2025 को एमओयू किया गया है। इसके माध्यम से दिव्यांगजनों को उनकी योग्यता के अनुसार निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक संस्था द्वारा 5 दिव्यांगजनों को रोजगार दिया जा चुका है। खेल, विवाह प्रोत्साहन और विशेष उपलब्धियां दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 958 दंपत्तियों को लाभ दिया गया है। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। तैराकी प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सत्येन्द्र लोहिया, रामबरन पाल एवं सद्दाम खान को पाँच–पाँच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। वृद्धजनों का सम्मान: सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदेश में 81 वृद्ध आश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें राज्य, केंद्र और जनसहयोग से संचालन हो रहा है। प्रति हितग्राही 2,200 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण सहायता सहित अन्य आवश्यक व्ययों का वहन किया जा रहा है। मंत्री कुशवाहा ने बताया कि राजधानी भोपाल में आधुनिक सुविधाओं से युक्त पेड ओल्ड एज होम का संचालन सेवा भारती मध्य भारत प्रांत द्वारा किया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन: 100 प्रतिशत ई-केवाईसी प्रदेश की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 54 लाख से अधिक हितग्राहियों का 100 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण किया गया है। प्रतिमाह 325 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे खातों में अंतरित की जा रही है। नशामुक्त भारत अभियान: जनभागीदारी से जागरूकता “विकसित भारत का मंत्र, भारत हो नशे से स्वतंत्र” अभियान के तहत प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह सहायता योजना: बड़ा सामाजिक संबल विगत 2 वर्षों में इस योजना के अंतर्गत 1 लाख 52 हजार हितग्राहियों को 838.44 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। पात्रता और आयोजन प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी बनाने के लिए योजना में संशोधन किया गया है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार लाभान्वित हो सकें।  

मंत्री कुशवाह ने कहा- सामाजिक न्याय विभाग मानवीय संवेदनाओं से संचालित विभाग

भोपाल  सामाजिक न्याय दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि विभाग का मूल उद्देश्य समाज के असहाय और कमजोर वर्गों तक संवेदनशीलता के साथ योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय विभाग केवल प्रशासनिक कार्यवाही का ढांचा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना से संचालित एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसका केन्द्र बिंदु जरूरतमंद नागरिकों का सशक्तिकरण है। मंत्री श्री कुशवाह ने यह बात विभागों के 2 वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा बैठक में कही। मंत्री श्री कुशवाह ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, निराश्रितजन, विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं सहित सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर सहायता मिलना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि पेंशन योजनाओं के प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए और फील्ड स्तर पर हितग्राहियों से सीधा संवाद बढ़ाया जाए। मंत्री श्री कुशवाह ने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का त्वरित निराकरण, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करते हुए विभागीय सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के सबसे कमजोर लोगों के साथ व्यवहार में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने आगामी समय में विभागीय योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार और डिजिटल सेवाओं को सुदृढ़ करने पर भी जोर दिया। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियाँ और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी।  

मंत्री कुशवाह ने कहा- दिव्यांगजन की मोट्रेट साइकल रिपेयरिंग व्यवस्था जिलास्तर पर करें

भोपाल  दिव्यांगजन हितग्राहियों को, दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत प्रदान की गई, मोट्रेट साइकल के रिपेयरिंग के लिये जिलास्तर पर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस आशय के निर्देश सामाजिक न्याय दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने विभागीय अधिकारियों को दिए है। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में केन्द्र सरकार की संस्था एलिम्को के माध्यम से 11 हजार 200 से अधिक दिव्यांगजन को 5 करोड़ 60 लाख रूपये के उपकरण प्रदान किए गये है। इनमें जिन हितग्राहियों को मोट्रेट साइकल प्रदान की गई है, उनकी रिपेयरिंग की व्यवस्था जिलास्तर पर दिव्यांगजन पुनर्वास केन्द्रों पर की जाना चाहिए। इसके लिए केन्द्र सरकार की संस्था एलिम्को से सम्पर्क किया जाये। वर्तमान में एलिम्को द्वारा ग्वालियर और जबलपुर में यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने यह व्यवस्था समय-सीमा में बहाल करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता होने पर सामाजिक न्याय विभाग राज्य शासन के बजट से आवश्यक पार्टस उपलब्ध करायेगा।  

