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फेडरेशन ने उद्योगपतियों के हित में किया निरंतर सहयोग : मंत्री काश्यप

भोपाल  फेडेरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मध्यप्रदेश के विकास को नई गति देने वाला प्रमुख स्तंभ है। प्रदेश के स्थानीय और युवा उद्योगपतियों को नई दिशा दी है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल निजी होटल में फेडेरेशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के आयोजन और उद्योगों को दिए जा रहे नीतिगत प्रोत्साहन से प्रदेश के छोटे उद्यमियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में एक नया आत्मविश्वास जागा है, जिससे अब गांव का व्यक्ति भी उद्योग लगाने का साहस जुटा रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  चेतन्य काश्यप भी समारोह में शामिल हुए और उन्होंने भी संबोधित किया। मंत्री  पटेल ने कहा कि मजदूर और उद्योगपति के बीच का संबंध हितों के टकराव की जगह आपसी समन्वय का होना चाहिए और इसे वास्तविकता में बदलना सरकार की प्राथमिकता है। इसी दिशा में मंत्री  पटेल ने फेडरेशन के प्रतिनिधियों को श्रम संबंधी विभागीय समितियों में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने '' जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो श्रम और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप को कम करने का कार्य कर रही हैं। मंत्री  पटेल ने उद्योगों की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्किल मैपिंग पर विशेष बल दिया और उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे अपने आवश्यक 'स्किल लेवल' की पहचान कर विभाग को सूचित करें। सरकार इन जरूरतों के आधार पर स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर कुशल कार्यबल उपलब्ध कराएगी, जिससे उद्योगों को श्रमिकों की कमी का सामना न करना पड़े और स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो। मंत्री  पटेल ने कहा कि प्रदेश कृषि उत्पादन के उच्चतम स्तर को प्राप्त कर रहा है इसलिए अब हम सभी को 'प्रोसेसिंग' (प्रसंस्करण) क्षेत्र पर केंद्रित करना होगा। राज्य की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए उपयुक्त है। इसके साथ ही, उन्होंने श्रम विभाग में जारी सुधारों की चर्चा करते हुए बताया कि अनावश्यक कानूनों को समाप्त किया जा रहा है और शेष प्रमुख कानूनों में एकरूपता लाने का प्रयास किया जा रहा है। निरीक्षण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड और डिजिटल सिस्टम लागू किए गए हैं जिससे प्रक्रियाएं सिस्टम आधारित और पारदर्शी बनी रहें। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  चेतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में वर्ष 2025 को 'उद्योग वर्ष' के रूप में मनाया गया है जिसका मुख्य केंद्र स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को नए अवसर प्रदान करना था। मंत्री  काश्यप ने कहा कि फेडरेशन ने उद्योगपतियों के हित में शासन के कार्यों में निरंतर सहयोग किया है। साथ ही उन्होंने उद्यमियों से गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखने का आग्रह किया, जिससे वैश्विक बाजार में प्रदेश की साख और मजबूत हो सके। मंत्री  काश्यप ने औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के बारे बताते हुए कहा कि विभाग ने पिछले डेढ़ वर्षों में 1200 से अधिक प्लॉट पूरी पारदर्शिता के साथ ऑनलाइन आवंटित किए हैं और आगामी दो वर्षों में 3 हजार नए प्लॉट उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश ने निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए एक अनूठी पहल की है, जिसके तहत लैंड-लॉक्ड राज्य होने की चुनौतियों को देखते हुए निर्यातकों को 50 प्रतिशत परिवहन सब्सिडी प्रदान की जा रही है। सब्सिडी वितरण की इस पूरी प्रक्रिया को 'डेट ऑफ प्रोडक्शन' के आधार पर पारदर्शी और ऑनलाइन बनाया गया है, जिससे उद्यमियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।मंत्री  काश्यप ने कहा कि व्यापारियों के कल्याण के लिए एक 'व्यापार बोर्ड' का गठन किया गया है, जिसमें फेडरेशन के प्रतिनिधि को स्थायी सदस्य के रूप में स्थान दिया गया है। मंत्री द्वय ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष  हिमांशु खरे एवं संयुक्त अध्यक्ष  वीरेंद्र कुमार पोरवाल और  अखिलेश राठी को अंगवस्त्रम् भेंट कर नवनिर्वाचन का प्रमाण पत्र प्रदान किया और शुभकामनाएं दी। साथ ही निवृतमान अध्यक्ष  दीपक शर्मा को अध्यक्षीय कार्यकाल के लिए शाल, फल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। फेडेरेशन की ओर से अध्यक्ष  खड़े ने मंत्रीद्वय को स्मृति चिन्ह भेंट किया।  पूर्व अध्यक्ष डॉ. आर.एस. गोस्वामी ने स्वागत उद्बोधन में फेडरेशन द्वारा प्रदेश में उद्योगों के विकास और विस्तार के प्रयासों के लिए सरकार की सराहना की। समारोह के दौरान अध्यक्ष  दीपक शर्मा के कार्यकाल और उपलब्धियों पर आधारित वीडियो का प्रसारण किया गया। इस अवसर पर फेडरेशन के सदस्य और आमजन उपस्थित रहें।  

