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विकास और जनकल्याण को समर्पित बजट : जल संसाधन मंत्री सिलावट

भोपाल जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने केंद्रीय बजट 2026-27 का स्वागत करते हुए कहा है कि यह बजट विकास और जनकल्याण को समर्पित है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया है और प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। जल संसाधन मंत्री  सिलावट ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। केंद्रीय वित्त मंत्री मती सीतारमण द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का यह बजट देश के समग्र विकास, ग्रामीण सशक्तिकरण, कृषि एवं जल संसाधन प्रबंधन और आधारभूत संरचना के विस्तार की दिशा में सकारात्मक पहल है। बजट में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से राज्यों को लाभ पहुँचाने का स्पष्ट दृष्टिकोण दिखाई देता है, जिससे मध्यप्रदेश को व्यापक लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के विकास में यह बजट मील का पत्थर साबित होगा। मंत्री  सिलावट ने कहा कि जल संरक्षण, सिंचाई, कृषि, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं पर केंद्र सरकार का विशेष फोकस प्रदेश के किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। इससे जल सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और विकास कार्यों को नई गति प्राप्त होगी। मंत्री  सिलावट ने प्रधानमंत्री  मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री मती सीतारमण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा और महिलाओं को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और सशक्त करता है।  सिलावट ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वय से केंद्रीय बजट के प्रावधानों का मध्यप्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगा।  

सिंचाई परियोजनाओं में देरी नहीं चलेगी, समय-सीमा का सख्ती से पालन हो: मंत्री सिलावट

विभागीय कार्यों की समीक्षा की भोपाल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है की प्रदेश में विभिन्न निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं का कार्य समय से पूरा किया जाए। वरिष्ठ अधिकारी परियोजनाओं के कार्य का निरंतर निरीक्षण करें और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। मंत्री श्री सिलावट ने मंत्रालय स्थित अपने प्रतिकक्ष में बुधवार को विभाग के अंतर्गत धसान केन कछार सागर में निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता श्री विनोद कुमार देवड़ा, मुख्य अभियंता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्य से संबंधित निर्माण ऐजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मंत्री श्री सिलावट ने निर्देश दिए कि वरिष्ठ अधिकारी स्वीकृत परियोजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें और प्रति 15 दिन में कार्य की समीक्षा करें। बैठक में बताया गया कि परियोजनाओं के पूर्ण होने पर सागर, पन्ना, दमोह एवं छतरपुर जिले की लगभग 81 हजार हैक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मंत्री श्री सिलावट द्वारा कछार के अंतर्गत आपचंद, मंझगाय, सतधारू, पवई, रूंज एवं काठन सिंचाई परियोजनाओं से सिंचाई सम्बन्धी व्यवस्थाओं के निर्देश दिये गये।

किसानों को पानी की कमी न हो, रबी सीजन में सुनिश्चित की जाए सिंचाई : मंत्री सिलावट