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना एक महत्वाकांक्षी योजना, सतत निगरानी की आवश्यकता : मंत्री कुशवाह

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा भोपाल उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना एक महत्वाकांक्षी योजना है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित किए जा सकते है। मंत्री श्री कुशवाह ने विभाग की 2 वर्षो की उपलब्धियों की समीक्षा के दौरान पीएमएफएमई योजना की सतत निगरानी ने निर्देश अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 तक योजना की शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति की जाए। मंत्री कुशवाह ने कहा कि उद्यानिकी गतिविधियाँ ग्रामीण अंचल से शहरों तक संचालित की जाती है। प्रदेश में उद्यानिकी उत्पादों को लगातार प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिये कि बड़े शहरों के आसपास सब्जी के साथ साथ फूल उत्पादन के क्लस्टर भी विकसित किये जाये। मंत्री कुशवाह कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और मेले भी आयोजित किये जाने चाहिए। उन्होंने एमपी एग्रो तथा उद्यानिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को वितरित किये जाने वाले उपकरण व अन्य सामग्री का भौतिक सत्यापन कराये जाने के निर्देश भी दिये। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अरविन्द दुबे ने बताया कि प्रदेश में गत 2 वर्षो में उद्यानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज कराई है। इन 2 वर्षो में उद्यानिकी फसलों का रकबा में 2 लाख 43 हैक्टेयर तथा उत्पादन में लगभग 36 लाख मैट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है। संरक्षित खेती के तहत 1573 हैक्टेयर क्षेत्र का विस्तार किया गया है। आयुक्त दुबे ने बताया कि प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिये 3 सेक्टर आफ एक्सीलेंस मुरैना में आलू, छिंदवाड़ा में नीबूवार्गीय तथा हरदा में आम एवं सब्जी के विकसित किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि पीएमएफएमई (PMFME) योजना में चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 3 हजार 113 सूक्ष्म उद्यमियों को 108 करोड़ का अनुदान प्रदान किया जा चुका है। योजना की नियमित समीक्षा की जा रही है। एमपी एग्रो ने समीक्षा के दौरान प्रबंध संचालक श्री दुबे ने बताया कि गत तीन वर्षों में एमपी एग्रो का व्यापार 47 करोड़ से बढ़कर 386 करोड़ हो गया है। इसके और बेहतर करने के प्रयास किये जा रहे है। बैठक में विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

सामाजिक न्याय मंत्री कुशवाहा ने वृद्धजन का किया सम्मान

भोपाल सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने बुधवार को ग्वालियर के जैन छात्रावास के श्री वीर सभागार में वरिष्ठ नागरिक सेवा संस्थान ग्वालियर द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में 75 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान समारोह कार्यक्रम में सहभागिता की। मंत्री श्री कुशवाहा ने कार्यक्रम को संबोधित किया एवं 26 वरिष्ठजन को शील्ड देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर संस्थापक श्री भूपेन्द्र जैन, अध्यक्ष श्री एस.के. गुप्ता, श्री रितेश गुप्ता, सहित सम्मानित सभी वरिष्ठजन एवं नागरिक उपस्थित रहे।  

मंत्री कुशवाहा बोले – वृद्धजनों के सशक्त और समावेशी भविष्य की दिशा में कार्य करेगी सरकार