प्रदेश में गौवंश संरक्षण के लिए बजट और नीतियों में बड़े बदलाव : मंत्री पटेल

मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज भोपाल में "गौ सेवा से राष्ट्र निर्माण" विषय पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन भोपाल भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान केवल एक पशु का नहीं, बल्कि माता का रहा है। प्रदेश में गोवंश के संरक्षण के लिए बजट और नीतियों में बड़े बदलाव किए गए हैं। जिसके अंतर्गत अब सरकार गोशालाओं के लिए प्रति गाय प्रतिदिन 40 रुपये की राशि प्रदान कर रही है। स्वावलंबी मॉडल गौशालाओं के अंतर्गत सरकार 130 एकड़ जमीन और 5000 गायों के पालन के साथ सीएनजी और जैविक खाद उत्पादन मॉडल पर काम कर रही है। पशुपालन एवं डेयरी राज्‍यमंत्री स्‍वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने यह बात संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। भोपाल स्‍थ‍ित मानसरोवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के तीनों आयुर्वेदिक महाविद्यालय और विश्व आयुर्वेद परिषद के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को 'गौ-सेवा से राष्ट्र निर्माण' संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश में गौ-संवर्धन एवं संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों और जन प्रतिनिधियों ने युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम के दौरान गौ-संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने पर चर्चा की गई। राज्‍यमंत्री पटेल ने कहा मध्यप्रदेश सरकार ने अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग का नाम बदलकर गौपालन पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग कर दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित गौवंश के संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक अभिनव योजना तैयार की गई है। इसके तहत लगभग 130 एकड़ भूमि निवेशकों को उपलब्ध कराई जाएगी, जहां न्यूनतम 5 हजार गौमाताओं के साथ बड़े स्तर पर आधुनिक गौशालाएं विकसित की जाएंगी। इस योजना का उद्देश्य गौशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से स्वावलंबी इकाइयों के रूप में विकसित करना है। इसके लिए गौशालाओं में सीएनजी उत्पादन, जैविक खाद निर्माण, दुग्ध उत्पादन, ब्रीडिंग और सोलर ऊर्जा जैसे बहुआयामी कार्य किए जाएंगे। विशेष रूप से गोबर से सीएनजी बनाने और जैविक खाद तैयार करने पर जोर दिया जाएगा, जिससे आय के स्थायी स्रोत विकसित होंगे। राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि 5 हजार गौमाताओं की क्षमता वाली इन गौशालाओं में भविष्य में 15 से 20 हजार तक गौवंश रखने की व्यवस्था की जाएगी। इससे उत्पादन और आय में वृद्धि होगी और गौशालाएं पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकेंगी। प्रदेश के 32 जिलों में इस योजना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि 7 जिलों में टेंडर जारी किए जा चुके हैं। दमोह जिले में इस मॉडल की पहली गौशाला स्थापित की जा रही है। यह मॉडल पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और प्रदेश में आवारा गौवंश की समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में परम गौसेवक गुरुदेव अच्युतानंद, सारस्वत वक्ता वैद्य प्रदीप त्रिपाठी, विश्व आयुर्वेद परिषद् के संरक्षक राम प्रताप सिंह राजपूत, डॉ. संध्या चौकसे, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय, मानसरोवर समूह के आयुर्वेद संचालक डॉ. बाबुल ताम्रकार, मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग सिंह राजपूत, साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन की प्राचार्या डॉ. मनीषा राठी उपस्‍थ‍ित रहीं।