किसानों को रबी फसलों के लिये मिले पर्याप्त पानी : जल संसाधन मंत्री  सिलावट प्रदेश के जलाशयों में जल-भराव की स्थिति बहुत अच्छी बाँध सुरक्षा संबंधी हुई बैठक भोपाल जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि किसानों को रबी की फसलों की सिंचाई के लिये पर्याप्त पानी मिले, यह सुनिश्चित किया जाये। प्रदेश में रबी फसलों के लिये आगामी 15 नवम्बर से पानी छोड़ा जायेगा। इसके पूर्व जल-स्रोतों, नहरों आदि की मरम्मत का कार्य अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाये, जिससे डाउन स्ट्रीम के हर किसान के खेत तक पानी पहुँच सके। इस बार प्रदेश के जलाशयों में जल-भराव की स्थिति बहुत अच्छी है। प्रदेश के प्रमुख 286 जलाशयों में औसत जल-भराव 97 प्रतिशत है। जल संसाधन मंत्री  सिलावट ने सोमवार को मंत्रालय में बाँध सुरक्षा संबंधी बैठक में ये निर्देश दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन  राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता  विनोद देवड़ा, मुख्य अभियंता बोधी परियोजना  आर.डी. अहिरवार एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री  सिलावट ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा मध्यप्रदेश को 3 बड़ी परियोजनाएँ केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल और मेगा ताप्ती दी गईं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में निरंतर सिंचाई का रकबा बढ़ रहा है। उन्होंने निर्देश दिये कि जो अंतर्राज्यीय योजनाएँ लंबित हैं, उनके समाधान के विषय में प्रयास करें। आरआरआर (रिपेयर, रिनोवेशन और रेस्टोरेशन) एवं ईआरएम (एक्सटेंशन, रिनोवेशन एण्ड मोडर्नाइजेशन)योजनाओं संबंधी प्रस्ताव केन्द्र सरकार को तैयार कर भिजवाये जायें। बाँधों की सुरक्षा के लिये आईआईटी दिल्ली एवं रुढ़की के साथ होगा एमओयू मंत्री  सिलावट ने कहा कि सरकार के लिये बाँधों की सुरक्षा उच्च प्राथमिकता है। इस संबंध में मध्यप्रदेश सरकार शीघ्र ही आईआईटी रुढ़की और आईआईटी दिल्ली के साथ एमओयू करेगी। प्रदेश में गाँधी सागर बाँध की सुरक्षा के दृष्टिगत 29 करोड़ 41 लाख रुपये की लागत से बाँध सुदृढ़ीकरण कार्यों के लिये निविदा की जा चुकी है और कार्य प्रगतिरत है। बाँध सुरक्षा अधिनियम-2021 के अंतर्गत समस्त निर्दिष्ट बाँधों का फ्लड रिव्यू, बाँधों पर इंस्ट्रूमेंटेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाये जाने का कार्य किया जायेगा। इसके लिये प्रदेश के 1365 बाँधों को चिन्हित किया गया है। मंत्री  सिलावट ने निर्देश दिये कि जल-संरचनाओं में वर्षा उपरांत किये जाने वाले कार्य बाँधों के स्लूस गेटों एवं सेंट्रल स्पिलवे के गेटों का संचालन, नहरों पर आवागमन के लिये बनाये गये रास्तों का सुधार, नहरों पर बनाये गये ऐस्केप को बंद करना आदि सुनिश्चित करें। क्षतिग्रस्त जल-स्रोतों की मरम्मत, गाद की सफाई और नहरों पर बने स्ट्रक्चर – पुलिया, फॉल, साइफन, एक्वाडक्ट आदि की सफाई और मरम्मत कराई जाये। मंत्री  सिलावट ने कहा कि रबी फसल के लिये पानी छोड़े जाने के संबंध में जिला जल उपभोक्ता समितियों की बैठकें आयोजित की जायें और इस संबंध में जनता एवं जन-प्रतिनिधियों से संवाद किया जाये। किसानों को राज्य सरकार की सिंचाई कर पर ब्याज दर में छूट योजना का पूरा लाभ दिया जाये। सिंहस्थ संबंधी कार्यों को युद्ध स्तर पर करें पूरा मंत्री  सिलावट ने निर्देश दिये कि सिंहस्थ-2028 के कार्यों को युद्ध स्तर पर किया जाये और इन्हें वर्ष 2027 तक पूरा किया जाये। राज्य सरकार का संकल्प है कि सिंहस्थ में शिप्रा नदी के शुद्ध जल में श्रद्धालु स्नान-आचमन करें। वर्तमान में उज्जैन में विभाग के 3 कार्य – सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी, खान डायवर्जन और घाटों के निर्माण का कार्य प्रगतिरत है। इन सभी कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण किये जाने के निर्देश दिये गये। प्रदेश के बेसिन में जल-भराव की स्थिति प्रदेश में इस बार अच्छी बारिश के चलते सभी 10 बेसिन में जल-भराव की स्थिति बहुत अच्छी है। नर्मदा बेसिन में सर्वाधिक 99.83 प्रतिशत, माही बेसिन में 98.67 प्रतिशत, बेतवा बेसिन में 97.99 प्रतिशत, सिंध बेसिन में 97.63 प्रतिशत, गंगा बेसिन में 97.19 प्रतिशत, चंबल बेसिन में 95.97 प्रतिशत, वेनगंगा बेसिन में 95.48 प्रतिशत, यमुना बेसिन में 95 प्रतिशत, ताप्ती बेसिन में 89.23 प्रतिशत और धसान बेसिन में 86.60 प्रतिशत जल-भराव हुआ है।  