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर होंगे विविध कार्यक्रम भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा ने कहा कि इस वर्ष एक अक्टूबर, अन्तर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस "समावेशी भविष्य के लिए वृद्धजन की पहचान को सशक्त बनाना" विषय पर केन्द्रित रहेगा। एक अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालायों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएगे। इसका मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों की समाज में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और उन्हें समावेशी भविष्य के निर्माण में सशक्त पहचान दिलाना है। मंत्री  कुशवाहा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के आयोजन से प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता की भावना को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही समाज में उनके अनुभव और मार्गदर्शन की उपयोगिता को भी पुनः रेखांकित किया जाएगा। यह आयोजन प्रदेश की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें बुजुर्गों को समाज की धरोहर मानते हुए उन्हें सम्मान और सहयोग प्रदान करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मती सोनाली वायगणकर ने बताया कि कार्यक्रम की थीम “समावेशी भविष्य के लिए वृद्धजन की पहचान को सशक्त बनाना” निर्धारित की गई है। जिला स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, संवाद-सत्र एवं जनजागरूकता गतिविधियां होंगी। इन आयोजनों का मुख्य फोकस यह रहेगा कि वृद्धजन केवल परिवार और समाज के अनुभव का आधार ही नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी के माध्यम से समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। जिलास्तर पर शतायु सम्मान विशेष आकर्षण के रूप में प्रत्येक जिले में ‘शतायु सम्मान’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 100 वर्ष या उससे अधिक आयु पूर्ण कर चुके वृद्धजनों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। इस पहल से राज्य सरकार का उद्देश्य बुजुर्गों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश देना है। सभी जिला कलेक्टर और विभाग के जिला अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। कार्यक्रमों का स्वरूप स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों के अनुरूप होंगे और प्रत्येक जिले में अधिक से अधिक वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।  

नशामुक्ति केंद्रों में अब होगी सख्त जांच! सामाजिक न्याय मंत्री कुशवाहा ने दिए निर्देश

सामाजिक न्याय मंत्री कुशवाहा ने नशामुक्ति केंद्रों की जाँच के दिये निर्देश राज्य स्तरीय कार्यक्रम कर दिव्यांगों की प्रतिभा को मंच देने के निर्देश भोपाल सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने प्रदेश में संचालित समस्त शासकीय नशा मुक्ति केंद्रों के निरीक्षण के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित कर केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने यह निर्देश शुक्रवार को मंत्रालय में विभागीय समीक्षा बैठक में दिये। इसके साथ ही दिव्यांगों के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर मेडिकल बोर्ड के शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए। मंत्री कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "विकसित भारत का मंत्र-भारत हो नशे से स्वतंत्र" देशव्यापी कार्यक्रम के अंतर्गत मध्यप्रदेश में नशा मुक्ति के क्षेत्र में प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। नशा मुक्त समाज के लिए सामाजिक भागीदारी के साथ-साथ विभाग द्वारा जो कार्यक्रम और योजनाएं संचालित की जा रही है, उनका प्रभावी क्रियान्वयन मैदानी स्तर पर किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नशे से पीड़ित लोगों के लिए प्रदेश में 13 नशा मुक्ति-सह-पुनर्वास केन्द्र, सात आउट रिच एंड ड्रॉप इन सेंटर, तीन कम्युनिटी बेस्ड पियर-लेड इन्टरवेशन सेंटर तथा 8 जिला मुख्यालय पर डीडीआरसी संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी संस्थानों के सुव्यवस्थित संचालन की नियमित समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन के लिए चलाए जा रहे "सुगम भारत अभियान" की भी नियमित समीक्षा की जाए। मंत्री कुशवाहा ने कहा कि दिव्यांगजन को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग द्वारा राज्य स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिसमें प्रदेश भर के दिव्यांगजन जो गायन, वादन, नृत्य, अभिनय और खेलकूद में रुचि रखते हैं, उनको प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त हो सके। इसके लिए विभाग कार्यक्रम की रूपरेखा बनाकर प्रस्तुत करे। प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि प्रदेश में नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत सामाजिक संगठन, शैक्षणिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ सामाजिक न्याय विभाग द्वारा लगातार जन-जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गांधी जयंती 2 अक्टूबर को विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन भी कराया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचने के लिए छात्रावास स्तर पर नशा मुक्ति समितियों का गठन किया गया है। इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। बैठक में प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर सहित अन्य विभाग की अधिकारी उपस्थित थे।