मजदूर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का संकल्प, मंत्री पटेल का बड़ा बयान

मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक हुई भोपाल मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक में श्रमिकों के बच्चों के शैक्षणिक उत्थान को केंद्र में रखते हुए मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन देने और प्रारंभिक स्तर पर कॅरियर काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने पर प्राथमिकता दी गई। श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मंडल की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों को इन अवसरों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। बैठक में मंडल का आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट माननीय सदस्यों द्वारा चर्चा उपरांत सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक में श्रम सचिव रघुराज राजेन्द्रन, कल्याण आयुक्त संजय कुमार एवं श्रमिकों एवं नियोजकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंत्री पटेल ने कहा कि श्रमिकों और कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखना शासन की जिम्मेदारी है। वेतनमान से जुड़े मामलों में देरी कार्यकुशलता को प्रभावित करती है, इसलिए सभी लंबित प्रकरणों की सूची बनाकर त्वरित कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के समाधान और सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा न करने वाले प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, श्रमिक कल्याण योजनाओं की प्रगति, खेल एवं कौशल विकास गतिविधियों तथा नवीन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में श्रम सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने बताया कि श्रम कल्याण बोर्ड में संपूर्ण कंप्यूटरीकरण एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जा रहा है। श्रम विभाग द्वारा नवीन श्रम संहिताओं पर संभागीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें से एक भोपाल में संपन्न हो चुकी है। इन संहिताओं के आधार पर राज्य में श्रम कानूनों में संशोधन किए जा रहे हैं। सिलाई केंद्रों का पुनः संचालन, 17 केंद्र सक्रिय बैठक में बताया गया कि चचाई और इंदौर में सिलाई केंद्रों को पुनः प्रारंभ किया जा रहा है। वर्तमान में 27 श्रम कल्याण केंद्रों में से 17 में सिलाई-कढ़ाई केंद्र संचालित हो रहे हैं। कौशल विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षणार्थियों का परीक्षण कराया गया है। मंडल के अंतर्गत संचालित श्रम कल्याण केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण, राष्ट्रीय पर्व, विश्वकर्मा जयंती जैसे आयोजन नियमित रूप से किए जा रहे हैं। श्रमिकों के लिए कंप्यूटर केंद्र भी संचालित हैं। खेलों को बढ़ावा, समयावधि बढ़ाने का प्रस्ताव बैठक में खेल प्रतियोगिताओं की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। बताया गया कि खेलों के माध्यम से श्रमिकों का सर्वांगीण विकास संभव है। साथ ही नियमित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान के एरियर भुगतान को शीर्ष प्राथमिकता देने की बात कही गई। भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के निराकरण पर भी चर्चा हुई। अंत में सभी सदस्यों ने श्रमिक एवं कर्मचारी हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया।  

मजदूर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना सरकार का लक्ष्य : पटेल