जल संसाधन मंत्री सिलावट कहा- सतत निगरानी के साथ करें सभी सुरक्षात्मक उपाय

भोपाल   जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि प्रदेश में अब तक हुई बारिश से जलसंरचनाओं में जल भराव की स्थिति अच्छी है। विभागीय अधिकारी जल संरचनाओं की सतत निगरानी एवं अनवरत कार्य करते हुए सभी सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करें। कहीं भी किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने। बांधों में पानी छोड़ने की सूचना सभी संबंधितों एवं आमजन को समय से पूर्व उपलब्ध कराएं। मंत्री श्री सिलावट ने मंगलवार को मुख्य अभियंता बोधी कार्यालय स्थित राज्य बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्रदेश में वर्षा और जलाशयों में जलभराव की स्थिति की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में मुख्य अभियंता बोधी परियोजना, अधीक्षक यंत्री सहित सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में बारिश की स्थिति अच्छी है. इस मानसून में मध्यप्रदेश में आज दिनांक तक 905.30 मि.मी. वास्तविक वर्षा दर्ज की गई है, जो प्रदेश में औसत वर्षा से 23 प्रतिशत अधिक है। राज्य के पूर्वी हिस्से में औसत से 25 प्रतिशत अधिक एवं पश्चिमी हिस्से में औसत से 22 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। विगत वर्ष आज की स्थिति में मध्यप्रदेश में वास्तविक वर्षा 840.70 मिलीमीटर दर्ज हुई थी, जो कि प्रदेश की औसत वर्षा से 14 प्रतिशत अधिक थी। प्रदेश के प्रमुख बांधों में जल भराव की स्थिति भी अच्छी है। विगत वर्ष आज दिनांक की स्थिति में प्रदेश के प्रमुख बांधों में लगभग 82.23 प्रतिशत औसत जल भराव था, जबकि इस वर्षाकाल में अच्छी बारिश के चलते प्रदेश के प्रमुख बांधों में 83.65 प्रतिशत जलभराव हो चुका है। प्रदेश के 17 बांधों के जल द्वार खोले जा चुके हैं। प्रदेश के सभी प्रमुख बेसिन में बांधों के जल ग्रहण क्षेत्र में मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी वर्षा के पूर्वानुमान, पानी की आवक और बांधों के गवर्निंग लेवल के दृष्टिगत गेटों का संचालन किया जा रहा है, जिससे बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में है। रिजर्वायर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम में चिन्हित प्रदेश के 286 प्रमुख बांधों में से 145 बांधों में 90 प्रतिशत से अधिक, 32 बांधों में 75 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक तथा 45 बांधों में 50 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक जल भराव हो चुका है। इसी प्रकार 27 बांधों में 25 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक, 14 बांधों में 10 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक तथा शेष प्रमुख बांधों में 10 प्रतिशत से कम जल भरा हुआ है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के प्रमुख 17 बांधों के द्वार खोले जा चुके हैं। बरगी जबलपुर बांध के 9, बानसुजारा टीकमगढ़ का 1, धोलाबाड़ टैंक रतलाम का 1, बिलगांव डिंडोरी के 2, इंदिरा