दत्तक पुत्र की भांति वृद्धजनों को अडाप्ट करने पर फोकस किया जाए : मंत्री कुशवाह

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिए सुझाव भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह गुरूवार को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित सामाजिक कल्याण एवं सुरक्षा क्षेत्र पर मंत्री समूह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल हुए। बैठक केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। मंत्री श्री कुशवाह ने ईज ऑफ डुइंग बिजनेस, ईज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने तथा नागरिकों और उद्यमों पर अनुपालन बोझ कम करने के लिए दत्तक पुत्र की भांति वृद्धजनों को अडॉप्ट करने, पैरेंटल केयर लीव लिए जाने तथा सशुल्क वृद्धाश्रमों को पीपीपी मोड पर विकसित करने के सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से समाज कल्याण के क्षेत्र में बेहतर कार्य हो सकेगा। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि वृद्धजनों को समाज की मुख्य धारा में बनाए रखने की जरूरत है, जो वृद्धजन शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हैं, उनको क्षमता के अनुसार रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी वृद्धाश्रमों, नशा मुक्ति केंद्र, डीआरसी भिक्षु गृह आदि के संचालन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिव प्रोसीजर बनाया जाना चाहिए। सभी जरूरतमंदों के लिए एक हेल्पलाइन विकसित किए जाने, ट्रांसजेण्डर व्यक्तियों को 50 वर्ष की आयु के बाद वृद्धजनों का दर्जा दिए जाने तथा केन्द्र में ओबीसी एवं एससी विभाग पृथक पृथक बनाए जाने का सुझाव भी दिया। केंद्रीय मंत्री श्री वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिये सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय समाज के वंचित वर्गों के विकास के लिए एक रोड मैप पर कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में सभी प्रदेशों के सामाजिक न्याय विभागों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन के अनुरूप संस्थाओं को सुदृढ़ बनाना, केंद्र, राज्य, नगर निगम सुधारों की पहचान करना और मौजूदा कानून में आवश्यक संशोधन पर भी विचार किया जा रहा है। इसी कड़ी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए गये है।

एमपी एग्रो अनुत्पादन व्यय नियंत्रित करें : एसीएस राजन

भोपाल  उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि द एमपी स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड नये कार्य क्षेत्र विकसित कर आय वृद्धि के प्रयास करे। उन्होंने यह निर्देश एमपी स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कार्पोरेशन के संचालक मंडल की 200वीं बैठक में दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अनुपम राजन, आयुक्त उद्यानिकी श्रीमती प्रीति मैथिल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री कुशवाह ने कहा कि एमपी एग्रो राज्य शासन के कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के लिये कार्य करने वाली महत्वपूर्ण एजेन्सी है। उद्यानिकी विभाग द्वारा अनेक योजनाओं के लिये एमपी एग्रो को नोडल एजेन्सी बनाया गया है। इसके काम में तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के माध्यम से कलस्टर विकसित करने की जिम्मेदारी भी एमपी एग्रो को दी गई है। यह काम समय-सीमा में किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नर्मदापुरम जिला स्थित बाबई कृषि फार्म की आय वृद्धि के लिये विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाये। फार्म स्थित मशीनरी और उपकरणों के उपयोग के लिये विशेष एजेन्सी की सेवाएँ ली जा सकती है। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि एमपी एग्रो अनुउत्पादन व्ययों को नियंत्रित करें। उन्होंने कहा कि परम्परागत प्रक्रिया के स्थान पर एग्रो विशेष एजेन्सियों की सेवाएँ लेकर बेहतर प्रोजेक्ट तैयार करें। उन्होंने कहा कि एग्रो लिमिटेड को अपनी टेण्डर प्रक्रिया में गति लाने की आवश्यकता है इससे समयानुसार योजनाओं का लाभ किसानों को मिल सकेगा। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण श्रीमती प्रीति मैथिल ने कहा‍कि एमपी एग्रो को व्यवसाय वृद्धि के लिये ड्रोन टेक्नोलॉजी, एग्रीपीवी कृषि जैसे क्षेत्रों में नवीन प्रयोग करने की आवश्कता है। उन्होंने एग्रो द्वारा टेण्डर प्रक्रिया की समय-सीमा में सुधार कराये जाने का सुझाव भी दिये। प्रबंध संचालक अरविंद दुबे ने बताया कि एमपी एग्रो ने इस वर्ष 2025-26 में लिक्विड बायो फर्टिलाइजर उत्पादन का लक्ष्य एक लाख 25 हजार लीटर रखा है। इसमें एक करोड़ लाख 96 लाख रूपये की सकल आय अनुमानित है। 2024-25 में निगम को 2470 बायो गैस संयंत्र का लक्ष्य के विरूद्ध 1840 संयंत्रों का निर्माण कराया गया है। बैठक में निगम के अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन भत्तो से संबंधित प्रस्ताव भी पारित किये गये।