भोपाल  मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक में श्रमिकों के बच्चों के शैक्षणिक उत्थान को केंद्र में रखते हुए मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन देने और प्रारंभिक स्तर पर कॅरियर काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने पर प्राथमिकता दी गई। श्रम मंत्री  प्रहलाद पटेल ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मंडल की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों को इन अवसरों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। बैठक में मंडल का आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट माननीय सदस्यों द्वारा चर्चा उपरांत सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक में श्रम सचिव  रघुराज राजेन्द्रन, कल्याण आयुक्त  संजय कुमार एवं श्रमिकों एवं नियोजकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंत्री  पटेल ने कहा कि श्रमिकों और कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखना शासन की जिम्मेदारी है। वेतनमान से जुड़े मामलों में देरी कार्यकुशलता को प्रभावित करती है, इसलिए सभी लंबित प्रकरणों की सूची बनाकर त्वरित कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के समाधान और सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा न करने वाले प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, श्रमिक कल्याण योजनाओं की प्रगति, खेल एवं कौशल विकास गतिविधियों तथा नवीन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में श्रम सचिव  रघुराज राजेन्द्रन ने बताया कि श्रम कल्याण बोर्ड में संपूर्ण कंप्यूटरीकरण एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जा रहा है। श्रम विभाग द्वारा नवीन श्रम संहिताओं पर संभागीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें से एक भोपाल में संपन्न हो चुकी है। इन संहिताओं के आधार पर राज्य में श्रम कानूनों में संशोधन किए जा रहे हैं। सिलाई केंद्रों का पुनः संचालन, 17 केंद्र सक्रिय बैठक में बताया गया कि चचाई और इंदौर में सिलाई केंद्रों को पुनः प्रारंभ किया जा रहा है। वर्तमान में 27 श्रम कल्याण केंद्रों में से 17 में सिलाई-कढ़ाई केंद्र संचालित हो रहे हैं। कौशल विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षणार्थियों का परीक्षण कराया गया है। मंडल के अंतर्गत संचालित श्रम कल्याण केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण, राष्ट्रीय पर्व, विश्वकर्मा जयंती जैसे आयोजन नियमित रूप से किए जा रहे हैं। श्रमिकों के लिए कंप्यूटर केंद्र भी संचालित हैं। खेलों को बढ़ावा, समयावधि बढ़ाने का प्रस्ताव बैठक में खेल प्रतियोगिताओं की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। बताया गया कि खेलों के माध्यम से श्रमिकों का सर्वांगीण विकास संभव है। साथ ही नियमित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान के एरियर भुगतान को शीर्ष प्राथमिकता देने की बात कही गई। भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के निराकरण पर भी चर्चा हुई। अंत में सभी सदस्यों ने श्रमिक एवं कर्मचारी हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया।  