सागर खंडवा के 12, महान सीधी के 6, कुटनी छतरपुर के 2, महुअर शिवपुरी के 2, मोहिनी पिकअप वियर शिवपुरी के 1, ओंकारेश्वर के 9, पगारा मुरैना के 2, पगरा फीडर सागर का 1, पवई पन्ना का 1, राजघाट अशोकनगर के 3, तवा नर्मदापुरम के 3, थावर मंडला का 2 तथा अपर ककेटो श्योपुर का 1 गेट खोले जा चुके हैं। बाँधों के जल ग्रहण क्षेत्र में वर्षा के पूर्वानुमान एवं जल आवक के अनुसार निकासी की जा रही है, जिससे बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में है। जल निकासी की निरंतर आमजन और सभी संबंधितों को समय से पूर्व सूचना दी जा रही है। नदी बेसिन में जलभराव की स्थिति         नर्मदा बेसिन अंतर्गत प्रमुख बांधों के जलग्रहण क्षेत्र में औसत से अधिक वर्षा दर्ज होने से लगभग सभी बाँधों में जल भराव की स्थिति सामान्य से अधिक है। जबलपुर जिले में बरगी बांध 100.16 प्रतिशत, रायसेन जिले में बारना 95.60 प्रतिशत, नर्मदापुरम में तवा बांध 93.87 प्रतिशत, सीहोर में कोलार बांध 69.26 प्रतिशत, खंडवा में इंदिरा सागर बांध 86.1 प्रतिशत एवं ओंकारेश्वर बांध 92.64 प्रतिशत भर चुका है।         प्रदेश के गंगा बेसिन अंतर्गत निर्मित बड़ी परियोजनाओं में शहडोल स्थित बाणसागर में 96.44 प्रतिशत एवं सीधी स्थित महान बांध में 92.03 प्रतिशत जलभराव हो चुका है। बाणसागर बॉध के जलग्रहण क्षेत्र में गत दिनों भारी वर्षा दर्ज की गई।         वैनगंगा बेसिन अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख बांधो में पेंच छिंदवाड़ा में 85.74 प्रतिशत, संजय सरोवर सिवनी में 83.08 प्रतिशत एवं बालाघाट स्थित राजीव सागर में 44.54 प्रतिशत जल भराव है।         माही एवं ताप्ती बेसिन में प्रमुख बांध पारसडोह 85.03 प्रतिशत, माही मेन और माही सब्सिडरी बांध में क्रमश: 70.87 प्रतिशत एवं 28.25 प्रतिशत जल भराव हुआ है।         बेतवा बेसिन बेसिन अंतर्गत प्रमुख बांधो में भोपाल जिले में स्थित केरवा एवं कलियासोत बांध में क्रमश: 54.70 एवं 63.67 प्रतिशत जल भराव की स्थिति है। सम्राट अशोक सागर हलाली 86.91 प्रतिशत, संजय सागर बांध 93.41 प्रतिशत और राजघाट 81.83 प्रतिशत भर चुके हैं।         चंबल बेसिन में गांधी सागर बांध 58.4 प्रतिशत, मोहनपुरा 91.27 प्रतिशत और कुण्डलिया 60.24 प्रतिशत भर गए हैं।         प्रदेश के शेष बेसिन जैसे सिंध, केन, धसान में भी बांधों के जलग्रहण क्षेत्र में माह जुलाई में अत्यधिक वर्षा दर्ज हुई है। प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के छतरपुर, टीकमगढ़, निवारी जिलों में गत दिनों भारी वर्षा दर्ज की गई। धसान बेसिन में बाणसुजारा बांध 77.41 प्रतिशत एवं पन्ना में पवई बांध 62.38 प्रतिशत जलभराव में है।         इसी प्रकार ग्वालियर-चंबल संभाग में दतिया, भिण्ड, शिवपुरी, श्योपुर, एवं अशोक नगर मे भी भारी वर्षा दर्ज की गई। सिंध बेसिन पर स्थित आवदा बांध 100 प्रतिशत, हरसी 104.01 प्रतिशत, अपर काकेटो 76.59 प्रतिशत, काकेटो 101.37 प्रतिशत, मड़ीखेड़ा 90.49 प्रतिशत, मोहिनी पिकअपवेयर 75.59 प्रतिशत जल भराव की स्थिति में हैं।