जी राम जी योजना की प्रदेश में तैयारी पूर्ण रखें : मंत्री पटेल

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने की विभागीय योजनाओं की समीक्षा भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने आज विभागीय योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंन विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 के समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु भारत सरकार से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुरूप समस्त तैयारी यथा समय पूर्ण करने के निर्देश दिये। सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रतिमाह फील्ड विजिट करते हुए योजनाओं की धरातल पर स्थिति देखें। जिलों द्वारा किए गए अच्छे नवाचार प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किए जायें। यदि कोई अनियमितता या गड़बड़ी प्रकाश में आती है तो उस पर तत्काल कार्यवाही हो। सभी जिलों की परफॉर्मेंस के आधार पर प्रतिमाह ग्रेडिंग की जाकर ग्रेडिंग लिस्ट जारी करने के निर्देश भी दिए ताकि अधिकारियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु तकनीकी अमला सतत निगरानी रखे। इस दौरान उन्होंने पंचायतराज, महात्मा गांधी नरेगा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह तथा श्रीमती दीपाली रस्तोगी, श्रीमती हर्षिका सिंह, श्री अवि प्रसाद, श्री दिनेश जैन, श्री छोटेसिंह एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 में 2718 सामुदायिक भवन लागत राशि 654.7024 करोड़ रूपये के स्वीकृत किये जाकर प्रथम किश्त की राशि 293.8262 करोड़ रूपये जारी कर दी गई है। स्वीकृत सामुदायिक भवनो की वर्क आईडी पंचायत दर्पण 2.0 पोर्टल पर जनरेट की गई है। बैठक में मंत्री श्री पटेल ने मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी 208 ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में वृन्दावन ग्राम का चयन किया जा चुका है। प्रत्येक वृन्दावन ग्राम के लिए पाँच वर्षीय कार्य योजना तैयार करें। इसके लिए एक लाख रूपये प्रति वृन्दावन ग्राम के मान से राशि जिला पंचायत को अंतरित की जा चुकी है। कार्ययोजना तैयार होने पर निर्धारित प्राथमिकता एवं बजट उपलब्धता के आधार पर आगामी कार्यवाही की जाए। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज योजनान्तर्गत 1 लाख 95 हजार 712 प्रतिभागियों को दिया गया प्रशिक्षण बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय ग्राम स्वराज योजनान्तर्गत वर्ष 2025-26 में कुल एक लाख 95 हजार 712 प्रतिभागियों का त्रिस्तरीय पंचायत राज प्रतिनिधि, कार्यकारी अमलो का प्रशिक्षण किया जा चुका है। एक्सपोजर विजिट के तहत 2 हजार 797 प्रतिभागियों का भ्रमण कराया जा चुका है। आरजीएसए योजनांतर्गत (PMU) मद अंतर्गत राज्य स्तर (SPRC, SPMU), जिला स्तर (DPMU, DPRC), जनपद स्तर (BPMU) पर 854 के लक्ष्य के विरूद्ध 766 मानव संसाधन पदस्थ किए जा चुके है। पेसा सपोर्ट अंतर्गत पेसा क्षेत्रो में जिला स्तर पर 20 जिला समन्वयक, विकासखंड स्तर पर 88 विकासखंड समन्वयक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर 4 हजार 839 पेसा मोबलाइजर्स नियुक्त किए जा चुके है इस मद में मानदेय के रूप में कुल 15.17 करोड़ राशि भुगतान की जा चुकी हैं। झाबुआ को मिली सराहना बैठक में मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि पेसा एक्ट के क्रियान्वयन में जनजातीय कल्याण विभाग से बेहतर समन्वय रखें। झाबुआ सहित अन्य वनांचलों में पेसा एक्ट के तहत अच्छा कार्य हो रहा है। अनेक ग्रामों में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता का वातावरण बना है और 3-D, दहेज, डी.जे. और दारू के खिलाफ जनजाति समाज में अलख जगी है। यह खुशी की बात है कि अनेक स्थानों पर अब चौथे-D धर्मांतरण के खिलाफ भी आवाज़ उठायी जा रही है। यह ग्रामीण जनजाति समाज में जागरूकता का परिचायक है और समाज में एक मिसाल है। माँ नर्मदा परिक्रमा पथ पर पौधारोपण के लिए 128 कार्य प्रारंभ बैठक में बताया गया कि एक बगिया माँ के नाम अंतर्गत 31 हजार 300 का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। जिसमें 29 हजार 193 कार्य प्रगतिरत है। एक बगिया माँ के नाम परियोजना में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पाँच जिले खण्डवा, सिंगरौली, रायसेन, बड़वानी एवं बालाघाट है। उन्होंने बताया कि माँ नर्मदा परिक्रमा पथ पर पौधारोपण के लिए 138 कार्य स्वीकृत है, जिसमें से 128 कार्य प्रारंभ हो चुके है। अब तक कुल 38 हजार 920 पौधे रोपे गए है। पौधों की सुरक्षा हेतु तार फेंसिंग पंचायत राज संचालनालय से की जायेगी। बैठक में बताया गया कि दो गांव/पंचायत/मजरे-टोले को दोहरी संपर्कता एवं संदीपनी विद्यालय को संपर्कता उपलब्ध कराए जाने के लिए प्रदेश में "मुख्यमंत्री सुगम सम्पर्कता परियोजना" लागू की जा रही है। कार्य स्थल का चयन तथा डीपीआर तैयार करने हेतु आरआईएमएस पोर्टल विकसित किया गया है। प्रदेश में जी राम जी योजना अंतर्गत एक हजार करोड़ रूपये की नवीन सड़कों का निर्माण किया जायेगा। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना अंतर्गत क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन बैठक में बताया गया कि खरीफ 2025 में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में 14 जिलों में प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना अंतर्गत क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन कार्य लिया गया है। इसके अंतर्गत 3 हजार 110 कृषको को चयनित कर लाभान्वित किया गया एवं सब्जी उत्पादन से प्रति कृषक 25 से 30 हजार अतिरिक्त आमदनी भी हुई। रबी 2025 में सभी 36 जिलों में क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन कार्य लिया गया है। सब्जी उत्पादन 9 हजार 157 कृषकों को चयनित किया जाकर सब्जी उत्पादन कार्य से जोड़ा गया है। क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन में सर्वोत्तम प्रगति वाले जिले जबलपुर, अशोकनगर, सागर, नरसिंहपुर एवं डिंडोरी है।  

पेसा एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये सरकार प्रतिबद्ध : मंत्री पटेल

भोपाल पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा है कि जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम स्वराज की अवधारणा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पेसा एक्ट (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्री श्री पटेल ने गत दिवस भोपाल में जन अभियान परिषद के पदाधिकारियों तथा प्रदेश के 20 पेसा जिलों से आए जिला समन्वयकों के साथ पेसा एक्ट के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में अधिनियम के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक एवं प्रशासनिक कठिनाइयों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने अधिकारियों को इन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि पेसा एक्ट का उद्देश्य अधिसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार सम्पन्न बनाना है, जिससे स्थानीय समुदाय अपनी परंपराओं, संसाधनों एवं विकास संबंधी निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा सके। इसके लिए प्रशासनिक संवेदनशीलता, समन्वय और निरंतर प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। मंत्री श्री पटेल ने निर्देश दिए कि आगामी फरवरी माह में पेसा विकासखंडों के सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, जिला समन्वयक एवं विकासखंड समन्वयकों का दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भोपाल में आयोजित किया जाए। इस प्रशिक्षण के माध्यम से पेसा एक्ट के प्रावधानों, प्रक्रियाओं एवं व्यावहारिक क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।  

डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के प्रावधानों को बनायें और पारदर्शी : मंत्री पटेल

भोपाल पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने सोमवार को मंत्रालय में बैठक लेकर विभागीय कार्यक्रमों और योजनाओं की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री पटेल ने विशेष कर गौसंवर्धन गौसंरक्षण तथा प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिये नई प्रचलित डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के विषय में विस्तृत समीक्षा की। योजना के प्रावधानों को और अधिक पारदर्शी बनाए जाने के विषय में निर्देशित किया। विभाग में प्रचलित डेयरी प्लस योजना के अंतर्गत पशुओं के वितरण व्यवस्था को सुधार किए जाने की आवश्यकता के लिये निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, संचालक डॉ. पी.एस. पटेल, पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के कार्यपालिक संचालक डॉ. प्रवीण शिंदे और उपसंचालक डॉ. प्रियकांत पाठक उपस्थित रहे।  

मध्यप्रदेश की ग्रामीण सड़कों के रख-रखाव पर दें ध्यान : मंत्री पटेल

पहले चरण में निर्मित समस्त सड़कों में बने रपटे आवागमन के लिए हों बारहमासी मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की कार्यकारिणी समिति की हुई बैठक भोपाल  मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के तहत बनी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़कों के रख रखाव पर प्राधिकरण पूरा ध्यान दे। योजना के पहले चरण में निर्मित समस्त सड़कों में बने रपटे में बारहमासी आवागमन सुनिश्चित रहे। यह निर्देश पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मंगलवार को मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण समिति की 26वीं बैठक में दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण श्री दीपक आर्य सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री श्री पटेल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत निर्मित सड़कों के संधारण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग के इंजीनियर्स को गुणवत्तापूर्ण कार्यों के लिए मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क अकादमी में प्रशिक्षित भी किया जाए। नवीन तकनीक के उपयोग से उन्‍हें अवगत कराया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत निर्मित सड़कों के संधारण का दायित्व प्राधिकरण को सौंपा गया है। प्राधिकरण द्वारा अब तक 88 हजार 517 किलोमीटर लंबाई के 25 हजार 331 मार्गों का निर्माण किया जा चुका है। प्राधिकरण द्वारा अभी तक कुल 66 हजार 292 किलोमीटर बिटुमिन नवीनीकरण किया गया है। इनमें से लगभग 15 हज़ार 900 किलोमीटर लंबाई का नवीनीकरण वेस्ट प्लास्टिक तकनीकी का उपयोग करते हुए किया गया है। संधारण के अंतर्गत स्व सहायता समूहों द्वारा 14 ज़िलों के 114 मार्गों पर संधारण कार्य किया जा रहा है। ख़ास बात यह है कि ऐसे 115 स्व-सहायता समूह में 1270 महिलाएँ भी कार्य कर रही है। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना अंतर्गत सड़क सम्पर्कता प्रदान करने के लिए लगभग 30 हजार 900 किलोमीटर मार्ग निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसकी लागत 21 हजार 630 करोड़ रुपये है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क के चतुर्थ चरण का कार्य दिसंबर 2024 से प्रारंभ हुआ है। इसमें 868 सड़कों का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। इनकी कुल लंबाई 1849 किलोमीटर और लागत 1545 करोड़ रुपये है। इन सड़कों के बनने से ग्रामीण क्षेत्र की 878 बसाहटें लाभान्वित होंगी। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में भारी वाहनों के आवागमन से क्षतिग्रस्त सड़कों के उन्नयन पर ध्यान दिया जाए।